हादसे से कुछ दिनों पहले संजय दत्त के घर आया था अवैध साधन से भरा ट्रक।

संजय दत्त अगर एक गलती नहीं करते तो 1993 का हादसा टल सकता था। 257 लोगों की जाने बचाई जा सकती थी। अगर एक इंफॉर्मेशन संजय दत्त अपने पास रखने के बजाय एजेंसीज को बता देते तो यह स्टेटमेंट दिया है पब्लिक प्रोसकटर उज्जवल निकम ने।

उन्होंने अपने लेटेस्ट इंटरव्यू में संजय दत्त के 1993 में हुए खौफनाक हादसे के बारे में बात करते हुए कहा कि संजय दत्त को पता था कि एक गाड़ी मुंबई में अबू सलीम लेकर आया है एक लोडिंग जिसके अंदर बहुत सारे हथियार है और हद गोले हैं। संजय दत्त के घर पर वो गाड़ी आई थी। उस गाड़ी में से संजय दत्त ने इनिशियली कुछ चीजें ले ली थे। इसलिए क्योंकि उन्हें उनका का बहुत शौक था।

बाद में संजय दत्त ने सारी अवैध चीजे वापस उस गाड़ी में रख दिए। बस एक 47 संजय दत्त अगर तभी एजेंसीज को बता देते कि सलीम एक गाड़ी लेकर आया है जिसके अंदर बहुत सारे अवैध चीजे और हद गोल हैं तो एजेंसीज पता लगा देती और इस हादसे को रोक सकती थी।

लेकिन संजय दत्त ने यह इंफॉर्मेशन पास ऑन नहीं करके बहुत बड़ी गलती की और इस गलती का खामियाजा संजय दत्त ने भी चुकाया। उन्हें एक टाइम पर बदमाश कहा गया। हालांकि टाटा तो उनके ऊपर से हट गया। लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत उन पर कारवाई हुई और 5 साल की सजा उन्हें सुनाई गई।

उज्जवल निगम ने यह भी बताया कि संजय दत्त बेल पर थे और तभी कोर्ट में सुनवाई हुई थी और कोर्ट में जज ने कहा था कि यह दोषी है इसे अरेस्ट करो। उज्जवल निगम ने कहा कि जब जज ने यह फैसला सुनाया तब संजय दत्त बहुत ज्यादा डर गए थे। मैंने उनकी बॉडी लैंग्वेज बदलते हुए देखी और तब मैंने संजय दत्त को कहा कि आप ऐसा मत करो। यहां पर मीडिया और सभी लोग मौजूद है। उनके सामने आप संजय दत्त एक्टर हो और आपके ऊपर यह आरोप लगे हैं।

आप दोषी करार नहीं दिए गए हो। ऐसे में अगर आपकी बॉडी लैंग्वेज बदली, आप डरे हुए लगे तो लोग आपको दोषी मानेंगे। हम अभी अपील करेंगे और आपको इस मामले से निकालने की भी कोशिश करेंगे। लेकिन तब तक आपको खुद को संभालना होगा।

कुछ इस तरह से संजय दत्त बहुत घबरा गए थे। जज के उस फैसले से आर्म्स एक्ट के तहत संजय दत्त को 6 साल की सजा सुनाई गई थी। वह सजा कम करके 5 साल की की गई। संजय दत्त ने पुणे के यरवड़ा जेल में 5 साल गुजारे

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