ईरान से के बीच क्या तैयारी है? क्या अमेरिकी राष्ट्रपति को मौत का डर सता रहा है? क्या दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति को हमले का डर है? जिस ट्रंप ने खुफिया बंकर में हमला कर खमनेई को खत्म कराया। क्या उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए नए बंकर की जरूरत महसूस हो रही है? और क्या इसलिए वाइट हाउस में वह अंडरग्राउंड सेफ हाउस बनवा रहे हैं। जहां का असर नहीं होगा और ड्रोन से हमला नहीं किया जा सकेगा।
ट्रंप ने बाकायदा तस्वीरें जारी कर खुफिया तहकाने का खुलासा किया है और कहा कि हम ऐसा बंकर बनवा रहे हैं जो पूरी तरह से बुलेट प्रूफ और प्रूफ होगा। गोली मारी जाएगी तो कांच में फंस जाएगी। छत से टकरा कर बिखर जाएगा। ट्रंप का जहां बंकर बन रहा है उसे वाइट हाउस का बॉल रूम कहा जाता है। और खबर है कि बॉल रूम के नीचे एक बड़ा मिलिट्री कॉम्प्लेक्स बन रहा है। इसमें ट्रंप खुफिया और सैन्य मीटिंग लेंगे। जरूरी आयोजन भी यहां होंगे। मिलिट्री कॉम्प्लेक्स ऐसे डिजाइन किया जा रहा है कि कोई हमला ना हो सके। यहां या होने पर भी इस बंकर नुमा कॉम्प्लेक्स को कुछ नहीं होगा।
और इसी मिलिट्री कॉम्प्लेक्स के एक हिस्से में ट्रंप के लिए खास बंकर बन रहा है। यह बंकर कब तक पूरी तरह बनकर तैयार होंगे यह जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन खबर यह है कि ट्रंप ने खतरे को देखते हुए इसे जल्दी पूरा करने का आदेश दिया है। अब सुनिए जरा खुद ट्रंप की जुबानी उनके दिल में जो खौफ है उसकी कहानी। बॉल रूम के नीचे एक खास कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है। वाइट हाउस में इसका निर्माण कार्य जारी है और हम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। हम तय समय से आगे चल रहे हैं।
बॉलरूम के नीचे मिलिट्री कॉम्प्लेक्स का एक शेड बनाया गया है। इसमें हाई क्वालिटी का कांच लगा है। सभी खिड़कियां बुलेट प्रूफ है। मुझे लगता है कि कुछ खिड़कियों के बारे में जो बातें कही जा रही हैं, वह नकली है। हमारे पास कोई नकली खिड़की नहीं है। हमारे पास बुलेट प्रूफ खिड़की और ऐसे शेड है जिसमें हमलों का भी असर नहीं होगा। हम उस वक्त में पहुंच गए हैं जहां यह सब करना पड़ रहा है। लेकिन यही सच है। सोचिए दुनिया के सबसे ताकतवर देश का राष्ट्रपति इस हालत में पहुंच गया है कि अपने घर में बंकर बना रहा है। वो भी उसे बताना पड़ रहा है। क्यों? उस हालत में पहुंचने के पीछे वजह यह है क्योंकि ईरान सिर्फ इजराइल पर हमला नहीं कर रहा है।
हर जगह हमला कर रहा है जो अमेरिका से जुड़ा हुआ है। ये अमेरिकी रडार स्टेशन पर ईरानी हमला हुआ है। यूएई में संयुक्त अरब अमीरात में। और यही वजह है ट्रंप की सिक्योरिटी बहुत खास होती है कि आसपास परिंदा भी पर नाना मार पाए लेकिन कई बार उन पर अटैक भी हो चुका है। यह भी सच है। [हौसला बढ़ाने की आवाज़हौसला बढ़ाने की आवाज़] [हौसला बढ़ाने की आवाज़ अमेरिका के राष्ट्रपति बहुत खास और कड़ी सुरक्षा में रहते हैं। चारों तरफ उनके देखेंगे आप तो अलग-अलग तरह के खास सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स हैं। यानी जो सुर माहिर हैं।
कहा जाता है अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में 300 एजेंट तैनात होते हैं जो अलग-अलग स्तर पर राष्ट्रपति के लिए मजबूत सुरक्षा घेरा बनाते हैं। डॉन्ड ट्रंप के आसपास भी अमेरिका के ट्रेंड कमांडो तैनात होते हैं। ट्रंप की सुरक्षा का बड़ा जिम्मा यूएस सीक्रेट सर्विस एजेंसी संभालती है। 1865 में बनी सीक्रेट सर्विस अमेरिका की सबसे अनुभवी एजेंसी है जो करीब 125 साल से अमेरिकी राष्ट्रपतियों की सुरक्षा करती है। इसलिए आधुनिक और ट्रेन जवान 24 घंटे ट्रंप के आसपास रहते हैं। चाहे वह वाइट हाउस हो या कहीं यात्रा पर हो या फिर चुनावी सभाई क्यों ना हो। अब देखिए जरा उन सिक्योरिटी में एक और दस्ता है प्रेसिडेंशियल प्रोटेक्टिव डिवीजन के एजेंट ट्रंप के सबसे करीब होते हैं। यह अत्याधुनिक , बॉडी आर्मर और बॉडी कैमरों से लैस होते हैं। यह जवान आपात स्थितियों के लिए विशेष रेस्क्यू में माहिर होते हैं।
2024 में हुए हमले में यूएस सर्विस एजेंट ने ही ट्रंप को बचाया था और इसके बाद किसी हमले की आशंका हो तो काउंटर असॉल्ट टीम भी होती है ट्रंप की सिक्योरिटी में। तुरंत एक्शन लेने वाले कमांडो राष्ट्रपति को सुरक्षित जगह ले जाते हैं। ट्रंप जहां भी जाते हैं वहां पहले ही K9 [संगीत] यूनिट पहुंच जाती है। स्पेशल l से लैस ये यूनिट बम विस्फोटक का पता करती है। और इसके अलावा ट्रंप के कार्यक्रम के आसपास तैनात किए जाते हैं। ऊंची इमारतों पर और छतों पर टीम से लैस होती है जो संदिग्धों पर नजर रखने के लिए साथ ही टारगेट को ध्वस्त करती है। इसके अलावा ट्रंप किले की तरह सुरक्षित एयरफोर्स वन विमान में हवाई यात्रा करते हैं। इसे सुरक्षा देने के लिए अमेरिकी फाइटर जेट साथ में होते हैं।
इस तरह की सुरक्षा में अमेरिका के राष्ट्रपति होते हैं। यानी दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क का राष्ट्रपति सबसे ताकतवर सुरक्षा घेरे में होता है। सुनिए जरा क्या कुछ कह रहे हैं। ईरान के कमांडर अमेरिकी और जेनेई दुश्मनों को हराकर सबक सिखाएंगे। जिस तरह अमेरिका और इजराइल ने ईरान के लोगों को निशाना बनाया है, बेगुनाहों पर हमले किए हैं। हम दुश्मनों को भी उसी भाषा में जवाब देंगे। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी और इजराइली कमांडर को बखशेंगे नहीं। हम उनके ठिकानों पर बमबारी करेंगे और उन्हें खत्म कर देंगे। इसी तरह अगर अमेरिका से नहीं निकल पाया तो वो ईरान में बड़ा ऑपरेशन करना चाहता है। ईरान में अपनी सेना उतारना चाहता है।
यूएसएस त्रिपोली से की नजदीक तक अमेरिकी सेना पहुंच चुकी है। ट्रंप के तीन टारगेट हैं ईरान में कब्जा करने के। पहला टारगेट कौन सा है? पहली कौन सी जगह जिस पर ट्रंप कब्जा करना चाहते हैं और ये है ईरान का मैप। ईरान के नक्शे में आप देखेंगे। यूएई देख रहे हैं। यूएई के आगे आपको दिखाई दे रहा है हॉर्मूस। उससे पहले देखिए जो ब्लिंक कर रहा है यह है खार्क द्वीप। यहां एक आइलैंड है। ईरान से लगभग 25 कि.मी. दूर ये आइलैंड है। ट्रंप इस आइलैंड पर कब्जा करना चाहते हैं क्योंकि इसी आइलैंड पर ईरान का सारा तेल मौजूद है। ट्रंप यहां करके अपनी सेना उतार के इस आइलैंड को कब्जाना चाहते हैं। देखिए जरा ये है वो आइलैंड। ऐसा दिखता है। समंदर के बीचोंबीच और ईरान से लगभग 25 से 30 कि.मी. दूर यह आपको दिखाई दे रहा है। ऑयल डिपो नजर आ रहे हैं। गैस के पाइप्स नजर आ रहे हैं। यहां लगभग 90% ईरान का ईंधन यही है।
ट्रंप ने कहा वो ईरान का तेल अपने कंट्रोल में लेना चाहते हैं। जंग में पहली बार ट्रंप ने खुलकर ईरान के तेल पर यह बात कही है। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा मेरी पसंदीदा चीज है ईरान का तेल लेना। कुछ अमेरिकी कहते हैं आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? लेकिन वो बेवकूफ हैं। ईरान का तेल कब्जाने के लिए अमेरिका के पास कई विकल्प हैं। हो सकता है हम ईरान से उनका खार्ग द्वीप ले लें। ट्रंप कह रहे हैं ईरान करीब 90% तेल इसी खार्ग द्वीप पर से निर्यात करता है।
खबर है कि यहां अभी करीब 2 करोड़ बैरल तेल स्टोर है। तेल के इस खजाने पर कब्जे के लिए ट्रंप बड़ा ऑपरेशन कर सकते हैं। कुछ इस तरह से। अमेरिकी जेट बमबारी से ईरान के मिसाइल और रडार सिस्टम पहले यहां तबाह करेंगे जो खार्ग में है। ईरान के 150 कि.मी. के हवाई क्षेत्र पर ऐसा दबदबा रखेगा अमेरिका कि वो हमला ना कर सके। यानी फाइटर भेजेगा, अटैक करेगा और 150 कि.मी. के दायरे को कब्जा लेगा और उसी वक्त अमेरिका के मरीन कमांडो खार्क पर जमीनी हमला शुरू कर देंगे। और अमेरिका के एयरबोन डिवीजन के सैनिकों को भी हवाई लैंडिंग कराई जा सकती है। यहां पर अमेरिका ने हाल में एयरबोन के 3000 जवानों को उतारने का फैसला किया है। अमेरिका के खास जवान 18 घंटे में दुनिया में कहीं भी तैनात हो सकते हैं। पैराशूट विमान से छलांग लगाने में माहिर हैं। यह जवान जमीनी हमले में भी माहिर होते हैं। लेकिन खार्ग आइलैंड पर कब्जा करना ट्रंप की सेना के लिए खतरनाक हो सकता है। खार्क के पास ईरान ने भारी सैन्य तैनाती पहले से कर रखी है। खबर है कि बड़ा मिसाइल भंडार भी यहां पर है।
दावा है कि ईरान ने यहां चारों तरफ खुफिया माइंस भी बिछाई हुई है। आईआरजीसी के सैनिकों की तैनाती और यहां एयर डिफेंस भी बढ़ा दिया गया है। यानी ईरान अमेरिकी सैनिक और उनकी कोशिश को नुकसान पहुंचा सकता है। 13 मार्च को अमेरिका ने खार्क पर हमला किया था लेकिन बड़ा नुकसान नहीं कर पाया था। तो यहां अगर अमेरिका अपनी सेना भेजेगा तो नुकसान उठाना पड़ सकता है। सुनिए जरा ट्रंप क्या कह रहे हैं। मुझे ईरान में एक डील होती दिख रही है। हां, यह जल्द ही हो सकती है। हम ईरान के साथ तय समय से आगे हैं। हम तय समय से कई हफ्ते आगे हैं और हमारे पास एक ग्रुप है। यह सच में ईरान में एक नई सरकार है। यह लोगों का एक नया ग्रुप है।
ऐसे लोग जिनसे हमने पहले कभी डील नहीं किया है, जो बहुत समझदारी से काम कर रहे हैं। हमने आज कई टारगेट तबाह किए और हम उनसे सीधे और अपरोक्ष रूप से बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने हमें हॉर्मोन स्टेट से तेल की 20 बड़ी नाव भेजी और यह कल सुबह से अगले कुछ दिनों तक चलेगा। अब ट्रंप के पहले टारगेट के बाद ईरान में ट्रंप का दूसरा टारगेट है जिस पर कब्जा करना चाहते हैं ट्रंप। वो दूसरा टारगेट कौन सा है?
इससे पहले अमेरिका के ने उनके साइट्स पर अटैक किया था। यह अमेरिकी अटैक के की तस्वीरें हैं। जून 25 की तस्वीरें हैं। ईरानी ठिकानों पर यह हमले हुए थे और ठिकाने तबाह किए गए थे। ये ठिकाने थे नताज और इसहान।
आपको बताऊं इन ठिकानों पर कब्जा क्यों करना चाहते हैं? यहां से निकाल कर ले जाना चाहते हैं ट्रंप। ये आप देख रहे हैं। ये इसान है और यह नताज है। इन दो जगह पर अमेरिकी सेना उतरेगी और यहां से यूरेनियम निकाल कर ले जाएगी। ईरान के इन दो शहरों में बड़े केंद्र मौजूद हैं। और इस वाहान में एक अंडरग्राउंड सुरंग है ।
इस वाहान में। नताज में ईरान का एक प्लांट है। साथ ही आईएईए इंटरनेशनल एजेंसी के मुताबिक इसी दो जगहों पर यूरेनियम हो सकता है ईरान का। अमेरिका ने हमले में यहां भारी नुकसान पहुंचाया था। ईरान को यूरेनियम को 40 से 50 खास सिलेंडरों में यहां रखा गया है। खास तरह के सिलेंडर होते हैं। वो मैं अभी आपको दिखाऊंगा। यूरेनियम के लिए ही ईरान इतनी लंबी लड़ रहा है अब तक अमेरिका से। अमेरिका भी इसी के लिए इतना नुकसान करा चुका है अपना अब तक। अब देखिए जरा वो l कहां है? अमेरिका वहां ऑपरेशन कैसे करेगा? अपनी फोर्स कैसे भेजेगा?
ये बताता हूं। यह जो आप सिलेंडर देख रहे हैं, ऐसे ही सिलेंडर में भरा जाता है। उसके बाद इसे तेजी से घुमाया जाता है। जितनी तेजी से घूमेगा, इसके अंदर जो यूरेनियम भरा है, वो शुद्ध होता जाएगा। यही है यूरेनियम। यहीं पहुंचना चाहते हैं ट्रंप और यूरेनियम उठाना चाहते हैं। लेकिन कैसे? जंग के बीच ईरान से निकालना बड़ी चुनौती है। राष्ट्रपति ट्रंप इस मोर्चे पर काम कर रहे हैं। ईरान के पास 450 किलो यूरेनियम का अनुमान है। इससे ईरान 10 से 11 परमाणु हथियार बना सकता है। अमेरिका इस यूरेनियम पर कब्जा करने की कोशिश में है। इसके लिए ट्रंप सैन्य ऑपरेशन पर विचार कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 10,000 जवान तैनात किए जा रहे हैं।
इसका मकसद है किसी खास इलाके पर कब्जा करना। इसके तहत अमेरिकी सैनिक सीधे ईरान में दाखिल होंगे। उन्हें यूरेनियम को सुरक्षित रखना है और फिर फौरन बाहर निकलना है। यह पूरी प्रक्रिया बेहद जोखिम भरी होगी ट्रंप की सेना के लिए। इस ऑपरेशन में सैनिकों की सुरक्षा और खतरे पर भी ध्यान रखना जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक ट्रंप ने सैनिक विकल्प पर फाइनल फैसला भी नहीं लिया है। एक्सपर्ट के मुताबिक पहले इस इलाके पर हवाई हमले किए जाएंगे ताकि ईरान की सेना को व्यस्त रखा जा सके।
इसके बाद थल सेना की हवाई लैंडिंग कराई जाएगी और इनका सामना न्यूक्लियर फैसिलिटी में तैनात ईरानी सैनिकों से होगा। इसके बाद अमेरिकी सैनिक साइट पर कब्जा करेंगे और एक स्पेशल यूनिट को मौके पर बुलाया जाएगा। इन्हें न्यूक्लियर हथियारों को निष्क्रिय करने की ट्रेनिंग मिली हुई है क्योंकि रेडिएशन लीक के खतरे से भी बचना जरूरी है। इस मिशन में कई दिन या शायद हफ्ता भी लग सकता है। तो ये सारी चीजें ट्रंप के प्लान के हिसाब से है।
सुनिए जी डी बक्शी क्या कह रहे हैं। हम स्पेशल फोर्सेस डेल्टा फोर्स और सील्स और ये सब डाल के जो 450 किलो एनरिच यूरेनियम है उसको पकड़ के निकाल के ले आएंगे। मजाक है। सक्सेस ऑफ सच एन ऑपरेशन जीरो। आप बड़े सारे अच्छे मरीनंस मरा देंगे। आप चाहे मेवन एआई लगाइए, यह लगाइए, वो लगाइए, आपका नुकसान अच्छा खासा होगा। अच्छा खासा होगा और ऑपरेशन की सफलता के चांस तकरीबन यहां पे तो जीरो हैं और बाकी जगह 90% फेलियर के चांस। ऐसे में कोई अपनी बेशकीमती मिलिट्री जाने चवन्नी में नहीं डालता। लेकिन डॉन्ड ट्रंप साहब गैंबल करने को तैयार हैं। दो टारगेट मैंने आपको ट्रंप के बता दिए। जीडी बक्शी कह रहे हैं हलवा है क्या सेना भेजकर कुछ करना।
लेकिन तीसरा टारगेट भी ईरान में है ट्रंप का। तीसरा टारगेट है ये आप देख रहे हैं। स्टेट ऑफ होमूस के पास है केशम आइलैंड। यही जगह है जहां से ईंधन के जहाज नहीं गुजर पा रहे हैं। यही ईरानी सेना जो भी जहाज गुजरता है उसे फोड़ देती है। केशम आइलैंड यहां नजदीक है। अमेरिका चाहता है अगर इस केशम आइलैंड पर मैंने कब्जा कर लिया तो यहां से जहाज सुरक्षित तरीके से निकल पाएंगे क्योंकि इससे पहले अमेरिका के कई जहाज और इजराइल के कुछ जहाज दावा किया गया। यहां से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। कई जहाजों पर ईरान ने कर दिया और उसके बाद देखिए इस जगह से जो जहाज गुजर रहे थे उनका यह हाल और हश्र हो गया। इसमें अमेरिकी जहाज होने का भी दावे किए गए। अब देखिए जरा हॉर्मूस समंदर है और समंदर के पास ही एक आइलैंड है जिसका नाम है केशम आइलैंड।
समझिए इस वक्त हम केश केशम आइलैंड पर खड़े हैं और यहीं से जहाज गुजरते हैं। ट्रंप हॉररमूस स्ट्रेट पर कंट्रोल की तैयारी में इसलिए क्योंकि हॉररमूस करीब 167 कि.मी. लंबा समुद्री मार्ग है और इसका सबसे संकुरा इलाका सिर्फ 35 कि.मी. चौड़ा है। इसी हॉर्मूस स्ट्रेट मोड़ पर है ईरान का केशम आइलैंड जो समंदर में फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप माना जाता है। केशम आइलैंड का एरिया लगभग 1445 वर्ग कि.मी. का है।
जानकारी के मुताबिक यहां 148,000 लोग भी रहते हैं। केशम आइलैंड ईरान के लिए सबसे रणनीतिक केंद्रों में से एक है। क्योंकि यहां ईरान की सेना ने अंडरग्राउंड सुरंगे बनाई हुई हैं। यहां एंटीशिप मिसाइलें, माइंस, ड्रोन और जेट्स रखे जाते हैं। ऐसे में अमेरिका यहां फोर्स उतार कर ऑपरेशन की तैयारी में कर कर रहा है। अगर इस आइलैंड पर अमेरिका की फोर्स आ गई तो यहां से जहाज गुजर पाएंगे। ऑपरेशन शुरू हुआ तो प्लान के शुरुआती कदम के तहत ट्रंप की सेना हॉर्मूस स्ट्रेट के आसपास के आइलैंड पर कब्जा करेगी। फिर समंदर में बिछाई गई माइंस को हटाया जाएगा। इसके बाद अमेरिकी वॉरशिप और फाइटर जेट मिलकर हॉर्मूस से निकलते जहाजों को एस्कॉट करते हुए सुरक्षा देते हुए जाएंगे ताकि ईरान के हमलों को रोक कर जहाजों को निकाला जा सके।
हालांकि अमेरिकी सेना को इस काम में कई हफ्ते लग सकते हैं। सुनिए जरा डिफेंस एक्सपर्ट टीपी त्यागी क्या कह रहे हैं? क्या यह सब अमेरिका के लिए ट्रंप के लिए कर पाना आसान है? किसी भी ग्राउंड ऑपरेशन को करने के लिए सबसे पहले तो उस ग्राउंड को एयर करके या आर्टिलरी शेइलिंग करके सॉफ्ट किया जाता है। फिर उसके बाद उसमें एयर बोर्न पैराट्रोपल्स उतारे जाते हैं। हो सकता है कि वो फैब्रिकेटेड बंकर्स के अंदर उतारे जाए और फिर उसके बाद एफीबियस ऑपरेशंस किए जाते हैं। लेकिन ईरान ने परर्शियन गल्फ में सभी आइलैंड खान आइलैंड से लेके और केशव आइलैंड तक उसके नीचे टनल्स बनाई हुई है जिसमें उनके एंटीशिप हैं, हैं और बोट्स हैं।
ग्राउंड ऑपरेशंस करना इस स्थिति में मैं समझता हूं दीवार में से टकराने जैसा होगा। लेकिन इसे ही तो डिसेप्शन और सरप्राइज कह सकते हैं। हो सकता है कि बताया जा रहा हो ग्राउंड ऑपरेशन और प्लान कोई दूसरी हो और इसमें डॉनल्ड ट्रंप तो माहिर
