आज दोपहर एक बहुत ही अफसोसनाक बहुत ही दुखद दिल को झकझोर देने वाली खबर आई और यह खबर आई अहमदाबाद से अहमदाबाद से आज दोपहर को 1:38 पर एयर इंडिया की एक फ्लाइट अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भर दी है। इस प्लेन में कुल 242 लोग सवार थे। इनमें से 230 पैसेंजर थे और 12 क्रू मेंबर इस प्लेन को उड़ा रहे थे। बहुत ही एक्सपीरियंस्ड एयर इंडिया के बड़े पुराने एम्प्लई कैप्टन सतीश सबरवाल। जबकि इस प्लेन के फर्स्ट पायलट थे क्लाइव कुंद्रा। कैप्टन सतीश सबरवाल को प्लेन उड़ाने का काफी तजुर्बा था। अराउंड 4000 आवर से ज्यादा उनका एक्सपीरियंस था प्लेन को उड़ाने का। तो उनके एक्सपीरियंस में कोई कमी नहीं थी।

दोपहर 1:38 पर टेक ऑफ होता है अहमदाबाद एयरपोर्ट से और लंदन में लंदन के टाइम के लोकल टाइम के हिसाब से 6:05 पर वहां लैंड करना था। ये डायरेक्ट फ्लाइट थी। कोई स्टॉपेज नहीं था। जब लंदन में इस प्लेन को लैंड करना था तब इंडिया में उस वक्त टाइम होता है.

अराउंड 10:30 या 11 के आसपास रात के। प्लेन अपने वक्त पर और तय वक्त पर इस प्लेन ने उड़ान भरा 1 बज 38 और 39 के दरमियान। इस प्लेन का नंबर था ए1 यानी एयर इंडिया से। ये जो फ्लाइट थी ये 787 बोइंग ड्रीम लाइनर थी। 787 बोइंग ड्रीम लाइनर सबसे हैरानी की बात यह है कि पूरी दुनिया में 787 बोइंग ड्रीम लाइनर ये जो प्लेन है ये जो इसका मेक है ये आज से पहले कभी कोई क्रैश ही नहीं किया 787 बोइंग के क्रैश करने का ये आज पहला इंसिडेंट इस दुनिया में हुआ है। इसका रिकॉर्ड इतना बेदाग रहा है। लेकिन आज यह हादसे का शिकार हो गया। यानी बोइंग 787 ड्रीम डायना पहली बार किसी हादसे का शिकार हुआ है पूरी दुनिया में।

इस फ्लाइट में जो 242 लोग सवार थे उनमें से 169 इंडियन थे। 169 53 ब्रिटिश थे क्योंकि ट्रेन लंदन जा रही थी। इसके अलावा इसमें सात लोग जो थे वो पुर्तगाल के थे और एक कनाडा के। तो इस तरीके से 61 फॉरेन नेशनल थे। 169 इंडियन और 12 क्रो मेंबर फ्लाइट अपने तय वक्त पर उड़ान भरती है और इसके बाद मुश्किल से दो मिनट बीतता नहीं है। अहमदाबाद के रनवे से सिर्फ और सिर्फ 625 फीट 625 फीट की दूरी पर यह प्लेन थी। और अचानक इसने अपना हाइट लूज कर दिया। यह लिफ्ट नहीं हो पा रही थी।
मतलब ऊपर की तरफ एयरपोर्ट के आसपास हर शहर में बस्तियां होती हैं। यहां पर भी एक बस्ती थी और प्लेन धीरे-धीरे जब टेक ऑफ करने के बाद ऊपर जाने की बजाय धीरे-धीरे नीचे आती है। फिर एक इमारत दिखती है। उस इमारत के पीछे यह प्लेन जाता है और उसके बाद एक आग का गोला नजर आता है।
अब जाहिर सी बात है जहां पर यह प्लेन गिरा आसपास बस्ती है। बस्ती में लोग थे बहुत सारे जो जमीन पर लोग थे उनके भी घायल होने की खबर है। अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि इन 242 लोगों में जो प्लेन के अंदर सवार थे या जमीन पर जिस बस्ती में यह प्लेन गिरा वहां कितने लोगों को नुकसान पहुंचा है। बचाव का काम जोरों पर है। दिल्ली और आसपास से बचाओ दल, एनडीआरएस और बाकी टीमें वहां पहुंच चुकी हैं। सिविल एिएशन मिनिस्टर वहां पहुंच रहे हैं। होम मिनिस्टर वहां पहुंच रहे हैं। जो बचाव का काम है वह सारी चीजें अब शुरू हो गई है देखने के लिए। लेकिन एक सवाल वो यह कि जो 787 बोइंग आज तक कभी क्रैश नहीं किया आज पहली बार यह कैसे हादसा हुआ? तो जाहिर सी बात है कि जब जांच होगी इसके बाद यह सच्चाई सामने आएगी।
लेकिन आपके पास आने से पहले कई ऐसे एक्सपर्ट्स, कई ऐसे पायलट एिएशन एक्सपर्ट उनसे मैंने बात की और उन्होंने जो कुछ बताया है जो फिलहाल शुरुआत में नजर आ रहा है कि यह हादसा क्यों हो सकता है वो आपके सामने रखता हूं। अगर आप लोगों ने सोशल मीडिया पर देखा हो तो यह प्लेन जब टेक ऑफ के बाद धीरे-धीरे नीचे उस बस्ती की तरफ गिर रहा है तो प्लेन के इंज आग दिखाई नहीं दे रही।
आग ना दिखाई देने का मतलब यह है कि इस प्लेन को किसी बर्ड ने हिट नहीं किया। अमूमन जब टेक ऑफ या लैंडिंग के वक्त ही जो बड हिटिंग के केस होते हैं वो या तो टेक ऑफ के वक्त होता है या लैंडिंग के वक्त। और जब बड हिटिंग होती है तो वह सीधे इंजन में होता है और उस बड हिटिंग के दौरान में आग लगती है। लेकिन दोनों इंजन सही सलामत उसमें से कोई आग का शोला या गोला दिखाई नहीं दे रहा है। इसका मतलब ये बड हिटिंग का केस नहीं है। तो फिर क्या है? टेक ऑफ के बाद जितने भी प्लेन क्रैश किए हैं उसकी कुछ ही वजह होती हैं। पहला या तो इंजन फेल हो जाए। लेकिन बोइंग और इस तरह के प्लेन में एक इंजन नहीं दोद इंजन होता है। तो अगर एक साथ दो इंजन फेल हो यह पॉसिबल नहीं है। एक ही इंजन एक वक्त में फेल हो सकता है और एक फेल भी हो जाए तो दूसरा इंजन इस काबिल होता है कि वो आपको आपकी मंजिल तक पहुंचा सकता है। तो पहली चीज कि दोनों इंजन एक साथ फेल हो इस00:05:38 बात की गुंजाइश है ही नहीं। यानी इस क्रैश के पीछे बड हिटिंग के अलावा इंजन फेलियर की भी गुंजाइश कम बचती है। दूसरा कोई टेक्निकल फॉल्ट हो सकता है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि प्लेन में कुछ डिफेक्ट हो ऐसा जिसकी वजह से अचानक पायलट को प्लेन पर अपना कंट्रोल रखना मुश्किल हो गया और उसकी वजह से ये रहा। तो इंजन फेलियर रूल्ड आउट है। बड हिटिंग क्योंकि इंजन में आग दिखाई नहीं दे रही है। रूल्ड आउट है। हां टेक्निकल फॉल्ट हो सकता है। इसके अलावा एक और चीज है। और वो है स्टॉल। कोई भी प्लेन जब टेक ऑफ करता है दो चीजें00:06:20 होती है टेक ऑफ और लैंडिंग के वक्त आपने अक्सर सुना होगा कि फ्लाइट जब एक बार टेक ऑफ हो गया तो फिर ऑटो पायलट पे भी पायलट छोड़ देते हैं और आराम से चलता रहता है। लेकिन टेक ऑफ और लैंडिंग दो ऐसी चीज़ है। खासतौर पर इन दोनों में भी टेक ऑफ जो पूरी तरह से मैनुअल होता है। यानी इसमें ऑटो का कोई मतलब नहीं है। जो पायलट है उन्हीं के रहमोकरम रहमोकरम पर पूरा प्लेन होता है। जब यह टेक ऑफ हुआ तो इसका मतलब है कैप्टन सतीश सबरवाल और क्लाइव कुंद्रे फर्स्ट जो पायलट थे इन दोनों के हवाले था ये क्योंकि टेक ऑफ में जिम्मेदारी पूरी पायलट की ही00:06:57 होती है। अब टेक ऑफ किसी भी प्लेन का सबसे नाजुक हिस्सा होता है। उसकी वजह है कि इस टेक ऑफ के दौरान आपको एक साथ बहुत सारी चीजें सेकंड के अंदर देखना होता है और सेकंड के अंदर फैसला लेना होता है। जैसे आपको अगर आप जाते हैं तो आपको रनवे रनवे क्या है? मौसम प्लेन की स्पीड रनवे पर स्पीड ये सारी चीजें एक साथ देखनी होती है। और इन सारी चीजों में एक चीज सबसे इंपॉर्टेंट होता है मौसम। मुझे आज पता चला इन एिशन एक्सपर्ट्स और हमारे एक पायलट साहब उनसे बात करके कि टेक ऑफ में मौसम का कितना बड़ा रोल होता है। जितनी ज्यादा गर्मी होती है उतनी ज्यादा00:07:40 टेक ऑफ रिस्की होता है। उसकी वजह उन्होंने बताई कि गर्मी में हवा पतली हो जाती है। जो ह्यूमिडिटी होती है या फिर जब बारिश होती है तब हवा बहुत अच्छी होती है और वो प्लेन को लिफ्ट करने में यानी टेक ऑफ के बाद ऊंचाई प्रदान करने में मददगार साबित होती है। लेकिन जब गर्मी ज्यादा होती है तो हवा बहुत पतली होती है और वो प्लेन को लिफ्ट करने में जब आप रनवे से छोड़ते हैं तो प्लेन जब लिफ्ट होती है तो उसमें बड़ी मुश्किल होती है। जो एस्टॉल मैंने जिक्र किया यह भी एक प्लेन को लिफ्ट करता है। स्टॉल असल में जो किसी भी प्लेन के जो दोनों विंग होते हैं,00:08:18 पंख होते हैं, उस पंख के जरिए ही प्लेन को लिफ्ट कराने में मदद मिलती है और उसमें हवा का बहुत बड़ा रोल होता है। तो एक एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि बहुत मुमकिन है अभी कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन जिस तरीके से इस प्लेन ने रनवे छोड़ा और उसके बाद इसको लिफ्ट करके ऊंचाई पकड़नी थी। लेकिन यह नीचे की तरफ आ रहा है। उनके हिसाब से यहां पर इस प्लेन को स्टॉल यानी वह लिफ्ट करने के लिए शायद हवा उस तरीके से नहीं मिली और जब हवा नहीं मिली तो विंग ने उसको कंट्रोल नहीं किया उस तरीके से और यही वजह है कि वो फिर हाइट नहीं पकड़ी और ऊपर जाने की बजाय प्लेन00:08:57 धीरे-धीरे नीचे की तरफ आ रही है। तो एक रीजन शायद इसमें स्टॉल या स्टॉलिंग हो सकती है जो प्लेन को हाइट प्रदान करती है। तो ये बहुत इंपॉर्टेंट चीज हो सकती है। अब टेक ऑफ के वक्त पायलट को अपनी स्पीड देखनी पड़ती है रनवे पर। आपको याद होगा बेंगलुरु में कुछ साल पहले एक प्लेन क्रैश किया था। वो भी एयर इंडिया का था जो शायद गल्फ से आ रहा था। तब मैं वहां था उसको कवर करने के लिए गया था। उसमें उस प्लेन ने वो रनवे से आगे निकल गया था। तो वहां पर जजमेंट गलत हो गई थी पायलट साहब की और वो बेंगलुरु का वैसे भी वो रनवे जो है काफी छोटा है। तो00:09:37 उसके बाद खाई में गिरा था। तो जब टेक ऑफ होता है या लैंडिंग इन दोनों में रनवे की लंबाई और स्पीड दोनों बहुत मायने रखती है। कहते ये हैं कि जब किसी भी प्लेन का टेक ऑफ होता है तो एक खास स्पीड जब वो पकड़ लेती है उसके बाद उस पायलट के हाथ में भी ये कंट्रोल नहीं होता कि अगर उस वक्त कोई टेक्निकल फौल्ट आ जाए या कोई और चीज उसे पता चले कि उस प्लेन को वापस रोक सके। क्योंकि और एवरेज जो होता है एक ठीक-ठाक रनवे है लंबाई में आइडियली 300 कि.मी. पर आर की स्पीड उस रनवे पर पकड़ती है और जैसे ही मैक्सिमम 300 पर अलग-अलग मौसम के हिसाब00:10:16 से भी कई बार ये स्पीड ऊपर नीचे होती है। तो अगर 300 मान लीजिए है और यही जन आइडियल यही होता है और वो 300 उसने टच कर लिया और उस वक्त अगर पायलट को पता चला कि कुछ तकनीकी खराबी आ गई है तो प्लेन को रोक नहीं सकता। उसको टेक ऑफ करना ही करना पड़ेगा। ये उसकी मजबूरी है। अब वो वापस उसके बाद फिर क्या करता है? वापस लाता है वो ठीक। लेकिन आप मैक्सिमम स्पीड जब टच कर लेते हैं तो आपको रनवे छोड़ना ही छोड़ना है। फिर यहां से पायलट की अपनी जो सारी चीजें हैं वो काम आती है। गर्मी में एक दूसरा जो आज ही पता चला मुझे कि टेक ऑफ एक तो हवा पतली होती है तो आपको00:11:00 लिफ्ट करने या फिर ऊपर हाइट पकड़ने में मुश्किल होती है। दूसरा एक और है गर्मी में ये जो स्पीड रनवे की होती है फ्लाइट को उड़ाने के लिए यह भी बहुत मुश्किल पैदा करती है। उसकी वजह यह है कि जब कोई प्लेन टेक ऑफ करने की तैयारी में होता है तो उससे पहले वो आमतौर पर एयरपोर्ट पे होता है और ऐसा तो है नहीं कि एक प्लेन अभी लैंड किया और 5 मिनट के बाद उसने दोबारा उड़ान भरी एक प्लेन के आने जाने में कम से कम दो-ती घंटे का वक्त तो लगता है और कई प्लेन ऐसे होते हैं जो लंबी दूरी के लिए वो फिर 10 10 12 घंटे या 24 घंटे तक वही00:11:33 होते हैं। उसके बाद उड़ते हैं। तो ऐसे में प्लेन और उसका इंजन ठंडा हो चुका होता है। अब आप उसको रनवे पर ले जा रहे हैं। आपको टेक ऑफ करना है एक ठंडा इंजन और अब आप उसको उस गर्मी के माहौल में आपको उस मैक्सिमम स्पीड को पकड़ना है टेक ऑफ के लिए तो एक ठंडे इंजन को अचानक आपको इस तरीके से गर्म करना है उसमें भी कई बार कई तकनीकी खामियां पैदा हो जाती है तो एक मुश्किल यह भी आती है तो गर्मी में इसीलिए सबसे ज्यादा मुश्किलें आती है टेक ऑफ के दौरान लेकिन यह पूरा टेक ऑफ जो होता है यह सिर्फ और सिर्फ पायलट के ही हाथ में होता00:12:11 है और पायलट ही इसको पूरी तरह से कंट्रोल करता है। और यह जो फ्लाइट है जिसकी मैंने बात बताई कि दुनिया में पहला है 787 बोइंग जो क्रैश किया है। लगभग 11 साल पुराना ये प्लेन है और इसकी कीमत थी जब खरीदी गई थी। अराउंड 2100 करोड़ ₹100 करोड़ का यह प्लेन था। दोनों पायलट की क्षमता पर कोई शक नहीं है। और 7000 किलोमीटर का सफर तय करना था अहमदाबाद से लंदन तक का अराउंड 10 आवर्स 10 घंटे के बीच में लेकिन सिर्फ 2 मिनट और 625 फीट की हाइट ही पकड़ी थी इस फ्लाइट ने कि ये अचानक क्रैश कर गया। अब प्लेन क्रैश होने से पहले कैप्टन सुमित00:13:00 सबरवाल ने बाकायदा मे डे का ऐलान किया था। मतलब एटीसी एयर ट्रैफिक कंट्रोल को उन्होंने कहा था मेड डे और यह तब हुआ सिर्फ टेक ऑफ के 2 मिनट के अंदर अंदर जब उन्हें एहसास हो गया कि यह प्लेन लिफ्ट नहीं हो रही है ये हाइट नहीं पकड़ रही है टेक ऑफ के बाद नीचे ही की तरफ आ रही है नोस के बल तब उन्हें लग गया था कि अबकि हाइट भी बहुत कम थी 625 फीट तो उसमें फिर उस हाइट को दोबारा पकड़ना रनवे की तरफ आप जा नहीं सकते थे तो मे उन्होंने डिक्लेअर किया था मे प्लेन में जब कोई पायलट डिक्लेअ करता है इसका मतलब मतलब है कि वह बिल्कुल इमरजेंसी00:13:35 की हालत है और अब शायद मे मतलब लास्ट ऑप्शन होता है। पहले उससे पहले कोशिश होती है एयरपोर्ट पे दोबारा लैंड करने बाकी चीजें होती है। लेकिन जैसे ही कोई पायलट अगर मे बोल देता है तो वो समझ लीजिए वो फिर कयामत ही होती है। तो इसमें भी मे का ऐलान किया गया। फ्लाइट के जो ब्लैक बॉक्स है उसमें आखरी पल तक की सारी बातचीत पायलट की रिकॉर्ड होती है। ब्लैक बॉक्स भी बरामद होगा। इसकी इन्वेस्टिगेशन भी होगी। जो बोइंग कंपनी है उसके लोग भी जांच करेंगे और इन सारी चीजों के बाद फिर पता चलेगा कि असल में यह हादसा हुआ कैसे? लेकिन एक अफसोसनाक हादसा गर्मी का की00:14:21 छुट्टी चल रही है इस वक्त और इस ट्रेन में बहुत सारे ऐसी फैमिली थी परिवार थे जो छुट्टियां मनाने के लिए लंदन जा रहे थे और जो खबर आ रही है वो यह भी है कि गुजरात के जो एक सीएम है पूर्व मुख्यमंत्री रूपाणी जी वो भी इस ट्रेन में सवार थे और लंदन में उनकी बिटियां रहती हैं और शायद उनसे मिलने जा रहे थे तो अभी तक 242 मुसाफिर और क्रू मेंबर जो उसमें सवार थे उनकी पूरी रिपोर्ट धीरे-धीरे आएगी। बचाव काम का काम चल रहा है। दुआ यही है जितने लोग बच सके। बाकी जो भी इसकी अपडेट या डिटेल आती है रात 9:00 बजे मैं आपके सामने लेकर फिर से हाजिर हूंगा। फिलहाल00:15:04 इतना ही।
