40 साल के आसपास उम्र है। नाम है मेहीलाल। काम करते हैं ईंट भट्ठे पर। करीब 15 मिनट तक एक तेंदुए के साथ इनकी लड़ाई चलती है। अब तक आपने फिल्मों में देखा होगा किस तरीके से एक हीरो अपने हीरोइन को बचाने के लिए या फिर किसी और को बचाने के लिए किसी जंगली जानवर से भिड़ जाता है जिनमें शेर, चिता, बाघ या फिर कुछ भी दिखाया जाता है।
लेकिन अगर असल जिंदगी में इनको लड़ाई लड़नी पड़ेगी तो शायद वहां पर सिर्फ एक नाम आ सकता है मेहीलाल का। उम्र करीबन मैंने पहले बताया कि 40 साल के आसपास है। ईंट भट्टे पर काम कर रहे थे। अचानक सेमंगलवार को एक तेंदुआ इनके ऊपर धावा बोल देता है। इनके साथ बहुत सारे लोग थे। लेकिन उनको बचाने के चक्कर में मेहलाल अचानक से ही तेंदुए के साथ लड़ाई कर लेते हैं। 15 मिनट तक इनकी जमकर फाइट चलती है। इस दौरान ये तेंदुए को बहुत पीटते हैं। उसके ऊपर मुक्के से मारते हैं। उसके अलावा उसे दबोचते हैं। यानी तेंदुआ एक इंसान को दबोच सकता है।

करीब सात गुना जो तेंदुआ है वो माना जाता है एक इंसान से सात गुना ज्यादा ताकतवर होता है। यानी मेहीलाल से सात गुना ज्यादा ताकतवर तेंदुआ उनके साथ 15 मिनट तक फाइट करता है। इन 15 मिनट मेंवह उनके ऊपर नाखूनों से वार करता है क्योंकि आप जानते होंगे कि उनके नाखून बड़े खतरनाक होते हैं। एक तेंदुआ करीब 10 फीट ऊंचे तक छलांग लगा सकता है। 20 फीट छलांग लगाकर जमीन से जमीन पर पार कर सकता है। और अपना तीन गुना ज्यादा वजन लेकर पेड़ पर चढ़ सकता है। ऐसे तेंदुए के साथ जब बेलाल की फाइट होती है तो उस दौरान जीतता कौन है? यह आपको आश्चर्यचकित कर देगा।

एम राइट अचीव बिग एट केआर मंगलम यूनिवर्सिटी वी प्रोवाइड यू द प्लेटफार्म टू टर्न योर ड्रीम्स इनू रियलिटी एट केआर मंगलम यूनिवर्सिटी। 15 मिनट की फाइट के दौरान मेलाल तेंदुए को हराने में कामयाबहो जाते हैं। तेंदुआ वहां से फिर फरार हो जाता है क्योंकि उसको लगता है कि अब शायद वो उस इंसान से नहीं लड़ पाएगा जो उस ईंट भट्टे पर अभी कुछ समय पहले इसी तेंदुए को देखने के लिए पहुंचे थे। दरअसल ये जो खबर है यह है लखीमपुर खीरी से। ढरारा एक इलाका है। वहीं पर एक जुगनूपुर गांव है। यहां एक ईट भट्टा है वर्मा जी का। वहीं पर तमाम जो मजदूर हैं वह काम करते हैं। मंगलवार को अचानक से जब यह मजदूर जा रहे थे वहां पर तो ईंट भट्टे पर काम करने के लिए वहीं पर कुछ खेतीबाड़ी का काम होता है। वहां ज्वार बाजरे की खेती हो रही थी और उसी में से एक तेंदुआ निकल कर सामने देख रहा होता है।
यह लोग पहुंचते हैं उसे देखने के लिए कि कहीं ऐसा ना हो कि वो इधर ही आ जाए और अचानक से वो तेंदुआ इन लोगों पर धावा बोल देता है। इसमें मिललाल भी शामिल होते हैं। मीलाल अचानक से तेंदुए के साथ लड़ाई भी कर लेते हैं और 15 मिनट तक जमकर लड़ाई करते हैं और इन 15 मिनट में जो दूसरे लोग थे वह चीखने चिल्लाने लगते हैं। उन्हें डर लगता है कि अब शायद मेहलाल को गंभीर चोट आ जाए। लेकिन चोट तो गंभीर आई मगर उन्होंने जो किया वो बेहद गंभीर है।
हालांकि इसके साथ-साथ सरकार और प्रशासन पर भी सवाल खड़ेहोते हैं। हो सकता है आप में से बहुत सारे लोगों को लगे कि अरे वो जंगली जानवर है अब वार कर दिया तो इसमें सरकार का क्या दोष है। अभी मेहनल से भी आपको सुनवाएंगे कि आखिर उन्होंने किस तरीके से यह फाइट लड़ी और कैसे इस जंग को जीता। लेकिन उससे पहले यह समझिए कि आखिर सरकार और प्रशासन की गलती क्या है। दरअसल लखीमपुर खीरी में आपने एक पार्क का नाम सुना होगा। यह पार्क बहुत ज्यादा प्रचलित है। जहां पर बहुत सारे जंगली जानवर हैं।
दूर दराज इलाके से लोग आते हैं यहां पर देखने के लिए पार्क घूमने के लिए। व्यवस्था भी खूब की जा रहीहोगी सरकार में। लेकिन सवाल तो सुरक्षा को लेकर है। जंगलों को आमतौर पर हम काटकर उखाड़ कर फेंक दे रहे हैं क्योंकि हमें विकास करना है। शायद यही कारण बन रहा है कि जो जंगली जानवर हैं वो रहने के लिए जब उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है, जगह नहीं मिल रहा तो वो डर कर उस इलाके से भागने की कोशिश करते हैं। हालांकि लखीमपुर खीरी में क्या हुआ इंसिडेंट? यह अभी तक क्लेरिफाई नहीं किया जा सका है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर सुरक्षा जो ग्रामीण है उस पार्क के इलाके वाले उनको लेकर क्या की जा रही है? जो संरक्षक लगाए गए उनकी ड्यूटी कैसी है?आए दिन अगर ऐसे हादसे होंगे तो फिर शायद यहां से लोग पलायन कर जाए। क्योंकि क्या आप चाहेंगे कि आपके घर वाले कभी जंगली जानवर का शिकार बन जाए? शायद नहीं। आए दिन यहां पर तेंदुआ देखे जाते हैं। और कई ग्रामीणों को वो घायल भी कर चुके हैं।
कुछ लोगों की भी डेथ भी होने की खबरें आ रही थी। ऐसे में मिही लाल इन्होंने जमकर ना सिर्फ फाइट की बल्कि लोगों के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बने कि जब अचानक से आपके ऊपर कोई मुसीबत आती है तो उसके साथ लड़ा जाता है ना कि उस मुसीबत से भागा जाता है। हालांकि हम यह बढ़ावा नहीं दे रहे हैं किआप आप भी इस वीडियो को देखकर तेंदुआ से फाइट करें या किसी खतरनाक जंगली जानवर के साथ लड़ाई करें। लेकिन मुसीबत में डट के सामना किया जाता है। अखिलेश यादव यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष वो अब योगी सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं कि जंगलों को काटा जा रहा है और उन्होंने मांग की है कि मेलाल की अच्छे से देखभाल की जाए। उनका इलाज विधिवत हो।
हालांकि इससे पहले मेलाल को एडमिट करा दिया गया था। उन्हें चोट बहुत ज्यादा आई है। इलाज चल रहा है उनका। उनका यही कहना था कि उन्होंने उस दौरान वो जब कुछ कुछ भी समझपाते उससे पहले ही यह सारा कांड हो गया और उन्हें वहां पर लड़ना पड़ा। हुआ था। हम वही जा रहे थे पौधे लेने। तो जो पौधे का मालिक था वो भट्टे पर खड़ा था। बाघ देखने गया लेकिन वो सब लोग बोले कि अंदर बाघ है। तो हमने कहा हो सकता होगा। तो हमने वहां से उतरा भट्ठे पर से घर के लिए चल दिए। फिर देखा थोड़ा लचके में देखने लगा। वो बहुत दूर 15 20 मीटर दूरी के अंदर था बैठा था चली के अंदर वो हमारे ऊपर एकदम वार कर दिया निकला वहां से बस हमको पक लिया मैंने उसको भी गला उसका नहीं छोड़ा गला छोड़ देते तो हमारा गला काट देता वो तभी काफी चोट आई बहुत पूरा शरीर कटा हुआ है बहुत बुरा है और ये वीडियो कल जो वायर वायरल हुआ था रेंज में बुरी क्षेत्र में एक इकट्ठे का वीडियो वायरल हुआ था जहां पे एक द्वारा एक युवक के साथ एक मानव की घटना घटी थी द्वारा इस युवक पर वार किया गया था और उसी का ये वीडियो वायरल हुआ जैसे ये सूचना प्राप्त हुई तो वन विभाग की टीम तत्काल वहां मौके पर पहुंचे और उच्च अधिकारियों के निर्देशों में अनुमति प्राप्त करके हम लोगों ने एनिमल को सक्सेसफुली करके रेस्क्यू कर लिया था और फिलहाल उसका ट्रीटमेंट प्राथमिक उपचार जोहमारे पशु चिकित्सक के निर्देश में और लखनऊ ज के हमारे जितने विशेषज्ञ है उन लोगों के निर्देशों में फिलहाल प्राथमिक उपचार जारी है और जो इंजर्ड है उनको भी तत्काल पहले सीए द्वाराारा भेजा गया था उपचार के लिए उसके बाद वहां के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया था ।
वहां भी हम लोग उनसे मिलकर आए हैं उनकी वहां व्यवस्था हम लोगों ने देखी है हर्ष की बात ये है कि वह युवक जो है अभी खतरे से बाहर इसके बाद वन विभाग की टीम आती है इस 15 मिनट के बाद लेकिन 15 मिनट में जो कुछ होता है वो सबको चौंकाने वाला है। इस दौरान जो भट्टे परईंट थी उसको उठाकर लोग मार रहे थे तेंदुए को ताकि वो मीलाल को छोड़ दे। लेकिन तेंदुआ बहुत जिद्दी जानवर होता है। वो तब तक लड़ता है जब तक उसे लगता है कि वो हरा ना दे। बहुत चतुर भी माना जाता है तेंदुआ और खतरनाक। लड़ाई वो लड़ रहा होता है। लोग पत्थर लेकर, ईंट लेकर मारते हैं उसको।
हालांकि जिस हिसाब से मेलाल उससे लड़ रहे थे कामयाबी सिर्फ उन्हीं की मानी जाएगी। वहां पर खड़ा एक भी इंसान जबकि कोई लड़ रहा है कोई बचाने के लिए नहीं आता बल्कि पीछे से ही लोग वार कर रहे होते हैं। अब सवाल सरकार से है प्रशासन से है और मांग भी हैकि लोगों की रक्षा की जाए। सुरक्षा की जो गारंटी होती है सरकार की तरफ से वो अंततः उसी के पास जाती है। जो नागरिक हैं जो लोग रहने वाले हैं प्रदेश के देश के उन सबकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ किसी की है तो वो सरकार की है। इसके अलावा आमतौर पर नागरिकों की भी होती है। लेकिन सबसे पहले सवाल सरकार से पूछा जाता है।
