अमिताभ बच्चन पहली सुपर सक्सेस फिल्म जंजीर भी हमने डिस्ट्रीब्यूट की थी और लगभग अगर उन्होंने अगर 100 फिल्मों में काम किया तो 50 हमने डिस्ट्रीब्यूट की आमिर और धर्मेश को पसंद आई थी उन्होंने बना ली तो ठीक है बचपन से राज कपूर साहब का बहुत फैन था बड़े-बड़े डायरेक्टर्स थे उनका आना जाना हमारे यहां तो डैड कि आप मुझे राज कपूर साहब के पास असिस्टेंट का जॉब दिला सकते हैं डैडी ये तो सुपर डुपर हिट फिल्म आने वाली है फिल्म इंडस्ट्री में से एक सक्शन होता है ना उसने कंज्यूम कर लिया था मुझे।
व्हाई डू यू वांट टू बी अ पार्ट ऑफ़ दिस? इट्स अ हाई स्पेकुलेटिव। यहां हर मौसम के साथ लोग बदल जाते हैं। फिल्म बनाने का शौक था लेकिन कभी हिम्मत ही नहीं हुई फादर को बोलने की।
मेरे फर्स्ट बर्थडे का फोटो जो था उसमें भी मनोज अंकल की गोद में होता था। तो वो रिलेशनशिप एक लाइफ टाइम रहा उनके साथ और उनको स्पेशली मेरी मम्मी से वो राखी बंधवाते थे। हेलो एंड वेलकम टू बॉलीवुड ठिकाना। मैं हूं खुशबू हजारे। ऑटोबायोग्राफी में आज जो पर्सनालिटी मेरे साथ है, यह एक फिल्म मेकर हैं, प्रोड्यूसर हैं, डिस्ट्रीब्यूटर हैं और इन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में बहुत ही शानदार कमबैक दिया अक्षय कुमार को। इन्होंने प्रियंका चोपड़ा को उस वक्त एक सुपरहिट फिल्म में कास्ट किया जब प्रियंका के पास फिल्म नहीं थी। आउटसाइडर्स के लिए यह फिल्म मेकर एक ब्लेसिंग से कम नहीं। इनका देओलस के साथ भी काफी अच्छा रिश्ता रहा है। आज हमारे साथ है फिल्म इंडस्ट्री के वो डायरेक्टर जिन्होंने 90ज में खूब नाम कमाया और इनकी फिल्म मेकिंग की काफी चर्चा रही। हमारे साथ है सुनील दर्शन जी। सुनील जी वेलकम टू बॉलीवुड ठिकाना। थैंक यू। सुनील जी हमारा यह जो शो है ऑटोबायोग्राफी ऑन ठिकाना इसमें हम बचपन की भी बातें करते हैं। तो इससे पहले कि हम आपकी फिल्मों के बारे में बात करें प्लीज आपके बचपन के बारे में कुछ बताइए।
मेरी पैदाइशी सिनेमा इंडस्ट्री में ही हुई है। लगभग 65 इयर्स पहले लेकिन मेरी फैमिली जो है वो फिल्म इंडस्ट्री में जनरेशन से रही। अ पहले मेरे फादर दर्शन समवाल उनका नाम था। पहले एक प्रोड्यूसर थे। उन्होंने फिल्म डायरेक्ट भी की। बहुत पॉपुलर और बहुत सक्सेसफुल फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर रहे वो। मैं 1959 बोर्न हूं। 63 या 64 से मुझे ऐसा फील होता है मुझे सिनेमा याद है। तो 3 साल या चार साल में जब फिल्में देखनी शुरू की होंगी तो मुझे याद है कि मैंने मेरे महबूब नाम की फिल्म देखी थी और दिलख मंदिर नाम की फिल्म देखी थी। दिस द ऑल अर्ली 60ज की फिल्म्स। और एक साइड पे ये जो हिंदी सिनेमा जो था वो तो देखता था लेकिन क्योंकि मेरे पूरे मैटरनल फैमिली से जो थी मेरे मदर के साइड से वो सब जवान थे उस वक्त बच्चे तो नहीं कहूंगा लेकिन बच्चे सब बढ़ रहे थे तो उनके साथ अकेला था मैं बच्चा तो साथी होता था तो हम लोग फिल्में बहुत देखा करते एक श्री सिनेमा होता था माटूंगा में मुंबई में तो वहां पे इंग्लिश फिल्में बहुत लगती थी तो वी वुड ऑल यू नो मैं टैग ऑन होता था और मेरे मां मामा था महेश और मुकेश और फैमिली थी पूरी तो वो सब फिल्म देखने जाते थे और मैं भी साथ चला जाता था तो वहां से इंग्लिश सिनेमा हॉलीवुड सिनेमा जो डाउन डाउन शायद जाके नहीं देख पाते तो यहां वो देखना शुरू हुआ एंड ग्रेजुअली दोनों सिनेमा अपने ऊपर ग्रो होते रहे लेकिन क्योंकि मेरे फादर बिज़नेस एलिमेंट ऑफ सिनेमा में थे यू नो तो, आई रियलाइज़ दैट बाइ द टाइम आई वाज़ अह आई वाज़ इन स्कूल, आई वाज़ मोर ड्रोन टुवर्ड्स टुवर्ड्स हिंदी सिनेमा।
हिंदी सिनेमा क्योंकि आप इंग्लिश भी देख रहे थे और हिंदी भी आपको अट्रैक्ट किया हिंदी सिनेमा। हिंदी सिनेमा इंग्लिश सिनेमा तो क्या क्योंकि बॉम्बे स्कॉट स्कूल का था तो वो एक वो नेचुरली देखा जाता था। लेकिन हिंदी सिनेमा में कहीं ना कहीं अपने दिखते थे। वंडरफुल एक्टर्स थे उस जमाने के जैसे शमी कपूर थे, शशि कपूर थे या फिर धर्म जी या धर्मेंद्र जी आ रहे थे। लवली म्यूजिक होता था फिल्मों में उस जमाने का विथ ऑल दोज़ वंडरफुल म्यूजिक कंपोज लाइक शंकर जयकिशन एंड ओपी नयर एंड मदन मोहन एंड ऑल दैट। इट वास अ ग्रेट प्लेजर यू नो हिंदी सिनेमा आई थॉट वास गोइंग थ्रू तब तो नहीं अब सोचता हूं कि वो सब वो बहुत ही खूबसूरत दौर था एंड यस सर आई केप्ट ग्रोइंग एंड फिर मेरे फादर क्योंकि बहुत ज्यादा बहुत एक्टिव डिस्ट्रीब्यूटर थे तो लगभग हर दूसरे हफ्ते में उनकी कोई ना कोई फिल्म रिलीज होती थी तो उनके ट्रायल देखे जाते थे एंड अपनी गेसिंग करते थे एक एस्टिमेशन करना शुरू कर दिया था एंड वी ऐसा लगा पता नहीं कब तब फिल्म इंडस्ट्री में जैसे एक सक्शन होता है ना उसने कंज्यूम कर लिया था मुझे एंड या बाय बाय द अर्ली 70ज आई थॉट आई वास रेडी टू मेक फिल्म्स बिल्कुल तैयार सा फील चल रहा था एंड मतलब आपको फिल्म देख के पता चल जाता था कि ये इसकी पहुंच कहां तक होगी और कितना ये बिज़नेस कर सकती है या कैसी बनी वो वो वो बाय मिड 70ज हो गया था लेकिन हिंदी पॉपुलर हिंदी सिनेमा का जो था ना वो बहुत कि एक पूरी फैमिली जो थी हमारे इर्द-गिर्द वो सिनेमैटिक थे। मेरी मेरी नानी की छोटी बहन थी।
पूर्णिमा जी उनका नाम था। एक्ट्रेस थी वो। उन्होंने बहुत उनका भी बहुत कंट्रीब्यूशन है मेरे ये जो प्रोसेस ऑफ़ लर्निंग सिनेमा था क्योंकि उन्होंने काफी काम किया सिनेमा समझती थी। तो जब मैं मेरी उनसे बनती बहुत अच्छी। छोटा सा लड़का था। 8 9 साल काऊंगा तभी तो बात करता था उनसे तो भी वो बताती थी सुनील तुम्हें अंदाज देखनी चाहिए। तुम्हें मदर इंडिया देखनी चाहिए। पुरानी अंदाज जो 40 में बनी 47 या 48 बनी होती वो देखनी चाहिए। शी टू एजुकेट अस इन सिनेमा वै अनइटेंशनली और यस बाय द टाइम 1970 के अर्ली से तो फिर मेरे फादर का जो करियर था वो इतना ज़ूम हो रहा था। तो जितने जो बाद में लेगज़ यू नो बड़े-बड़े बड़े डायरेक्टर्स थे उनका आना जाना हमारे यहां तो प्रकाश मेहरा जी मनमोहन देसाई जी एंड मिस्टेशियस रेवेल एंड ऑल दिस जिस वक्त की आप बात कर रहे हैं जिस वक्त आपके फादर बहुत ग्रूम कर रहे थे बिनेस वाइज उस टाइम आपके मामा जो है वो स्ट्रगल कर रहे थे तो क्या कभी मामा ने फादर के साथ जुड़कर कोई फिल्म नहीं प्लान की नहीं ऐसा नहीं था दे वर इन देयर डिफरेंट स्पेससेस एंड आई थॉट माय फादर वास ऑलवेज ऑलवेज देयर फॉर एवरीवन बट उनकी उनकी एक अपनी जर्नी थी इनकी अपनी जर्नी थी एंड आई डोंट थिंक इट रियली गॉट कपल देयर ऑलदो उनकी फिल्में काफी हमने डिस्ट्रीब्यूट भी की थी जैसे सड़क थी और दिल है कमालता थी ऑल दोज़ फिल्म्स तो वो एक अलग जर्नी थी बट उस दौरान मिस्टर राजकुमार कोहली जी थे जो ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाया करते थे तो मुझे याद है कि मेरे डैडी को 1973 की बात हो या 74 की होगी तो ट्रायल दिखाने कैंड्स ले आया कि भ मैंने एक फिल्म शुरू की है नागिन नाम के पिक्चर की और मैं उनको दिखाना चाहता हूं और वो घर पे नहीं थे तो मैं और मेरे मदर घर पे थे तो हमें ले गए भाई देखो तो ये कुछ कुछ शूट हुई उस फिल्म में देन यू हाउ सुनी कहानियां सुनी होती है टिं्स देखे प्रोड्यूस तो जाके देखे तो गाना सुना तेरे संग प्यार में नहीं और इतना प्यारा गाना सो वेल श आई रिमेंबर आई केम बैक एंड आई टोल्ड माय फादर आई सेड डैडी ही तो सुपर डुपर हिट फिल्म आने वाली है एंड ही वास नॉट अ वेल नोन डायरेक्टर एट दैट पॉइंट ऑफ़ टाइम ही वाज़ अ प्रोड्यूसर एंड राजकुमार को दीजिए एंड एंड यस जो कुछ सोचा दुश्मन भी उनकी बहुत बड़ी बहुत बड़ी हुई उसके बाद आई फिल्म तो उस जर्नी में सारे जितने यू नो आज लेजेंड्स जो हैं उनसे इंटरेक्ट करने का मुझे मौका मिला ऑल ऑफ देम आई थॉट यू नो जैसे बचपन से राज कपूर साहब का बहुत फैन था मतलब कह सकते हैं कि इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स के साथ रहकर आपकी ग्रूमिंग हुई है और साथ रहा तो नहीं हो लेकिन इंटरेक्ट जरूर इंटरेक्ट उनकी बातें सुनना भी उससे पता चलता है कि ये लेवल है।
तो मेरे मेरे गुरु जिनको मैं हमेशा गुरु राज कपूर जी का तो फैन रहा लेकिन बहुत अजीब बात आपको बताऊंगा कि मैं पैदा हुआ था जिस घर में उस घर के बाजू के फ्लैट में जो रहते थे वो भी एक ग्रूमिंग ग्रोइंग मतलब यू नो आए थे एक्टर बनने। उनका नाम मनोज कुमार था। जी। ओह। और उनकी शादी के पहले तो ही वास् वैरी क्लोज टू माय बिकॉज़ दीज़ वर फिल्म पीपल। ही वाज़ एन एस्पायरिंग एक्टर। और उनको स्पेशली मेरी मम्मी से वो राखी बंधवाते थे। अच्छा। एंड या। तो मुझे तो फर्स्ट मेरे फर्स्ट बर्थडे का फोटो जो था उसमें भी मनोज अंकल की गोद में होता था। तो वो रिलेशनशिप एक लाइफ टाइम रहा उनके साथ। इनिशियली कहां रहते थे आप? हम बैंड में रहे शुरू से आप बैंड्रा में ही रहा है और फ्लैट से बंगलो तक का सफर में कितना समय लगा था? मैं सोचता हूं 19 74 15 साल फ्रॉम माय बर्थ अच्छा दैट वी वर वी शिफ्टेड टू पालियन वहां पे फादर बहुत पहले ले थे लेकिन उनको ही वाज़ अ कंजर्वेटिव मैन तो बट इट वाज़ वंडरफुल वो जो वो जो फ्लैट्स थे आई विल आई रिमेंबर मीटिंग यू नो एक बहुत ही बहुत बड़ी म्यूजिक कंपोजर थे ओपी नयर उनका नाम था कमाल का 60 में तो उनके ऐसे गाने होते थे पीपल जस्ट सून टू ह म्यूजिक तो आई रिमेंबर इंटरेक्टिंग विथ हिम वि आशा भोसले जी बिकॉज़ दे वर अ कपल देम तो इन सब लोगों से मुलाकात रही तो सिनेमा का कितना इन्फ्लुएंस हुआ होगा आप सोचिए यस एंड दे वर ब्यूटीफुल पीपल वंडरफुल पीपल हमेशा जब मैंने यू नो सिनेमा की बात हो रही इंटरेक्शंस एक पॉजिटिव तरीके से क्रिएटिविटी की बातें होती थी नयर साहब जब भी आते थे उनका एक एलपी आता था उस वक्त जमाने में तो एलपी आके गिफ्ट करते थे और मम्मी को बहन मानते थे। तो बोलते सबसे पहले आपको मैं तुम्हें देना चाहता हूं शीला। तो वो रिलेशनशिप्स बहुत इंपॉर्टेंट थे फिल्म इंडस्ट्री में। एंड यस आई वाज़ आई वाज़ अ बेनिफिशियरी ऑफ़ दैट रिलेशनशिप कि आज मैं आपको ये बात सब बोल पा रहा हूं। इट वाज़ इट वाज़ ग्रेट। इट वाज़ ग्रेट मीटिंग दीज़ पीपी। फर्स्ट फिल्म की प्लानिंग कैसे हुई?
अ फिल्म बनाने का शौक था लेकिन कभी हिम्मत ही नहीं हुई फादर को बोलने की कि भाई मैं आई आई फिनिश माय ग्रेजुएट माय स्कूलिंग फ्रॉम द बॉम्बे स्कॉटिशन इन 1976 और फिर उसके बाद सिडनम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स में था जहां पे सारे हिंदुस्तान के आज के जितने भी स्टॉल वर्ड्स हैं यू नो इकोनॉमिक्स में एंड लॉ में और वो सब वहां के थे मेरे क्लासेस में मेरे क्लास में ही थे बट समवेयर विद इन मी मुझे ये था कि नहीं यार मुझे तो फिर भी जॉइ करनी है तो माय फादर थॉट आई वुड गेट इंटू यू नो हायर एजुकेशन एंड व्हेन वी बिकम इंडस्ट्री समथिंग बट वन डे आई व्हेन आई डन माय ग्रेजुएशन आई मास्टर्ड करज जो कहूंगा और उनको जाके मैंने कहा कि डैड क्या आप मुझे राज कपूर साहब के पास असिस्टेंट का जॉब दिला सकते हैं और क्यों क्या हो गया तुम्हें सेड मुझे आई वांट टू लर्न फिल्म मेकिंग तो ही सेड यू मैड ही सेड यू नो फिल्म मेकिंग अ वेरी वेरी वेरी दिस वर्ल्ड इज़ अ वेरी डिफरेंट वेरी डिफिकल्ट वर्ल्ड वर्ल्ड टू बी एंड व्हाई डू यू वांट टू बी अ पार्ट ऑफ़ दिस? इट्स अ हाईली स्पेककुलेटिव। यहां हर मौसम के साथ लोग बदल जाते हैं। स्टफ ही सेड वी गो इनू समथिंग मोर कंसिस्टेंट मोर सॉलिड मजबूत पढ़े लिखे हो। अच्छा बैकग्राउंड है तुम्हारे पास। एजुकेशन में अच्छे हो। आई सेड नहीं डैड मुझे तो यही करना है। तो मुझे करना है तो फिर ठीक है। तो फिर स्टार्ट ऐसा करो। उन्होंने सोचा मुझे थोड़ा सा परेशान करेंगे और मैं भाग जाऊंगा। आई विल कम बैक। तो कहा इंदौर का ऑफिस जो है हमारा बोले उस तो मैं वहां जाके एक्चुअली में बेसिक ग्रास रूट से अपना करियर शुरू कर। एंड एट दैट पॉइंट मैं ऐसा सोचता हूं अमिताभ बच्चन साहब जो हैं उनकी पहली फिल्म साथ हिंदुस्तानी भी हमने डिस्ट्रीब्यूट की थी। उनकी पहली सुपर सक्सेस फिल्म जंजीर भी हमने डिस्ट्रीब्यूट की थी। और लगभग अगर उन्होंने अगर 100 फिल्मों में काम किया तो 50 हमने डिस्ट्रीब्यूट किए होंगे। तो दैट ऑफिस हैड दैट वो श्रेय था एक सक्सेस ड्रिंक एंड 1981 में जब मैंने वहां जॉइ किया तो हमने पहली फिल्म रिलीज की वहां पे इसका नाम था क्रांति ओके व्हिच वाज़ अ ब्लॉकबस्टर मनोज कुमार दिलीप कुमार हेमा मालिनीरा एंड बहुत बहुत फर्क था बॉम्बे शहर और इंदौर शहर में जहां तक मुझे याद आता है तो शायद मैंने वहां पे एक डेढ़ महीना ना मुझे एडजस्ट होने को पानी पीने को मुझे तकलीफ होती है। पानी का टेस्ट अलग लगता है। तो कोल्ड ड्रिंक पे ही चला लेकिन मैं भी ज़दी था। बोला नहीं आई विल नॉट गो मूव आउट ऑफ़ द सिंग। यू नो आई विल टेस्ट माय पेशेंस। वो जर्नी बहुत इंपॉर्टेंट रही मेरे लिए। आप जो पूछते हो ना कि भाई तो मैंने उन मेरे जो अंकल्स थे उनका सिनेमा को क्यों अडॉप्ट नहीं किया? उसका कहीं ना कहीं ये अ ये रीजन है। मैंने वहां पे जाके आई सेड आई थॉट आई एम नॉट गोइंग टू जस्ट सट इन एन ऑफिस एंड जस्ट टू द हैंडल द बिनेस एस्पेक्ट। मैंने उस वक्त मध्य प्रदेश के हर डिस्ट्रिक्ट को टूर किया। मैंने लोगों से इंटरेक्ट किया। मैंने लोगों से बात करता था। मैं समझना चाहता था कि भाई हम में वो जो एक लोग कहते थे उस वक्त ऋषिकेश मुखर्जी और बासु चैटर्जी और जो ऐसे डायरेक्टर्स होते थे यू नो मृणाल सेन एंड मनी एंड ऑल दे वर देयर बोले उनकी फिल्में बॉम्बे के ये जो थाना किक है ना उसको क्रॉस नहीं करती और ये जो इंडियन डायरेक्टर्स हैं राज कपूर मनोज कुमार राजकुमार कोहली मनमोहन देसाई ये पैन इंडिया चलती है राइट सो आई सेड मुझे वहां से समझना पड़ेगा मैं यहां वेस्टर्न अर्बन अर्बनाइजेशन तो देखा वहां हूं तो मुझे हिंदुस्तान में घुसना पड़ेगा। एंड आई स्पेंट आई स्पेंट फ्यू इयर्स आई थिंक से इयर्स आई स्पेंट देयर एंड आई वाज़ इंदौर मध्य प्रदेश में और वो तब बहुत रिग्रेसिव था। आज का मध्य प्रदेश वो नहीं है। उस वक्त वहां पे बहुत रिग्रेसिव था। बहुत पुराने लेकिन वहां पे एक खूबसूरती थी।
वहां पे इंडियन कल्चर था। वहां पे जो कहते हैं ना उनकी सभ्यता उनके ट्रेडिशंस वो सब दे वर वेरी वेल रूटेड इन दैट एंड दैट्स व्हाट आई गेन फ्रॉम देयर इन्फ्लुएंस रहा इंदौर का आपकी फिल्मों में या फिल्म मेकिंग प्रोसेस दैट वास वैरीेंट इनफैक्ट मैंने फिर एक फिल्म का एक स्क्रिप्ट लिखा था उस वक्त वहां पे ओनली आउट ऑफ माय इंटरेक्शन विद द पीपल ओवर देयर और वो फिल्म फिर बाद में बनी भी थी
हालांकि उसका उसको थोड़ा वेरिएट कर दिया था मेला के नाम से अच्छा अच्छा तो उसका आपको आईडिया मतलब तभी लिख दी थी आपने वो अच्छा अच्छा अच्छा वाओ सो फिर धर्मेश ने बाद में आमिर और धर्मेश को पसंद आई थी उन्होंने बना ली तो ठीक है इनसे बड़ी उस फिल्म में एक और कैरेक्टर थी आर्टिस्ट थी उसका नाम था मीनाक्षी शर्त मिथुन चक्रवर्ती जी है ना उनका बेटा है नमाशी उसने मुझे कहा कि पता है मेरे पापा कह रहे थे कि एक्चुअली सुनील दर्शन अपना करियर सनी देओल के साथ नहीं शुरू करने वाले थे वो मेरे साथ फिल्म बनाने वाले थे।
