यु!द्ध लंबा चला तो भारत में इन चीजों की आ सकती है कमी

मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव का असर अब सिर्फ़ तेल और गैसों तक सीमित नहीं रहा है। बल्कि इसका सीधा असर भारत की खेती और खाद सुरक्षा पर भी दिखने लगा है। अगर लंबा चलता है तो भारत में खाद की कमी, पैदावार में गिरावट और खाद की कीमतों में तेजी से वृद्धि हो सकती है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य उपभोक्ता और अपनी जरूरत के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। भारत हर साल करीब 4 करोड़ टन यूरिया इस्तेमाल करता है। जिस [संगीत] पर सरकार भारी सब्सिडी देती है। फिलहाल देश के पास करीब 62 लाख टन यूरिया का स्टॉक मौजूद है जो नॉर्मल कंडीशन में बुवाई सीजन के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपूर्ति में दिक्कत लंबे समय तक बनी रहती है तो आने वाले महीनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।

यूरिया बनने के लिए प्राकृतिक गैस सबसे अहम कच्चा माल है और भारत अपनी जरूरत का करीब 85% [संगीत] गैस आयात करता है। जिसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। युद्ध [संगीत] के चलते गैस सप्लाई प्रभावित होने लगी है। जिससे कई फर्टिलाइजर कंपनियों को उत्पादन घटाना पड़ा।

वहीं रिपोर्ट्स के अनुसार फिलहाल फैक्ट्री को उनकी जरूरत की केवल 70% गैस ही मिल पा रही है। जिसका सीधा असर उत्पादन पर दिख रहा है। [संगीत] कुछ फैक्ट्रीज ने मजदूरों को घर वापसी का कह दिया है। जिसकी वजह से बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर लौटते मजदूरों की भारी भीड़ देखी जा रही है। पंजाब और हरियाणा जैसे बड़ी खेती से जुड़े राज्यों में अगर सप्लाई में दिक्कत जारी रही तो खरीफ सीजन के दौरान समस्या बढ़ सकती है। वहीं एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि जहां किसान पहले से ज्यादा खाद का इस्तेमाल करते हैं वहां असर सीमित हो सकता है।

लेकिन जिन इलाकों में खाद का इस्तेमाल कम है, वहां पैदावार पर असर पड़ सकता है। अगर अमेरिका, इजराइल और ईरान में चल रहा तनाव लंबा चलता है तो इसका असर भारत पर भी देखने को मिलेगा। अगर यह लंबा चलता है तो भारत को तेल, गैस और खाद जैसी चीजों को लेकर दिक्कत छीननी पड़ सकती है।

इसके अलावा खाद की कमी या महंगाई का सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता

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