शाहरुख खान ने अपने जन्मदिन पे कहा कि रावण का सीक्वल आएगा अगर अनुभव चाहेंगे तो। उन्होंने बॉल ऐसे टॉप करके मेरी तरफ फेंक दी है। मैंने उसके बाद से शाहरुख से बात ही नहीं की है। क्योंकि अगर वो बात आगे निकल गई तो हम दोनों का काम हो जाएगा। दिल्ली में किसी भी जगह के छोले भटूरे खा लो अच्छे ही होंगे। इसी तरीके से लखनऊ में किसी भी जगह का आप मटन खा लीजिए अच्छा ही होगा। सलमान के साथ सलमान जैसी फिल्म बनानी पड़ेगी। हां। हां मतलब दीवार तोड़ के एंट्री जारी रहेगी। हां। लव स्टोरी बनाऊंगा।
शाहरुख के साथ बनाऊंगा नहीं तो नहीं बनाऊंगा। मतलब प्यार करना जितना अच्छा उस आदमी को आता है उतना किसी को नहीं आता। फील किया आपने कि दूसरे तरह के रोल्स के ऑफर्स थोड़े कम आते हैं। अब मुझे ऐसा लगता है कि इंडस्ट्री में हम लोग बस वेट ही कर रहे होते हैं कि ये एक दो फिल्में करें और जल्दी से इसको इस बक्से में डाल देते हैं कि ये इस तरह की हीरोइन है। तो वो रिस्क से ही पूरा करियर बना लिया मैंने अपना।
सिनेमा में क्या समझ बेहतर हुई सेक्सुअल जिसको रेप सीन कहा जाता है। सेक्सुअल असॉल्ट के सीन किस तरह से शूट किए जाए, किस तरह से लिखे जाएं। मैंने शूटिंग की है बिना लड़की के। तो वो एक्चुअली आपके इमेजिनेशन पे छोड़ दिया गया है कि आप कितना घिनौना इसको समझते हैं उतना घिनौना आपको दिखाई देगा। अदरवाइज उस पूरे सीन में लड़की नहीं है। आप तैयार होकर आते हैं शूट पर, सेट पर और आपसे कहा जाता है कि यू आर नॉट गुड इनफ। जाइए और चेंज करके आइए। जनरली अगर लड़की को ग्लैमरस दिखाना हो तो वो एक मेल गेज से ग्लैमरस दिखाना होता है। उसको आप थोड़ा सा फ्लिप कर दीजिए तो वो सेम समस्याएं मर्दों के साथ भी है। वो इसलिए भी होता है अगर आप लॉजिकली सोचे तो कि ज्यादातर ये डिसीजन कि ये पिक्चर देखी जानी चाहिए कि नहीं देखी जानी चाहिए।
एक आदमी लेता है शाहरुख का, सलमान का, किसी का आप सिक्स पैक शूट कर रहे हैं। वो शर्ट उतार के आया है और थोड़ा सा यहां पे लव हैंडल बचा हुआ है। तो आप जाते हैं और बोलते हैं शाहरुख इधर टर्न नहीं करना। दिखेगा। सो ये बातें मर्दों से भी होती है। अब मैं रैपिड फायर नहीं पूछूंगा आपसे। आपको इस देश में रहना है। कैसा रहा लखनऊ? लखनऊ में आके कुछ लखनऊ का फ्लेवर तापसी ने अभी तक लिया? मैं लखनऊ में लगता है दिल्ली से ज्यादा जा रही हूं आजकल। जी पिछले हफ्ते भी आप थी। जी बिल्कुल और उस दिन मैंने ब्रेकफास्ट लेके ब्रेकफास्ट से लेके डिनर तक मतलब मेन्यू में जितने भी प्रकार के मटन के डिशेस थे सब खा लिए थे।
तो अभी तो मैं आई यहां तो लिटरली ऐसा ही है। आज तो मैं एयरपोर्ट से बस कपड़े बदल के यहां पहुंच गई हूं। तो अभी इतना समय नहीं मिल पाया है। बट लखनऊ आना मेरा होता है मैं और किसी भी जगह क्योंकि मैं नॉन वेजिटेरियन हूं तो किसी भी जगह मैं मटन नहीं खाती हूं और सिवाय लखनऊ के ना दिल्ली में भी नहीं खाती हूं। तो इसलिए यहां पे आने के बाद मेरा फिक्स्ड एक रहता ही है कि ये मील तो होगी। तो उसमें कहीं का मतलब कालिका का मटन या कहीं का किसका? कालिका का बड़ा मशहूर है। नहीं जरूरी नहीं है। एक्चुअली काफी जगह है यहां पे। जैसे मेरा मानना है कि जैसे फॉर एग्जांपल क्योंकि दिल्ली की हूं तो वहां वहां का एग्जांपल देती हूं। कहते हैं छोले भटूरे अच्छे हैं। कहां के छोले भटूरे अच्छे हैं? दिल्ली में किसी भी जगह के छोले भटूरे खा लो अच्छे ही होंगे। इसी तरीके से लखनऊ में किसी भी जगह का आप मटन खा लीजिए अच्छा ही होगा।
अनुभव से उत्तर प्रदेश पर मैं क्या पूछूं? ये तो यहीं के हैं। थोड़ा सा फिल्म के बारे में 80 का ट्रेलर मैंने देखा। फिल्म आपकी आ गई है। आज उसका तीसरा दिन है और वो सफल हो। ऐसी शुभकामनाएं आपको। अ इस फिल्म को ना कहा गया एक अर्जेंट वॉच है ये। ये एक फिल्म के प्रमोशन के साथ ये लाइन नथी करने की वजह क्या थी? क्यों आपको ये लगा कि ये एक अर्जेंट वॉच है भारत के लिए लोगों के लिए देखना तुरंत जरूरी है। वो एक आंकड़ा है कि हर 20 मिनट पे महिला वायलेट होती है इस देश में। तो जितने 20 मिनट होंगे इस विषय पर बातचीत उतनी डिले हो जाएगी। मतलब यह बातचीत हम खत्म करते करते महिलाएं कहीं पीड़िताओं में परिवर्तित हो चुकी होंगी। तो इसलिए मुझे ऐसा लगा कि इस बारे में जल्दी जितनी जल्दी बात करनी शुरू की जाए उतना अर्जेंट वॉच लिख दिया। अ तो आपसे एक बात और है। मतलब आपको कोई अनुभव का सीक्रेट पता है क्या? या ऐसा उल्टा भी हो सकता है ना जी अगर आप हमारे दोबारादबारा काम करने के बारे में पूछना चाहते हैं तो दो रीज़न होते हैं। एक तो के लग रहा है जब साथ में काम करते हैं उसका रिजल्ट अच्छा रहता है। और मोस्टेंटली ये कि एक दूसरे के साथ काम करना आसान लगता है एट मतलब एट अ ह्यूमन लेवल एक प्रोफेशनल के लेवल पे। एक दूसरे को जानते इतना है कि समझ में आ जाता है कि ये मतलब मैंने मुझे नहीं लगता मुल्क के बाद बाकी जो दो स्क्रिप्ट्स थी वो पढ़ी थी हां या ना बोलने के लिए कभी क्योंकि मुझे पता था तब तक इतना तो जान चुके थे कि सर क्या लिख सकते हैं। एंड आई थिंक बिकॉज़ ये अपनी खुद की पिक्चरें खुद लिखते हैं। तो शायद ये भी उसी तरीके से उसी तरीके से सोचते होंगे कि ये क्या कर सकती है। उसके उसको मद्देनजर रखते हुए शायद कैरेक्टर में कुछ चीजें डालते भी होंगे एज अ राइटर। सो आई थिंक ये जो तालमेल है वो दोनों तरीके से बिफोर द रिजल्ट एंड आफ्टर द रिजल्ट शायद अच्छा बैठ रहा है। इस वजह से दोबारादबारा काम करने का मौका मिल रहा है। अनुभव आपने और गौरव सोलंकी ने साथ मिलकर के फिल्म लिखी है।
इसके पहले आर्टिकल 15 भी आप दोनों ने मिलकर के लिखी। इस फिल्म के रिलीज से पहले जो बात बड़ी सुर्खियों में रही, चर्चा में रही और लिखने वाले लोगों ने उसमें बड़ा मान खोजा कि साहब बॉलीवुड के देखिए ये दिन आए हैं। बड़ी खुशी की बात है कि एक फिल्म के सेट पे जो हाईएस्ट पेड क्रू है वो उस फिल्म का राइटर है। गौरव ने सबसे ज्यादा पैसे लिए इसके लिए। हां माना नहीं वो। नहीं वो एक्चुअली ऐसा नहीं था। इतना भी अच्छा समय नहीं आया है कि यह तय कर लिया जाए कि सबसे ज्यादा पैसे राइटर को दिए जाएंगे। जब फिल्म बनानी शुरू की तो ऐसा लग रहा था कि इसका बजट इतना होगा। उस हिसाब से गौरव की फीस तय हुई। फिर ऐसा लगा कि नहीं इतने पैसे नहीं खर्च कर सकते। तो गौरव की फीस बदली नहीं गई। और बाकी लोगों की फीस नए बजट के हिसाब से तय हुई। तो बहुत अंत में यह रियलाइज हुआ कि सब ज्यादा पैसे तो गौरव को दिए गए हैं। तो मैंने कहा इसको सेलिब्रेट करना चाहिए। या तो उससे पैसे वापस ले लें थोड़े से या इसको सेलिब्रेट करें।
तो हमने दूसरा रास्ता चुना। ये फिल्म बहुत एक सेंसिटिव मुद्दे पर है। 80 इसका नाम इसलिए मतलब ये भी एक इत्तेफाक है कि आप बनारस से हैं। बनारस मीडिया वर्क्स आपकी कंपनी का नाम है और इस फिल्म का नाम 80 है। इसका 80 घाट से कोई लेना देना नहीं है। पर हर 80 मिनट में एक रेप हर 80 यही है ना उसमें नहीं दिन में 80 रेप दिन में 80 रेप होते हैं और मैं 80 घाट के पास का रहने वाला भी हूं। जी अ तो आपसे ये जो फिल्म है फिल्मों की चॉइस के नजरिए से मैं कह रहा हूं। हर फिल्म सोशल मैसेज वाली आपने ज्यादातर फिल्में की हैं।
इसके साथ एक ना बॉलीवुड में एक जोखिम आता है टाइप कास्ट हो जाने का और अ आई नो मतलब ये बहुत सम्मान से देखे जाने वाली बात है कि यार तापसी थप्पड़ जैसी फिल्में करती है। ताप्सी कोर्ट में आर्ग्यू कर रही है। जरूरी नहीं है कि ताप्सी किसी हीरो के अगेंस्ट एक सो कॉल्ड गर्लिश छवि की हीरोइन की भूमिका जिसमें उसका काम एक रोमांटिक पार्टनर का ही होना तय किया गया है उसमें नहीं है। बट ये क्या किसी तरह की लिमिटेशंस लेके आता है प्रोफेशन में? जी देखिए बचपन से कहानियां सुनते आए हैं सारे। फिल्म्स क्या है? कहानियां आई हैं। मैं हमेशा मेरे लिए इंटरप्रिटेशन ये होती थी कहानी की कि कुछ भी कहानी सुनते थे बचपन में। अब पूछा जाता था इसका सार क्या है? आप इससे क्या सीख मिलती है आपको? तो सारे टाइम व्हाइल ग्रोइंग अप आप कह सकते हैं।
हम सब ने अपने-अपने स्कूलों में कहानियां सुनी है और उसका सार समझा है। आई थिंक यही लॉजिक से मैंने जो कहानियां मेरे पास आ रही थी। तो ज्यादातर उनका सार समझ में आता था। क्योंकि मेरे लिए कहानी मतलब उसका सार होगा। हालांकि हां ऐसी कहानियां भी हैं यहां पे जो जिनमें सार नहीं होता कुछ बट मेरे लिए कहानी के साथ सार होना इज अ इज़ अ नेचुरल नॉर्मल थिंग। सार ना होना इज़ स्लाइटली इन एक्सेप्शन फॉर मी। ऐसा मुझे लगता था कहानी का मतलब होता है। इसलिए ऐसे कभी अलग से नहीं सोचा कि मैंने सिर्फ सार वाली कहानियां ही उठाऊंगी।
मुझे लगता है कि मैंने किसी भी तरह की कहानी करी है। उसका कोई ना कोई आप टेक अवे कुछ सार लेके जाएंगे घर और ये ऐसा करने का जी टाइप कास्ट तो भाई मुझे ऐसा लगता है कि इंडस्ट्री में हम लोग बस वेट ही कर रहे होते हैं कि ये एक दो फिल्में करें और जल्दी से इसको इस बक्से में डाल देते हैं कि ये इस तरह की हीरोइन है। ये जल्दी से एक दो पिक्चरें करके ये यही काम करेगी। उस वो उस उसकी अर्जेंसी बहुत रहती ही है यहां पे ताकि हमारे को ज्यादा अनप्रिडिक्टेबिलिटी झेलनी ना पड़े कि अच्छा पता ही नहीं है इंसान किस तरह की पिक्चर कर जाएगा अगला। उससे सेफ रहे इसलिए जल्दी से बक्से में डाल दिया। ऐसा फील किया आपने कि दूसरे तरह के रोल्स के ऑफर्स थोड़े कम आते हैं। जी हां, पहले भी कम आते थे।
मतलब मैंने तो खैर मेरी शुरुआत ही काफी इस तरीके से हुई थी इंडस्ट्री में कि उनको स्टार्टिंग से ही लगने लग गया था कि ये बेबी पिंक वगैरह करके आई है तो ये तो वो करेगी नहीं पिक्चरें जिसके अंदर कुछ मतलब की बात नहीं होगी किरदार में तो वो ठीक है ये वाली टाइप कास्ट तो मतलब मैं खुश हूं एक्चुअली मैं तो हमेशा कहती हूं कि कितनी एक्ट्रेसेस आती हैं चली जाती हैं जिनका कोई जिनकी कोई इमेज कोई रिकॉल वैल्यू जिसको कहते हैं ना होती ही नहीं है। मैं खुश हूं कि मेरी कुछ तो है। मुझे कोई इससे आपत्ति नहीं है और हां वो होता है कि इन द बार्गेन आपके पास वो पिक्चरें नहीं आती जो आप आपको एक कहते हैं ना बड़ी हीरोइन का टैग जिससे आसानी से मिल जाता है कि आप बड़ी फिल्म की बड़ी बजट फिल्म की एक बड़े हीरो के साथ एक फिल्म कर रही हैं जिसके अंदर चाहे आप जो भी कर रही हो आप उस फिल्म का हिस्सा हैं ।
वही बहुत बड़ी बात है और आपकी पदवी जो है वो ऊपर ऊंची हो जाती है वो फिल्म करने से वो वाली पिक्चरें नहीं आती मेरे पास ज्यादा ज्यादा और मुझे सोचा भी नहीं जाता उनके लिए यही सोच के कि यह वाली फिल्में तो यह करेगी नहीं।
मतलब आप मुझे देखिए अगर मुझे शाहरुख खान के साथ काम करने का मौका मिला तो भी उस पिक्चर में मिला जिसमें एक बहुत अच्छा किरदार था। ऐसा नहीं था कि मैं सिर्फ हीरोइन बनने के लिए उस पिक्चर में हूं। राजकुमार हिरानी जैसे डायरेक्टर थे जो इतने क्लियर थे फ्रॉम द बिगनिंग कि उनको मैं ही चाहिए हूं। क्योंकि उन वरना उनके पास ऑप्शंस की कोई कमी नहीं थी। तो मेरे लिए एक एक्सेप्शनल रोल्स ऐसे कभी-कभी हो जाते हैं। बट ज्यादातर वही फिल्में मेरे पास आती हैं जिसके अंदर इनको लगता है कि कोई और नहीं करेगा। रिस्की है ये। ये वाली पिक्चर रिस्की है या कैरेक्टर रिस्की है। ये कोई और हीरोइन नहीं करेगी। डरते हैं लोग ये करने से। तो इसके पास चले जाते हैं। ये कर लेगी। तो वो रिस्क से ही पूरा करियर बना लिया मैंने अपना। वेल सेट। अनुभव सेक्सुअल असॉल्ट का एक सीन है इस फिल्म में। मैंने फिल्म नहीं देखी पर हमारे साथी ललिन टॉप के श्वेता वो फिल्म देख के आए और मुझसे उन्होंने उस सीन के बारे में खासतौर से बात की कि बहुत देखना मुश्किल है। आप लगातार स्क्रीन की ओर देखेंगे नहीं। आप अपनी आंखें हटाने की कोशिश करेंगे।
हमारी इंडस्ट्री वहां से चली थी जहां सीन एक शब्द होता था जिसको नॉर्मलाइज किया गया था कि फिल्म में जैसे एक गाना होना चाहिए चार गाने होने चाहिए एक विलेन होना चाहिए एक कॉमेडी करने वाला व्यक्ति होना चाहिए ऐसे ही एक रेप सीन होना चाहिए वहां से आकर के अब हम l सीन को एक उसके लगभग जितना घिनौनापन उसमें शामिल रहा होगा उसी घिनौनेपन के साथ दर्शाने तक आए हैं अ पर इररिवर्सिबल एक फिल्म है ना उसमें भी एक सिमिलर दृश्य है जो देखा नहीं जाता पर सीन को लेकर के सिनेमा में समझ मतलब आप इस तरह की फिल्में बनाते हैं तो आप कर ले गए बट एक ओवरऑल सिनेमा में क्या समझ बेहतर हुई है जिसको सीन कहा जाता है के सीन किस तरह से शूट किए जाएं किस तरह से पर्सव किस तरह से लिखे जाएं इसको लेकर क्या डू यू बिलीव के हम बेहतर की ओर बढ़ रहे उसमें मुझे पता नहीं मैंने कभी शूट किया नहीं था रेप सीन पहले तो मैं बहुत परेशान था कि इसको कैसे शूट करूंगा क्योंकि जब आप एक सीन शूट करते हैं तो एक महिला होती है उसमें और जब सीन होता है तो उसमें स्किन दिखने का चांस होता है और वो कब एक घिनौने कृत की बजाय एक वस्टिक कृत में बदल जाए बदल जाएगा वो मैं बहुत परेश शांत था और आप यकीन नहीं मानेंगे कि जिस सीन को आपके कलीग ने डिस्क्राइब किया कि देखा नहीं जाता उस पूरे सीन में लड़की दिखती नहीं है। एक बार भी लड़की का हाथ पैर लड़की ही नहीं है।
मैंने शूटिंग की है बिना लड़की के। तो वो एक्चुअली आपके इमेजिनेशन पे छोड़ दिया गया है कि आप कितना घिनौना इसको समझते हैं। उतना घिनौना आपको दिखाई देगा। अदरवाइज उस पूरे सीन में लड़की नहीं है तो वो उसकी थोड़ी सी लिखाई में अभी बड़ा अजीब लगेगा सुन के आप देखेंगे तो समझेंगे आप आंख बंद भी कर लेंगे ना तो भी आपको सुनाई देता रहेगा और इतना ही घिनौना होना चाहिए जितना वो है हमकि अब नॉर्मलाइज हो गए हैं पढ़ते हैं उसकी खबर और उससे आगे निकल जाते हैं उसके बारे में सोचते भी नहीं इतनी आदत हो गई है तो मेरी कोशिश ये थी कि आप आइंदा कभी इस बारे में सुने तो आपको घिन आए अगर आपने फिल्म देखी है तो तापसी इसी इसी मिजाज का सवाल है कि मेल गेज एक प्रॉब्लम है ना मतलब पूरे समाज में है सिनेमा में काम करते हुए शूट करते हुए स्पेशली वो प्रॉब्लम आप फेस करती हैं मतलब मैं इस फिल्म की बात नहीं कर रहा इन जनरल अपने करियर में आपने अ दक्षिण भारत की फिल्मों में काम किया है। हिंदी बहुत सारी फिल्मों में काम किया है। ऐसा आपने अभी जैसे नीना गुप्ता ने एक पॉडकास्ट में ये बात कही के अ आप तैयार होकर आते हैं शूट पर, सेट पर और आपसे कहा जाता है कि यू आर नॉट गुड इनफ।
जाइए और चेंज करके आइए। है ना? इशारों में बात कही जाती है। वो आपने फील किया हिंदी फिल्मों में या दक्षिण की फिल्म स्ट्रेंजली उसी पडकास्ट पे उनके इंटरव्यू के बाद मुझसे भी यह सवाल पूछा गया था। यही रेफरेंस उनका उनके जवाब का देके तो मैंने उनको उस जवाब में इतना कहा था कि ये कोई इंडस्ट्री की बात नहीं है कि यहां हिंदी इंडस्ट्री में ऐसा हुआ था उनके साथ क्योंकि हिंदी में हुआ था ऐसा। तो मैंने कहा ये तो मेरे साथ भी हो चुका है क्योंकि मैंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के अंदर इस तरह की फिल्में नहीं करी हैं जिसमें ऐसा कुछ मुझे बदल के आना पड़े कि मैं अलग फिजिकली अलग दिखूं बट साउथ में मैंने इस तरह की ग्लैमरस फिल्में करी हैं। तो मैंने कहा मेरे को वहां पे बोला गया था। सेम वही चीज वही बातें जो नीना जी को यहां हिंदी में बोली गई थी। तो मुझे नहीं लगता कि ये कोई डीमारकेशन है कि एक स्पेसिफिक तरह की इंडस्ट्री में ऐसा होता है। इट्स जनरली इन इन आवर इंडस्ट्री आवर कंट्रीज इंडस्ट्री एटलीस्ट क्योंकि मैंने हॉलीवुड में काम नहीं किया है मुझे नहीं पता। अ जनरली अगर लड़की को ग्लैमरस दिखाना हो तो वो एक मेल गेज से ग्लैमरस दिखाना होता है। अब उसका मतलब ये वो इसलिए भी होता है अगर आप लॉजिकली सोचे तो कि ज्यादातर ये डिसीजन कि ये पिक्चर देखी जानी चाहिए कि नहीं देखी जानी चाहिए। एक आदमी लेता है घर में। तो जो डिसाइड करेगा और जो पैसे लगा रहा है टिकट खरीदने में उसी की गज को कैटर किया जाता है इन मेजोरिटी।
तो इस वजह से उसको क्या ग्लैमरस लगता है और उसको क्या देखना पसंद है उसके हिसाब से फिल्में बनती हैं। तो ये सिंपल लॉजिक है इसका। अब ये सही है गलत है वो तो ऑब्वियसली टू ईच देयर ओन। क्या उनको लगता है क्या सही है क्या गलत है बट ये लॉजिकली इसीलिए होता है जिस दिन ऐसा होगा ना कि औरतें डिसीजन लेंगी के अच्छा मुझे ये चीज में कोई ग्लैमर नहीं दिख रहा है मेरे लिए कुछ ग्लैमर का मतलब और होता है और मैं भी कमाती हूं या मैं भी डिसाइड कर सकती हूं कि कौन सी पिक्चर देखनी है तो शायद ये गेस बदल जाएगी क्योंकि हमारी ऑडियंस बदल जाएगी तब तक जब तक नहीं होता तब तक ऐसे ही चलेगा और ये एक्चुअली वर्ड्स बदल गए होंगे होंगे बट एक्सपेक्टेशन आज भी वही है। वर्ड्स शायद तरीका उसको डील करने का क्या बोले? कैसे बोले एक्टर को वो बदल गया होगा। मतलब आई नो बट थोड़ा अगर आप बता सके उदाहरण से जैसे इशारे किस तरह से इशारों में क्या इशारे नहीं होते अब। अब अब एक्चुअली एवरीबडी इज वेल वर्डेड। अच्छे शब्दों में मतलब एक इस तरीके से कि आपको एकदम सेम बात को अगर थोड़े समझा के इस तरीके से बताया जाए कि नहीं ये वाला लुक चाहिए इसके अंदर तो समझ जाते हैं इंसान। अब ऑब्वियसली अगर सेट पे एक दो ही औरतें हैं बाकी नहीं है तो उस सेट पे थोड़ा सा एंबरेसिंग लग सकता है अगर सही शब्द ना यूज़ हो। और एक सेट ज्यादातर आजकल तो हो गया है। काफी लड़कियां होती हैं एटलीस्ट मैंने देखा है हिंदी फिल्म्स के अंदर डेटली काफी लड़कियां होती हैं सेट पे यूजुअली तो उसको एंबरेसमेंट की तरह इतना नहीं देखा जाता बट ये बात तो फिर भी बोली जाती है बेहतर शब्दों में बट बात तो फिर भी यही एक्सपेक्टेड तो फिर भी यही है कि आप इस तरह की दिखेंगी तो वो चीज जो है वो ग्लैमरस मानी जाएगी नहीं तो नहीं तो वैसे तो बदला नहीं है बस शब्द बदल गए हैं अ तापसी आपसे ही है ये सवाल भी कि जैसे आप आपने कमाल की फिल्मों की चॉइस जो रही आपकी जो अनुभव के साथ खासतौर से किए है ना मुल्क थप्पड़ उसके पहले पिंक अब ये फिल्में अ आपको बतौर इंसान भी बदलती ही होंगी। जैसे मैं कोई एक प्रोजेक्ट उठाता हूं अपने काम का। वो प्रोजेक्ट मुझे थोड़ा सा बदलता है। कितना क्या किस स्तर पर वो एक अलग बात है। पर इन फिल्मों का जो सार है इन सारी ही फिल्मों का उसने आपके अंदर जो इजाफा किया है क्या वो अ ज्यादा क्रिटिकल अब आप मेन स्ट्रीम बॉलीवुड सिनेमा के लिए हो गई हैं। उस वजह से हो सकती हैं। मतलब कि प्रॉब्लम्स को बेहतर आइडेंटिफाई कर पाती हैं। आपके यू नो ये भी गलत है। ये ठीक नहीं हो रहा है। इसको कहते हैं ना कि आप आइडियोलॉजिकली थोड़ा सा ओपिनियनेटेड ज्यादा हो गई हैं।
मैं उसको अच्छे और बुरे के तौर पर नहीं कह रहा हूं कि होना चाहिए या नहीं होना चाहिए। कोई बुराई नहीं ओपिनिएटेड होने में। बट डू यू बिलीव कि उस उन फिल्मों का उसमें रोल रहा और उन्होंने आपको इस तरह से प्रभावित किया। एक्चुअली मैंने दोनों को कनेक्ट करके नहीं सोचा। मुझे लगता है मेरे मेरी समझ में जो इजाफा होता है वो तब हुआ जब मैं खुद मैं घर से बाहर निकल के काम करने लगी पैसे कमाने लगी तो चीजें मुझे जो चीजें घर में शील्ड हो जाती हैं कई कबभार आपके घर वाले शील्ड कर देते हैं आपको डायरेक्ट ओपिनियंस आसपास के लोगों के पता नहीं चलते जब खुद कमाने निकलते हो तो आपको डायरेक्टली समझ में आता है कोई आपके कोई क्या चीज़ एक्सपेक्ट कर रहा है किस तरीके का बिहेवियर से क्या होता है तो आई थिंक वो धीरे-धीरे समझ काम करके आने लगी वो भी क्योंकि मैं अकेले गई थी बिना किसी सपोर्ट सिस्टम के घर वाला कोई साथ नहीं गया था मेरे जब मैं साउथ में काम करने गई थी फिर बॉम्बे आई तो वो काफी चीजें जो है वो डायरेक्टली डील करनी पड़ी तो ओपिनियंस एक्सपीरियंसेस होते गए एक्सपीरियंस की वजह से ओपिनियन बनते गए फिल्मों का जो चयन है वो इनसे डायरेक्टली रिलेटेड इसलिए नहीं है क्योंकि जब भी ये फिल्में मेरे पास आई थी मुझे लगता था कि यार हां इस बात पे फिल्म बनी नहीं है कोई और मैं देखना पसंद करूंगी इस तरह की फिल्म पैसे लगा के तो ये सोच के मैंने वो फिल्में चूज़ करी। अब उसका इंपैक्ट आउटपुट जो आउटपुट होता है ऑब्वियसली कुछ हर फिल्म से आपको कुछ सीखने को मिलता है। मेरे को नहीं लगता कि मैं सेम इंसान रहती हूं फिल्म खत्म होने के बाद। मैं हमेशा थोड़ी-थोड़ी बदल जाती हूं। मे बी इसलिए क्योंकि आपने 30-40 दिन 45 दिन वो किरदार जिया है 12-12 घंटे रोज। तो आप थोड़ा बहुत आपके अंदर कुछ बदल जाता है। कभी अच्छे के लिए कभी बुरे के लिए। अह मुझे लगता है कि थोड़ी सी तो मैं बदल जाती हूं, बट ओपिनियंस मेरे बड़े सॉलिड बन या बिगड़ नहीं जाते। आई डोंट थिंक मैं पहली बात तो मैं लेती ही नहीं हूं पिक्चर अगर मेरा ओपिनियन उस फिल्म के ओपिनियन से मैच नहीं होता। आइडियोलॉजिकली जिसको बोलते हैं। उस स्तर पे एटलीस्ट मेरा ओपिनियन मैच होना चाहिए फिल्म से करने के लिए एट फर्स्ट प्लेस। उसके बाद मैं किस तरह के इंसान बन के निकलती हूं वो इतना डिफरेंस नहीं होगा कि मैं पहले इस बात पे विश्वास नहीं करती थी। सडनली मेरे को ये बातें दिखने लग गई। ऐसा नहीं होता। ठीक। अ अनुभव अ बहुत लोगों ने पूछा होगा बट शाहरुख खान ने अपने जन्मदिन पे कहा कि रावण का सीक्वल आएगा अगर अनुभव चाहेंगे तो। उन्होंने बॉल ऐसे टपक करके मेरी तरफ फेंक दी है। वो क्या है कि वो हम दोनों के लिए थोड़ा मुश्किल फिल्म है। क्योंकि हम दोनों को दो-दो तीन-तीन साल अपने जीवन के उसमें इन्वेस्ट करने पड़ेंगे। और इस वक्त खान साहब भी बहुत रफ्तार में है और मैं भी ठीक-ठाक रफ्तार में चल रहा हूं। तो अचानक एक दिन इस सबसे इजेक्ट करना पड़ेगा और दो से तीन साल कम से कम हम दोनों के जीवन के जाएंगे। इतना समय क्यों जाएगा मतलब अच्छा पूरा ये फिल्मों को शूट करने में टाइम लगता है बहुत ज्यादा। नहीं मतलब अच्छा आप कहानी से लेकर के कहानी से नहीं बात कर रहा हूं। इसकी जो वीएफएक्स फिल्में होती है ना जैसे पहली जो बनाई थी उसमें भी उसमें तो पांच छ साल लग गए थे पांच साल लग गए थे तो अब दो साल तो कम से कम लगेंगे जब फुल्ली डेडिकेटेड होके वो काम करना पड़ेगा तो कहानियां तो बहुत है। मैं सोच रहा हूं कि अभी ये शूट रिलीज का काम खत्म हो गया है। मैंने सोचा एक लिख डालता हूं।
मेरे दिमाग में बहुत सारी हैं। खुद ही सोचता हूं कि अच्छी बनी क्या? फिर तय करेंगे कि बना दी जाए या नहीं बना दी जाए। मैंने उसके बाद से शाहरुख से बात ही नहीं की है। क्योंकि अगर वो बात आगे निकल गई तो हम दोनों का काम हो जाएगा। आपने एलन टॉप के इंटरव्यू में ना सलमान खान को दुनिया का सबसे खूबसूरत आदमी कहा था। तो उनके साथ अगर आप कोई फिल्म प्लान करें तो उसका वो किस जॉनर की होगी? मतलब सलमान को आप अगर अपनी फिल्म में लेंगे तो उसका जॉनर क्या होगा? किस तरह की फिल्म होगी लगभग आप कुछ इमेजिन करते हैं? नहीं एक बीच में एक दौर था 2000 दो तीन में जब मैं और सलमान काफी मिले थे और ऐसी हम लोग दोनों कोशिश कर रहे थे कि एक फिल्म बनाएं पर वो हुई नहीं है। उस जमाने में सलमान के साथ सलमान जैसी फिल्म बनानी पड़ेगी। हां मतलब मैं सलमान को मेकओवर करने की कोई कोशिश नहीं करूंगा अगर मैं सलमान के साथ कोई फिल्म करूं तो। क्योंकि वो एक इतना प्यारा इन लोगों का सितारा है सबका के नाम आते ही ताली बजने लगती है।
तो भाईजान को भाईजान ही रहना चाहिए। दीवार तोड़ के एंट्री जारी रहेगी। हां हाई स्पीड में वो जो आप लोगों ने एक बात की थी उसमें मेरा थोड़ा सा हस्तक्षेप है। अगर आप इजाजत दें तो मैं करूं जो आपने मेल गेस की बात करी। वो एक कुछ फिल्में होती है। हम लोग अक्सर फिल्म इंडस्ट्री को ऐसे बात करते हैं। हम ही पसंद करते हैं उन चीजों को जब हीरोइन खूबसूरत लग रही होती है और हम ही उसको मेल गेज और उस तरह की बातें करते हैं। कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिसमें हीरो या हीरोइन या दोनों ऑब्जेक्टिफाई होते हैं। तो जब वो हिस्सा शूट हो रहा होता है ना तो थोड़ा क्रूल होता है कि मान लीजिए शाहरुख का सलमान का किसी का आप सिक्स पैक शूट कर रहे हैं। वो शर्ट उतार के आया है और थोड़ा सा यहां पे लव हैंडल बचा हुआ है। तो आप जाते हैं और बोलते हैं कि मेरा टर्न नहीं करना क्योंकि वो दिखेगा। तो ये बातें मर्दों से भी होती हैं। डिपेंड करता है कि आप क्या कर रहे हैं। जब हम हस्ती शूट करते हैं तो तापसी ने क्या पहना है? उसका शरीर कैसा दिख रहा है?
उस पर कोई बातचीत कभी होगी नहीं। उस प्रकार की फिल्मों में मर्दों से भी बातचीत इस प्रकार की होती है। अब अगर आप उसी बातचीत को मद से भी अच्छे तरीके से ना करें तो वो गंदा लग सकता है कि पेट दिख रहा है तेरा तरफ पेट दिख रहा है। ऐसे नहीं बोलते अपन अपन बोलते हैं कि हां थोड़ा संभालना ही है। वैसे ही महिलाओं से बोला जाता है। अब इसके अंदर भी नोस है दोनों तरह से और शायद उस नोस की बात होती है। मुझे थोड़ी आपत्ति हुई आप लोगों की वार्ता में क्योंकि इट वास साउंडिंग अ लिटिल जेनेरिक। इट्स नॉट दैट जेरिक। ठीक है? मतलब वो जो इंडस्ट्री है उस उसके तमाम आधार हैं। तमाम कॉम्पोनेंट्स हैं। जिसमें एक बड़ा कॉम्पोनेंट है मेल गेज। तो और वो शूटिंग के दौरान पुरुष कलाकारों को भी ये झेलना पड़ता होगा देखना पड़ता होगा झेलना शायद गलत शब्द है कि भाई चेंज कर लो ऐसे नहीं लग रहे हो पर कोई गाना या आइटम नंबर जो आता है वो बनाया डिजाइन उसकी जो टारगेट ऑडियंस है वो पुरुष ही है तो हम हम ओ ओ जाने जाना ढूंढे तुझे दीवाना नहीं नहीं एक्सेप्शनंस हमेशा नहीं नहीं नहीं और जहां तक आप बात कर रहे हैं मेल गेज बॉलीवुड में पत्रकारिता में पहली महिला एडिटर कब हुई है? जरा ढूंढ लीजिएगा। नहीं नहीं आप ये बात सही है कि पूरा समाज मेल गेस का शिकार है।
वही वही 5000 सालों से तो वो यहां क्या हो गया है? बॉलीवुड के बारे में कुछ पॉपुलर क्रिटिसिज्म है और उसका कोई बेसिस नहीं है। उसका कोई उसकी कोई बहुत सदी हुई स्पाइन नहीं है। उसको आप थोड़ा सा फ्लिप कर दीजिए तो वो सेफ समस्याएं मर्दों के साथ नहीं है। लेकिन इट हैज़ बिकम वेरी पॉपुलर टू से के जैसे इससे अलग हट के बात करता हूं के आजकल लोग थिएटर में नहीं जा रहे हैं। तो 1000 करोड़ का बिज़नेस कैसे हो गया? खूब जा रहे हैं थिएटर में। पर आप अक्सर आप लोगों को ये बात करते हुए पाएंगे कि लोग थिएटर नहीं जा रहे, लोग थिएटर नहीं जा रहे हैं। वैसे ही ये बातें बॉलीवुड के बारे में बहुत ज्यादा होती है। पहले समाज में महिलाओं की स्थिति क्या थी और आज क्या है उसमें भी फर्क है। सिमिलरली बॉलीवुड भी समाज का हिस्सा ही है ना। उससे अलग थोड़ी है। इस बातचीत का आखिरी हिस्सा जिसको हम कहते हैं नहीं नहीं। अब मैं रैपिड फायर नहीं पूछूंगा आपसे। आपको इस देश में रहना है। सेलेक्ट कॉन्वर्सेशन एक-एक सवाल आप दोनों से वो ये है कि हमारे स्पोंसरर की तरफ से ये सेगमेंट स्पों्सर्ड है। तो उसमें सवाल ये है कि सवाल हमारे अपने हैं। आप तापसी अवेयर रहने के लिए अपडेटेड खुद को रखने के लिए क्या-क्या कंज्यूम करते हैं? मतलब पडकास्ट सुनते हैं, अखबार पढ़ते हैं, मैगजीनंस देखते हैं, टाइम कम मिलता है तो सिर्फ ऑडियो वाली चीजें सुन लेते हैं। बट हर आदमी एक अपना ओपिनियन खबरें कहीं से बनाता है।
आप क्या-क्या कंज्यूम करते हैं या फिल्म्स ही ज्यादा देखते हैं, डॉक्यूमेंट्री ज्यादा देखते हैं। मैं ज्यादातर न्यूज़ पढ़ती हूं। अब ऑब्वियसली डिजिटली पढ़ती हूं। अखबार क्योंकि घर में नहीं होती हूं। ज्यादा ज्यादातर तो अपने ऐप होती है जिसपे मैं हर तरह के न्यूज़ देखती हूं। मेरे पास मेरे फोन में सोशल मीडिया नहीं है। सोशल मीडिया पे न्यूज़ नहीं पढ़ती मैं तो मैं न्यूज़ ऐप पे पढ़ती हूं। तो मेरे को ज्यादातर पूरी दुनिया का हर कैटेगरी का जो न्यूज़ है वो अपडेटेड रहती हूं मैं उससे। सेकंड टाइम अगर उसमें कोई चीज़ इंटरेस्टिंग लगी जिसके बारे में ज्यादा जानने का मन किया, तो जिस इंसान से रिलेटेड वह खबर है उसका कोई पॉडकास्ट दिख जाता है क्योंकि आजकल एल्गोरिदम और इतना अच्छा है कि मैं अगर किसी इंसान के बारे में Google सर्च भी करूं तो मेरे को नेक्स्ट YouTube वो दिखाना शुरू कर देगा उसका पॉडकास्ट क्या आया नेक्स्ट। तो कभी कबभार इस वजह इस तरीके से मुझे और जानने को मिलता है। तो यूजुअली ये तरीका होता है मेरा चीजें जानने का। अनुभव आपने जो फिल्में की मतलब उसमें कुछ-कुछ जॉनर डिफरेंट भी हैं। IC814 और कैश कैश भी की थी आपने पर कई फिल्म फिल्में लगभग एक से जॉनर में रख दी जाती हैं।
अगर आप एक नए तरह का एक्सपेरिमेंट करें या जिन जो जहां पर अभी आपने एंट्री नहीं ली है तो आप किस तरह की फिल्म बनाना चाहेंगे? कभी रोमांटिक फिल्म बनाने के बारे में सोचा है इस मतलब आगे आपके दिमाग में जो कहानियां घूम रही हैं उसमें से कोई ऐसी है जो जिस तरह की फिल्म अभी नहीं बनाई जिस जॉनर्रा की दो तीन बातें हैं उसमें एक सेंसेशनल है 80 बनाना खत्म करने तक मैंने ये तय कर लिया था कि अगली पिक्चर इस जॉनर से बाहर निकलूूंगा मैं ये जो एक समस्या समस्या प्रधान फिल्में मैं बना तो थोड़ा उससे निकलूूंगा तो अगली फिल्म इससे अलग होगी। लव स्टोरी बनाऊं? शाहरुख के साथ बनाऊंगा नहीं तो नहीं बनाऊंगा। मतलब प्यार करना जितना अच्छा उस आदमी को आता है उतना किसी को नहीं आता। उसकी मैं जब पांच साल उसके साथ काम किया तो मैं उससे पूछता रहता था। मैं उसका इंटरव्यू करता रहता था। मेरे लिए रावण उतनी इंपॉर्टेंट नहीं थी। मेरे लिए इंपॉर्टेंट था कि मैं शाहरुख खान को जानता हूं।
मैं उसके साथ बैठा हूं पिछले 8 घंटे से। रोज 5 साल तो मैं उसका इंटरव्यू करता रहता था तो मैं उससे पूछता था कैसे आता है आंख में प्यार कैसे आता है गाना तुम्हारे ऊपर अच्छा क्यों लगता है क्या करते हो नया इस प्रकार की चीजें मैं उससे उससे बहुत कुछ सीख के भी आया चुरा के भी आया औरतों के लिए दरवाजा खोलना उनको औरत की तरह ट्रीट करना अच्छे उसमें तो वो सब तो लव स्टोरी मुझे लगता है जब भी मैंने शाहरुख को भी बोला है कि आप ये कर लो एक्शनवक्शन तब मैं आपके पास एक लव लव स्टोरी लेके आऊंगा तो लव स्टोरी उसके बिना नहीं बनाऊंगा और जॉनर मेरा चेंज होने वाला है। मेरा तीसरा वर्जन आने वाला है। अब इसके बाद तीसरा वर्जन आएगा।
