पायलट को बचाकर US ने अपने हीएयरक्राफ्ट को ईरान में क्यों फूंक डाला?

अमेरिकी पायलट को ईरान से सुरक्षित निकालने के साथ ही अमेरिका ने अपना ही एक कीमती मिलिट्री एयरक्राफ्ट धमाके के साथ फोड़ दिया है। जी हां, आपने बिल्कुल ठीक सुना। अमेरिकी सेना ने अपने ही लड़ाकू विमान को नष्ट कर दिया। लेकिन क्यों? आखिर क्यों ईरान में फंसे अपने पायलट को जिंदा बचाने के जस्ट बाद ईरान ने अपने एयरक्राफ्ट को फूंक डाला?

दरअसल के मैदान में कई बार जीत सिर्फ दुश्मन को हराने से नहीं मिलती बल्कि अपने सबसे कीमती चीजों को खुद नष्ट करने का फैसला भी लेना पड़ता है। अमेरिकी सेना का ईरान में मिशन तो पूरी दुनिया ने देखा लेकिन किस तरह अमेरिकी अधिकारी ने पहाड़ों में छिपकर ईरानी टीमों से बचते हुए 7000 फुट ऊंची पहाड़ी चोटी तक चढ़कर अपनी जान बचाई वो भी।

लेकिन जो पहली नजर में चौंकाने वाली बात रही वो यह कि पायलट को बचाने के मिशन के अंजाम देने वाली अमेरिकी फोर्स जिसके बाद ईरान ने अपने विमान को आग के हवाले कर देती है। इसकी कीमत जानेंगे तो आप चौंक जाएंगे। इस विमान की कीमत करीब 9 अरब 27 करोड़ 73400 बताई जा रही है।

जी हां, ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि ऑपरेशन में जो शामिल यह एयरक्राफ्ट है, वह तकनीकी खराबी की वजह से ईरान में फंस चुका था। एयरक्राफ्ट को वापस उड़ाकर अमेरिका ले जाना पॉसिबल नहीं था और उसके दुश्मन जो आर्मी है यानी कि ईरान की सेना के हाथों में पड़ने का खतरा था। सबसे पहले तो ईरान में विमान गिरने के बाद अमेरिकी फोर्स ने ऑपरेशन शुरू किया। अपने एयरमैन को ढूंढ निकाला।

इसके बाद उसे ईरान के अंदर अपने अस्थाई हवाई पट्टियों पर इंतजार कर रहे एमसी 130 जे कमांडो विमानों तक पहुंचाते हैं। लेकिन इसी वक्त अमेरिका के लिए नई मुश्किल आकर खड़ी हो जाती है। यूएस आर्मी के सामने दिक्कत यह हुई कि इनमें से एक या दो विमान खराब हो चुके थे। उनमें उड़ने की हालत में विमान नहीं रहे।

अमेरिकी विमानों में यह परेशानी खराबी रेगिस्तान की नरम जमीन में फंसे होने की वजह से आती है। दूसरी ओर यूनिट के पास ना तो विमानों को वापस ले जाने का कोई तरीका था ना उनको ठीक करने का कोई इंतजाम। डर यह भी था कि ईरानी सेना हमला कर सकती है। ऐसे में अमेरिकी कमांडरों के सामने जब कोई ऑप्शन नहीं बचा तो फिर विमान को आग के हवाले कर दिया गया। यह मुश्किल फैसला लेना पड़ा।

अमेरिकी यूनिट को ईरानी सेना के आने से पहले अपने पायलट को लेकर सुरक्षित निकलना था। उन्होंने विमान को ऐसे ही छोड़ने के बजाय आग लगाने का फैसला लिया। एयरक्राफ्ट को पूरी तरह नष्ट किया गया और यह जरूरी इसलिए था क्योंकि विमान की खुफिया सैन्य तकनीक थी ईरानियों के हाथों में पड़ने का जोखिम था जो कि अमेरिका की सेना नहीं ले सकती थी और किसी भी देश की सेना यह नहीं चाहती कि उसकी खुफिया तकनीक दुश्मन देश के हाथ लगे और इसीलिए ईरान की धरती पर खड़े उस विमान को अमेरिकी सेना ने कर पूरी तरह खत्म कर दिया। अमेरिकी फोर्स ने ईरान में जिस जेट को नष्ट किया है, ऐसे हर विमान की कीमत 100 मिलियन है।

इंडियन रूपीस में बात की जाए तो 9 अरब 27 करोड़ 73 लाख400 का एक विमान है और इसे उड़ा दिया गया है। लेकिन अब यह समझिए कि विमान इतना खास क्यों है? इसमें आधुनिक संचार है, नेविगेशन और विशेष ऑपरेशनल सिस्टम लगे होते हैं। यानी यह विमान विरोधी पक्ष को मिल जाए तो उसको अमेरिकी तकनीक के बारे में काफी कुछ पता चल सकता है। हो सकता है कि ईरान की सेना अपने लिए इसका इस्तेमाल करें।

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला जोखिम वाले ऑपरेशनों में अपनाए जाने वाले आम प्रोटोकॉल को दिखाता है और यह फोर्स की ट्रेनिंग का हिस्सा भी होता है। आपके लिए दुश्मन के हाथ गोपनीय उपकरण लगने से रोकना ज्यादा जरूरी है ना कि विमान के नष्ट होने से होने वाले आर्थिक नुकसान की फिक्र करनी होती है। और यही अमेरिका की सेना ने की। आर्थिक नुकसान की फिक्र बिल्कुल नहीं की। उन्होंने केवल और केवल फिक्र की कि अमेरिका की जो तकनीक है वह दुश्मन सेना के पास ना जाए। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक विमान पर हमले के बाद ईरान में उतरे अमेरिकी अधिकारियों ने पहाड़ों में छिपकर और ईरानी टीमों से बचते हुए 7000 फुट ऊंची पहाड़ी चोटी तक चढ़कर अपनी जान बचाई और इस अभियान में अमेरिकी एजेंसी सीआईए ने ईरानी अधिकारियों को अपने एयरमैन की जगह के बारे में गुमराह भी किया।

कई सारे अभियान चलाए और आखिरकार अमेरिका की सेना को सफलता मिलती है। अपने पायलट को सुरक्षित निकालने में अमेरिकी सेना कामयाब रहती है। लेकिन इसके लिए उसे अपने ही अरबों रुपए के विमानों की कुर्बानी देनी पड़ी। युद्ध के मैदान में कई बार जीत सिर्फ दुश्मन को हराने से नहीं बल्कि अपनी सबसे कीमती चीज को खुद नष्ट करने का फैसला जो है लेना पड़ता है।

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