क्या अमेरिका के बिना नेटो सिर्फ एक कागजी शेर है? दुनिया के सबसे ताकतवर सैन्य गठबंधन में इस वक्त दरारें साफ नजर आने लगी हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ही सहयोगियों को सरेआम कायर कह दिया है। ट्रंप की यह नाराजगी कोई छोटी बात नहीं है।
इसके पीछे है ईरान का वो कदम जिसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। ईरान के साथ चल रहे युद्ध को 21 दिन हो चुके हैं और होरमूस जल डमरू मध्य यानी स्ट्रेट ऑफ होरमूस इस वक्त व्यावहारिक तौर पर बंद जैसी स्थिति में पहुंच चुका है।
दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग ठप पड़ने से हाहाकार मचा है। इसी बीच डोनल्ड ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर एक ऐसा पोस्ट किया जिसने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी। ट्रंप ने अमेरिका के सैन्य सहयोगियों को सीधा कायर कहा और लिखा कायरों हम इसे याद रखेंगे।
ट्रंप इस बात से भड़के हुए हैं कि सहयोगी देश तेल की बढ़ती कीमतों का रोना तो रो रहे हैं लेकिन स्ट्रेट ऑफ होमस को खुलवाने में अमेरिका की कोई मदद नहीं कर रहे।
ट्रंप ने साफ कहा नेटो की हमने इतनी मदद की लेकिन जब हमें जरूरत है तो कोई साथ नहीं आ रहा। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर अमेरिका साथ ना हो तो नेटो सिर्फ एक कागजीशेर है। यानी दिखने में ताकतवर लेकिन असल में कमजोर। ट्रंप का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना सिर्फ अमेरिका का नहीं बल्कि इन सभी देशों की भी जिम्मेदारी है।
यह मामला सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर हर ओर पड़ रहा है। युद्ध शुरू होने से पहले जो ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब $0 प्रति बैरल था वह अब उछलकर $18 प्रति बैरल तक पहुंच गया है। और इसका सबसे ज्यादा असर एशिया पर पड़ रहा है। क्योंकि होरमज से निकलने वाला ज्यादातर तेल और गैस यहीं आता है। तेल ही नहीं कंप्यूटर चिप्स बनाने में इस्तेमाल होने वाली हीलियम गैस और फर्टिलाइजर में काम आने वाले सल्फर की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। अगर यह रास्ता जल्दी नहीं खुला तो पूरी दुनिया में महंगाई का बड़ा झटका देखने को मिल सकता है।
खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण है। ईरान की तरफ से लगातार हमले हो रहे हैं और अब तक 10 ऑयल टैंकर समेत कम से कम 23 कमर्शियल जहाजों पर हमले या घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अब इस पूरे विवाद के बीच यूरोप और जापान का रुख बदलता नजर आ रहा है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स और जापान जैसे देशों ने एक साझा बयान जारी किया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की स्टारमर के कार्यालय से जारी इस बयान में ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की गई है।
इन देशों ने कहा है कि वह होरमूस, जलडमरू मध्य में सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाएंगे। साथ ही ईरान से साफ तौर पर कहा गया है कि वो ड्रोन और मिसाइल हमले रोके, माइंस बिछाना बंद करें और कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना तुरंत बंद करें। अब देखना यह होगा कि क्या यह देश सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहेंगे या अमेरिका के साथ मिलकर ईरान को रोकने के लिए कोई ठोस कदम भी उठाएंगे। क्योंकि ट्रंप ने तो साफ कह दिया है कि अमेरिका अब अकेला बोझ नहीं उठाएगा। और अगर नेटो में ही दरारें गहराने लगे तो यह सिर्फ एक बयान नहीं बल्कि आने वाले ग्लोबल पावर शिफ्ट का संकेत भी हो सकता है।
