ये तीन गलतियां न होतीं तो जिंदा होते रहबर ! ईरान ने की शब्बत वाली चूक?

मिडिल ईस्ट में जो हुआ उसे सदियों तक भुलाया नहीं जा सकता। सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामने की मौत अपने आप में बड़ा सवाल है। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि हमला कैसे हुआ?

असली सवाल है कि इतनी सख्त सुरक्षा के बावजूद ईरान अपना सर्वोच्च नेता कैसे खो बैठा? दुनिया भर के विश्लेषक अब तीन बड़ी रणनीतिक चूकों की तरफ इशारा कर रहे हैं। सबसे पहली चूक शब्बत के दिन हमला नहीं होगा। जी हां, शब्बत के दिन हमला नहीं होगा।

यही सबसे बड़ी गलतफहमी बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि ईरान को भरोसा था कि यहूदी विश्राम दिवस पर हमला नहीं होगा। शब्बत शुक्रवार सूर्यास्त से शनिवार शाम तक का पवित्र समय माना जाता है। परंपरागत रूप से यह दिन प्रार्थना और विश्राम का होता है। रिपोर्ट के अनुसार शनिवार सुबह वह भी रमजान के दौरान हुए इस हमले ने तेहरान को पूरी तरह चौंका दिया।

दावा किया जा रहा है कि सुरक्षा एजेंसियों ने यह मान लिया था कि इस दिन बड़े पैमाने की सैनिक कार्यवाही की संभावना कम होगी। अगर यह सच है तो यह रणनीतिक अनुमान सबसे भारी गलती साबित हुआ है। दूसरी चूक खतरे का अंदेशा था लेकिन तैयारी अधूरी।

सूत्रों के मुताबिक ईरान को हमले का अंदेशा था। सुरक्षा अलर्ट भी जारी थी। लेकिन कहा जा रहा है कि फोकस केवल कुछ संवेदनशील ठिकानों तक सीमित रहा। जबकि हमले की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि देश के 31 में से 24 प्रांत प्रभावित बताए जा रहे हैं। यह संकेत देता है कि हमला बहुस्तरीय और बहुदिशात्मक था और जवाबी सुरक्षा परतें उतनी व्यापक नहीं थी जितनी होनी चाहिए थी। तीसरी चूक दिन दहाड़े वार चौंकाने वाला समय। स्थानीय समय अनुसार सुबह लगभग 8:00 बजे के आसपास बमबारी हुई। दावा है कि उस वक्त खामिनई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में थे। राजधानी तेहरान में स्थित उनका परिसर कथित तौर पर पूरी तरह तबाह हो गया। एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने इसे बेहद दुस्साहसी दिन दहाड़े हमला बताया जिसने शीर्ष नेतृत्व को शुरुआती मिनटों में ही स्तब्ध कर दिया।

अंदरूनी सेंध सबसे सनसनीखेज आरोप यह है कि ईरान की सुरक्षा व्यवस्था में गहरी घुसपैठ हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि जासूसी नेटवर्क इतने अंदर तक सक्रिय थे कि खामने की सटीक लोकेशन तक की जानकारी लीक हो गई थी। यहां तक कि मोसाद से जुड़े नेटवर्क और अमेरिकी खुफिया तंत्र के समन्वय की चर्चाएं तेज हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब बड़ा सवाल है कि अगर यह सभी दावे सही है तो क्या धार्मिक कैलेंडर पर भरोसा रणनीतिक भूल थी? क्या एयर डिफेंस सिस्टम अपेक्षा से कमजोर था? क्या अंदरूनी खुफिया तंत्र में बड़ी सेंध लग चुकी थी? अब खामने की निधन को कई लोग एक युग का अंत बता रहे हैं।

तेहरान से लेकर क्षेत्रीय ताकतों तक हर जगह हलचल है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही बना है कि क्या सिर्फ एक सैन्य हमला था या यह सालों की खुफिया तैयारी और रणनीतिक जाल का परिणाम। फिलहाल ये तीन बड़े दावे हैं कि तीन बड़ी गलतियां ईरान ने की है। जिसकी वजह से ईरान ने अपने रहबर अयातुल्ला अली खामनई को खो दिया है। आगे अगली रिपोर्ट में दिखाएंगे किस तरह से मोसाद ने ईरान के अंदर अपनी पकड़ मजबूत की और खामने तक पहुंचने में सफल रहा।

देखिए हमारी अगली रिपोर्ट। मिडिल ईस्ट में पिछले कुछ दिनों से चली आ रही लड़ाई की आशंका हकीकत में उस वक्त बदल गई जब इजराइल ने ईरान पर हमला कर दिया। बल्कि इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर के आवाज को भी निशाना बनाया गया जिसमें ईरानी सुप्रीम लीडर और उनका पूरा परिवार ही खत्म हो गया। दावा किया जा रहा है कि खामिनाई के घर पर 30 से ज्यादा बम गिराए गए थे। हालांकि पहले खामनाई की निधन की सिर्फ अटकलें चल रही थी। लेकिन ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि देश की सर्वोच्च नेता आया अली खामिनई शनिवार सुबह तेरान स्थित अपने कार्यालय में मारे गए।

इस हमले में आया जीसी चीफ मेजर जनरल मोहम्मद पाकपुर और आया अली खामिनई के सीनियर सलाकार अली शमखानी मारे गए हैं। इजराइल के पूर्व प्रेसिडेंट अहमदी नेजाद के मुताबिक ईरान की सीक्रेट सर्विस ने ईरान के अंदर मोसाद एजेंट्स को टारगेट करने के लिए एक यूनिट बनाई थी। लेकिन इस यूनिट का हेड खुद मोसाद का एक ऑपरेटिव निकला। साथ ही साथ 200 एजेंट्स भी इसमें शामिल थे। यानी कि माना यही और दावा किया जा रहा है कि कोई ऐसा तो था जो ईरान में रहकर इजराइल के लिए काम कर रहा था और जिस तरह से खामनाई को मारा गया उससे ऐसी भी आशंका जताई जा रही है कि कोई खामनाई का करीबी ही था जिसका इसमें पूरा पुका पूरा हाथ रहा है। इजराइल के चैनल 12 के मुताबिक खामिनाई की बॉडी की एक फोटो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेजमीन नेतन याू को दिखाई गई।

रिपोर्ट में बिना नाम वाले इजराइली अधिकारियों का जिक्र किया गया। पब्लिक ब्रॉडकास्टर कान ने यह भी बताया कि सीनियर इजराइली अधिकारियों को खामनाई की खत्म होने की जानकारी दे दी गई थी और उनकी बॉडी तेहरान में उनके कंपाउंड के मलवे से मिली थी।

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि शनिवार सुबह शुरू हुए यूएस इजराइली हमलों में खामनाई के साथ उनकी बेटी, पोता, बहू और दामाद भी मारे गए। ईरान के डिफेंस मिनिस्टर अजीज नसी जादे और इस्लामिक रिवोशनरी गार्ड कॉम्स के कमांडर मोहम्मद पाकपुर भी इस हमले में मारे गए हैं। रेड क्रिसेंट के मुताबिक इजराइल और अमेरिका द्वारा किए गए इन हमलों में कम से कम 20 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।

बीबीसी और सीबीएस न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक मरने वालों में कम से कम 40 वरिष्ठ ईरानी अधिकारी भी शामिल हैं। बीबीसी ने भी सेटेलाइट तस्वीरों के जरिए खामिनाई के कार्यालय लीडरशिप हाउस को हुए भारी नुकसान की पुष्टि की है।

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