[संगीत] हेलीकॉप्टर में घूमने वाले विजय पथ को आखिरी पलों में नसीब भी नहीं हुआ कार। ड्राइवर से लेकर घर तक पर बेटे का था कब्जा अंबानी के एंटीलिया से ऊंचा बनाया था मकान। लेकिन किराए के घर में ली आखिरी सांस। कौन थे विजयपत सिंघानिया 12,000 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी के मालिक। लेकिन आखिरी समय में खुद के बेटे ने सड़क पर सोने को कर दिया था मजबूर।
कपड़ा बेचने वाले ने घर-घर तक पहुंचा दिया था ब्रांड। शादियों से लेकर सेलिब्रिटी तक की जुबान पर होता था नाम। एक सिग्नेचर से बेटे ने छीन ली थी ₹11,000 की प्रॉपर्टी।
दुनिया को द कंप्लीट मैन बनाने वाले और रेमंड जैसे ग्लोबल साम्राज्य को खड़ा करने वाले विजयपथ सिंघानिया अब इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन जाते-जाते इस दुनिया को बहुत बड़ी सीख दे गए हैं। आप पूछेंगे कैसे? उनकी पूरी लाइफ और उनकी पूरी सक्सेस जर्नी को देखने के बाद आप भी कहेंगे सचमुच समय बड़ा बलवान होता है। 87 साल की उम्र में टेक्सटाइल टकन विजयपत सिंघानिया ने दुनिया को अलविदा कह दिया लेकिन उनकी के साथ ही कॉर्पोरेट जगत का एक ऐसा दर्दनाक अध्याय भी खत्म हुआ जिसे सुनकर किसी भी पिता का कलेजा फट जाए।
।जिस इंसान ने ₹12,000 करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया और मुंबई में सबसे आलीशान इमारतों में से एक जेके हाउस बनाया जो एंटीलिरिया से भी ऊंचा था। उसे अपनी ही जिंदगी के आखिरी पल एक किराए के मकान में काटने पड़े। यह कहानी उसी पिता की है जिसने अपने बेटे पर अंधा भरोसा किया और बदले में उसे सिर्फ जिल्लत और बेरुखी मिली। विजय पथ सिंघानिया ने 1980 में रेमंड की कमान संभाली थी और इसे एक छोटे से मिल से उठाकर दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचा दिया था। उन्होंने सिर्फ कपड़े ही नहीं बेचे। उन्होंने एक ब्रांड बनाया जिसने भारत के टेक्सटाइल उद्योग को नई पहचान दी। रेमंड मतलब भरोसे का दूसरा नाम। उनके नेतृत्व में रेमंड ने सिंथेटिक कपड़ों से लेकर इंजीनियरिंग और रियलस्टेट तक में झंडे गाड़े।
विजयपत सिंघानिया की गिनती कभी देश के टॉप रसों में होती थी और वह मुंबई के मालाबार हिल स्थित 37 मंजिला जेके हाउस में रहते थे। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह जेके हाउस मुकेश अंबानी के एंटीलिया से भी ऊंची बिल्डिंग मानी जाती है। एक जमाने में विजयपथ सिंघानिया की नेटवर्थ 12,000 करोड़ हुआ करती थी। लेकिन साल 2015 में उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उनकी तकदीर पूरी तरह पलट कर रख दी। विजयपत सिंघानिया ने अपने बेटे गौतम सिंघानिया पर भरोसा करके रेमंड लिमिटेड में अपनी पूरी 37% हिस्सेदारी उन्हें ट्रांसफर कर दी। उस वक्त उनके शेयरों की कीमत ₹1000 करोड़ से ज्यादा थी। उन्होंने सोचा था कि बेटा बुढ़ापे का सहारा बनेगा और खानदान की विरासत को आगे बढ़ाएगा। लेकिन उस एक साईं ने उन्हें सड़क पर ला दिया। हिस्सेदारी मिलते ही बाप और बेटे के रिश्तों में ऐसी दरार आई कि गौतम सिंघानिया ने अपने पिता को उसी घर से बाहर निकाल दिया जिसकी एक-एक ईंट विजयपथ ने खुद जोड़ी थी।
सिर्फ घर ही नहीं छीना गया। उनसे कार और ड्राइवर जैसी बुनियादी सुविधाएं तक छीन ली गई। यहां तक कि विजयपत सिंघानिया को अपने नाम के साथ चेयरमैन एमिरेट्स लिखने तक से रोक लगा दी गई थी। एक अरबपति बाप अपनी पत्नी के साथ मालाबार हल्के उस आलीशान महल को छोड़कर किराए के मकान में रहने को मजबूर हो गया। विजय पथ सिंघानिया ने खुद एक इंटरव्यू में कभी अपना दर्द बयां करते हुए कहा था कि उनका बेटा उन्हें सड़क पर देखकर खुश होता है। उन्होंने इसे अपनी जिंदगी की सबसे भयंकर भूल बताई थी और उन्होंने अपना सब कुछ अपने बेटे को सौंप दिया था। सोच कर देखिए उस पता पर गुजरी क्या होगी। जिस इंसान को हवाई जहाज उड़ाने का शौक था और जिसने 67 साल की उम्र में हॉट एयर बैलून में सबसे ऊंची उड़ान भरकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था उसकी जिंदगी की ढलान इतनी दर्दनाक होगी यह किसी ने सोचा नहीं था। मतलब वो एक कार और एक ड्राइवर तक को तरस गए। एक वक्त तो ऐसा आया जब उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई जिसमें वह बहुत लाचार नजर आ रहे थे और वह भी सड़क किनारे पड़े हुए। विजय पथ सिंघानिया ने अपनी दौलत का बड़ा हिस्सा पहले ही गौतम सिंघानिया को दे दिया था। आज उनके बेटे गौतम सिंघानिया की नेटवर्थ ₹1,000 करोड़ से ज्यादा है।
लेकिन विजय पथ के पास उनके आखिरी वक्त में सिर्फ यादें और अधूरापन ही बचा था जो अपनों के धोखे से मिला था। उम्र के आखिरी पड़ाव पर आने के बाद भी पिता को बेटे का सुख नहीं दे पाए गौतम सिंघानिया। विजय पथ सिंघानिया ने रेमंड के लिए फील्स लाइक हेवन का नारा दिया था। लेकिन उनकी खुद की जिंदगी नर्क से बदतर बन गई थी। उनके निधन के साथ ही भारतीय बिजनेस जगत में एक युग का भी अंत हो गया।
वह एक ऐसे विरासत छोड़ गए जो आज हर घर में पहचानी जाती है। लेकिन उनकी कहानी एक चेतावनी बनकर रह गई कि जायदाद और भरोसे के खेल में अक्सर खून के रिश्ते ही सबसे बड़े दुश्मन बन जाते हैं। 29 मार्च 2026 को रेमंड मैन हमेशा के लिए खामोश हो गए और हर परिवार को एक मैसेज देकर भरोसा करने से
