बड़े यु!द्ध की आहट ? इजरायल पहुंचा हजारों टन गो!ला-बा- रू!द,

अमेरिका ने 24 घंटों के भीतर इसराइल को 6500 टन और सैन्य साजो सामान भेजकर दुनिया को साफ संकेत दे दिया है कि मिडिल ईस्ट में हालात अब और सकते हैं और और अब सवाल सिर्फ तनाव का नहीं रह गया बल्कि संभावित बड़े युद्ध का उठने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सेंट कॉम के कमांडर ब्रैक कूपर और जॉइंट चीफ के अधिकारियों ने करीब 45 मिनट तक ब्रीफ किया जिसमें ईरान के खिलाफ तीन नई सैन्य योजनाओं पर चर्चा हुई।

यानी अब मामला सिर्फ दबाव बनाने तक सीमित नहीं रहा बल्कि सीधी कारवाही की दिशा में बढ़ता दिखने लगा है। इसके पीछे की वजह ईरान का डटे रहना। ईरान की तरफ से अमेरिका के आगे ना झुकने की कसम खा ली गई है। ईरान बार-बार कहता रहा है वह अपने देश के लिए अपने लोगों के लिए लड़ता रहेगा और घुटने कभी नहीं टेकेगा। पूरे जंग के दौरान की स्थिति को देखें तो अमेरिका बैकफुट पर नजर आया। ईरान ने जमकर मारी, मारे। इजराइल को भेजे गए इस भारी सैन्य सपोर्ट में हवाई और जमीनी गोला बारूद, सैन्य ट्रक, जॉइंट लाइट टैक्टिकल, व्हीकल्स और कई अन्य हथियार शामिल बताए गए।

और यह कोई पहली खेप नहीं है। फरवरी में ईरान के साथ संघर्ष शुल्क होने के बाद से अब तक अमेरिका 115,000 टन से ज्यादा सैन्य सामग्री इसराइल को बेच चुका है। 403 हवाई उड़ानों और 10 समुद्री शिपमेंट के जरिए यह सप्लाई पहुंचाई गई। यानी अमेरिका ना सिर्फ इसराइल के साथ मजबूती से खड़ा दिखाई दे रहा है बल्कि उसे हर हाल में युद्ध के लिए तैयार भी कर रहा है। सेंट कॉम की योजनाओं ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

एक प्लान के तहत ईरान पर छोटे लेकिन बेहद तेज और लगातार हमलों की रणनीति तैयार की गई है। जिससे उसके बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाकर उसे बातचीत के टेबल पर लाया जा सके। ऐसा अमेरिका सोच रहा है। वहीं दूसरी योजना पोरमूल स्ट्रीट के एक हिस्से पर कब्जा करने से जुड़ी है ताकि वैश्विक जहाज रानी को फिर से शुरू किया जा सके।

लेकिन इसके लिए जमीनी सेना की जरूरत पड़ सकती है जो इस संघर्ष को और खतरनाक बना देगी। फिलहाल अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी को अपनी सबसे बड़ी रणनीति ताकत मान रहा है। लेकिन अगर तेहरान झुकने को तैयार नहीं होता तो ट्रंप प्रशासन सीधे सैन्य कार्यवाही का रास्ता चुन सकता है। ऐसे में टकराव सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर असर डाल सकता है। ईरान भी घात लगाकर बैठा है। वह बार-बार कह रहा है एक बार मैदान में जरूर आना चाहिए क्योंकि इससे पता चलेगा कि ताकत अब तक कितनी अमेरिका की बढ़ी है या घटी है।

अब नज़रें इस बात पर टिकी हैं। क्या यह दबाव कूटनीतिक समाधान की तरफ ले जाएगा या फिर आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट में एक और बड़े युद्ध की आग फिर से झुलसने वाला है। वहीं दूसरी तरफ खबर यह भी है कि इसराइल भी यूएई को मजबूत करने में लगा है। यानी इस बार अमेरिका, इसराइल और यूएई इन तीन देशों के मिलेजुले हमले देखे जा सकते हैं। हालांकि ईरान हर परिस्थिति से निपटने के लिए खुद को तैयार मान रहा है। गजा से लेकर ईरान, इसराइल, अमेरिका में इसराइल की आक्रामकता और थोपने की कोशिश पर मिडिल ईस्ट के अरब मुल्क भले ही चुप्पी साधे रहते हैं और तमाशा देखते रहे। यहां तक कि खुद के यहां जंग में नुकसान उठाकर भी उनके मुंह से चू तक नहीं निकलती। यूएई और जॉर्डन जैसे अरब मुल्क तो इसराइल का खुलकर साथ भी देते हैं।

लेकिन दुनिया में एक मुस्लिम देश ऐसा है जिसके प्रेसिडेंट इसराइल के खिलाफ सख्त बोलते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं मोहम्मद मोइजू की। छोटे से मुस्लिम बहुल मुल्क मालदीव के प्रेसिडेंट मुइजू के इसराइल को लेकर तीखे तेवर से अमेरिका भड़क गया है। बावजूद इसके मोहम्मद मुइजू पीछे नहीं हटे हैं। उन्होंने ईरान अमेरिका इसराइल जंग के दौरान भी कहा था कि ईरान को चाहिए कि इसराइल पर तगड़े हमले करें और जंग से पहले ही जब अमेरिका मिडिल ईस्ट में तैयारियां अंजाम दे रहा था। असलहे जुटा रहा था। तब भी मोहम्मद मुईजू ने साफ कह दिया था कि वह मालदीव की धरती का इस्तेमाल अमेरिका को किसी भी देश पर हमले के लिए नहीं करने देंगे। मालदीव के प्रेसिडेंट के इस बेखौफ अंदाज से अमेरिका गया है।

अमेरिका ने उनसे जवाब तलब किया है। तो मोहम्मद मोइजू ने एक कदम और आगे बढ़कर कह दिया है कि वह अपनी बातों से पीछे नहीं हटेंगे। इतना ही नहीं उन्होंने पिछले दिनों मालदीव की राजधानी माले पहुंचे अमेरिकी नुमाइंदे से मिलने से भी इंकार कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट कहती है कि अमेरिकी प्रेसिडेंट के प्रतिनिधि को खाली हाथ लौटना पड़ा था। उस समय भी मोहम्मद मोइजू ने कहा था कि ख्ते में जंग तुरंत रुकनी चाहिए और ईरान को हमले करने हैं तो सीधे इसराइल पर करने चाहिए। इसराइल पर रात दिन हमले होने चाहिए और हम तो ऐसा ही चाहते हैं। इससे पहले मालदीव के राष्ट्रपति ने मार्च में सर्जियो गौर से मिलने से इंकार कर दिया था।

ट्रंप के दूत तब मालदीव की राजधानी माले के दौरे पर थे। गौर ने इस दौरान मालदीव के विदेश और रक्षा मंत्रियों से मुलाकात की थी। हालांकि मोहम्मद मुइजू के साथ उनकी मीटिंग रद्द कर दी गई। इस बारे में पूछे जाने पर प्रेसिडेंट मोहम्मद मुइजू ने टका सा जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें युद्ध के बारे में कोई चर्चा नहीं करनी। एक बयान में उन्होंने कहा कि मुझे यह देखना होगा कि वह किस बारे में बात करना चाहते हैं। अगर यह के बारे में है तो मुझे कुछ नहीं करना कुछ नहीं कहना।

मालदीव की धरती का इस्तेमाल किसी भी जंग के लिए नहीं किया जाएगा। यह मैं नहीं होने दूंगा। इन बातों से अमेरिका भन्ना गया है क्योंकि लगभग सभी मुस्लिम देश उसके साथ बनाकर चलते हैं। उसे समझ में नहीं आ रहा कि मालदीव में इतनी गैरत कहां से आ गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर और विदेश विभाग के उप सहायक सचिव बैथनी मॉरिसन ने मालदीव के विदेश मंत्री इरथिशाम एडमम से बातचीत भी की। इस बातचीत के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई जिसमें मोहम्मद मुइजू का बयान भी शामिल था। एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरान की बेखौफी और जज्बे ने दुनिया को एक नया विचार दिया है। जिस तरह से 40 दिनों की जंग ईरान ने अकेले अमेरिका और इसराइल से लड़ी और आज भी लंबी जंग लड़ने को तैयार है। उससे कई देशों में हिम्मत आई है। वहीं ईरान मिडिल ईस्ट में निर्विवाद रूप से एक मजबूत ताकत बनकर उभरा है। ऐसे में देखना होगा कि मोहम्मद मुइजू आगे अपने बयानों पर किस हद तक कायम रह पाते हैं।

अथाह समंदर लेकिन उसके नीचे हो रही है हलचल। एक चीज जो पानी के अंदर पानी को चीरती हुई चली जा रही है। मानो कोई मछली है या पानी में तेजी से रेंगने वाला सांप। यह चीज कुछ ही मिनट में 100 200 कि.मी. पानी के अंदर ही अंदर पार कर लेती है और फिर पानी में ही भड़ाम। समंदर में ऊंचा पानी का गुबार और दुश्मन का जहाज टुकड़े-टुकड़े।

जी हां, ईरानी नेवी ने दुश्मनों को चेतावनी दी है कि उनके पास एक ऐसा सीक्रेट है जिसका नाम सुनकर दुश्मन की सेनाओं को दिल का दौरा पड़ सकता है। यह बयान तब आया है जब अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें स्टेट ऑफ हॉर्मोस को फिर से खोलने के बदले सेंशंस हटाने की बात कही गई थी|

ईरानी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शहराम ईरानी ने सरकारी मीडिया प्रेस टीवी से बात करते हुए कहा है कि इस्लामिक रिपब्लिक बहुत जल्द अपने दुश्मनों का सामना उस से करवाएगा जिससे वह सबसे ज्यादा डरते हैं।

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