एक तरफ ईरान के साथ की आहट और दूसरी तरफ अपने ही अतीत के काले पन्नों में घिरते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। जब पूरी दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट के रणक्षेत्र पर टिकी हैं तभी अमेरिका के भीतर एक ऐसा बम फटा है जिसने ट्रंप की कुर्सी और साख दोनों को हिला कर रख दिया है। जेफरी की फाइलों से निकला एक नया और खुलासा ट्रंप के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है।
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने एफबीआई को जो दस्तावेज पब्लिश किए हैं, उनमें एक महिला का दिल दहला देने वाला इंटरव्यू है। यह मामला तब का है जब वह महिला महज 15 साल की थी। महिला का आरोप है कि कुख्यात जेफरी एपस्टीन ने उन्हें ट्रंप से मिलवाया था।
जिसके बाद ट्रंप ने उसका यौन उत्पीड़न किया। इस फाइल में 2019 में महिला की एफबीआई से की गई बातचीत का जिक्र है। इसमें उसने आरोप लगाया कि जब वह 15 साल की थी तब एप्सन और ट्रंप दोनों ने उसका शोषण किया। इंटरव्यू में महिला कहती है कि एप्सन उसे या तो न्यूयॉर्क या फिर न्यू जर्सी लेकर गया था। जहां पर उसने ट्रंप से उसकी मुलाकात करवाई। ट्रंप उस पर ओरल सेक्स करने को मजबूर कर रहे थे। तब उसने ट्रंप के प्राइवेट पार्ट पर काट लिया था। इससे भड़के ट्रंप ने उसको खूब मारा था। यह फाइलें तब सामने आई हैं जब इस बात की जांच की जा रही है कि क्या डिपार्टमेंट ने जानबूझकर ट्रंप के खिलाफ इन आरोपों वाली फाइल को रोक रखा था।
सीएनएन के अनुसार महिला ने इंटरव्यू में कहा कि वहां और भी लोग थे लेकिन उसे याद नहीं कौन थे। इंटरव्यू नोट्स के मुताबिक ट्रंप ने उनसे कमरे से बाहर जाने को कहा। फिर कहा मैं तुम्हें सिखाता हूं कि छोटी लड़कियों को कैसे होना चाहिए। इंटरव्यू को याद करते हुए उसने कहा कि ट्रंप ने फिर अपनी पैंट की ज़िप खोली और उसका सिर अपने प्राइवेट पार्ट के पास रख दिया। उसने कहा कि उसने उसे बुरी तरह काटा इस पर ट्रंप भड़क गए और उसके बाल खींचे और सिर की साइड में मुक्का मारा। हैरानी की बात यह है कि फाइलें पहले क्यों नहीं सामने आई?
जस्टिस डिपार्टमेंट का कहना है कि पिछली बार इन दस्तावेजों को डुप्लीकेटिव यानी दोहराव मानकर गलती से छोड़ दिया गया था। लेकिन अब यह डॉक्यूमेंट्स ऐसे समय पर जारी हुए हैं जब इस बात की जांच चल रही है। क्या सरकार ने जानबूझकर ट्रंप को बचाने के लिए इन आरोपों को छिपाए रखा था? ट्रंप के कई आलोचक और राजनीतिक विश्लेषक अब एक गंभीर थ्योरी पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि ईरान के खिलाफ युद्ध का मोर्चा खोलना दरअसल ट्रंप की एक सोची समझी चाल हो सकती है। ट्रंप के आलोचकों द्वारा दावा किया जा रहा है कि ट्रंप ने जानबूझकर ईरान के साथ तनाव इतना बढ़ा दिया ताकि दुनिया और अमेरिकी जनता का ध्यान एपस्टीन फाइल के इन काले कारनामों से हटकर देशभक्ति और पर चला जाए। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा की तरह इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोनियन लेविड ने इसे एक आपराधिक पृष्ठभूमि वाली महिला का बेबुनियाद आरोप बताया। ट्रंप की टीम का कहना है कि यह उनकी छवि खराब करने की एक राजनीतिक साजिश है और इसके पीछे कोई ठोस सबूत नहीं है। जानकारों का मानना है कि ट्रंप अब बुरी तरीके से फंसते हुए नजर आ रहे हैं।
एक तरफ युद्ध की चुनौतियां और दूसरी तरफ यह शर्मनाक खुलासे। आशंका जताई जा रही है कि अपनी साख बचाने के लिए आने वाले दिनों में ट्रंप कोई और बड़ा कारनामा कर सकते हैं या युद्ध को और भी घातक मोड़ दे सकते हैं। [संगीत] मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच ही ईरान के एक युद्धपोत पर हमले और उसके बाद आई प्रतिक्रिया ने इस संघर्ष को और जटिल बना दिया है। इस पूरे घटनाक्रम में एक छोटा सा देश अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया है। जिसने मुश्किल वक्त में ईरान की मदद करके अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया संदेश दे दिया है। घटना उस समय हुई जब ईरान का आधुनिक देना हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में गश्त कर रहा था।
इसी दौरान अमेरिकी सेना की कारवाही में जहाज को गंभीर नुकसान पहुंचा और वह डूबने लगा। यह हमला श्रीलंका के तट से लगभग नौ समुद्री मील दूर हुआ जिससे आसपास के समुद्री क्षेत्र में हड़कंप मच गया। जहाज पर मौजूद कई ईरानी सैनिकों की जान खतरे में पड़ गई और स्थिति बेहद गंभीर हो गई। ऐसे नाजुक समय में ईरान को अप्रत्यक्षित मदद मिली भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका से। श्रीलंका तटरक्षक और नौसेना की रेस्क्यू टीम ने तुरंत कारवाई करते हुए समुद्र में उतरकर डूबते जहाज की क्रू [संगीत] मेंबर्स को बचाने का अभियान शुरू किया। तेज लहरों और तनावपूर्ण हालात के बावजूद कई ईरानी सैनिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस मानवीय सहायता ने ईरान के लिए एक बड़ी राहत का काम किया है। इस घटना के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सार्वजनिक रूप से श्रीलंका का अभाव व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में श्रीलंका ने जिस तरह मदद का हाथ बढ़ाया वह अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवीय मूल्यों का उदाहरण है। ईरान ने इससे केवल रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं बल्कि एक दोस्ताना समर्थन के रूप में देखा है। इसी बीच ईरानी विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी फोन पर लंबी बातचीत की। इस बातचीत में ईरान ने अमेरिका की कारवाई पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में किसी युद्धपोत पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। ईरान अब इस मुद्दे को वैश्विक मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है और कानूनी कारवाई की संभावना भी जता रहा है। ईरान ने अमेरिका की इस कारवाई को समुद्री डकैती जैसा बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में उसके जहाजों को निशाना बनाया जाएगा तो वह अपने सैनिकों और नौसेना की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। इस बयान के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम से अमेरिका और इजराइल की चिंता बढ़ सकती है। वजह यह है कि ईरान अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा के सवाल से जोड़कर वैश्विक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही श्रीलंका जैसे देश का मानवीय हस्तक्षेप यह संकेत देता है कि यह संघर्ष अब सिर्फ खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसका असर हिंद महासागर तक पहुंचने लगा है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के 7 दिन बाद सामने आई यह घटना बताती है कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं बल्कि कूटनीति, मानवीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सवालों से भी लड़ा जाता है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा वैश्विक राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार ज्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं। इसी बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने अपने सर्वोच्च नेता अली खामन की मौत का बदला लेना ताबड़तोड़ तरीके से शुरू कर दिया है। ईरान के इस्लामिक रिवॉशनरी गार्ड कॉप्स यानी कि आईआईजीसी ने अमेरिका और इजराइल के ठिकानों के साथ-साथ समुंदर में मौजूद अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों को निशाना बनाने का दावा किया है।
ईरानी सैन्य कमान खतम अल अंबिया केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता के मुताबिक आया जीसी नेवी ने ओमान की खाली से होमो जलडमरू मध्य की ओर बढ़ रहे अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया है।
ईरान का दावा है कि यह हमला उस समय किया गया जब अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ईरान की समुद्री सीमा से करीब 340 कि.मी. दूर ऑपरेशन कर रहा था। ईरानी मीडिया के मुताबिक विमान वाहक पोत की ओर कम से कम चार बैलस्टिक दागी गई। प्रवक्ता ने दावा किया है कि हमले के बाद
