एयर इंडिया की फ्लाइट संख्या AI 171 बोइंग की ड्रीम लाइनर 787 को उस दिन ये दोनों पायलट उड़ा रहे थे और इस वीडियो में हम आखिरी में आपको बताएंगे आखिरी तक ये चीज़ें समझा देंगे कि ये दोनों पायलट हमारे हीरो हैं उस दिन कैसे इन दोनों पायलट ने सैकड़ों लोगों की जान बचाई ना कि इनके द्वारा 275 लोगों की जान गई अगर ये दोनों पायलट ने सूझबूझ नहीं दिखाया होता उस दिन तो यकीन मानिए ये आंकड़ा 275 से बढ़कर 300 400 के पार भी 500 के पार भी जा सकता है।
अगर उस दिन ये दोनों पायलट ने सूझबूझ नहीं दिखाई और इस वीडियो में यह भी बताएंगे कि सुमित सब्रवाल ने उस दिन मे डेट डिक्लेअर करने के बाद उनके आखिरी शब्द क्या थे जिससे जांच एजेंसीज को बहुत बड़ी लीड मिली है तो नमस्कार दोस्तों सबसे पहले यह समझते हैं कि यह दोनों पायलट कितने अनुभवी थे फर्स्ट ऑफिसर थे सुमित सब्रवाल 55 साल इनकी उम्र थी और इनका तजुर्बा करीब 8200 घंटे की उड़ान का है मतलब 8200 घंटे इन्होंने प्लेन उड़ाया है और लाखों लोगों को एक जगह से दूसरे जगह सेफली पहुंचाया है।
दूसरे हैं 38 वर्षीय क्लाइव कुंदर क्लाइव कुंदर के भी 1100 घंटे का अनुभव है और इन्होंने भी हजारों लोगों को सेफली पहुंचाया है तो ये दोनों पायलट्स बहुत अनुभवी थे तो इन पर शक करना बेबुनियाद है और इसलिए भी किया जा रहा है क्योंकि ये डिफेंड करने वाले नहीं है अपने आप को इस समय डिफेंड नहीं कर पा रहे तो दुनिया के सारे पायलट्स इनमें कमियां गिना रहे हैं कि पायलट्स की गलती थी पायलट्स ने लैंडिंग गियर ऊपर नहीं किया और उसको फ्लैग को एक्सटेंड नहीं किया ये सारी चीजें कही जा रही है लेकिन इस हम आपको बताएंगे कि इन दोनों की सूझ-बुझ से कैसे सैकड़ों लोगों की जान उस दिन बच गई।
गार्डियन की हेडलाइन है एयर इंडिया कैप्टन सेंट मेड ए लेस देन अ मिनट मतलब 1 मिनट के अंदर सुमित सबरवाल ने मेड ए डिक्लेअर कर दिया था और हकीकत ये है कि सिर्फ 36 सेकंड में उन्होंने मेड एडे डिक्लेअर किया टेक ऑफ किया और 36 सेकंड में उन्होंने मेडे मे डे मे बोल दिया था अब लेकिन पहले यह समझ लेते हैं बहुत लोगों को नहीं पता हो कि मेडे होता क्या है बहुत से लोगों को पता होगा।
कैप्टन जब ऐसी इमरजेंसी आती है जब कैप्टन जो है प्लेन से अपना कंट्रोल खो देता है या इंजंस दोनों इंजन फेल हो जाते हैं मतलब ये लास्ट कंडीशन होती है जब पायलट्स जो होते हैं वो पायलट्स प्लेन पे कंट्रोल नहीं कर पाते हैं चाहे उसका रीजन ईंधन खत्म होना हो या उसका रीजन इंजन खराब होना और ये ऐसी आखिरी कंडीशन मतलब कि अब उनके हाथ में कुछ रहा नहीं उस समय मेड डिक्लेअ किया किया जाता है।
कैप्टन तीन बार बोलते हैं मेडे मेडे मेडे और कैप्टन के तीन बार मेड बोलने से जो एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर पे बाकी जो प्लेन से बातचीत चल रही होती है जो ट्रांसमिशन रिसीविंग और ट्रांसमिशन चल रहा होता है वो सारे ब्लॉक हो के सबसे पहले उस पायलट जिसने मेडे मेडे मेडे बोला है उस प्लेन से संपर्क बन जाता है और वरीयता उस प्लेन को दी जाती है एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर के द्वारा और मेडे मेडे मेडे ये उस कंडीशन में होता है जब लास्ट सिचुएशन होती है कि अब प्लेन बचने वाला नहीं है।
इसके पहले पैन पेन पेन ये भी बोला जाता है कैप्टन के द्वारा लेकिन इस केस में ऐसी कोई खास इमरजेंसी नहीं होती 2018 की एक घटना बता रहा हूं 2018 घटना है एयर इंडिया में पायलट ने पैनपन पैनपैन पैनपन कह के कॉल किया था और बोला था इमरजेंसी सिचुएशन मुझे लैंडिंग चाहिए तो इस केस में प्लेन को लैंडिंग एक रनवे दिया गया बाकी प्लेेंस को रोक करके रनवे दिया गया और प्लेन आकर के लैंड किया पैनपन पैन पैन पैनपन में सिचुएशन ये था कि एक एक पे एक जो ट्रेवलर था एक पैसेंजर प्लेन में थे उनका मेडिकल इमरजेंसी हो जाती है इन केस आई थिंक हार्ट या कोई की प्रॉब्लम थी जिसकी वजह से प्लेन को लैंड करना तो ऐसी सिचुएशन में जब टाइम होता है इमरजेंसी बहुत ज्यादा नहीं होती उस केस में पेन पेन पेन पेन पेन पेन बोला जाता है।
लेकिन मेड बोलने का मतलब कि भाई अब प्लेन कंट्रोल में नहीं है तो सुमित सबरवाल ने 36 सेकंड में मेडे बोल दिया अब उनके 36 सेकंड में मेडे बोलने से क्या फायदा हुआ यह हम आपको बताते हैं फिर आप सुनिएगा फिर आपको समझ में आएगा कि यह कितनी बड़ी डिसीजन था एक कैप्टन के लिए मेड ए बोलना अब मैं टाइम्स ऑफ इंडिया की एक कटिंग दिखाता हूं टाइम्स ऑफ इंडिया में ये छापा गया था कि प्लेन फटने के जस्ट दो से 3 मिनट ये 2 से 3 मिनट इसको सीआईएसएफ पुलिस और फायर ब्रिगेड ये सारी जो हैं वो उस लोकेशन पर पहुंच गई थी जहां पर प्लेन फटा हुआ था सिर्फ 2 से 3 मिनट और यह इसलिए हुआ क्योंकि सब्रवाल ने सुमित सब्रवाल ने सिर्फ 36 सेकंड बाद ही मेडे डिक्लेअ कर दिया था मतलब उन्हें जैसे ही पता चला कि प्लेन उनके कंट्रोल में नहीं है उन्होंने मेडे मेडे मेडे बोल दिया इसके वजह से सारी एजेंसियां तुरंत अलर्ट हो गई और मात्र 2 से 3 मिनट में पहुंच गई।
आगे इस आर्टिकल में हम बहुत चीजें नहीं दिखा सकते आपको खुद पढ़िएगा लेकिन मैं जो बता देता हूं 2 से 3 मिनट में अगर पुलिस और बाकी एजेंसीज पहुंच गई एनडीआरएफ की टीम पहुंच गई जिसकी वजह से वहां से बड़े पैमाने पे जहां प्लेन हादसा हुआ वहां से लोगों को इवाक्युएट किया गया वहां से निकाल करके बाहर ला दिया गया जिसकी वजह से ये संख्या कम से कम 20-25 तो कम हुई सिर्फ इस वजह से और इसमें सिर्फ सबसे बड़ा हाथ जो है वो सुमित सुब्रवाल का है जिन्होंने सही समय पे मेड ए बोला अब अब आप इस चीज को ध्यान कि 2 से 3 मिनट में सारी एजेंसीज वहां पहुंच गई तो हमने फायर ब्रिगेड की लोकेशन निकाली कि क्रैश साइट से जो कितनी दूर थी उस समय तो अब हम देखते हैं इस मैप को यहां पर देखिए आप अब यहां आप देखिए ये वो हादसे साइट है जहां पर एआई 171 क्रैश हुई थी और उसके सबसे करीब का ये है नरोदा फायर स्टेशन ये है नरोडा फायर स्टेशन यहां से उस दिन पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां गई थी और जब हमने सर्च किया तो ये करीब 10 मिनट का रास्ता है ।
यहां से यहां पहुंचने का ये देखिए ये हमने सर्च किया था कार से अगर आप ट्रैवल करते हैं यहां से नरोडा से इस क्रैश साइड तक तो आपको 10 मिनट लगेंगे कम से कम डे टाइम में अभी की समय बता रहा हूं जब हम इस समय बज रहा है करीब जब हम वीडियो शूट कर रहे हैं 3:00 बज रहा है 1 घंटे पहले मैंने निकाली थी वही समय है जिस समय प्लेन क्रैश हुआ था 10 मिनट लगेगा लेकिन फायर ब्रिगेड उस दिन 5:00 से 6 मिनट में वहां पर अवेलेबल थी समय से पहुंची थी किसी की देरी की कोई बात नहीं थी तो ये हुआ कैसे क्योंकि वक्त रहते मे डे डिक्लेअर कर दिया था सुमित सब्रवाल ने अब हम आपको बताते हैं कि मेडे बोलने का एक पैटर्न होता है मेड डे कैसे बोला जाता है।
तीन बार मे डे कॉल किया जाता है मे डे मे डे मे डे तीन बार कॉल करने की वजह से सारे प्लेन से जो एटीसी का संपर्क होता है उसके बजाय जिस जहां से मे बोला जा रहा है उसको प्राथमिकता दे दी जाती है इसके बाद एक पैटर्न होता है जिसमें कहा जाता है सबसे पहले उस विमान के बारे में बताया जाता है जिससे मे कॉल किया गया उसके बाद जगह के बारे में बताया जाता है उसके बाद समस्या का विवरण और सहायता की जरूरत ये पायलट के द्वारा बताया जाता है जैसे मेडे मेडे ए मेडे एडे विमान का क्या है मेड डे मे Air इंडिया AI 171 625 फीट अबोव अहमदाबाद नो थ्रस्ट नो पावर और इमरजेंसी सिचुएशन इस तरह से बोलना था लेकिन यहां पर सारी चीजों को कैप्टन सब्रवाल ने दरकिनार करके सिर्फ कुछ लाइनें बोली थी और क्या बोला था ये आपको बता देते हैं ये कैप्टन सब्रवाल हैं तो कैप्टन सब्रवाल ने उस दिन बोला था सिर्फ ये कि मे डे मे डे मे डे मे डे नो पावर नो थ्रस्ट नो पावर नो थ्रस्ट गोइंग डाउन सिर्फ इतनी बात इन्होंने कही नो पावर नो थ्रस्ट नो डाउन मतलब उन्होंने ज्यादा समय नहीं लिया और यह इन्होंने सिर्फ नो पावर नो थ्रस्ट बोला और इसी से ये पूरे आर्टिकल में ये चीजें ये मैंने अपने आप से नहीं बनाई है ये पूरी ये देखिए ये आर्टिकल है मैंने किसी से निकाली है इसमें लिखा गया है कि सिर्फ इसकी वजह से ये चीज पता चली कि भाई दोनों इंजन खराब हो गए हैं ।
ये चीज को एक ये उन्होंने बोला नो पावर नो थ्रस्ट मतलब पावर नहीं था थ्रस्ट नहीं था जिसकी वजह से उनकी इस लाइन की वजह से पता चलता है कि भाई इंजन में गड़बड़ी थी और दोनों इंजन काम नहीं कर रहे थे तो ये एक बात जो है सूझबूझ की यह सुमित सबरवाल ने उस समय कहा अब सोचिए सुमित सबर्रवाल जब प्लेन में थे उनके साथ फ्लाइंग ऑफिसर थे प्लेन को उड़ा रहे थे 36 सेकंड टेक ऑफ किया और प्लेन उनके कंट्रोल से बाहर हो गई उन्हें ये चीज समझ आ चुकी थी कि मौत उनके करीब है वो बचने वाले नहीं हैं लेकिन 36 सेकंड में उस 36 सेकंड में और बाद में 18 सेकंड में प्लेन क्रैश हो जाता है उन्होंने मतलब उन्होंने जो उनकी ट्रेनिंग थी वो ट्रेनिंग उन्हें याद रही वो घबराए नहीं और इतने कम ड्यूरेशन में मतलब लंबा ड्यूरेशन इतने कम ड्यूरेशन में उन्होंने मेडेड डिक्लेअर किया और साथ में जानकारी भी दी अब हमने कुछ मीडिया रिपोर्ट को और एनालाइज किया तब हमें पता चला कि ये कितने बड़े हीरो थे ये पायलट्स कितने बड़े हीरो थे अब यहां पर आपको एक रिपोर्ट ये ये है एनडीटीवी ने लिखा है एनडीटीवी ने लिखा है लैक ऑफ लिफ्ट्स पायलट योंकिंग योक व्हाट मे हैव हैपन इन द प्लेन कर मतलब योग हम बता देते हैं आपको पहले क्या होता है देखिए पायलट्स जो लैक ऑफ लिफ्ट जैसा उन्होंने बोला था नो थ्रस्ट नो पावर कैप्टन सुब्रमल ने और उन्होंने बताया इस इसमें लिखा है ये योक होता है योक आपने देखा होगा कई बार फिल्मों में देखा होगा कि प्लेेंस जो है इस तरह से एक होता है कुछ थ्रोटलल होता है जिसको पीछे खींचते हैं लिफ्ट मिलता है उसको योक बोलते हैं ।
ये है योक तो इस आर्टिकल में कह रहा है कि प्लेेंस को ये जो है योक खींच करके लिफ्ट कराने की कोशिश कर रहे थे कौन पायलट्स अब देखिए पायलट्स लिफ्ट कराने की कोशिश कर रहे थे और ये इससे भी साबित होता है और यह साबित कैसे होता है यह भी इस यहां पर कहा जा रहा है कि यह जो नोज है प्लेन का यह नोज उठा हुआ है और टिल नीचे है तो इससे पता चल रहा है कि जो पायलट्स हैं वो पायलट्स प्लेन का नोज ऊपर रख के इसको ज्यादा डिस्टेंस तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं पायलट को पता चल गया था 36 सेकंड में ही पता चल गया था कि पावर नहीं है लिफ्ट मिल पाएगी नहीं ट्रस्ट नहीं है इंजन दोनों काम करना बेकार हो गए हैं और इस वक्त जो है प्लेन को क्रैश होना लगभग तय है प्लेन हादसा होगा हाइट बहुत ज्यादा नहीं थी 400 फीट ऊपर प्लेन थी तो मतलब उनके पास समय भी बहुत कम था।
लेकिन इस समय सुब्र सुमित सुब्रवाल और दूसरे कैप्टन को यह अपनी ट्रेनिंग याद आती है और वह घबराए बिना तुरंत एक्शन में आते हैं और वो योग को खींच करके कैसे नोज ऊपर रखते हैं कि प्लेन को हम ग्लाइड करा करके कहां गिराएं कहां लैंड करा सके कहां क्रैश लैंडिंग हो और उन्होंने मेडे डिक्लेअर कर दिया था ताकि क्रैश लैंडिंग के समय सारी एजेंसीज सारी जो फोर्सेस हैं जो बचा सके वो लोगों को मैक्सिमम लोगों की जान बचा सके पहुंच कर के इसलिए बहुत समय रहते उन्होंने मेड डिक्लेअर किया इसके बाद नोज ऊपर रख के वो आगे प्लेन को ले जा रहे हैं और ये चीज देखिएगा ये मैप में देखने के बाद मुझे समझ में आया कि ये नोज ऊपर रख करके ये कहां ले जा रहे थे प्लेन को और कैसे इन्होंने सैकड़ों लोगों की जान बचाई इस चीज को अब आप बहुत ध्यान से देखिएगा जो हम बताने जा रहे हैं यह गुगल अर्थ का हमने मैप खोला है इस वक्त अब आपके सामने गुगल अर्थ के द्वारा हम अहमदाबाद शहर को देख रहे हैं यह अहमदाबाद का शहर है और यह वो रनवे है जिस दिन जिससे उस दिन एआई एi 171 ने कैप्टन सब्रवाल उसके पायलट थे उड़ान भरी थी और सीधे वो यहां पर आती है इतनी दूर आकर के वो लिफ्ट खो देती है।
उसके बाद पायलट उसको मेंटेन करके चलते हैं क्योंकि आप देखेंगे यहां से लेकर के यहां तक का एरिया पूरा बहुत डेंस पापुलेशन वाला है अगर लिफ्ट नहीं दिया होता अगर योक को खींच कर के नोज ऊपर नहीं रखा होता पायलट ने तो अगर प्लेन यहां पर क्रैश होता हम आपको ज़ूम करके दिखा देते हैं यहां पर अगर क्रैश होता तो आप यकीन मानिए कि उस दिन 200 के बजाय 500 लोगों की जान जाती ये देखिए ये कितना पॉपुलेटेड एरिया है ये जो एरिया है ये सिर्फ ये रनवे से टेक ऑफ किया और प्लेन यहां पर आया यह रनवे रनवे से टेक ऑफ करके यह डेंस इतना डेंस इतना पॉपुलेटेड एरिया है इस मार्केट में अगर प्लेन क्रैश हुआ होता तो यकीन मानिए यह आंकड़ा 275 से कहीं ज्यादा होता लेकिन पायलट्स कामयाब हुए इसको पार करके आकर के प्लेन जो गिरता है वो प्लेन गिरता है क्रैश लैंड होता है वह इस एरिया में यह जो बिल्डिंग है यहां पर होता है यह बिल्डिंग देखिए आप यह वो बिल्डिंग है यहां पर वो प्लेन क्रैश होता है और इस बिल्डिंग के अगल-बगल को आप एरिया को देखिए इस अगल-बगल के एरिया को आप देखिए आपको खुद समझ में आएगा ये एक मैदान है बहुत बड़ा मैदान है यह बहुत बड़ा एरिया मैदान है और मुझे पूरा यकीन है पायलट्स ने उस वक्त क्रैश लैंडिंग इन जो एरिया ये ग्राउंड है यह जो खाली मैदान इतनी दूर पड़ा हुआ है।
यहां पर कहीं कराने की कोशिश की होगी यह एक बहुत बड़ा मैदान दिख रहा है यहां पर कराने की कोशिश की होगी लेकिन प्लेन में जब एक्सपर्ट्स ने बताया कि प्लेन के कि ना ना प्लेन दाएं जा रहा था ना बाएं जा रहा था उनके बस में दाएं बाएं लेफ्ट राइट प्लेन को करना नहीं था तो बाय मिस्टेक प्लेन जो है ये बिल्डिंग में यहां आ कर के प्लेन घुसता है उस दिन यहां पर यहां पर अगर वो इतना कैपेबल हो जाते कि दाएं बाएं करते तो मुझे यकीन है कि प्लेन में सवार लोगों की जान भी कुछ बचती क्योंकि यह बिल्डिंग में नहीं घुसता क्योंकि विंडिंग में नहीं घुसता तो इमरजेंसी गेट से कुछ लोग तो बाहर निकलते दो चार और कम से कम और जो यह हॉस्टल में जो बच्चे थे जो मेडिकल स्टूडेंट्स थे उनकी भी जान बचती और प्लेन हादसे में कुछ लोगों की जान बचती और एनडीआरएफ और बाकी टीमों को भी काम करने में आसानी मिलती अगर यह यहां पर कहीं गिरा लेते लेकिन हमें मुझे पूरा यकीन है कि उस दिन सुमित सब्रवाल के मन में होगा कि वह क्रैश लैंडिंग तो होनी थी लेकिन वह खाली जगह ढूंढ रहे थे और ऐसी खाली जगह गिराना वह चाह रहे होंगे।
