स्कूल में लंच ब्रेक के टाइम कितने सारे गेम्स होते थे ना। ट्रुथ एंड डेयर, हाइड एंड सी, कैटलिस्ट वगैरह-वगैरह। कुछ गेम्स एंटरटेनमेंट के लिए होते थे और कुछ नॉलेज बढ़ाने के लिए। लेकिन कुछ खेल ऐसे भी हैं जो बच्चों की सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकते हैं जो उन्हें बड़ी मुश्किल में डाल सकते हैं। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक स्कूल है जहां करीब 35 बच्चों ने अपनी कलाइयां छेड़ डाली।
उनके हाथों में पिन के निशान हैं। पहले कुछ बच्चों ने इसकी शुरुआत की और फिर एक दूसरे की देखादेखी 35 बच्चों ने अपनी-अपनी कलाई ली। जब जांच बैठी तो पता चला कि यह खेल एक दिन का नहीं है। पिछले कई दिनों और हफ्तों से बच्चों का यह गेम चल रहा था। इंडिया टुडे से जुड़ी सुमित राजप्पन की रिपोर्ट के मुताबिक यह सारे बच्चे क्लास सिक्स से एथ में पढ़ने वाले हैं। माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल पुनीत राम साहू ने बताया कि 13 फरवरी को उन्हें घटना की जानकारी मिली।
किसी बच्चे के पेरेंट ने घर पर बच्चे का हाथ देखा तो उससे सवाल किए। पता चला कि क्लास में और भी कई सारे बच्चे हैं जिन्होंने खुद को इस तरह से चोट पहुंचाई है। इसके बाद पेरेंट्स ने फॉरेन प्रिंसिपल से शिकायत की और फिर जांच बैठी। घटना के बाद कुछ सवाल उठे। पहला क्या बच्चे किसी के दबाव में ये काम कर रहे थे? दूसरा क्या नशे की हालत में ये काम किया गया? और तीसरा सवाल क्या कलाई किसी गेम के टास्क का हिस्सा था? जब हायर अथॉरिटी से शिकायत की गई तो केस खुला। बच्चों से बात की गई। उनकी काउंसलिंग हुई। जांच में पाया गया कि यह सब किसी टास्क का हिस्सा नहीं था और ना ही बच्चों पर किसी का दबाव था। बच्चों ने खेल-खल में पिन से अपने हाथों को गोदा था। रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल के 21 छात्रों और 14 छात्राओं के हाथों में चोट के निशान मिले हैं। यह घटना स्कूल प्रिमिससेस के अंदर हुई है।
अब आपको पेरेंट्स के बयान सुनाते हैं। वो पालक के द्वारा टीचर लोग को पता चला तो वो लोग टेस्ट किए कि कितने बच्चे हैं करके कुछ-कुछ बच्चे के भी निकला है जिसमें 35 बच्चे हैं। उसमें मेरा भी लड़का है। कक्षा सातवीं से मुनेश सिंह है। बच्चे को पूछे तो बोले कि नहीं मम्मी कोई दूसरे को देख के मैं भी काटा हूं। ऐसे लगता है करके काटा हूं करके यहां 35 बच्चे हैं बोल रही हूं बढ़ गया है लेकिन हम लोग को लगता है इतने छोटे-छोटे बच्चे वैसे नहीं कर सकते चंद्रहाल साहू नाम के पेरेंट ने बताया कि हमने अपने बच्चे के हाथ पर निशान देखा तो पूछा कि किसने काटा है तब बच्चे ने कुछ नहीं बताया लेकिन स्कूल आए तो पता चला कि 25 से 30 बच्चों ने यही किया है।
हम बस यही चाहते हैं कि बच्चे सुधर जाए। स्कूल के प्रिंसिपल पुनीत राम साहू ने बताया कि बच्चों की काउंसलिंग कराई गई है और आगे से ध्यान रखा जाएगा कि हरकत दोबारा रिपीट ना हो। ये सर बच्चे लोग एक आध बच्चे जो काट लिए होंगे है ना स्टैंड के नाम से उसको देख देख के छोटे बच्चे एक दूसरे को देख के सब अपने हाथ को काटे हैं। खरोच किए हैं। काटे नहीं है मतलब खरोचे हैं। अब लगभग सभी बच्चों के बाएं हाथ में ही खरोच के निशान पाए गए हैं। लगभग 35 है सर। मिडिल स्कूल धारा हमारे संज्ञान में 13 तारीख को आया सर है ना उसके बाद विभाग को सूचित किए विभाग से जांच टीम आई विकास खंड विकास शिक्षा अधिकारी और डॉक्टर की टीम बीएएमओ वगैरह आए सब जांच किए है ना जांच करके प्रतिवेदन ले गए हैं। है ना पालकों की काउंसलिंग भी हो चुका है। है ना? तो सभी पालकों को गाइड किया गया है कि आप लोग अपने बच्चों को घर में थोड़ा सा पूछताछ किया करें।
मामले पर एसडीएम नब सिंह ने कहा कि शुरुआती जांच में तो यह सिर्फ बच्चों की शरारत लग रही है लेकिन फिर भी जांच जारी है। कुछ 35 बच्चे हैं जिन्होंने अलग-अलग टाइम पे अपने हाथों में निशान बनाए हैं। डीप कट्स नहीं है। सुपरफिशियल है। उसका हमने प्रारंभिक जांच भी कराया। अभी भी जांच चल रही है सभी पहलुओं पे। कोरियन गेम जैसा कोई मामला नहीं है। पुलिस उसमें उसका पतासाजी कर रही है और मोबाइल्स को भी पेरेंट्स के चेक किया गया है। ऐसा कोई मामला सामने निकल के नहीं आया। नहीं नशे का एंगल नहीं है। पेरेंट्स से भी हमने बात किया है। काउंसलिंग की है। इसके अलावा बच्चों से भी बात किया है पर्सनली हमने। तो ऐसा नशा का कोई एंगल नहीं है।
बच्चों ने एक दूसरे के साथ देख के गेम खेलते हुए या नॉर्मली बातचीत में एक दूसरे का देख के ऐसा अभी तक प्रारंभिक रिपोर्ट में ऐसा आया। स्कूल अधिकारियों ने कहा कि आगे से ध्यान रखा जाएगा कि इस तरह की घटना रिपीट नहीं हो। आप भी घर पर और आसपास मौजूद बच्चों का ध्यान रखें कि वह किस तरह का गेम खेल रहे हैं। मानसिक और शारीरिक रूप से वो गेम उनके लिए सेफ है या नहीं इसका भी ध्यान रखें। l
