ईरान – इजरायल तूफान: हमें लगा भूकंप है.. ईरान सेलौटी छात्रा ने बताया कितने खौफनाक हैं वहां के हालात।

आप किन हालातों में वहां पर थे और कैसे आपको अरर्मनिया ले जाया गया? फर्स्ट ऑफ ऑल आई एम वेरी थैंकफुल टू द गवर्नमेंट जिन्होंने हमें बहुत हालात बिगड़ने से पहले ही वहां से इवाकुएट किया। हम बहुत सेफली लैंड किए हैं। अभी हम इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली में हैं। वी आर वेरी थैंकफुल। लेकिन हमारे साथ मसला ये हो रहा है वी वर कि आपको जब आप दिल्ली पहुंचेंगे उसके बाद आपका स्टे जो होगा आपको कराया जाएगा सेफली आपको कश्मीर पहुंचाया जाएगा लेकिन अभी जो हम देख रहे हैं हमें एसआरटीसी बसेस दी गई है जिनमें हमें बोल रहा है आप 20 आवर सफर करके कश्मीर चले जाओ हम ऑलरेडी चार पांच दिन से ट्रेवल कर रहे हैं हमें हमारा वो हम उस सिचुएशन में नहीं है कि हम अभी 20 घंटे ऐसा आरटीसी बसेस में ट्रेवल करके कश्मीर जा रहे हैं।

लेकिन अभी पहली चुनौती इस बात को लेकर शायद सरकार की थी कि आप लोग को वहां से सुरक्षित निकाला जाए। शायद इसके भी इंतजाम हो आगे। ये भी आप जरा बताइए कि आप वहां पर उर्मिया में ही थे। उर्मिया में ही आपकी यूनिवर्सिटी थी। ये काफी दूर है इलाका तेरान से। वहां पे भी कुछ हुआ था। जी जी। यूजुअली वहां पे पहले कुछ दिनों हालात बहुत ठीक थी। कुछ हमें फील नहीं हो रहा था। लोग नॉर्मली अपनी लाइफ स्टाइल कैरी कर रहे थे। लेकिन वन डे वन नाइट ऑल ऑफ अ सडन हमें ऐसा लगा कि कुछ अर्थक्वेक जैसा आया। एक तूफान हुआ था। वी कुड सी द फ्रॉम आवर विंडो एंड दैट अस। हम बहुत हो गए थे उस टाइम पे। हम और हर जगह चेकिंग जो भी फॉरेन थे फॉरेनर्स थे उनको चेकिंग की जा रही थी ऐसे। तो उस उस हादसे की वजह से हम बहुत हो गए थे। जी बिल्कुल जिस तरीके के हालात है आप बता रही हैं वहां पे कैसे हालात बने हुए थे।

एक बार यह बता देते हैं कि ईरान से लौटते वक्त भारतीय हैं। उन्हें क्या-क्या जो स्टेप्स है वह फॉलो करने पड़ रहे हैं। ईरान के शहरों से नद्ज बॉर्डर और नॉर्थ बॉर्डर से तबरीज होकर उन्हें आना पड़ रहा है। उसके बाद हमदान, तेहरान और इसहान करमान ये पहला स्टेप है ताबीज जो फॉलो करना पड़ रहा है वहां के लोगों को। यह मैप के जरिए भी हम आपको दिखा रहे हैं कि किस तरह से अलग-अलग जो इलाके हैं ईरान के वहां से जो स्टूडेंट्स हैं या जो भारतीय वहां पर हैं उनको निकालने के लिए कोशिश यहां पर हो रही है। इसके बाद दूसरा स्टेप जो आता है उसमें नॉर्थ बॉर्डर से यरेवन एयरपोर्ट और फिर यरवन एयरपोर्ट से नॉर्थ बॉर्डर तक जो है इनको ले जाया जाता है ताकि सुरक्षित उन जगहों से दूर ले जाया जा सके जहां पर तनाव के हालात बने हुए हैं। बिल्कुल। उसके बाद अगर स्टेप थ्री की अगर बात की जाए तो यरेवन एयरपोर्ट से भारत का सफर तय करना और अर्मेनिया से भारत जो छात्र हैं वो पहुंच रहे हैं और जितने भी छात्रों के अलावा और भी जो नागरिक हैं उन्हें भारत जो है लाया जा रहा है और

शुभां सबसे पहले आपके पास ही आना चाहूंगी मैं। कितने जो छात्र हैं वो अभी भारत लौट चुके हैं और कितने और ऐसे छात्र हैं जिन्हें अभी लाना बाकी है? बिल्कुल देखिए फिलहाल यह जो पहला बैच था सभी छात्रों का जिन्हें भारत लाया गया है। अभी तकरीबन 110 जो छात्र हैं उन्हें भारत लाया गया है। जिनमें से 90 जो है वो जम्मू कश्मीर के हैं और जो 20 हैं वो अन्य राज्यों के हैं। कुछ ऐसे जो छात्र थे वो बाहर निकले जिनसे हमने बात करी और हमारे को हमने सुनाया भी कि आखिरकार क्या कुछ उनकी परेशानियां रही और कितना वो यहां पर शुक्रिया अदा कर रहे हैं।

भारत भारत भारतीय देश की जो एंबेसी है उसका और साथ ही साथ सरकार का वहां पर देखिए अभी भी फिलहाल जो कई ऐसे छात्र हैं जो ईरान में इंतजार कर रहे हैं कि उन्हें भी दिल्ली लाया जाए और कहीं ना कहीं जो पूरा का पूरा रास्ता है क्योंकि देखिए नो फ्लाई ज़ोन फिलहाल ईरान को बना दिया गया है। पड़ रहा था और वह बहुत ज्यादा थक गए हैं और ऐसे ही कई छात्र हैं जो फिलहाल बस के जरिए अभी जम्मू कश्मीर नहीं जाना चाहते हैं क्योंकि वह बेहद थक चुके हैं। बिल्कुल शुभां अभी हम देख भी रहे थे एक हमारे साथ छात्र जुड़े थे उनसे बात कर रहे थे जरा ये भी आप बताइए के थोड़ा डिले भी हुई फ्लाइट उसकी भी कोई वजह रही यहां पर और दूसरा और कितनी फ्लाइट्स हैं जो एक्सपेक्ट कर रहे हैं हम आज बिल्कुल देखिए क्योंकि कहीं ना कहीं जो ये पूरा सफर था ये एक बाय रोड किया गया आधा सफर बाय रोड था उसके बाद जो फ्लाइट थी वो ली गई तो कहीं ना कहीं ये जो था पूरा समय लगना था और क्योंकि दूसरे देश से बच्चों को वापस लाया जा रहा था। तो कहीं ना कहीं जो चेकिंग होती है वह भी की जाती है। उसको लेकर के कहीं ना कहीं डिले हमने पहले भी देखा है ऐसा होता है और आज भी इसी तरीके से हुआ है।

अगर हम बात करते हैं ईरान में भारतीय लोगों की तो तकरीबन 10,000 लोग वहां पर रहते हैं जिनमें से 6,000 केवल छात्र हैं और अभी तक 110 भारतीय छात्रों को जो है दिल्ली लाया गया है। तो यानी कि अभी ये जो सिलसिला है पूरा ऑपरेशन सिंधु का ये काफी बड़ा है और आज भी जो फ्लाइट्स है बताया जा रहा है जो जानकारी हमें सूत्रों से मिल रही है 10:00 बजे के करीब एक और ऐसी फ्लाइट होगी जो छात्रों को लेकर के दिल्ली पहुंचेगी। तो00:05:29 अब से थोड़ी देर में एक और फ्लाइट यहां पर है। शुभांग आप कह रहे हैं 10:00 बजे के आसपास। अली भी हमारे साथ है। अली करीब 13,000 भारतीय हैं जो वहां पर हैं। जरा इस ऑपरेशन के बारे में आप बताइए। कैसे उनको लाने की कोशिश यहां पर हो रही है। एक कंट्रोल रूम भी वहां पर बनाया गया भारत सरकार की तरफ से 24 घंटे का। जी बिल्कुल वो कंट्रोल रूम बहुत ही बेहतर तरीके से उस खुद हमने भी एक तरीके से बात की क्योंकि जो यहां के लोग थे उन लोगों ने बड़े परेशान होते हैं क्योंकि आपको बता दूं इस वक्त में जो ईरान के अंदर सबसे ज्यादा जो लोग हैं वो कुम तैरान और मशद ये एक ऐसे क्षेत्र है जहां पे सबसे ज्यादा लोग जियारत करने भी जाते हैं पढ़ाई करने भी जाते हैं।

इनफ स्कॉलर्स और बिजनेसमैन भी यही तो सारा बिनेस करते हैं। अब गवर्नमेंट ने कल ही जो हमने सबसे पहले खबर ये बताई थी जो इंडियन एंबेसी ने जो तैहरान और कुम में जो तैरान से जो ला के लोगों को पहले कुम में रखा और कुंभ से कल 17 बसें गई है मशद के लिए जो तकरीबन मशद जो है वो तैरान से 900 किलोमीटर अराउंड दूर है और 900 किलोमीटर दूर पहुंचने के बाद 17 बसें वहां तकरीबन पहुंची और अब तकरीबन 2000 जो इंडियन है वो वहां पे मौजूद है मशरबद में अब गवर्नमेंट एक प्लान बना रही है कि तुर्कमिनिस्तान क्योंकि वहां से तकरीबन 200 किलोमीटर ही दूर है वहां की बॉर्डर जो एयरपोर्ट है उसके जरिए 2000 लोग जो तकरीबन जिन्होंने फॉर्म भरे थे गवर्नमेंट से कि हम लोग जाना चाहते हैं उनको अब के जरिए भारत लाने की कोशिश करेगी।

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