A10 थॉग है। तमाम महंगे-महंगे जेट्स होने के बावजूद अब अमेरिका ने इस 50 साल पुराने जेट को ईरान के खिलाफ उतारा है। इसे अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस खाली करवाने के लिए तैनात किया है। तो क्या है इस विमान की खासियत? इससे क्या-क्या नुकसान है?
क्या फायदे हैं? यह तमाम यह जो विमान है वार्थक पहले तो वार्थक जो शब्द है जो जंगली शुगर एक सूअर जो होते हैं पिग्स होते हैं उनके जो वो यहां पे दांत निकले होते हैं बड़े-बड़े तो उससे उसको कहा जाता है वार्थक और ये यूएस ने उस जानवर से मिलताजुलता नाम इनको दिया है इस जहाज को आप देखेंगे तो वैसे ही उस पे दांत वगैरह भी पेंटिंग वगैरह करके यूएस एयरफोर्स ने बनाई है और वह जो जानवर है जो पिग्स होते हैं जंगली वाले वो दौड़ाकर और काफी आपको मतलब डीप डीप करते हैं और आपको मतलब हमला करके बहुत तेज घायल कर सकते हैं। इंसानों पे भी कभी-कभी हमला कर देते हैं।
उसी से सिमिलर ये एटेन वर्थॉक की कार्यप्रणाली जो है जिस तरीके से ये काम करता है। डीप इसको जहाज कहा जाता है। दुश्मन के इलाके में अगर आपको काफी अंदर तक जाके ऑपरेट करना है। काफी कम ऊंचाई पे ऑपरेट करना है तो उसमें आपको जो अमेरिका के पास जो अभी जेट्स हैं नो डाउट बहुत उन्नत जेट्स हैं वो भी F22 रैप्टर है। F35 है उनका B2 है और तमाम तरीके के उनके पास जेट्स हैं।
15 हालांकि अभी हो गया था उनका तो खैर जितने भी उनके पास जेट्स हैं वह बहुत ज्यादा नीचे नहीं उड़ सकते। क्लोज एयर सपोर्ट एक चीज होती है एयरफोर्स में कि जब आप ग्राउंड ट्रूप्स ग्राउंड इन्वज़ की आप बात करते हो खासकर नीचे स्टेट ऑफ हार्मोस को खाली कराने के लिए ऐसा कहा जा रहा है कि इसको ले आया है अमेरिका। 50 साल पुराना जेट है। देखिए अब हमें लगता था कि हम ही अभी तक MG-21 जो है 60 साल पुराना इस्तेमाल कर रहे हैं। नहीं ऐसा नहीं है।
यूएसबी अगर यह भरोसेमंद होती है कोई मशीन तो आप उसको पांच दशक तक भी यूज़ कर सकते हैं। और यह जहाज जब अपने समय में जब यह आया था तो मतलब उस समय के लिहाज से क्लोज एयर सपोर्ट के लिहाज से डीप स्ट्राइक जो कहते हैं एक शब्द डीप के लिहाज से यह जहाज सबसे उन्नत जहाजों में से एक था। इसमें एक रोटरी यानी घूमने वाली कैनन होती है जो होती है वो घूमती है और जब वो किसी या इसको किलर भी इसीलिए इसका निक नेम एक पड़ा जब इसको टैंक वगैरह पे इससे हमला किया जाता है तो मुझे लगता है कि तीन से 4 सेकंड के अंदर वो कर देता है आर्मर पियरसिंग इसमें बड़े-बड़े बड़ी-बड़ी गोलियां होती हैं 30 एमएम की गोलियां होती हैं 30 मिलमीटर की और वो आर्मर पियरसिंग करती हैं और टैंक को तबाह कर देती हैं। अमेरिका जो इसको जो लाया है वह इसलिए लाया है कि उसको स्टेट ऑफ होमोस में जो ईरान की जो आईआरजीसी की जो नेवी है उसके जो वॉरशिप्स घूम रहे हैं जो माइन बिछा रहे हैं जो समुंदर में जो माइंस होती हैं बड़ी-बड़ी कुछ तैरने वाली होती हैं माइंस की सबसे बड़ी दिक्कत क्या है कि वो ऐसा नहीं कि वो सिर्फ कांटेक्ट से ही ब्लास्ट होंगी।
वो अगर वाइब्रेशन हल्का उनको मिला जो जहाज के प्रोप्लेयर घूमते हैं तब भी वह हो सकते हैं। अब उनको क्लियर कराने के लिए उन जहाजों को वहां से छोटे-छोटे जो शिप्स हैं बोट्स हैं आईआरजीसी के उनको हटाने के लिए अमेरिका ले आया । अब इसकी रेंज अगर देखिए अब जो भी जानकारी जो यूएस एयरफोर्स की ओर से है उसमें कहा गया है यूएस एयरफोर्स अपनी हर चीज को बड़े शान से बताता है कि हमारे पास क्या है। करीब-करीब यह जहाज यह सब सोनिक है। सबसे बड़ी चीज सुपर सोनिक रफ्तार पे नहीं जा सकता। इसकी रफ्तार 800 के आसपास है
800 कि.मी. 700 से 800 के बीच में जनरल फ्लाई करता है। यह अगर इसके फुल आफ्टर बर्नर ना इस्तेमाल किए जाए आफ्टर बर्नर जो पीछे आपने देखा होगा जहाजों में से आगनुमा एक वो जो वेंट होता है पीछे की तरफ अगर वो इस्तेमाल ना भी किया जाए तब भी यह 500 से 550 की स्पीड पे उड़ सकता है। तो स्पीड इसकी फाइटर जेट्स के लिहाज से बहुत ज्यादा नहीं है। फाइटर जेट्स की स्पीड जनरली मैक वन से ऊपर होती है। तो इस लिहाज से भी यह इसीलिए डीप कर सकता है। जो स्लो मूविंग ऑब्जेक्ट्स हैं जैसे टैंक्स हुए आपके बोट्स हुई जो बहुत ते नहीं जा रही हैं। 500 की स्पीड में शायद बोट नहीं चलती और अगर आप एक फाइटर जेट लेके रैप्टर जैसा उस पे जाएंगे हमला करने तो वो शायद उतना कामयाब नहीं होगा। आपको हो सकता है वापस घूम के आना पड़े और एक जहाज की एक वापस सॉर्टी लगाना मतलब आपको एक से 1ढ़ मिनट वापस से देने होंगे।
उतने में वो कहीं और जा सकता है। तो यह जहाज इसलिए अमेरिका क्लोज सपोर्ट के लिए लाया है। लगातार इससे हमले इसमें हाइड्रा नाम का एक रॉकेट लगता है। हाइड्रा रॉकेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह रॉकेट जब भी जहां भी इंपैक्ट होता है, इंपैक्ट होने के बाद उसमें कुछ अह पीछे के साइड हम हमेशा देखते हैं कि आगे की तरफ जनरली वॉलेट होता है।
हाइड्रा रॉकेट में पीछे की साइड एक एक्सप्लोसिव मटेरियल अलग से लगाया जाता है। इसकी वजह से क्या होता है कि जब वो ब्लास्ट होता है उस की वजह से उस मटेरियल में भी आग लगती है और वो आग और ज्यादा फैलती है। इस वजह से डिस्ट्रक्शन बहुत ज्यादा होता है। इसके अलावा कुछ ऐसे इसमें लगे हैं जो पुराने जमाने के ट्रेडिशनल हथियार होते थे। जैसे हालांकि कुछ ऐसे थे जैसे फ्लेम थ्रोअर एक आता था वर्ल्ड में आग की वो फ्लेम्स फेंकता था वो। कुछ-कुछ उसी तरह का एक इसमें बम यूज़ होता है जिसमें मिला के उसको यूज़ किया जाता है। अब वो जैसे ही वो बम गिरेगा वहां आग लग जाएगी। और में कई और केमिकल्स मिलाए जाते हैं ताकि वो आग बुझे। केरोसिन की आग तो फिर भी आप बुझा सकते हैं। लेकिन कुछ ऐसे उसमें केमिकल्स होते हैं वो जल्दी बुझती नहीं है वो आग। पानी से नहीं बुझती है जल्दी। उसको बुझाने के लिए आपको बहुत ज्यादा प्रेशर और और जंग के मैदान में चीजें मिलना आकांक्षा बहुत मुश्किल है।
इसके अलावा इसमें मार्क 80 सीरीज के अनगाइडेड जो नॉर्मल जो बम्स होते हैं अनगाइडेड जिनको बस ड्रॉप कर दिया जाता है वो जाके अपने टारगेट पे गिरते हैं। उनमें कोई गाइडेंस सिस्टम नहीं होता है। बस वो वजन से अपने ग्रेविटी की वजह से वो नीचे आते हैं वो गिरते हैं। इसके बाद जॉइंट डायरेक्ट अटैक म्यूशन होता है। एक जे डैम होता है जो पूरी तरीके से किसी जमीन को अगर आपको समतल करना हो तो जे डैम का आप इस्तेमाल करते हैं।
बाकी दुश्मन के फायर से बचने के लिए जो नॉर्मल जो फ्लेयर डिप्लॉय करते हैं जहाज जो फ्लेयर्स होती हैं शेप्स होते हैं मेटल के क्योंकि जो दुश्मन की मिसाइल आती है आपके जहाज पे वो आपकी या तो हीट को पकड़ के आती है या तो आपके रडार को पकड़ने के लिए आती है या तो आपके मेटल्स जहाज आपका मेटल से बना होता है उस मेटल का पीछा करते हुए आती है। मेटल के शेफ्स गिराए जाते हैं इस जहाज से ताकि वो दुश्मन की मिसाइल डिस्ट्रैक्ट हो। फ्लेयर्स गिराए जाते हैं ताकि दुश्मन की मिसाइल जो गर्मी ढूंढ रही है जो हीट सीकिंग होती हैं वो डिस्ट्रैक्ट हो। इसके अलावा जो इसका मेटल है इस पे टाइटेनियम की एक बहुत अच्छी परत लगाई गई है A10 पे। उस समय जब ये क्लोज एयर सपोर्ट में जाता था।
दुश्मन के इलाके में जाता था तो दुश्मन अपनी एंटी एयरक्राफ्ट गन से इस पे फायर करते थे। इस वजह से पायलट को कभी गोली लगना, प्लेन डैमेज होना इन सब चीजों का खतरा दर। लेकिन टाइटेनियम बॉडी होने की वजह से यह कई गोलियां लगने के बावजूद काफी अटैक होने के बावजूद काफी खराब हालत में उड़ सकता है। इवन इसका जो टर्बो फैन है इसमें दो साइड में आप देखेंगे टर्बो फैन लगे हैं। एक टर्बो फैन फेल होने के बाद भी यह उड़ सकता है। इसलिए इसको इतना भरोसेमंद और इतना रिलायबल माना गया है। वर्थॉक जैसा हमने बताया कि इसका निकनेम है और इसका कई वर्जन बनाए गए।
समय के साथ अमेरिका ने इसके कई वर्जन डेवलप किए। इसके रडार डेवलप किए। एयनिक सेंसर जो भी चीजें आती हैं जहाज में लाइन से अमेरिका ने डेवलप करता गया और थंडर बोल्ट टू अभी जो वर्जन यूज़ कर रही है यूएस एयरफोर्स उसका नाम थंडर बोल्ट टू है। सिंगल सिंगल पायलट है ये सिंगल सीटर विमान है। एक पायलट इसको उड़ाता है और बहुत मतलब बहुत ज्यादा रेंज भी नहीं है इसकी। 1000 कि.मी. तक यह जाता है। अपना मिशन करके चला आता है। कभी-कभी अगर पेलोड ज्यादा है मतलब इसमें अगर जो बम है उनका वजन अगर ज्यादा है तो ये 600 से 700 की इसकी रेंज रहती है। लेकिन जिस इलाके में आकाशा इस समय अमेरिका को ऑपरेट करना है वो इलाका कोई उनको रेंज बहुत ज्यादा नहीं चाहिए। उनके पास तमाम तरीके के एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। उनके बेसिस हैं मिडिल ईस्ट कंट्रीज में जो भी गल्फ कंट्रीज हैं वहां पे। तो इस वजह से उनको बहुत ज्यादा रेंज नहीं चाहिए।
और शायद इसीलिए उन्होंने जो स्टेट ऑफ होमोस का इलाका है वह खाली करने के लिए उन्होंने A10 को अब डिप्लॉय किया और वो एकदम पुराने जमाने में चले गए कि अब लगता है कि ये महंगे-महंगे जेट से कुछ हो नहीं रहा है। गिर भी गए उनके तीन F-15 अभी F35 का दावा भी किया है कि ईरानियन मीडिया ने कई जगहों से आईआरजीसी दावा कर रही है। हालांकि अमेरिका उसको नहीं मान रहा है। लेकिन हां F35 जैसे मतलब कुल मिला के काम कुछ नहीं आ रहा। तो इस वजह से शायद अमेरिका ने पुरानी रणनीति अपनाई। तो क्या आपको लगता है मानस कि यह जो एट वॉर थोक जो तैनात हुई है तो इससे इस बात की पॉसिबिलिटी है कि अमेरिका अब ईरान के लिए जमीनी हमले पे उतर आई है। और इतने महंगे-महंगे इतने आधुनिक इतने मॉडर्न एयरक्राफ्ट्स जेट्स होने के बावजूद अब वो बैक टू बेसिक्स वाली नीति को नीति पे उतर आई है। आपको क्या लगता है।
? ये आपने बहुत सही शब्द यूज़ किया बैक टू बेसिक्स। जब मतलब होता है ना कि जब आया था तो हम सब लोग दिल्ली से अपने-अपने घर चले गए थे। हम लोग बैक टू बेसिक्स हो गए थे। टूथब्रश छोड़ के हम लोग दातून पे आ गए थे। तो वो बैक टू बेसिक्स आदमी तभी आता है जब उसकी हालत बहुत खराब होती है। अमेरिका की जो मिलिट्री माइट का एक जो उसने बनाया था पूरी दुनिया में कि हमारे पास हम तो अजय हैं।
इजराइल ने भी ऐसा ही कुछ अपने आयरन डोम को लेकर बनाया था। सारी चीजें ध्वस्त हो गई। यह कहीं से साबित होता हुआ नहीं दिखा कि अमेरिकन मिलिट्री माइट, अमेरिकन फायर पावर दुनिया में सबसे तगड़ी है। ईरान जैसा देश जिस पे 10 साल से सेंक्शन लगे हैं वो आपको इतनी तगड़ी चुनौती दे रहा है। जैसा आपने बात की ग्राउंड इन्वज़न की। अभी हमने इस चीज को दिखाया भी ललन टॉप पे हम लगातार बता भी रहे हैं इस चीज को कि प्रेसिडेंट ट्रंप ने मरींस भेजे हैं। मरींस वो सैनिक होते हैं जैसे इंडिया में पैरा एसएफ और मार्कोस के हमारे कमांडोस हैं जो हाईली ट्रेंड होते हैं। हालांकि हर सोल्जर अपने आप में बेस्ट होता है। लेकिन मार्कोस और पैरा एसएफ को हमारे यहां बेस्ट ऑफ द बेस्ट माना जाता है। उसी तरह यूएस में दो फोर्सेस ऐसी हैं। एक मरींस और एक डेल्टा फोर्स। ये दो ऐसी फोर्सेस हैं यूएस में। को तभी भेजा जाता है।
जब ग्राउंड इंटरवेंशन अर्बन वॉरफेयर जो शहरों में लड़ाई क्योंकि ईरान अफगानिस्तान की तरह नहीं है अमेरिका के लिए ईरान एक ऐसा जगह जहां शहर हैं काफी घर हैं बसा हुआ एक प्रॉपर वो बहुत बड़ा देश है ईरान इजराइल से 10 गुना ज्यादा बड़ा है वो तो अगर अमेरिका को ग्राउंड इन्वेज नहीं करना होता जमीनी हमला नहीं करना होता तो उसने दो यूएसएस ट्रिपोली है उसने भेजा है जो एफीबियस जहाज है जो पानी उसमें से जहाज निकलते हैं वो पानी और जमीन दोनों पे ऑपरेट कर सकते हैं 2500 जो मरीन एक्सप एक्सपेडिशनरी यूनिट है उसकी जापान के ओकिनावा में उनको भेजा है उन्होंने।
तो इस मतलब यह स्ट्रेटजी तो साफ समझ में आ रही है। किसी को नॉर्मल इंसान को भी समझ में आ जाएगी कि अगर ग्राउंड इन्वेशन नहीं करना तो आप इतने सैनिक भेज क्यों रहे हो? आप अगर सिर्फ हवाई हमला करना होता आपको सिर्फ जेट्स ही इस्तेमाल करने होते तो आप F-22 रैप्टर F-35 आपके पास तो B2 बॉम्बर या ऐसी-ऐसी चीजें हैं आपके पास। तो फिर आप क्यों A10 वापस से उतार रहे हो? 50 50 साल पुराने। 50 साल। क्यों बैक टू बेसिक्स जा रहे हो आप? तो बैक टू बेसिक्स जाने का यही मतलब है कि प्रेसिडेंट ट्रंप ईरान को घेर रहे हैं चारों ओर से और अब वो चाह रहे हैं उनके दो टारगेट थे। एक तो न्यूक्लियर प्रोग्राम पीछे हो जाए ईरान का। दूसरा उनका टारगेट था कि रिजीम चेंज हो जाए। हुआ दोनों में से कुछ नहीं। वहां था नहीं था ये किसी को नहीं पता।
शायद प्रेसिडेंट ट्रंप को भी नहीं पता। लेकिन हां रिजीम चेंज जैसी कोई चीज नहीं दिख रही वहां पे। हां। हालांकि ईरान को बहुत बड़ा झटका लगा। उनके सुप्रीम लीडर की मौत हो गई हमले के पहले ही दिन। बावजूद उसके ईरान ने जिस तरीके से रेजिस्ट किया, जिस तरीके से अपने ड्रोंस और कम खर्च में जिस तरीके से नुकसान पहुंचाया अमेरिकन मिलिट्री को यह अभी तक इतिहास में तो कई लोग ये कहने लगे कि कहीं वियतनाम मूवमेंट तो नहीं हो जाएगा अमेरिका का या अफगानिस्तान तो नहीं हो जाएगा। क्योंकि अभी जो अमेरिका की मिलिट्री पावर है आप सोचिए पहले नंबर पर जब एयर पावर की बात आती है तो पहले नंबर पर यूएस एयरफोर्स आती है। दूसरे नंबर पे यूएस नेवी की एयर नेवी है। मतलब दोनों एयर पावर उन्हीं की है। उनकी नेवी की पावर कई देशों की एयरफोर्स से ज्यादा है। बावजूद उसके अगर अमेरिका नहीं कर पा रहा है अपने महंगे जेट से कुछ। दिन रात आप देख रही हैं सेंट कॉम वीडियोस डाल रहा है कि हमारे यह विमान उड़ रहे हैं। स्ट्राइक पैकेज जा रहा है। इजराइल अलग-उधर से सपोर्ट दे रहा है इनको। वो भी बम गिरा रहा है। हमेशा एक स्टेटो टैंकर आपको मिडिल ईस्ट में दिख जाएगा। उड़ता हुआ फ्लाइट रडार पे। बावजूद इसके अगर नहीं कुछ हो पा रहा है तो ग्राउंड इन्व ही वो तरीका है। जमीनी हमला ही वो तरीका है।
बूट्स ऑन द ग्राउंड के बिना नहीं हो पाएगा ये ऑपरेशन। प्रेसिडेंट ट्रंप ये बात समझ गए हैं। जनरल टन केन ये बात समझ गए हैं। एडमिरल ब्रेड कूपर जो यूएस सेंट कॉम के कमांडर हैं, वह यह बात समझ चुके हैं कि हमें अपनी स्ट्रेटजी बदलनी होगी। हमें ईरान से ईरान की तरह लड़ना होगा। हमें अगर हम अमेरिका बनके लड़ते हैं, हम सिर्फ हवाई हमले करते हैं। क्या पता उनके मिसाइल लांचर्स ऐसी जगह हो जहां आपको दिख ही ना रहे हो। क्योंकि अगर वो तबाह हो गए होते तो आज तो डियागो गार्सिया तक पहुंच गए ना उनके मिसाइल। तो संभवत ये बहुत चांस है कि ग्राउंड इन्वेशन की पूरी-पूरी तैयारी है। किस तरह से होगी, क्या होगी? लेकिन वॉरथॉक्स को ये जो जिस तरीके से ये आगे बढ़ रहा है अमेरिका। ये स्टेप बाय स्टेप मतलब अगर कोई मिलिट्री एनालिस्ट है तो वो इस बात को ही इशारा समझ रहे हैं कि हां यह ग्राउंड इन्वेशन की तैयारी है। हम पहले बोट्स हटवाएंगे वहां से हुरमुस से उसके बाद वर्थॉक्स को एटेन को हम डिप्लॉय करेंगे ताकि और एरिया खाली हो सके। नीचे जो उनके मिसाइल पोजीशन या एंटी एयरक्राफ्ट गंस जो हाथ से चलती हैं एंटी एयरक्राफ्ट गंस हैंडल्ड होती हैं उन पे हमला करेंगे और उसके बाद हम अपने सैनिक उतारेंगे। तो मरींस को भेज दिया गया है। वॉरथॉक्स को डिप्लॉय कर दिया गया है और जो फाइटर जेट्स के ऑपरेशंस थे वो कम कर दिए गए हैं। मिसाइल्स के ऑपरेशन ज्यादा हो रहे हैं।
तो इस पे बहुत पॉसिबिलिटी है कि ग्राउंड ऑपरेशंस अब जल्दी शुरू हो सकते हैं। जी थैंक यू मानस। तो जंग में अपना सबसे पुराना पत्ता खोल दिया है अमेरिका ने। अब देखना ये है कि इससे अमेरिका इजराइल का लक्ष्य पूरा होता है या नहीं।