सोना चांदी छोड़िए… महंगा हो रहा है तांबा, दाम ने तोड़े रिकॉर्ड्स।

सोने और चांदी के दामों में तेजी के बाद अब तांबा दिखा रहा है आंख। कॉपर के बढ़ते दामों की वजह से इलेक्ट्रॉनिक सामान हुए महंगे। जी हां, आपकी रसोई से लेकर बिजली के तारों तक सब कुछ आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है। तांबा यानी कॉपर की कीमतें आसमान छू रही हैं।

लेकिन असली सवाल यह है कि आखिर जीएसटी के बड़े-बड़े सुधारों का फायदा आम जनता की थाली तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है? क्या बिचौलिए मलाई खा रहे हैं या सिस्टम में कोई बड़ा लूप होल है? आज इस पैकेज में हम इसी पर बात करेंगे और जानेंगे तांबे के तेजी और टैक्स के बीच का झोल क्या है। बाजार में तांबे की कीमतों ने रफ्तार पकड़ ली है। ग्लोबल मार्केट से लेकर स्थानीय मंडियों तक कॉपर की चमक आम आदमी को झुलसा रही है।

बर्तन बनाने वाले हो या फिर इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरर सबकी लागत 15 से 20% तक बढ़ गई है। मिडिल क्लास परिवार जो तांबे के बर्तनों को सेहत और परंपरा से जोड़ता था। अब खरीदारी से पहले 100 बार सोच रहा है। जानकारी के मुताबिक एसी, फ्रिज, पंखे समेत कई ऐसे आइटम हैं जिनका इस्तेमाल हर घर में होता है। पिछले साल केंद्र सरकार ने जीएसटी रिफॉर्म का तोहफा दिया था जिससे कार से लेकर एसी, टीवी समेत कई इलेक्ट्रॉनिक आइटम की कीमतों में गिरावट आई है। लेकिन लोगों ने सरकार की इस पहल की जमकर तारीफ भी की। लेकिन अब राहत मिलना मुश्किल लग रहा है। व्यापारियों के मुताबिक 2 महीने में कॉपर के रेट करीब 40% की बढ़ोतरी हुई है।

यानी ₹1000 प्रति किलो मिलने वाला कॉपर अब लगभग ₹1400 का हो गया है। इसका असर अब बाजार पर पड़ने वाला है। जनवरी की शुरुआत में एसी फ्रिज पंखा बनाने वाली कई कंपनियों ने रेट बढ़ा दिए हैं। आशंका है कि अगले महीने से इन आइटमों की कीमतों में 10% की बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार ने जीएसटी लागू करते समय दावा किया था कि टैक्स पर टैक्स का बोझ कम होगा और कीमतें घटेंगी। लेकिन तांबे के मामले में हकीकत इसके उलट है। एक्सपर्ट का कहना है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी का फायदा आखिरी पायदान तक नहीं पहुंच पा रहा है। रिफॉर्म्स तो हुए हैं.

लेकिन उनका लाभ कंपनियों के मुनाफे में सिमट कर रह गया है। जबकि उपभोक्ता अब भी ऊंची कीमतों का बोझ ढो रहा है। कुल मिलाकर बढ़ती कीमतों और बेसर रिफॉर्म अब एक बड़े संकट की ओर इशारा कर रहे हैं। अगर समय रहते सप्लाई चेन और टैक्स बेनिफिट्स के ट्रांसफर पर ध्यान नहीं दिया गया तो तांबे की ये चमक आम आदमी के लिए सिर्फ एक सपना बनकर रह जाएगी।

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