देखिए कैसे समुद्र से क्रेन ने किया शुभांशु के कैप्सुल को रेस्क्यू।

अब किस रूप में इसको उठाकर ऊपर रखा जाएगा? क्योंकि यहां प्लेटफ़ार्म तैयार है। यह जो बड़ी नाव है, इस पर एक प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया गया है। जाहिर सी बात है जिसका जिक्र अभी कि साहब, वजन बहुत ज्यादा होता है। इसका ड्राई वेट ही करीब नौ टन के आसपास का होगा। और ऐसे में अब जब इसको उठाकर रखना होगा तो वो कैसे उठाकर रखा जाएगा? और इतना वजन वो अब्सॉर्ब करे। इसीलिए शायद यह शॉक अब्सॉर्बिंग वो प्लेटफार्म है जो तैयार किया गया है यहां पर।

और दिलचस्पी भी है हमारी देखने की कि किस तरीके से इसको यहां शिप के ऊपर रखा जाएगा। रस्सियों की मदद से खींच कर रखा जाएगा या कैसे रखा जाएगा? क्योंकि कपूर साहब डायरेक्शन बहुत जरूरी हो जाता है कि आप उसको इसी हिसाब से ऊपर रखें ताकि उसका दरवाजा आसानी से खुल सके और जो अंतरिक्ष यात्री हैं वो सहूलियत के साथ इस ड्रैगन कैप्सूल से बाहर निकलें। कपूर साहब बिलकुल सही बात है। अब ये एकदम पास में आ गए हैं।

अभी देखते हैं ये किस प्रकार देखिए कैप्सूल उतरा आ रहा है पानी में। तो अगर जो बच्चे देख रहे हैं उनको पता है कि अब इसकी डेंसिटी जो है रेटिव डेंसिटी पानी के मुकाबले जरा कम है तभी ये उतर आ रहा है। टोटल क्योंकि एकदम सील्ड है ये। अब ये काफी नजदीक आ चुका है और इसको इस प्लेटफार्म के ऊपर आना है तो आप देखिए कैसे रो तैरता हुआ नजर आ रहा है सर बिल्कुल तैरता हुआ नजर आ रहा है लेकिन ये जो बड़ी बोट है इससे कई रस्सियां है एक नहीं बल्कि कई रस्सियां नजर आ रही है जिससे पूरी तरीके से इस कैप्सूल को बांध दिया गया है ना सर बिल्कुल सही बात है अब देखिए आप ये इसका बॉटम देखिए आप अब इसको उठा लिया गया है अब और अब इसको अंदर चलाया जा रहा है। यह इनहीं रस्सियों की मदद से इसको खींचा जा रहा है। और देखिए बिल्कुल अब इसका जो तला है वो हवा में आपको नजर आ रहा है। और धीरे-धीरे कर इसको अब खींचा जा रहा है। और यह जो रेस्क्यू बोर्ड पर रेस्क्यू शिप पर आप कह सकते हैं जो प्लेटफार्म तैयार किया गया है। बिल्कुल उस प्लेटफार्म में जगह पर बीचोंबीच लाकर अब इसको रखा जा रहा है।

यह देखिए। यह देखिए आप यह कैप्सूल ड्रैगन कैप्सूल पानी से बाहर आ चुका है। अभी थोड़ा सा हवा में आपको नजर आ रहा है और नीचे उसके रखने की वो जगह वो प्लेटफार्म आपको दिख रहा है और बस उससे इस वक्त चंद फीट की दूरी पर ही बचा है। अब यह मुश्किल से दो-चार फीट की दूरी होगी और अब धीरे-धीरे कर इसको नीचे लाया जाएगा और उस पर फिट कर दिया जाएगा। वो जो प्लेटफार्म पहले से ही बनाकर रखा गया था इस ड्रैगन कैप्सूल को इस शिप पर रखने के लिए। यह देखिए आप नीचे आ रहा है। वो पानी भी गिर रहा है। जो पानी उसकी सतह पर आ गया होगा वो पानी भी नीचे गिरता हुआ आप देख रहे हैं क्योंकि वो सीधा हो रहा है। अभी टेढ़ा था और अब जैसे-जैसे सीधा हो रहा है। अब आकर पूरी तरीके से ये फिट होता हुआ नजर आ रहा है सर और इसी तरह वो दरवाजा भी दिख रहा है इसका। सर। बिल्कुल सही बात है और ये बड़ी बारीकी के साथ इसका प्लेसमेंट देखिए हो रहा है ताकि जरा सा कुछ भी सेंटीमीटर इधर से उधर ना हो और एकदम ये अपने पोजीशन पर सही ढंग से विराजमान हो जाए। अब हैच ओपनिंग का अभी एक सामने सिग्नल आया था।

अभी देखते हैं। अब एक्चुअली देखिए दिल की धड़कने अब बढ़ गई है। अपने बंदे को देखने के लिए अब जो है बहुत बेसब्री हो गई है। अब ये लोग जल्दी से खोलें ताकि हम अपने श्रीमान शुभांशु जी का दर्शन करें। उनका मुस्कुराता हुआ चेहरा देखें और उनकी तरफ से जो है जो एक अभिवादन में जो हाथ उठेगा हेलो आपने मेरे सर आपने मेरे दिल की बात कर दी। सर ये सब तो मुझे कहना था जो आप कह रहे हैं सर वाकई में इस वक्त इस वक्त बहुत बेताबी है सर इस वक्त शुभांशु शुक्ला को बस देखना है एक झलक शुभांशु शुक्ला की देखनी है और मेरी नहीं सर इस वक्त आपने सभी दर्शकों के दिल की बात कही है| लेकिन मुझे लगता है सर जरा सा ये भी बताइए ना दर्शकों को कि जब इसने ये जो स्पेसक्राफ्ट है ड्रैगन कैप्सूल इसने अंतरिक्ष से सफर शुरू किया तब ये नोज वाला हिस्सा नीचे था सर और अब जब ये पृथ्वी पर बिल्कुल पार्क हो गया एक तरीके से अब ये तो पार्किंग हो गई ना यहां पर जैसे वो आईएसएस में जाकर डॉकिंग हुई ऐसे ही यहां पर पार्किंग हो गई है। तो इस वक्त यह नोज वाला हिस्सा ऊपर है और अब वो जो रस्सियां बंधी हुई थी वो रस्सियां खुल रही है। हट रही है ये नीचे सारे बंधन टूटते हुए अब आप देख रहे हैं और ड्रैगन कैप्सूल जिन रस्सियों से बंधा हुआ था वो सब रस्सियां बाहर से हटाई जा रही है और वो घड़ी तो बस आने ही वाली है। लेकिन जरा इस अलाइनमेंट के बारे में भी जानकारी आरसी कपूर साहब दर्शकों को दीजिए प्लीज। देखिए इसका ओरिएंटेशन जिस प्रकार से इसको रखा गया है नीचे जैसा कि मैंने बताया वो जो कंप्रेसिबल मटेरियल है जाहिर है कि वो इसी को वजन को ले सकने के लिए और जरा सा भी मिसमैच है अगर ओरिएंटेशन में तो उसको उसको अब्सॉर्ब करने के लिहाज से लेकिन आप ये देख सकते हैं इसकी पोजीशन किस प्रकार से है वो टॉप अप और बॉटम्स डाउन और अब जैसे कि अब ये हैच खोला जाएगा एक ऑपरेशन चल रहा है इस समय दो लोग तो इस समय जुटे हुए हैं और जल्दी ही वो हमें वो मुस्कुराता हुआ चेहरा हमारे सामने आने वाला है। लेकिन ये देखिए एक ये प्रोसीजर होती है अपना ये लोग भी अपने तरीके से काम कर रहे हैं कि अब क्या करना है? अब क्या करना है?

ये सब एक एक करके वो स्टेप्स जो है वो ले रहे हैं। जैसा कि मैं इस समय स्क्रीन पे देख रहा हूं। एक व्यक्ति एक स्टेप ऊपर चढ़ा। अब तो सर मेरे ख्याल से अगर मैं आम भाषा में कहूं कि अब तो सिर्फ और सिर्फ एक तरीके से वो मैकेनिकल काम ही बाकी रह गया है। मतलब वो जितना टेक्निकल काम था और वो जिस तरीके की कैलकुलेशंस थी वो वो सब तो मुकम्मल हो गया है। वो ज्यादा जो चुनौतीपूर्ण वाला पड़ाव था वो सब पार करके अब तो सब कुछ सकुशल हो चुका है। पृथ्वी पर वापसी हो गई है। और एक तरीके से अब तो ये मैकेनिकल चीजें ही है कि वो रस्सियां हटेंगी। वो बस दरवाजा खुलने का इंतजार किया जा रहा है और उसके बाद शुभांशु बाहर हमें नजर आएंगे सर। बिल्कुल सही बात है। आप असल में ना वो सब निकल गया। अब जयियों का समय है। जी अभी अभी देखते हैं अभी आगे क्या होता है। देखिए कि ये अपने आप में एक लंबी प्रोसीजर लग रही है। हमको ऐसा लग रहा है जैसे बहुत समय निकल रहा है और अंदर बैठे लोग भी तो कितने बेचैन होंगे। आप ये भी तो सोचिए उनके दिल की बात को जरा थोड़ा सा अंदाजा लगाइए। तीन अंतरिक्ष यात्री पहली बार गए हैं जो हंगरी के और पोलैंड के हां और भारत के और हमारे लिए तो हमारे दूसरे अंतरिक्ष यात्री की अंतरिक्ष यात्रा है और इस समय तो आपको राकेश शर्मा जी को भी याद करना चाहिए।

किस प्रकार से उन्होंने कहा था सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा वही बात सुधांशु जी ने भी कही और अब जो है वो इस समय तो कैलिफोर्निया के आसपास में है समुद्र में तो कुछ समय बाद जो है उनको हस्टन ले ले जाया जाना है सर या अभी अभी भी अभी भी सर सारे कमांड्स जो है वो जो कमांड सेंटर है ग्राउंड पर वहीं से मिल रहे होंगे सर ये अनलॉकिंग वगैरह या अब अब कंट्रोल जो है वो अंदर जो यात्री बैठे हुए हैं अंतरिक्ष यात्री इन लोगों के पास आ गए होंगे ये सवाल मैं आपसे इसलिए पूछ रही हूं सर क्योंकि इस मिशन के पायलट हमारे शुभांशु शुक्ला हैं। तो क्या अब कुछ दरवाजा खोलने का इस तरीके का कमांड जो है वो यहां पर जो शुभांशु शुक्ला जो इस मिशन के पायलट थे क्या ये कंट्रोल्स अब उनके पास होंगे सर या अभी भी सारा कंट्रोल जो है वो ग्राउंड सेंटर पर होगा? नहीं इस समय जो है ग्राउंड टीम जो है रेस्क्यू टीम है उसके सब कुछ उसके हाथ में है तो क्योंकि एक वो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर रहती है एसओपी वो उसके अनुसार चल रहे हैं अब देखो अनस्क्रू किया जा रहा है कुछ चीज को और धीरेधीरे वो अंदर अंतरिक्ष यात्री अब इमजान में है क्योंकि ज्यादा से ज्यादा वो सिर्फ कम्युनिकेट कर रहे हैं कौन सी चीज कौन सा पैरामीटर उनको ग्राउंड कंट्रोल को बताना है अंदर की क्या परिस्थितियां है क्या हालत है एयर प्रेशर कैसा है टेंपरेचर कैसा है वो सब अगर वहां ऑटोमेटिक जो है उसके बारे में बात नहीं जा रही तो ये बताएंगे। इसके अलावा जो है कपूर साहब अभी आपने वो प्रेशर का जो शब्द इस्तेमाल किया सर मुझे ध्यान आ रहा है सर क्योंकि जब ये आईएसएस पर पहुंचा था उस वक्त भी कर रहे थे और तब हम लोग इसी बात को लेकर काफी हमने फोकस किया था कि साहब ये जो अंदर का ड्रैगन कैप्सूल का जो प्रेशर है और वो जो आईएसएस है जहां पर ये एक तरीके से वो कॉरिडोर से जाकर जुड़ा है वो प्रेशर मैच किया जाएगा ताकि किसी तरीके का कोई बैलेंस ना बिगड़े। अब यहां तो सर ये लोग पृथ्वी पर वापस आ गए हैं। तो यहां पर भी क्या प्रेशर को लेकर सर कंसर्न होगा अभी क्या? नहीं वो वो तो नहीं होना चाहिए।

लेकिन अगर आप ये देख ना कि इस यात्रा में जो डीऑर्बिटिंग के बाद में हुई है। आखिरकार ये एक मैकेनिकल चीज है। इसको पूरी तरह से सील बंद किया गया है तो कहीं कुछ किसी पैरामीटर में कुछ बदलाव आया हो वो हर चीज एक स्टडी रहती है। देखिए हर हर ल्च जो है वो अपने आप में एक बहुत बड़ा स्टडी का विषय है। तो जहां तक प्रेशर की बात है देखिए अंतरिक्ष स्टेशन में जो हवा का प्रेशर है वो वही है जो समुद्र तल पर रहता है और वही टेंपरेचर जो हवा का है वो स्पेस स्टेशन में रहता है और वही कंपोजशन वातावरण की रहती है। तो बगैर सूट के अंतरिक्ष यात्री वहां अपना काम करते हैं। तो एक एक्सपेरिमेंट जो शुभांशु जी ने किया था साइनोबक्टीरिया का तो वो जो है फोटोसिंथेटिक तरीके से वो ऑक्सीजन कार्बन डाइऑक्साइड का बैलेंस करते हैं तो अंतरिक्ष में किस प्रकार से करेंगे ताकि लंबी यात्रा में उनका उपयोग हो सके वो एक बहुत महत्वपूर्ण बात थी और दूसरी एक चीज और है जो एक्सपेरिमेंट उन्होंने किया एल्ग को लेकर के टू ग्रो योर ओन फूड तो वो लंबी यात्राएं अगर मंगल ग्रह के लिए होती है या चंद्रमा पर उसी दिनों हो जाएंगे। सर मेथी और मूंग का भी उगाने वाला वो एक्सपेरिमेंट जो था जरा उसके बारे में भी दर्शकों को कुछ बताइए। ऐसा मुझे पता चला था कि वो वहां पर ज्यादा तेजी से उगे हैं ये। तो क्या वजह है क्या नहीं है वो तो अब डिटेल्स में हमको बाद में पता चलेगा। एक वजह जो है भारहीनता की स्थिति है।

तो अब कुछ रोक तो रहा नहीं है उनको उगने से। तो वो एक बात है और मैं छोटी छोटी पत्तियां भी देखी मैंने उस की तो बड़ा सुंदर तस्वीर थी वो और आपको मालूम होगा कि अंतरिक्ष में स्टेशन में किसी समय पर अंतरिक्ष यात्रियों ने पिज़्ज़ा बनाया। वहां पर फूल उगाया वहां पर फूल खिला और वहां पर लेट्स भी उगाए गए। विभिन्न प्रकार के एक्सपेरिमेंट्स करते हैं वहां। तो ये सारे ह्यूमन स्पेस ट्रेवल को लेकर के ये जो है वो सारे एक्सपेरिमेंट्स है। इसके अलावा एक्सट्रीम परिस्थितियों में मतलब चरम स्थितियों में मनुष्य का शरीर किस प्रकार से रिसोंड करता है उसका शरीर उसका दिमाग उसकी सोच वो सब बातें जो है एक एक करके जो है ये सब बात हमारे जानकारी में आती है और अब ये जो है कपूर साहब इसको लेकर हम अपनी बातचीत आगे बढ़ाएंगे लेकिन पहले ये जो तस्वीर है सर और ये तस्वीर इसमें फिर से हलचल दिखी है। अब आप देख रहे हैं वह जिस प्लेटफार्म पर इसको रखा गया था अब उसका मकसद भी समझ में आ रहा है सर वो मूवेबल प्लेटफार्म है वो धीरे-धीरे कर आगे बढ़ रहा है उसमें अब मुझे ऐसा लग रहा है कि जी ये अब ये सीढ़ियों के जरिए या स्ट्रेचर के जरिए इनको इंक्लाइनेशन पर इंक्लाइन वो है सिचुएशन उससे यहां इनको उतारा बाहर लाया जाना है एक-एक करके आएंगे बिल्कुल सर पानी की बौछारे भी इस पर मारी जा रही है अब मुझे नहीं पता ये एक्सजेक्टली पानी है या कोई केमिकल है जिससे इसकी धुलाई की जा बाहर की कुछ बौछार तो मारी जा रही है।

यह किस चीज की होगी सर? डिसइफेक्शन एक बहुत जरूरी चीज है क्योंकि यहां से गए तो क्या बैक्टीरिया ले गए? वहां से आए तो क्या लेके आए? हम तो ये सब बातें हैं और वहां पर एक सील बंदा बंद वातावरण में सब लोग रहते हैं। तो और इंसान है तो हमारे साथ सर आगे आगे की तरफ सर सीढ़ी लगा दी गई है छोटी सी। मतलब जो इस यान का जो दरवाजा है वो थोड़ा ऊंचाई पर है। इसी वजह से सीढ़ी लगाई गई है सर। नहीं अभी ऊपर कुछ किया है उन्होंने। ये दरवाजे तो नीचे है ये जो आपको लग रहा है वो ऊपर शायद मुमकिन है कि ऊपर की तरफ एक लॉक हो सर उसको अनलॉक किया गया हो। वो दरवाजे की कोई ओपनिंग हो जो ऊपर से लॉक हो क्योंकि अब उसको खोलने के लिए दरवाजे को क्योंकि अब ये आगे की तरफ आप देखेंगे जो दरवाजा है वो खुलेगा और यहीं से एक-एक कर आपको जो अंतरिक्ष यात्री हैं वो बाहर आते हुए नजर आएंगे। लेकिन वो सीढ़ी छोटी सी लगाई गई और उसके बाद ऊपर चढ़ के ऐसा लगा जैसे कुछ अनलॉकिंग सिस्टम है उसको कुछ किया गया और वो डिसइफेक्टेंट जो मारा जा रहा था आगे की तरफ अब आगे बकायदा वो डिस डिसइफेक्टेंट के बाद वो कपड़ा सा भी मारा गया है उसके बाद बिल्कुल सफाई सी की गई है सर जैसे गाड़ी चलाने से पहले हम लोग कई बार अपनी विंडस्क्रीन नहीं साफ करते हैं तो उस तरीके से यहां पर अब सफर मुकम्मल हो गया है।

इन लोगों का और ये गेट खुलने का बस मुझे ऐसा लग रहा है सर अब तो इंतजार है कपूर साहब बस आ ही गया वो समय आ गया अब ज्यादा दूर नहीं अब ये देखो ये हट रहे और जो अब अगली क्या प्रोसीजर के जरिए जो है ये जो ये द्वार खोला जाएगा। जी आपको याद होगा कि कभी आप जब हवाई जहाज से यात्रा करते हैं तो कैसे एक प्रोसीजर के तहत जो है दरवाजा बंद किया जाता है। उसको खोला जाता है। कितना जोर लगाया जाता है। एकदम एयर टाइट रखा जाता है। क्योंकि हम जब आसमान में करीब 35 4000 फीट की ऊंचाई पे उड़ते हैं तो वहां पर भी तो हवा का दबाव बहुत कम होता है। बिल्कुल।

तो आप दिल थाम के बैठिए। अब मनीष जी भी हमारे साथ मौजूद हैं। मैं बिल्कुल मनीष जी आपसे बीच में शायद संपर्क नहीं हो पा रहा था सर इसलिए मैं आपके पास आ नहीं पाई। मनीष जी के पास लेकर चलेंगे जरा दर्शकों को। मनीष जी ये तस्वीरें आप भी लगातार देख रहे होंगे सर। जरा आप भी अपनी जानकारी इन तस्वीरों को लेकर दर्शकों को दीजिए सर। देखिए सबसे बड़ी बात तो यह है कि ये जो ड्रैगन हम देख रहे हैं यह मॉड्यूल हैच खुल गए हैं। अब थोड़ा उधर हम देखें तो द हैचेस आर ओपन और ये इसकी पहली फ्लाइट है। यह रयूजेबल होता।

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