ये डॉक्टर तो फ्रॉड है”… शार्क टैंक पर खुल गई पोल।

5 जनवरी से शुरू हुए शार्क टैक इंडिया सीजन 5 का एक हालिया एपिसोड इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। वजह कोई डील नहीं बल्कि एक ऐसा पिच सेशन रहा जहां चमकदमक और बड़े दावों के बावजूद एक वेलनेस ब्रांड को रिजेक्ट कर दिया गया और डॉक्टर लिखने पर बड़े सवाल उठे। यानी डॉक्टर को पूरी तरह से एक्सपोज कर दिया गया। उन डॉक्टर को एक्सपोज किया गया जिनकी रील्स शायद आप बड़े भरोसे से देखते होंगे।

दरअसल एपिसोड में एक वेलनेस ब्रांड लवसिया वेलनेस ने 1 करोड़ के इन्वेस्टमेंट के बदले 100 करोड़ की वैल्यू्यूएशन मांगी। ब्रांड के फाउंडर मनोज दास ने खुद को डॉक्टर बताकर प्रोडक्ट पेश किया।

लेकिन जब शार्क्स ने सवाल किए तो साफ हुआ कि उनके पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं है। इतना ही नहीं जिन प्रोडक्ट्स को केमिकल फ्री बताया जा रहा था उनमें केमिकल्स मौजूद होने की बात भी सामने आई है। शुरुआत में यह ब्रांड एक परफेक्ट डी टू सी सक्सेस स्टोरी जैसा लग रहा था।

चार कैटेगरी में प्रोडक्ट्स, 50% से ज्यादा डायरेक्ट वेबसाइट सेल्स और मल्टी करोड़ रेवेन्यू के दावे। लेकिन जैसे-जैसे सवाल बढ़े वैसे-वैसे हर दावा कमजोर पड़ता गया। रिव्यूज और डाटा ने रेवेन्यू की कहानी पर भी सवाल खड़े कर दिए। एक-एक करके हर बात एक्सपोज हो गई। इस पर मिनिमलिस्टिक के कोफाउंडर इन्वेस्टर मोहित यादव ने तो सीधे-सीधे कह दिया, आप यूज़र्स इनसिक्योरिटी पर क्लिकबेट कंटेंट क्रिएट कर रहे हैं। नॉन साइंटिफिक प्रोडक्ट बेच रहे हैं। मतलब यह तो फ्रॉड है।

पैनल में मौजूद इन्वेस्टर्स ने सिर्फ डील से मना नहीं किया बल्कि गंभीर चेतावनी भी दी। इन्वेस्टर अनुपम मित्तल ने साफ कहा कि ऐसे गलत दावे कानूनी मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। ना कोई हैंडशक हुआ ना कोई शुभकामनाएं। सीधा संदेश था कि इस तरह की ब्रांडिंग बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इस एपिसोड के बाद Lindin और एक्स पर कई प्रोफेशनल और यूज़र्स ने शो की तारीफ की। एक एनजीओ फाउंडर ने लिखा जो इन्वेस्टर और प्लेटफॉर्म्स ऐसे फर्जी वालों को खुलेआम उजागर करते हैं उन्हें सलाम। वहीं एक्स पर यूजर ने लिखा शुक्रिया शार्क टैंक इस एक्सपोज के लिए। वहीं मोहम्मद जुबैर ने लिखा टेक्निक है गलत है। इस डॉक्टर को तो पॉलिटिशियन होना चाहिए था। जहां पर नेशनलिज्म के नाम पर कुछ और शेयर करता। शार्क डैग में गलत ही आ गया। एक और रीज़न लिखा यही चल रहा है सोशल मीडिया पर। बस इन लोगों को कोई डर नहीं किसी का। एक और रीज़ ने लिखा, दीज़ डज़ देयर आर अ लॉट ऑफ़ फेक डॉक्टर्स सेलिंग देयर प्रोडक्ट्स ऑन Instagram विथ फेक क्लेम्स। शार्क टैंक ने कुक कर दिया, फ्राई कर दिया, रोस्ट कर दिया। मेगा ने लिखा, चला जा भाई इनको भी मालूम था कुछ नहीं मिलने वाला। यह बस मार्केटिंग करने आए थे। मेगा ने लिखा, आई एम आल्सो कंफ्यूज्ड ऑन व्हाई ही थॉट कमिंग टू शार्क टैंक वाज़ अ गुड आईडिया। आपको बता दें मनोज दास जो अपने आप को एरोमा थेरेपिस्ट और नेचुरल थेरेपिस्ट बताते हैं। उनका दावा है कि वह नेचुरल इंग्रेडिएंट से स्किन केयर, हेयर केयर और हेल्थ केयर स्यूशन बनाते हैं। मनोज ने अपने स्टार्टअप की 1% इक्विटी के बदले ₹1 करोड़ की मांग रखी थी। यानी ₹100 करोड़ का वैल्यू्यूएशन। हालांकि किसी भी फाउंडर ने इसमें पैसे नहीं डाले। इस सफर की शुरुआत हुई 2003 में जब मनोज ने अपना ब्यूटी कल्चर का सर्टिफिकेशन कोर्स किया। तमाम ब्यूटीिशियन उन्हें हायर करते थे और मनोज उनके लिए एक ट्रेनर की तरह सेमिनार ऑर्गेनाइज करते थे। 2017 तक उन्होंने यह सब किया। उसके बाद उन्होंने लोगों को ब्यूटी के लिए जागरूक करने के मकसद से YouTube वीडियोस बनाना शुरू किए। वह बोले कि हमारे चेहरे पर जो दिखता है उसका 80% हमारी अंदरूनी सेहत की वजह से होता है। उनके वीडियोस देखकर लाखों लोग उनसे जुड़े हैं और उनके वीडियो करोड़ों बार देखे गए हैं। 2020 में उन्होंने सोचा कि खुद का ब्रांड बनाया जाए। इसके बाद उन्होंने लेविस वेलनेस की शुरुआत की। दरअसल अनुपम मित्तल ने कहा कि मुझे आपकी क्रेडिबिलिटी पर डाउट आ रहा है। वह बोले आपने क्लेम किया है हेयर ग्रोथ स्कैल्प टोनर। दुनिया में दो-तीन ही एक्टिव इंग्रेडिएंट्स हैं जो हेयर ग्रोथ में हेल्प करते हैं। जैसे मिनोक्सिडल, फिनस्ट्राइड।

वहीं आप बोल रहे हैं कि रोज एक्सट्रैक्ट, एलोवेरा जूस, थाइम ऑइल, सिनेमन ऑयल लगाने से बाल उगेंगे। इस पर फाउंडर बोले कि एरोमा थेरेपी बताती है कि सिनेमन ऑयल मदद करता है बाल उगाने में। हालांकि जब अनुपम मित्तल ने पूछा कि क्या आपने इसकी क्लीनिकल स्टडी कराई है? तो मनोज ने कहा नहीं। फिलहाल अगर आप भी ऐसे किसी डॉक्टर को YouTube या Instagram पर देखते हैं तो सबसे पहले पूरी स्टडी करिए। उसके बाद ही किसी पर भरोसा करिए।

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