टैरिफ को लेकर ट्रंप ने लिए भारत के खिलाफ एक्शन।

टेरिफ पर अपने देश की सर्वोच्च अदालत में मात खाने के बाद भी डॉन्ड ट्रंप माने नहीं है। अब ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत 16 देशों के खिलाफ जांच बैठा दी है। इस बार आरोप यह लगाया जा रहा है कि कुछ देश ग्लोबल डिमांड से ज्यादा सामान बना रहे हैं। इससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हो रहा है। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसिन ग्रेटर का कहना है कि इस जांच का अहम मकसद अमेरिका के अंदर नौकरियों को बचाने का है।

उन्होंने बताया है कि जांच के जरिए यह देखा जाएगा कि कौन से देश इंडस्ट्रियल कैपेसिटी से ज्यादा सामान बना रहे हैं। यह भी देखा जाएगा कि कोई सरकार उत्पादकों को ऐसे फायदे तो नहीं दे रही है जिससे अमेरिकी कंपनियों के ऊपर उन्हें फायदे मिले। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के ऑफिस ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत जांच का ऐलान किया है। सेक्शन 301 के जरिए अमेरिकी प्रशासन दूसरे देशों के खिलाफ जांच बैठा सकता है। अगर उसे लगता है कि दूसरे देश ऐसी गतिविधियां कर रहे हैं जिससे अमेरिकी व्यापार को नुकसान हो रहा है तो यह सेक्शन उसे एक तरफ़ा कदम उठाने की ताकत देता है। अहम बात यह है कि ऐसा करने के लिए उसको विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ से भी इजाजत की जरूरत नहीं होती।

सेक्शन 301 में यह भी देखा जाता है कि अमेरिका में आयात किया जा रहा सामान फोर्स लेबर या बंधुआ मजदूरी करके तो नहीं बनाया गया है। भारत के अलावा चीन, यूरोपियन यूनियन, जापान, साउथ कोरिया, मेक्सिको, ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे भी इस जांच के घेरे में हैं। दरअसल अमेरिका का आरोप है कि भारत और चीन जैसी अर्थव्यवस्थाएं सरकारी सब्सिडी और मजदूरों के कम वेतन जैसी पॉलिसी अपनाकर ग्लोबल डिमांड से कहीं ज्यादा माल तैयार करती हैं। क्योंकि यह एक्स्ट्रा माल घरेलू बाजार में नहीं बिकता इसलिए इसे कम कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है। इससे अमेरिकी इंडस्ट्रीज को नुकसान पहुंचता है।

ग्रीन ने यह भी इशारा दिया है कि डिजिटल सर्विस टैक्स, फार्मासटिकल ड्रग्स की कीमतों, महासागरों में प्रदूषण जैसे मामलों की जांच के आसार भी हो सकते हैं। अब सवाल उठता है कि ट्रंप प्रशासन ने इस वक्त ऐसा फैसला क्यों किया है? दरअसल, अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन होने वाले हैं। यहां ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को विपक्षी डेमोक्रेट्स घेर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने जब टेरिफ के फैसले को खारिज कर दिया था, तो कंपनियों को आर्थिक घाटा भी उठाना पड़ा था। ऐसे में ट्रंप प्रशासन यह साबित करना चाहता है कि वो जनता को राहत देने की कोशिश कर रहा है। देश के 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत जो 10% टेरिफ लगे हैं वो 24 जुलाई को एक्सपायर हो रहे हैं। ट्रंप ने कहा था कि वह इंपोर्ट टैक्स को 15% करेंगे। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं किया गया है।

ग्रीव का कहना है कि प्रशासन इस डेडलाइन को देखते हुए नई जांच बैठा रहा है। अब देखना यह है कि ट्रंप के इस फैसले पर भारत की ओर से क्या जवाब दिया जाता है।

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