दोस्तों पॉलिटिक्स में पिटे हुए प्यादों की कोई इज्जत नहीं होती। चुके हुए लोगों की कोई कीमत नहीं होती। अहंकार किसी का भी हो वो चूर हो ही जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ स्मृति ईरानी के साथ। याद कीजिए स्मृति ईरानी का वो अंदाज जब वो सदन में खड़े होकर सोनिया गांधी के लिए किस भाषा का इस्तेमाल कर रही थी। कैसे उन्हें ललकार रही थी? माफी मांगो इस देश से। माफी मांगो सोनिया गांधी।
जरा याद कीजिए जब स्मृति ईरानी पत्रकार को धमका रही थी। आप अगर मेरे क्षेत्र का अपमान करेंगे भैया तो मैं आपके मालिकाना उनको फोन करके कहूंगी पत्रकार को अधिकार नहीं क्षेत्र की जनता का अपमान करेंगे। नहीं मैं सर कोई भरत अग्रवाल जी है ना? नहीं कोई अपमान नहीं हो रहा है। मैं करूंगी फोन और कहूंगी। सलोन विधानसभा क्षेत्र अमेठी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। मेरी क्षेत्र की जनता का अपमान मत करिए। बड़ी रिपोर्टर। तब लोगों ने सोचा कि स्मृति ईरानी ताकतवर हैं। सत्ता उनके हाथ में है। वो जो चाहे बोले, जो चाहे करें। लेकिन दोस्तों, इंसान को हमेशा याद रखना चाहिए कि वक्त बदलता है। घड़ी की सुइयां घूमती हैं। वक्त घूमकर स्मृति ईरानी को ढाई दशक पीछे ले गया। लोग अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाते हैं।
लेकिन स्मृति ईरानी को बैक गियर लगाना पड़ गया है। स्मृति ईरानी जो भारतीय जनता पार्टी में बड़ी ताकतवर नेता हुआ करती थी। चुनाव हारने के बावजूद भी नरेंद्र मोदी ने उनको अपनी कैबिनेट में शामिल किया। मानव संसाधन सूचना प्रसारण और उसके साथ-साथ महिला और बाल्य कल्याण जैसे इतने महत्वपूर्ण मंत्रालय दे दिए। वो स्मृति ईरानी जब 2019 में चुनाव लड़ती हैं तो अमेठी में राहुल गांधी को चुनाव हरा देती हैं। कोई कहता है कि स्मृति ईरानी का कद अब बहुत ऊंचा हो गया है। कोई कहना शुरू कर देता है कि भाई अब तो स्मृति ईरानी उत्तर प्रदेश की होने वाली मुख्यमंत्री लग रही है।
लेकिन फिर 2024 आ जाता है। यही अहंकार था कि स्मृति के सामने भला कौन जीतेगा? मुझे कौन हरा पाएगा। अमेठी में कांग्रेस ने किशोरी लाल शर्मा को टिकट दे दिया। स्मृति ईरानी दो गुने अहंकार से भर गई कि जब राहुल गांधी को हरा दिया, तो किशोरी लाल शर्मा क्या चीज है। चुनाव के नतीजे सामने आए तो हर किसी के होश उड़ गए। किशोरी लाल शर्मा ने स्मृति ईरानी को हरा दिया। चुनाव में जीत हार की कोई बड़ी चीज नहीं है। कोई जीतेगा तो कोई हारेगा। जीत हार लगी रहती है। लेकिन जीत के बाद जो घमंड होता है ना वो हमेशा खतरनाक होता है।
यही स्मृति ईरानी के साथ हुआ। 2019 की जीत ने उनको असल जमीन से दूर कर दिया। 2024 में मिली हार के बाद स्मृति ईरानी इतना बौखला गई कि उन्होंने अमेठी जाना बंद कर दिया। अमेठी में अपने मकान तक में नहीं गई। एक हार ने उनको अमेठी तो छोड़ दीजिए दोस्तों दिल्ली भी छुड़वा दिया। अब स्मृति ईरानी मुंबई का टिकट कटवा कर मुंबई निकल गई हैं। इधर स्मृति ईरानी ने अमेठी से दूरी बनाई तो बीजेपी ने उनसे दूरी बना ली।
लोगों ने कहा कि दिल्ली की सीएम बना दी जाएंगी। बीजेपी की अध्यक्ष बना दी जाएंगी, राज्यसभा जाएंगी। लेकिन सब कपोल कल्पना ही रहा। स्मृति ईरानी को समझ में आ गया कि भैया राजनीति में उनका काम हो चुका है। अब कुछ नहीं मिलने वाला। ऐसे में उनको याद आई अपनी दोस्त, अपनी प्रिय सहेली एकता कपूर की और याद आया क्योंकि सास भी कभी-बहू थी। जिसमें वह तुलसी का किरदार निभा रही थी। आपको याद होगा ना?
हम साल 2000 था। तुलसी बन करके स्मृति ईरानी लोगों के घरों में पहुंच गई। अब एक बार फिर से वह सीरियल आ रहा है। ट्रेलर आ चुका है। यानी अब दोस्तों स्मृति ईरानी अपने पुराने काम पर लौट गई हैं। उनको समझ में आ गया है कि अब राजनीति में उनके लिए कुछ नहीं बचा है। इसीलिए उन्होंने सोचा कि एक्टिंग ही बेहतर काम है। यह नेतागिरी में अब क्या ही मिलना है। सियासत को छोड़कर सुनहरे पर्दे पर उनकी वापसी हो गई है।
