RSF की पकड़ में आया सूडान का गुनहगार, 2000 लोगों ली जान।

वो मुस्कुराता था जबकि सामने एक बेबस आदमी रहम की भीख मांग रहा होता था। वो वीडियो बनवाता था। जबकि उसके पीछे बिछ रही होती थी। वो सोशल मीडिया पर लाइव आता था और कहता था मैंने 2000 लोगों को मारा है। अब गिनती भूल चुका हूं। नाम है अबू लूलू। सूडान के अलफाशर का । और अब वही शख्स हथकड़ी में है। 18 महीने की नाकेबंदी के बाद जब रैपिड सपोर्ट यानी कि आरएसएफ ने अलफाशर शहर पर कब्जा किया तो सूडान में एक ऐसी कहानी शुरू हुई जिसने पूरी दुनिया को झकझोड़ दिया।

एक ऐसी कहानी जिसमें मौत सिर्फ हथियार नहीं थी बल्कि एक शो एक लाइव परफॉर्मेंस बन चुकी थी। सूडान में चल रहे गृह लड़ाई के बीच एक चेहरा पूरी दुनिया में चर्चित हो चुका है। लंबे घुंघराले बाल, दाढ़ी वाला चेहरा और कैमरे के सामने ठंडी मुस्कान। यह है अबू लूलू।

असली नाम ब्रिगेडियर जनरल अल फतेह अब्दुल्ला इदरीस। लूलू आरएसएफ का कुख्यात चेहरा बन गया था। एक ऐसी मिलीशिया जो पिछले डेढ़ साल से सूडान की सेना एसएफ से लड़ रही है। लेकिन बीते गुरुवार को जब आरएसएफ ने उसकी हथकड़ी लगी तस्वीर जारी की तो पूरा सूडान सन रह गया।

26 अक्टूबर को अल्फाशर शहर पर आरएसएफ का कब्जा हुआ। 18 महीने तक शहर घेराबंदी में रहा और फिर जब सेना पीछे हटी तो नरसंहार शुरू हुआ। सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क के मुताबिक अब तक कम से कम 1500 नागरिकों की जान जा चुकी है। वीडियो सामने आए अबू लूलू बेखौफ होकर मासूम लोगों को मारता नजर आया। एक फुटेज में उसने एक रेस्टोरेंट मालिक से उसकी जाति पूछी।

जब उसने जवाब दिया मैं बर्टी जनजाति से हूं जो अरब नहीं है तो अबू लूलू ने गोली मार दी। उसके सामने उस आदमी की रहम की गुहार भी बेअसर रही। आई बैग यू। आई बैग यू। प्लीज प्लीज। अबू लूलू सिर्फ नहीं करता था। वो उन्हें कैमरे पर शूट करता था। कई बार टिकटोक लाइव पर आता और कहता मैंने 2000 लोगों को है। अब गिनती भूल गया हूं। कुछ लोग उसे हीरो कहते। कुछ लोग उसे रुकने की सलाह देते। लेकिन वह कैमरे के सामने और भी उग्र हो जाता। डॉक्टरों का मानना है कि अबू लूलू एक है जो को एक नुमाइश की तरह देखता है।

वो बिना वजह चलाता है। उसे लोगों को का सीन मजा देता है। अब दुनिया भर में आलोचना बढ़ी तो ने तुरंत बयान जारी किया कि अबू लूलू औपचारिक तौर से उसके संगठन का हिस्सा नहीं है। उनके एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वह हमारे साथ लड़ने वाले गठबंधन बल का नेता था। का सदस्य नहीं। लेकिन उसे उसके गुनाहों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।

के प्रवक्ता अल फतेह अल कुरैशी और कमांडर मोहम्मद हमदान डागालो दोनों ने अपराधों की जांच का वादा किया है। लेकिन मानवाधिकार संगठनों को इस दूरी बनाओ रणनीति पर भरोसा नहीं है। वो कहते हैं आरएसएफ बार-बार उन्हीं अपराधियों से खुद को अलग दिखाकर अपनी छवि बचाता रहा है।

अब जब अलफाशर नरसंहार के वीडियो सामने आए हैं तो संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय से अबू लूलू के अपराधों की जांच की मांग उठ रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह वीडियो खुद साफ सबूत हैं। यह युद्ध अपराध है। लेकिन पीड़ितों के परिवारों को अभी भी न्याय दूर दिखाई देता है। आज उड़ान की लड़ाई जारी है और अबू लूलू की मुस्कुराती तस्वीर हाथ में राइफल थामे देश की बर्बादी का प्रतीक बन चुकी है।

वो सिर्फ एक कातिल नहीं वो उस हिंसा का चेहरा है जो सत्ता, जाति और नफरत के नाम पर पूरे सूडान को लहूलुहान कर चुकी है। आपको बता दें कि आरएसएफ की जड़े 2000 के दशक में दारफुर लड़ाई तक जाती हैं। जब सूडान सरकार ने जंजावीद नाम की अरब मशिया बनाई उन्हीं पर , और जातीय सफाई के आरोप लगे। 2013 में राष्ट्रपति उमर अल बशीर ने इन्हीं जन जावेद को आरएसएफ के नाम से पुनर्गठित किया और कमांड सौंपी हेमदती को।

ने बाद में सोने की खदानों और विदेशी ठेकों से अपार आर्थिक ताकत हासिल की और अब जब 2023 में सेना और आरएसएफ में सत्ता संघर्ष छड़ा तो यही ताकत सूडान को गृह युद्ध में झोंक लाई। कभी टीकटोक पर लाइव आने वाला यह कातिल अब हथकड़ी में है। लेकिन सवाल अभी बाकी है।

क्या सूडान के जख्म भर पाएंगे या अल्फाशर का कसाई एक ऐसा नाम बन जाएगा जो आने वाली हर पीढ़ी को यह याद दिलाता रहेगा कि जब इंसान अपनी इंसानियत भूल जाता है तो कैमरे के सामने भी मरना एक नुमाइश बन जाती है।

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