शुभांशु शुक्ला पृथ्वी पर ऐसे आ रहे वापस |

शुभांशु शुक्ला आज 14 जुलाई 2025 शाम 4:45 पर अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी पर वापसी के सफर पर निकल चुके हैं। शुभांशु शुक्ला कल यानी 15 जुलाई 2025 को शाम करीब 3:00 बजे अमेरिका के कैलिफोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में उतरेंगे। लेकिन आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष से पृथ्वी पर वापस कैसे आएंगे? पृथ्वी पर वापस आने में उनका यान किन-किन प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करेगा?

अंतरिक्ष से पृथ्वी पर वापसी की प्रक्रिया शुरू होते ही सबसे पहले आज करीब दोपहर 2:00 बजे शुभांशु शुक्ला सहित चारों अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का गेट खोलकर ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के अंदर आ गए और ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट का गेट अंदर से बंद कर लिया। गेट बंद करने के बाद लगभग 2ाई घंटे तक इंतजार हुआ। सभी चीजों को चेक किया गया और जैसे ही नासा कमांड सेंटर से आदेश आया शाम 4:45 पर अनडॉकिंग हुई यानी कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट अलग हुआ। जैसे ही ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष स्टेशन से अलग हुआ। ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में लगे थ्रस्टर्स फायर हुए। जिससे धीरे-धीरे ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से विपरीत दिशा में अपनी दूरी को बढ़ाता गया।

अभी तक ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट 400 कि.मी. ऊंचाई पर ही पृथ्वी के गोल-गोल चक्कर लगा रहा है। जैसे ही ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से एक निश्चित दूरी पर आ जाएगा, ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट 90° घूमेगा और इसका मुंह पृथ्वी की तरफ हो जाएगा। उसके बाद शुरू होगी अगली प्रक्रिया। जब ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के थ्रस्टर्स फिर से फायर होंगे। थ्रस्टर्स फायर होते ही ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी की कक्षा की तरफ तेजी से बढ़ेगा और कुछ घंटे में ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी की कक्षा में होगा। पृथ्वी की कक्षा में आते ही ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट का ऑटोमेटिक मोड ऑन हो जाता है और यह कुछ घंटे तक पृथ्वी के चक्कर लगाएगा।

कुछ घंटों के बाद यह उस स्थान के ऊपर आ जाएगा जहां इसको पृथ्वी पर उतरना है। नासा कमांड सेंटर से आदेश मिलते ही शुरू होती है आखिरी घंटे वाली सबसे खतरनाक प्रक्रिया। इस प्रक्रिया के शुरू होते ही सबसे पहले ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट का पीछे वाला पार्ट यानी ड्रैगन ट्रंक अलग हो जाएगा। ड्रैगन ट्रंक इसलिए अलग किया जाता है क्योंकि अब पृथ्वी के एटमॉस्फयर में जाने के लिए हीट शील्ड की आवश्यकता होगी जो इसके नीचे लगी हुई है और ड्रैगन ड्रंक पर लगे हुए सोलर पैनल के साथ ही ड्रैगन ड्रंक पर लगी हुई अन्य चीजों की अब कोई आवश्यकता नहीं है।

इसलिए इसको अलग कर दिया जाता है। अलग होने के बाद ड्रैगन ड्रंक तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ेगा और पृथ्वी के एटमॉस्फियर में आकर जलकर राख हो जाएगा। ड्रैगन ड्रंक अलग होते ही शुरू होगी अगली प्रक्रिया। ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के थ्रस्टर वापस से फायर होंगे और लगातार 17 मिनट तक फायर होते रहेंगे। जिसकी वजह से ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ेगा। 17 मिनट के बाद वापस से ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट 180° घूमेगा और ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट का आगे वाला मुंह बंद हो जाएगा।

अब ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की हीट शील्ड पृथ्वी की तरफ और ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट का मुंह अंतरिक्ष की तरफ हो जाएगा। ईंट शीड का मुंह पृथ्वी की ओर इसलिए किया जाता है क्योंकि अब पृथ्वी का एटमॉस्फियर आने वाला है और यहां का तापमान 1600° से भी अधिक पहुंच जाता है। आपको बता दें कि ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट पर नीचे की तरफ से यह एक खास लेप लगाया गया है जो 1600° या इससे अधिक तापमान को भी आसानी से सह सकता है। उसे ही यहां हीट शील्ड बोला जा रहा है। 180° घूमते ही ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट तेजी से पृथ्वी के एटमॉस्फियर की तरफ बढ़ेगा और पृथ्वी के एटमॉस्फियर में घुसते ही ऐसा लगेगा जैसे ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट पर आग लग गई हो। इस वक्त ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट एक आग का गोला बन चुका है। इसका तापमान बाहर से 1600 डिग्री से भी अधिक हो जाता है। जिससे हीट शीड इसको प्रोटेक्ट यानी बचा रही होती है। य

ह प्रक्रिया सबसे खतरनाक प्रक्रिया है। क्योंकि इस वक्त सबसे ज्यादा अंतरिक्ष यान दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ने लगेगा। जैसे ही ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी से 5700 मीटर की ऊंचाई पर आता है। ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के दो पैराशूट खुलते हैं। पैराशूट खुलते ही ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की गति तेजी से धीमी होने लगती है और ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट धीरे-धीरे पृथ्वी की ओर बढ़ने लगता है। जैसे ही ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट 2000 मीटर की ऊंचाई पर आता है, यह दो पैराशूट अलग हो जाते हैं और ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के चार पैराशूट खुलते हैं। इन चार पैराशूटों के खुलने के बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की गति और भी कम हो जाती है और ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट धीरे-धीरे समुद्र में उतरने के लिए पृथ्वी की ओर बढ़ता है। समुद्र में पहले ही नासा की टीम नाव के साथ ड्रैगन कैप्सूल का इंतजार कर रही होती है। धी

रे-धीरे ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट समुद्र के पानी के बेहद करीब आ जाता है और चार पैराशूट्स के साथ धीरे-धीरे समुद्र में स्प्लैश डाउन यानी कि उतर जाता है। स्प्लैश डाउन यानी उतरते ही जो नासा की टीम पहले से मौजूद होती है वो ड्रैगन कैप्सूल को समुद्र में से उठाकर नासा के शिप पर ले आती है जहां पर ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट का गेट खोला जाता है और इस प्रकार अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर वापस लौट आते हैं। शुभांशु शुक्ला भी इसी प्रकार ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट से पृथ्वी पर वापस लौटने वाले हैं। आपको बता दें कि शुभांशु शुक्ला को पृथ्वी तक पहुंचने में इतना समय इसलिए लग रहा है क्योंकि ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी तक पहुंचने में लगभग 20 से 22 घंटे का समय लेता है।

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