ट्रंप की एक गलती पड़ी भारी !32 सेनाओं ने चारों तरफ से घेरा !

100 बात की एक बात यह कि जो विशेषज्ञ अब ईरान की मोजेक रणनीति की बात कर रहे हैं वो रणनीति आखिर है क्या? मोजेक रणनीति? क्या ईरान ने अमेरिका को अपने मोजेक के मकड़ जाल में फंसा लिया है? सबके मन में युद्ध को लेकर जो सबसे बड़ा सवाल तो है वो यही कि ईरान कब तक लड़ता रह सकता है? और पहले ही दिन जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान की टॉप लीडरशिप को खत्म कर दिया था तो ईरान लड़ कैसे रहा है?

पहले ही दिन जब सुप्रीम लीडर को ही मार दिया गया था ईरान के तो ईरान में कमान किसी ने इतनी जल्दी कैसे संभाल ली और अगर आईआरजीसी की सेना सीधा सुप्रीम लीडर की कमांड पर चलती है तो आयतुल्लाह खानई के मारे जाने के बाद सेना कैसे लड़ती रही तो उसका जवाब यह है कि ईरान इसके लिए पहले से ही तैयार था। विशेषज्ञ बता रहे हैं ईरान इस तरह की के लिए आज से नहीं बरसों पहले से तैयारी करके बैठा था और उसने इसके लिए यह मोजेक रणनीति बना रखी थी जो अब अमेरिका को छकाएगी और थकाएगी तो क्या है यह मोजेक रणनीति और क्या अमेरिका इसके लिए तैयार नहीं था तो बताया जा रहा है कि 2003 में जब अमेरिका ने ईरान के पड़ोसी इराक पर हमला किया था और सद्दाम हुसैन को पकड़ लिया था तो दुनिया ने देखा कि एकदम से इराक की सारी व्यवस्था ही चरमरा गई थी।

सद्दाम हुसैन ने पूरा कमांड स्ट्रक्चर बनाया हुआ था। पूरी सरकार उनके कब्जे में थी। पूरा प्रशासन उनके कब्जे में था। लेकिन अमेरिकी सेना आई सद्दाम को पकड़ कर सब एक झटके में उखाड़ फेंका। दुनिया ने देखा। ईरान ने भी देखा। ईरान को उसी वक्त समझ में आ गया था कि अगर अमेरिका ने उसके यहां भी हमला करने की सोची तो उसका भी यही हाल हो सकता है और शायद अमेरिका ने इस बार सोचा भी यही था। इजराइल ने पूरे कॉन्फिडेंस से बताया कि उन्होंने कई साल से खामन की जासूसी कर रखी है। खामनाई एक जगह मीटिंग करने वाले वाले हैं।

तो अमेरिका ने उसके साथ मिलकर हमला कर दिया। शायद यह आकलन था कि खामई को मार गिराने के बाद पूरा सिस्टम ढह जाएगा और आयतुल्लाह शासन का खेल खत्म हो जाएगा। लेकिन अब तो उसको काफी दिन हो गए। खेल तो खत्म हुआ नहीं बल्कि वहां के विशेषज्ञ तो कह रहे हैं कि खेल तो अब शुरू हुआ है। ट्रंप कह रहे हैं कि बस कुछ टाइम में युद्ध खत्म होने वाला है। जबकि ईरान सीना ठोक कर कह रहा है कि युद्ध शुद्ध शुरू भले ही अमेरिका ने किया हो लेकिन खत्म तभी होगा जब ईरान चाहेगा।

तो एक्सपर्ट बता रहे हैं ईरान ने सद्दाम हुसैन के इराक में जो 23 साल पहले अमेरिका ने किया था उससे सबक लेकर अपना पूरा कमांड स्ट्रक्चर ही चेंज कर दिया था। ईरान ने तभी अंदाजा लगा लिया था कि अगर उसकी सेना भी सद्दाम की तरह एक सेंट्रल कमांड के अंडर रहेगी तो अमेरिका उसे आसानी से खत्म कर सकता है। तो ईरान की आईआरजीसी सेना के एक कमांडर थे मोहम्मद जाफरी। कहते हैं 2005 में उन्होंने ही सेना का ढांचा ही पूरी तरह बदल लेने की रणनीति शुरू कर दी थी। इसी खतरे को देखते हुए दुनिया भर में किसी देश की सेना एक सेंट्रल कमांड से चलती है। हर देश की सेना टॉप पर एक सुप्रीम कमांडर होता है या सेना अध्यक्ष होता है। उसकी कमान होती है। वहीं से आर्डर जारी होते हैं और टॉप के जनरल सेना की रणनीति बनाते हैं। लेकिन अगर सारे टॉप के जनरल ही मार दिए जाएं। एक झटके में या सुप्रीम कमांडर ही मार दिया जाए तो सेना एक तरह से खत्म ही हो जाती है। जैसे शतरंज में भी यही होता है ना कि राजा खत्म तो शय और मात हो जाती है। यही अमेरिका की रणनीति रहती है कि टॉप के आदमी को खत्म कर दो और शय और मात। तो मोहम्मद जाफरी ने बोला कि कमांड स्ट्रक्चर ही बदल दो। मोजेक कमांड स्ट्रक्चर बना दो। मोजेक आपने शब्द सुना हो शायद। मोजेक पेंटिंग होती है।

छोटे-छोटे टुकड़ों को जोड़कर एक बड़ा सा चित्र बना दिया जाता है। बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों पर आपने देखा हो शायद छोटी-छोटी टाइलें होती हैं। उनको जोड़कर कोई कलाकृति बनाई जाती है या छोटे-छोटे फोटो जोड़कर एक बड़ी तस्वीर बना दी जाती है। उसको कहते हैं मोजेक। तो मोहम्मद जाफरी ने बोला कि आईआरजीसी की सेना भले ही एक हो लेकिन कमांड एक क्यों हो मतलब छोटी-छोटी टुकड़ियां अपने आप में अलग सेनाएं हो और सब जोड़कर एक सेना बन जाए। तो उन्होंने क्या किया कि आईआरजीसी सेना को मोजेक कमांड स्ट्रक्चर बना दिया। मतलब ईरान में 31 प्रांत हैं। 31 हर प्रांत में सेना की एक अलग कमांड बना दी। हर प्रांत में राजधानी तेहरान वो भी एक प्रांत है तेहरान। उसमें एक और रख दी। मतलब उसमें दो कर दी। यानी सेना की एक कमांड टोटल 32 कमांड हो गई।

31 प्रांत में 32 कमांड तेहरान में दो। यानी एक तरह से एक सेना की 32 सेनाएं बना दी। अमेरिका एक सेना से नहीं लड़ रहा है। यह 32 सेनाओं से लड़ रहा है। क्योंकि हर कमांड एक अलग यूनिट की तरह काम करती है। एक अलग सेना की तरह काम करती है। हर प्रांत की सेना के अपने कमांडर हैं। हर कमांड के अपने अलग हथियार हैं। हर कमांड की अपनी अलग इंटेलिजेंस है। हर कमांड के अपने अलग अधिकारी हैं। अपनी अलग चेन ऑफ कमांड है। यानी ये 32 की 32 एक तरह से अलग सेनाएं हैं। 30 दूसरे प्रांतों में तेहरान में दो। क्योंकि तेहरान भी एक प्रांत है लेकिन उसमें दो कमांड बना दी राजधानी है 32 अलग-अलग सेनाएं ही हो गई एक तरह से मतलब ऐसे समझ लो कि मोजेक स्ट्रक्चर का एक तरह से यह मतलब हुआ कि जैसे कि भारत की एक सेना में दिल्ली की अलग सेना हो जाए उत्तर प्रदेश की अलग सेना हो जाए राजस्थान की अलग सेना हो गई बिहार की अलग सेना हो गई सब प्रदेशों की अलग-अलग सेना हो गई और हो तो सब अपने हिसाब से अलग-अलग लड़ रही हो दुश्मन से कोई एक सेंट्रल कमांड ना हो तो एक यूनिट को अगर हरा भी दो खत्म भी कर तब भी दूसरी लड़ती रहे क्योंकि उसका कमांडर अलग है। उसके हथियार अलग हैं। वह कमांडर उसको लड़वाता रहेगा। दूसरी यूनिट को खत्म कर दो। तीसरी लड़ेगी। चौथी, पांचवी, छठी बाकी सब सेनाएं लड़ती जा रही हैं। उनके कमांडर लगे हुए हैं। यानी जब तक सारी कमांड एक-एक करके नहीं खत्म कर दो, तब तक सेना लड़ती रहेगी।

तो सेना की 32 कमांड है। तेहरान पर हमला करके उसके टॉप जनरल मार भी दिए। तो उसके लिए तैयार बैठे थे। बाकी कमांड तो लड़ लड़ती जाएंगी और कमांडर मार देने पर या सुप्रीम लीडर मार देने पर भी उन्होंने उत्तराधिकारी पहले से ही तय कर रखा है। अगर टॉप लीडर मर जाए तो हर यूनिट में पहले से उत्तराधिकारी तय है। हर यूनिट में एक उत्तराधिकारी तय नहीं है। हर कमांडर के तीन लेवल तक उत्तराधिकारी तय है। यानी कमांडर मारा गया तो नंबर दो कमांडर बन जाएगा। नंबर दो भी मारा गया तो नंबर तीन तय हो जाएगा। नंबर वो भी मारा गया तो चौथा नंबर हो जाएगा।

चार तक नंबर चार तक कमांडर बन जाएगा। तय है एक मारा गया तो दूसरा बन जाएगा और दूसरा बनते ही अपने नीचे तीन और बना लेगा तो हर बार चार रहेंगे और अपनी यूनिट को वो चलाते रहेंगे। लड़ता रहेगा

हर प्रांत की कमांड जंग में अपने फैसले लेने के लिए आजाद है। उसको सेंट्रल कमांड से आर्डर आने का इंतजार नहीं करना है। 32 की 32 कमांड अपने हिसाब से मिसाइलें ल्च कर रही हैं। सबके पास अपना अलग भंडार है। सब अपने हिसाब से हमले कर सकती हैं। यानी ये जो हमले हो रहे हैं या हमले हो रहे हैं ईरान के इस पूरे इलाके में वो 32 अलग-अलग कमांड के अलग-अलग आदेश पर हो रहे हैं। ये अलग-अलग सेनाएं कर रही हैं। किसी एक यूनिट के कमांडर को या उसके सारे अधिकारियों को मार देने से भी यह नहीं रुकने वाले। जैसे अगर भारत में ऐसा हो तो दुश्मन दिल्ली की सेना को भी हराए, फिर यूपी को भी हराए, फिर तमिलनाडु की सेना भी से भी भिड़ जाए, असम की सेना का आ जाए। ऐसे लड़ रही है आईआरजीसी की सेना। मोजेक स्ट्रक्चर बना रखा है। एक चेन नहीं है कमांड की।

एक एक चेन ऑफ कमांड नहीं है। कई पैरेलल चेन ऑफ कमांड चल रही हैं। यह सिस्टम खासतौर पर अपने से मजबूत दुश्मन से लड़ने के लिए बनाया गया है। जैसे छापामार युद्ध होता है। ये सेना ऐसे लड़ रही है। क्योंकि ईरान को पता था अमेरिका जैसी सेना से लड़ने के लिए उसको काफी टाइम तक उलझा कर रखना होगा। तभी मुकाबला किया जा सकता है। ईरान देख चुका था कि अमेरिका वियतनाम में लंबा नहीं लड़ पाया। अफगानिस्तान में लंबा नहीं लड़ पाया। जहां भी अमेरिका शुरुआती स्ट्राइक के बाद जीत का झंडा जल्दी से नहीं फहरा पाया, वहां वो फंस गया युद्ध में और फिर निकलने के चक्कर में रहता है। तो ईरान ने इसी की तैयारी कर रखी थी।

मतलब ईरान की सेना की यह रणनीति ही थी कि मजबूत दुश्मन से सीधे उस अंदाज में नहीं लड़ना जिसका दुश्मन को अंदाजा हो। बल्कि लंबे समय तक टिक कर उसकी सेना को थका देना है, छका देना है। और सिर्फ यह 32 कमांडी नहीं है। सिर्फ यह 32 नहीं है। एक है आईआरजीसी की कुज़ फोर्स जिसने दूसरे देशों में लड़ा के खड़े किए हुए हैं। जैसे लेबनान में हिजबुल्ला वो भी एक अलग मोर्चे पर इजराइल को उलझाए हुए हैं। ताकि इजराइल की ताकत वहां भी खर्च होती रहे। अभी तो वैसे यमन में हुथ लड़ाके भी हैं। वह भी आईआरजीसी ने ही खड़े किए हुए हैं। लाल सागर में वह भी हमले करके वहां युद्ध को लंबा खींच सकते हैं। यानी पूरा खेल युद्ध को लंबा और लंबा खींचने का है। एक कमांडर मार दो तो अगले तीन तक तैयार खड़े हैं। लहर पर लहर वार करते रहो। छोटे-छोटे मारते रहो। मारते रहो। अमेरिका की सेना ही नहीं उसके दूसरे देशों में सैन्य ठिकानों पर ही नहीं। दूसरे देशों में उसकी जो कंपनियां हैं उनको भी निशाने पर लेते रहो। और वो भी कर रहे हैं। भले ही को आसमान में ही गिरा मार गिरा दे अमेरिका। भले ही अमेरिका ड्रोन को हवा में ही मार गिरा दे लेकिन मलबा भी नीचे गिरेगा तो दुबई जैसी जगहों में दोहा जैसी जगहों में दहशत तो फैलेगी। पैनिकिक तो फैलेगा और छापा मार रणनीति से खींचता चला जाएगा। यानी यह मोजेक स्ट्रक्चर जो है सेना का उससे सेना एक बड़ी फोर्स भी है।

लेकिन इसके कई टुकड़े भी हैं। एक भी है और कई भी हैं। और हर टुकड़ा हर हिस्सा खुद एक अलग सेना बनकर लड़ सकता है। अगर सेंट्रल कमांड नष्ट भी हो जाए तब भी हर प्रांत की यूनिट अपनी से अपने से लड़ती रहेगी और यह मोजेक स्ट्रक्चर ईरान को लंबी में टिकने की ताकत देता है। क्योंकि दुश्मन को एक-एक करके हर यूनिट को हराना हराना पड़ेगा। एक सेना नहीं 32 सेनाएं लड़ रही हो जैसे। यह सब सालों की प्लानिंग से बना है। जब तक आखिरी यूनिट खड़ी है तब तक जंग जारी रह सकती है। यह मोजेक सेना की लड़ाई है। इतने बाजू, इतने सर, गिन ले दुश्मन ध्यान से। सौभाग की एक

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