पुणे ब्रिज दुर्घटना: कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा, घायलों ने क्या बताया?

पुणे में एक बड़ा हादसा हुआ। पुल टूटने से कई लोग पानी में बह गए। महाराष्ट्र के पुणे में बड़ा हादसा। पुल टूटने से कई लोग पानी में बहे और अब जो ताजा जानकारी निकल कर सामने आई है, उसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। आपको बता दें कुंदमाला गांव के पास इंद्रायणी नदी पर यह पुल बना था जो ढह गया। हादसे में छह लोगों की मौत हो चुकी है और अभी जो जानकारी आ रही है सामने उसके मुताबिक 32 लोग घायल हैं। जिनमें से छह की हालत गंभीर बताई जा रही है।

कई लोग घायल हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरएफ जुटी हुई है। एनसीपी नेता सुप्रिया सूले ने क्या कहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन सब सभी डॉक्टर्स हॉस्पिटल पूरा स्टाफ पूरी कोशिश कर रहा है। हर एक और इसीलिए हम लोग भी अंदर ज्यादा नहीं रुक रहे हैं क्योंकि उसको डिस्टर्ब नहीं करना चाहते। जिस जिसको ज्यादा जल्द से जल्द हेल्प मिले इसीलिए पूरे हमारे सब सहकारी यहां के सारे यंग बच्चे कॉलेज के बच्चे पूरी ताकत से मदद करने के लिए उतर गए हैं। तो महाराष्ट्र के पुणे में यह बड़ा हादसा हुआ। आपको बता दें कुंदमाला गांव है और कुंदमाला गांव के पास इंद्रायणी नदी है। उस पर यह पुल बना था जो ढह गया। हादसे में छह लोगों की निधन हुई है। कई घायल हुए हैं और तलाश अभी भी चल रही है।

आपको बता दें रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी चल रहा है। एनडीआरएफ की टीम वहां पर पहुंची हुई है। महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन भी मौके पर मौजूद हैं। पुणे हादसे पर डिप्टी सीएम एकनाथ शिंद का भी बयान सामने आया है। सरकार की नजर इस पूरे मामले पर बनी हुई है। एनडीआरएफ अन्य बलों द्वारा बचाव कार्य जारी है। शिंद की तरफ से यह बयान आया है। छह लोगों की मौत की जानकारी शुरुआत में आई थी और क्या डिटेल्स मिल पा रही हैं? देखिए सबसे बड़ी बात तो यह है कि जिन लोगों से मैं मिला जो इंजर्ड हुए थे उनके मुताबिक लगभग 5 मिनट जो है वह ब्रिज हिल रहा था। 400 लोग वहां पर थे और लगभग 50 से 60 लोग उस ब्रिज पे थे। 5 मिनट जब यह ब्रिज हिल रहा था तब लोग कह रहे थे कि ब्रिज हिल रहा है। बावजूद इसके कोई वहां से गया नहीं। अ पांच से छह टू व्हीलर उतनी ही मात्रा में फोर व्हीलर भी वहां पे थी और ज्यादा भीड़ होने की वजह से ये जो ब्रिज है जो प्रीिलिमिनरी रिपोर्ट मिल रही है उसके मुताबिक ये ज्यादा भीड़ होने की वजह से ब्रिज जो है वो कोलैप्स हुआ है।

अब तक 38 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। एनडीआरएफ की टीम वहां पे लगी हुई है। मैं अस्पताल में जा रहा हूं। कई लोगों से मैं मिल रहा हूं जो उसमें इंजर्ड हुए थे। उनका यह कहना है कि वहां पे कोई पुलिस नहीं थी। ऐसा कोई इंतजाम नहीं था। जबकि आपको पता है कि यह जो ब्रिज है वो यातायात के लिए बिल्कुल सही नहीं है। पिछली ही साल यहां पे बोर्ड लगाया गया था। तो अभी की स्थिति यह बनी हुई है कि जो लोग लेकिन राहुल सवाल तो यह है कि केवल बोर्ड लगाने से काम चल जाएगा क्या? जब एक पिकनिक स्पॉट की पहचान है उस इलाके की वहां पर लोग आएंगे रविवार का दिन है तो सवाल यह है कि एतियात क्यों नहीं बरती गई? यह तो सवाल है और अब लोग कह रहे हैं कि कल्पेबल होमिसाइड का रजिस्टर होना चाहिए।

जब आपको पता है कि पिछले साल ही आपने वहां पे बोर्ड लगाया है। आपको यह पता है कि ₹3 करोड़ की राशि नए ब्रिज के लिए आपने मंजूर की है। लेकिन ब्रिज क्यों नहीं बना? अगर आपको पता है कि बारिश के मौसम में जो सबसे पुणे के करीब टूरिस्ट स्पॉट है वहां पे लोग जाते हैं तो वहां पे पुलिस क्यों नहीं थी? कई सारे सवाल है अब पूछे जा रहे हैं और आपको यह भी जानकारी देना चाहिए कि वहां पे जो गार्डियन मिनिस्टर है वह अजीत पवार है जो खुद महाराष्ट्र के डेपुटी चीफ मिनिस्टर हैं। अगर उनके जिले में इस तरीके का हादसा होता है तो किसी को तो जिम्मेवारी लेनी सवालों की कड़ी में एक सवाल यहां पर यह भी उठता है कि इस पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी इसकी निगरानी की जिम्मेदारी इसे असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। उसके बावजूद यह लापरवाही किसकी जिम्मेदारी? कौन अधिकारी? प्रीलिमिनरी तो पीडब्ल्यूडी जो है वो उसकी जिम्मेवारी होती है। लेकिन क्योंकि टूरिस्ट स्पॉट है तो जो डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन है वो बार-बार एत के तौर पे कुछ गाइडलाइंस इशू करता है। तो डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर यहां के जो गार्डियन मिनिस्टर हैं यहां के जो एमएलए हैं उनको रिस्पांसिबल माना जाना चाहिए। ऐसे लोग कह रहे हैं जो इंजर्ड हुए हैं जिनका हताहत हुआ है इस मामले में जो मृतक हैं उनके रिलेटिव्स हमसे बात करते हुए कह रहे हैं कि इन सब लोगों के खिलाफ कल्पेबल होमीसाइड का क्राइम रजिस्टर्ड होना चाहिए क्योंकि आपको यह पता था कि यह ब्रिज जो है यह यातायात के लिए सही नहीं है।

पिछले साल का हमने वीडियो अब सुबह भेजा था। अब मैं यह प्रयास कर रहा हूं कि00:04:56 कितने लोग मिसिंग हैं जो डेड बॉडीज हैं वो आते हैं राहुल आपके पास राहुल आपके पास आते हैं तो हमारे संवाददाता राहुल कुलकर्णी ने अभी-अभी जो जानकारी दी है वो यह कि 38 लोगों को बचा लिया गया है रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुल गिरने से कई लोग बह गए थे इसके अंदर छह लोगों की मौत हो चुकी है। 38 लोगों को बचा लिया गया है।

लेकिन एनडीआरएफ की टीमें और अन्य राहत कर्मी अभी भी मौके पर मौजूद हैं क्योंकि वहां पर अभी भी सर्च ऑपरेशन चल रहा है। आशंका यह है कि कहीं और लोग ना फंसे हुए हो, पानी में ना हो, उनको ढूंढा जा रहा है। हमारे सहयोगी राहुल कुलकर्णी ने घायलों से बातचीत की थी। उन्होंने क्या देखा? उन्होंने क्या बताया? अब जरा यह जानिए। ब्रिज है वहां पे कितने बजे गए थे? आपने क्या देखा वहां? 3:00 बजे। अच्छा हम 3:00 बजे गए थे उधर। 2:30 बजे आप गए। वहां पे क्या हुआ? फुल पब्लिक थी। हां। पूरी फुल पब्लिक पूरा उधर उधर पे अभी पूरे पुल में भी भीड़ ज्यादा थी हम तो पुल ज्यादा ज्यादा था ना लोग इसके लिए वो इधर-उधर कोई हिलता नहीं था हिल रहा था हम ज्यादा भीड़ थी उसकी वजह से पुल जो है वो हिल रहा था हां हम बोले अरे चलो जल्दी जल्दी उधर उधर कोई सुन नहीं रहा सुन नहीं रहा दूसरे दिन मर गए मैं मैं इधर से जा रहा हूं मैं इधर नहीं रोक रहे ऐसे चलो चलो आपकी बात सुन नहीं रहा था आप कह रहे हैं कि वहां ज्यादा भीड़ थी भीड़ से ज्यादा कितने लोग थे वहां 4050 लोग रहे 50 लोग और जब यह पुल जो है वो हिलने लगा तो उसके बाद कितने मिनट के बाद यह पुल कोलैप्स हुआ?

5 मिनट में होगा ना? तो लगभग 5 मिनट जो है पांच मिनट में पुल हिल रहा था। सब लोग बोल रहे थे। पुल हिल रहा है। पुल हिल रहा है। हां। 5 मिनट वो गया नीचे। और फिर आप कहां नीचे चले गए? बीच में गए थे। आप भी नीचे। हां। मैं पानी में गए थे। आप पानी में गए? हां। वो एंगल है ना? हां। वो एंगल को मैं मेरा हाथ वैसे ही रह था। अटक गया था। हां। मैं अटक जोर लगाया ऊपर आया वो वो पाइप है ना उधर से वो पकड़ पकड़ के बाहर निकल उस ब्रिज पे उस पुल पे कितने लोग थे 50 आदमी होंगे कम से कम 50 पूरे ब्रिज पे बहुत बड़ा ब्रिज है हां 50 बाइक अलग थी स्कूटी अलग थी तो उस ब्रिज पे बाइक भी थी और स्कूटी भी थी स्कूटी भी थी और वो ज्यादा चौड़ा ब्रिज नहीं है उधर से एक ही आदमी आ जा सकता है उस बाइकें भी स्कूटी भी दोद लाइन तीनती लाइन बना रहे हैं तो हादसे में जो लोग घायल हुए हैं क्योंकि यह उस समय उस पुल पर मौजूद थे और उन्होंने जो बताया वो घनघोर लापरवाही की तरफ इशारा कर रहा है। जिस पुल को पिछले साल असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। उस पुल पर तय संख्या से ज्यादा लोग मौजूद थे। उस पुल पर बाइक स्कूटी मौजूद थी। बड़ा सवाल यहां पर खड़ा होता है। डीसीपी साहब क्या कह रहे हैं? जरा सुनवाते हैं आपको। यह आयरन का ब्रिज था पुराना डिलेपिडेटेड ब्रिज था। वो आज गिर गया है लगभग 3:30 से पौ:45 बजे। यहां पे एनडीआरएफ की जो टीम है वह रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए आई है। लोकल00:08:03 पुलिस है और ट्रेन और बचाव कार्य जारी है। तो बचाव कार्य जारी है। राहतकर्मी वहां पर मौजूद हैं। एनडीआरएफ की टीम लगी हुई है। यह तमाम बातें कही जा रही हैं और जो डिप्टी सीएम है एकनाथ शिंद उन्होंने कहा है कि इस मामले की गहन जांच होगी। लेकिन जो मुख्य बातें हैं इस पूरे घटना की इस हादसे की वो मुख्य बात में पहली बात तो यह है कि यह पुल असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। इस पुल की मरम्मत के लिए पैसा दिया गया था। लेकिन इस पुल की मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हुआ। जब पुल असुरक्षित था तो वहां पर लोगों की मौजूदगी कैसे थी? यह सवाल नंबर एक है। जब पुल असुरक्षित था तो वहां पर कोई कर्मी मौजूद क्यों नहीं था? जो पुल पर लोगों को जाने से रोके? तमाम अहम सवाल हैं जिनके जवाब मिलना अभी बाकी है। सीधे हम रुख करेंगे। । एक तो टीम वहां पे मौजूद थी जहां पे ये हादसा हुआ है वहां पे है ही। मैं अस्पताल में हूं क्योंकि यहां पे कई लोगों को लाया जा रहा है। तीनचार अस्पताल हैं जहां पे इंजर्ड लोगों को लाया गया है। इनकी अगर स्थिति हम लोग जाने कि जिस तरीके से इनके इनको इंजरी हुई है तो दो पेशेंट पवना अस्पताल में उनको में भर्ती किया गया है। क्योंकि आप देख रहे हैं कि जो ब्रिज था वो पुराना ब्रिज था और लोग जो मुझसे बात कर रहे हैं वो कह रहे हैं वो 5 मिनट 7 मिनट 10 मिनट एक हाथ से पकड़े हुए हैं।

अपने आप को बचाने की कोशिश कर रहे थे। फिर वह खुद ऊपर आए। तो इस जो आईसीयू में भर्ती हैं उनको सीरियस इंजरी हुई है। किसी को हेड इंजरी हुई है। कईयों के पांव टूटे हैं। और जो इंज हुए जो इंजर हुए हैं जो उनके जो रिलेटिव्स हैं वो कह रहे हैं कि अस्पताल भी जो है वो थोड़ा सा उनको डिपॉजिट वगैरह की मांग कर लेकिन सबसे बड़ी बात तो वही है जो पिछले साल का हम लोग अगर बोर्ड दिखा पाए कि वहां पे लिखा था कि यह डेंजर पुल है। उसके बावजूद वहां पे क्यों लोगों को जाने दिया? वो बोर्ड हम लगातार दिखा रहे हैं। पहले भी जब इस खबर पर हम गए थे हमने वो बोर्ड दिखाया था जिस पर मराठी में इंस्ट्रक्शंस लिखी हुई हैं। डेंजर मार्क बना हुआ है और साफ तौर पर दिखाई दे रहा है कि एक चेतावनी का साइन बोर्ड है जिसमें लिखा है कि यहां जाना सुरक्षित हो सकता है और इसको लेकर सवाल यहां पर खड़े हो रहे हैं। मैं आपसे ये जानना चाहता हूं पिकनिक स्पॉट था। जाहिर सी बात है बड़े लोग भी वहां पर थे। बच्चे भी वहां पर रहे होंगे। जो लोग घायल हुए हैं जिनको अभी तक बचाया गया है। उनमें क्या बच्चे भी शामिल हैं? हां बच्चे हैं जिनसे एक लतिका जो दिल्ली से लड़की है उसने कहा कि उसके फैमिली के चार मेंबर थे। उसका मामा भी था उसकी मां भी थी और दो-तीन बच्चे थे। अब वह उन उन बच्चों की क्या हालत है यह तो अभी तक पता नहीं चल पाया है।

लेकिन ये पुणे से सबसे करीब है। लोनावला में कुछ रिस्ट्रिक्शंस डाले गए थे डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से। तो जो पॉपुलर टूरिस्ट स्पॉट होते हैं वहां पे रिस्ट्रिक्शन थी लोनावलेला जैसे जगह पे। टू लोनावला में रिस्ट्रिक्शन होने की वजह से या मुझे लगता है कि ज़्यादा पर्यटकों की भीड़ हुई। जैसे प्रत्यक्षदर्शी बता रहे हैं 400 से 500 लोग जबकि वहां पे 30 या 40 लोग होने जरूरी थे उस ब्रिज पे। उतनी मात्रा में लोग वहां पे इकट्ठा हुए थे और लगभग 40-50 लोग उस ब्रिज पे होने की क्या कोई फाइनल फिगर सामने आई है? शुरुआत में कहा गया था कि 25 से 30 लोग पानी में डूबे हैं। पानी में बहे हैं। लेकिन अब आंकड़ा यह बता रहा है कि 38 लोगों को तो बचा लिया गया है। छह की मौत हो गई है। क्या यह संख्या पानी में बहने वालों की ज्यादा हो सकती है? और ज्यादा हो सकती है?

अब यह बताना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि जो ऑफिशियल स्टेटमेंट गवर्नमेंट की तरफ से आया है उसमें यह कहा है कि 38 लोग 38 लोगों को रेस्क्यू किया गया है जो जो एसपी हैं रूरल के उन उन्होंने बताया कि छह लोगों की निधन हुई है तो आंकड़ा शायद बढ़ सकता है। हम लोग आशा करें कि आंकड़ा ना बढ़े। लेकिन क्योंकि पानी का बहाव इतना ज्यादा था। लोग जो बता रहे हैं जो प्रत्यक्ष दृष्टि बता रहे हैं कि लोग नीचे कूदें। लोग नीचे गिरे और उन्होंने देखा है कि लोग जो बहते हुए हैं आपके पास आपके पास

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