छोटी बहन के श्राप ने बना दिया बड़ी बहन को जवानी में बदसूरत बेऔलाद और बुढ़िया।

आज यह दास्ता है गुजरे जमाने की उस खूबसूरत और हसीन अभिनेत्री की जिसने अपने अभिनय के साथ-साथ अपने हेयर स्टाइल से हिंदी भारतीय सिनेमा में राज किया सालों पहले दुख तकलीफ के साथ दुनिया को अलविदा कहने के बाद भी आज कैसे जिंदा हो गई यह मशहूर हसीन अदाकारा मुझे यहीं उतरना है

इस वीराने में ये तो कब्रिस्तान है गुमनाम है कोई बदनाम कैसे यह अदाकारा भारत पाकिस्तान के बंटवारे की आग में पाकिस्तान से भारत आकर दरबदर भटकती रही क्यों इस अभिनेत्री का बचपन स्कूल का मुंह तक नहीं देख पाया ना बरसे और क्या आप जानते हैं कि इस कलाकारा को अपनी पहली हिंदी फिल्म के लिए सिर्फ एक रुपया दिया गया कैसे इस अभिनेत्री की सफलता इनके सगे संबंधियों के लिए बन गई जलन और चिड़म की वजह ये कैसे हो सकता है अब चले जाइए यहां से आप मेरी जिंदगी में आग लगाने आए हैं.

और सबसे बड़ा अभिनेता और निर्माता क्यों इस अभिनेत्री से लड़ बैठा जिसकी वजह से इस अभिनेत्री को कपूर खानदान में कभी कोई जगह और फिल्म नहीं मिली और जो मेरे साथ हुआ कोई सुने तो क्या कहे कोई सोचे तो टूक मरे इस अभिनेत्री की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इनको इनकी बहन ने वह श्राप दिया जिसकी वजह से यह अदाकारा जिंदगी भर कभी भी मां नहीं बन पाई हमारा दर्द गम है ये क्यों लाखों रुपए कमाने वाली यह हीरोइन आखिरकार क्यों एक किराए के मकान में रहने गई आप भी देख लीजिए कैसा है यह कमरा और क्यों उसी मकान के लिए इस अभिनेत्री को मशहूर सिंगर आशा भोसले ने वो दिन दिखाए जिसकी वजह से यह अभिनेत्री जिंदगी भर और कानून से लड़ती रही मैं आपके हाथ जोड़ती हूं मुझे इस घर में तमाशा ना बनाइए इस अभिनेत्री को वो कौन सी बीमारी हो गई जिसकी वजह से यह लाजवाब खूबसूरत हसीन अदाकारा हो गई अंधी और किस वजह से यह अभिनेत्री जवानी में ही हो गई बदसूरत और बुड्ढी जिसकी वजह से फिल्म के बड़े-बड़े निर्माताओं ने बड़ी बेरुखी के साथ मोड़ लिया इनसे अपना मुंह जिस दिन से आपने मेरी शक्ल देखी है.

यह हीरोइन अपने अंतिम दिनों में हो गई एक-एक रुपए की मोहताज जिसकी वजह से यह बड़े ही दुख दर्द और तकलीफ के साथ दुनिया से हो गई अलविदा शायद फिर इस जन्म में मुलाकात बताएंगे और भी बहुत कुछ इस अभिनेत्री के बारे में आप बने रहिए हमारे साथ वीडियो के अंत तक ये पर्दा हटा दो जरा मुखड़ा दिखा दो हम प्यार करने वाले आज अपने शो में हम बात करने जा रहे हैं एक ऐ जबरदस्त शानदार अभिनेत्री की जिसने अपनी जिंदगी के छोटे से करियर में हासिल किया हिंदी सिनेमा का बड़ा सा मुकाम इनकी हर अदा और फैशन को लोगों ने किया सलाम इस अभिनेत्री का स्टारडम ऐसा कि यह बन गई उस दौर में हर किसी के दिल की रानी यह अभिनेत्री कोई और नहीं बल्कि थी अंजलि शिवदसानी यानी साधना शिवदसानी साधना का जन्म 2 सितंबर 1941 को पाकिस्तान के कराची सिंध में हुआ था जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है इनके पिता का नाम था शिवराम शिवदसानी और मां का नाम था लाली देवी शिवदसानी साधना का असली नाम था अंजलि लेकिन इनके पिता शिवराम बंगाली अभिनेत्री साधना बोस के बहुत बड़े फैन थे इसीलिए इन्होंने अभिनेत्री के नाम पर अपनी बेटी का नाम अंजलि से बदलकर साधना रख दिया अब तक यह परिवार पाकिस्तान में ही रह रहा था.

लेकिन जब साधना 6 साल की थी तब वो बुरा वक्त आया जब भारत दो टुकड़ों में बट गया भारत देश के विभाजन के समय यह परिवार पाकिस्तान को छोड़कर भारत के दिल्ली में आ गया दिल्ली से बनारस गए जहां कुछ समय बीत जाने के बाद यह कोलकाता पहुंच गए कुछ समय बिताने के बाद यह फाइनली कोलकाता से मुंबई आए यहां यह पूरा परिवार शरणार्थी शिविर में रहा हम आपको यहां पर बता दें कि साधना के एक चाचा भी हैं जिनका नाम था हरीश शिवदसानी जो बंटवारे से पहले ही मुंबई आकर बस गए थे और यह हरीश भी भारतीय हिंदी सिनेमा में एक्टर थे इनकी एक बेटी थी जिसका नाम था बबीता शिवदसानी जो आगे चलकर करिश्मा कपूर करीना कपूर की मां बनी खुदी में सनम उठ गए जो कदम आ गए साधना और बबीता दोनों एक दूसरे की बहन हैं कुछ समय गुजरा और साधना का परिवार शरणार्थी शिविर से निकलकर बम्बे के सायन इला में रहने लगा यहां इनके पिताजी ने घर चलाने के लिए पास ही एक किराने की दुकान खोल ली.

लेकिन घर की माली हालत ठीक नहीं होने की वजह से साधना की मां लाली देवी घर में बच्चों को पढ़ाया करती थी और साधना भी इन्हीं बच्चों के साथ 8 साल की उम्र तक अपनी मां से ही पढ़ा करती थी लेकिन जब पूरा परिवार बॉम्बे में अच्छे से सेटल हो गया तो इनकी मां ने साधना का एडमिशन वडाला के लियम कॉन्वेंट स्कूल में करा दिया साधना जब थोड़ा बड़ी हुई तो यह अपने पिता का हाथ बटाना चाहती थी लेकिन साधना ने स्कूल के समय में ही पार्ट टाइम में एक टाइपराइटर की जॉब जवाइन कर ली साधना देखने में बेहद खूबसूरत थी वह लंबी थी और गोरी थी साधना का सपना था जो वह बचपन से ही अपने मन में लेकर चल रही थी वो था एक अभिनेत्री बनने का लेकिन उनका सपना ऐसे सच होगा यह साधना ने कभी नहीं सोचा था एक दिन इनके स्कूल में आए कुछ फिल्म कंपनी वाले उनको अपनी एक फिल्म के गाने के लिए कुछ बैकग्राउंड में डांस करने के लिए कुछ लड़कियों की जरूरत थी.

इस सिलेक्शन में साधना भी पहुंची और इस तरह से पहली बार साधना ने अपना पहला कदम भारतीय हिंदी सिनेमा में रखा और इनकी वो फिल्म थी श्री 420 मुड़ मुड़ के ना देख मुड़ मुड़ के मुड़ मुड़ के ना देख मुम के मु जिसमें राज कपूर फिल्म के हीरो और नादिरा थी फिल्म की हीरोइन इसके बाद साधना की स्कूल की पढ़ाई पूरी हुई तो इन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए बॉम्बे के जय हिंद कॉलेज में एडमिशन ले लिया साधना जब कॉलेज में थी तब एक सिंधी फिल्म निर्माता भारत पाकिस्तान के बंटवारे पर एक फिल्म अबाना बना रहे थे साधना ने भी इस फिल्म के लिए अपने कुछ फोटोग्राफ्स भेज दिए और हुआ वही जो नियति को मंजूर था साधना को इस फिल्म के लिए पसंद कर लिया गया इस फिल्म में साधना ने शीला रमानी की छोटी बहन का किरदार निभाया और यही वह फिल्म थी जिसके फीस के तौर पर साधना को एक रुप दिया गया था जाए फिरन जाए फिल्म अबाना रिलीज हुई.

फिल्म ने अच्छा खासा काम किया और इस सबके बीच साधना की एक फोटो स्क्रीन मैगजीन में छप गई और इस फोटो पर नजर पड़ी फिल्मालय स्टूडियो के मालिक सशधर मुखर्जी की उनको साधना बहुत पसंद आई और उन्होंने ₹ 7750 महीने का ऑफर साधना को दे दिया साधना ने भी तुरंत इस ऑफर को स्वीकार कर लिया और फिल्मालय स्टूडियो से जुड़ गई कांग्रेचुलेशन मिस सोनिया और यह फिल्म्स का कांट्रैक्ट फिल्मालय कंपनी बॉम्बे के तरफ से उस दौर में यह ₹ 7750 बहुत बड़ी रकम थी और इस तरह से साध ना अपने परिवार की ताकत बन रही थी तो वहीं इनका अभिनेत्री बनने का सपना भी अब सच होने जा रहा था सशधर मुखर्जी उन दिनों अपने बेटे जॉय मुखर्जी को फिल्मों में लॉन्च करना चाह रहे थे और अपने बेटे के लिए हीरोइन के रूप में साधना उनकी पहली पसंद थी और सशधर मुखर्जी ने इन दोनों को लेकर फिल्म बनाई लव इन शिमला और फिल्म को डायरेक्ट कर रहे युवा निर्देशक आर के नैयर हसीनों की सवारी है हसीनों की सवारी बड़ी तकदीर वाली रिक्षा साधना बेहद गोरी थी लिहाजा उनका माथा काफी उभर कर आता था इसीलिए इनके माथे को छुपाने के लिए कई हेयर स्टाइल्स को चेक किया गया लेकिन जब तक बात नहीं बनी तो फिर इनके बाल काटने का सोचा गया और उनको हॉलीवुड अभिनेत्री आरे हेपबर्न की तरह हैक दिया गया आपने मेरे बाल क्यों काट दिए जिसके बाद साधना का नया लुक सबके सामने आया और साधना को इस लुक में जिसने भी देखा वह बस देखता ही रह गया.

साधना बेहद खूबसूरत दिख रही थी और इनको यह लुक दिया आर के नैयर ने जो साधना को पहली बार देखकर ही अपना दिल हार गए थे लग जा गले के फिर ये हसी साल 1960 में साधना की फिल्म लव इन शिमला रिलीज हुई और यह फिल्म बड़ी कामयाब फिल्म साबित हुई और साधना अपनी पहली ही फिल्म से लोगों के बीच बेहद फेमस हो गई और उनकी खूबसूरती के भी सभी कायल हो गए इसके बाद साधना नजर आई 1961 में देवानंद के साथ फिल्म हम दोनों में यह फिल्म भी हिट फिल्म साबित हुई इस फिल्म का एक गाना आज तक भी लोगों की पसंद बना हुआ है तेरा मेरा प्यार अमर फिर क्यों मुझ साधना का अब फिल्मी सफर दिन प्रतिदिन ऊंचाइयों की तरफ बढ़ता चला गया और साधना के लिए लोगों की दीवानगी बढ़ती जा रही थी लोग इनकी एक झलक पाने के लिए बेकरार हो जाते थे अभी से लोग कह रहे हैं कि मेरी ऐसी खूबसूरत लड़की आज तक स्क्रीन पर कभी नहीं देखी गई.

एक बार साधना अपनी दोस्त के साथ एक साड़ी की दुकान में साड़ी खरीदने पहुंच गई जैसे ही लोगों ने साधना को पहचाना तो वहां लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा हालत यह हो गई कि दुकान को बंद करके साधना को पीछे के रास्ते रवाना करना पड़ा मैंने बदले में प्यार के प्यार दिया है प्यार दिया है ते साधना के पास फिल्मों की एक लंबी लाइन थी और इसी कड़ी में साल 1962 में साधना की देवानंद के साथ एक और फिल्म आई असली नकली यह फिल्म भी सुपरहिट फिल्म बनी और इस फिल्म का एकएक गाना सुपर हिट गाना साबित हुआ था एक बुत बनाऊंगा तेरा और पूजा करूंगा इसके बाद साल 1962 में एचएस रवेल द्वारा बनाई गई फिल्म मेरे महबूब में यह नजर आई सुपरस्टार राजेंद्र कुमार के साथ इस फिल्म के लिए एचएस रवेल ने साधना का आठ महीने इंतजार किया था क्योंकि साधना के पास काम इतना था कि इनके पास इस फिल्म के लिए डेट्स ही नहीं थी यह फिल्म साधना की पहली रंगी फिल्म थी यह फिल्म सुपर डुपर हिट बनी उस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई मेरे महबूब तुझे मेरी मुहबत इस फिल्म के बाद ही साधना अब सबसे ज्यादा पैसे कमाने वाली अभिनेत्रियों के लिस्ट में शामिल हो गई और इस फिल्म के बाद ही साधना का हेयर स्टाइल लड़कियों के बीच इतना फेमस हुआ कि जहां देखो हर दूसरी लड़की उनके जैसा हेयर स्टाइल रखने लगी और यह हेयर स्टाइल साधना कट के नाम से अमर हो गया सूरत हसी लगता है .

दीवाना सूरत हसी इसके बाद साधना साल 1964 में वो कौन थी फिल्म में नजर आई इस फिल्म में इनके साथ हीरो थे मनोज कुमार यह फिल्म भी सुपर हिट फिल्म रही और इस फिल्म के लिए साधना को पहली बार फिल्म फेयर का नॉमिनेशन भी मिला इस फिल्म का संगीत आज भी फेमस है हैना बर से रि और इसी साल 1964 में इनकी एक और ब्लॉकबस्टर फिल्म आई राजकुमार इस फिल्म में यह शम्मी कपूर की हीरोइन थी आई बहार दिल है बेकरार इसी साल साधना की फिल्म दूल्हा दुल्हन भी रिलीज हुई इस फिल्म के हीरो थे राज कपूर और इस फिल्म के दौरान वो घट ना घटी जिसके बाद साधना को कभी भी कपूर खानदान और फिल्म में जगह नहीं मिली और साधना अपने परिवार से भी दूर हो गई मैं जानती थी इतना सुख मेरे भाग में नहीं है दरअसल साधना की बहन बबीता कपूर भी फिल्मों में आना चाहती थी लेकिन फिल्मों में आने से पहले ही उनकी मुलाकात रणधीर कपूर से हो गई और यह दोनों एक दूसरे से प्यार करने लग गए इनके प्यार के चर्चे .

फिल्मी गलियारों में गूंजने लगे और सभी जानते थे कि बबीता साधना की बहन है इसी सब के चलते राज कपूर ने साधना को फिल्म के सेट पर मिलने को बुलाया और साधना से रणधीर और बबीता को लेकर बात की राज कपूर ने साधना से कहा कि वह बबीता को समझाएं कि वह दो सपने एक साथ ना देखें एक तो फिल्म में काम करने का और दूसरा कपूर खानदान की बहू बनने का क्योंकि कपूर खानदान में शादी के बाद बहुएं फिल्मों में काम नहीं करती करती हैं इस बात को लेकर साधना और राज कपूर के बीच बहस हो गई साधना ने बबीता के पक्ष में बात रखी लेकिन राज कपूर को यह बात पसंद नहीं आई और वह साधना को काफी भला बुरा बोलकर वहां से चले गए इसके बाद यह बात बबीता तक भी पहुंची और बबीता साधना से इसीलिए नाराज हो गई कि इतनी सारी बात हो गई लेकिन साधना ने यह सब मुझे क्यों नहीं बताया और बबीता को लगता था कि साधना ने राज कपूर के सामने उनकी तरफदारी में बात नहीं की थी कुछ समय बाद जब इन दोनों बहनों की मुलाकात हुई साधना ने बबीता को बताया कि राज कपूर तुम्हारे इस रिश्ते को पसंद नहीं कर रहे हैं लेकिन बबीता जो गलतफहमी का शिकार थी वो एकदम से साधना पर बरस पड़ी और उनको बेवजह भला बुरा कहने लगी साधना ने जब बबीता को अपनी औलाद जैसा बोला तो इस बात पर बबीता बोली तुम औलाद के लिए इतना भला बुरा मत सोचना कि तुम जिंदगी भर औलाद के लिए ही ना तरस जाओ अपनी बहन को इस तरह का श्राप और बददुआ देकर बबीता वहां से चली गई और बबीता ने साधना से अपने संबंध खत्म कर लिए lइसके बाद साल 1965 में साधना के साथ यश चोपड़ा की एक मल्टीस्टारर फिल्म वक्त रिलीज हुई मेरी जोहरा जबी तुझे मालूम नहीं तू अभी तक है हसी यह फिल्म उस साल की की ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई इस फिल्म में साधना ने पहली बार चूड़ीदार पजामे के साथ कट स्लीव कुर्ता पहना जो उस दौर का फैशन बन गया था और इनके इस फैशन को और कई फिल्म अभिनेत्रियों ने भी अपनाया था चेहरे पे खुशी छा जाती है आंखों में सुरू इसी साल यह राजेंद्र कुमार के साथ फिर से फिल्म आरजू में इनकी हीरोइन बनकर नजर आई यह फिल्म भी उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी इस फिल्म के संगीत ने साधना की दीवानगी में चार चांद लगा दिए थे.

ऐ फूलों की रानी बहारों की मलका तेरा मुस्कुरा साधना जब अपनी पहली फिल्म लव इन शिमला कर रही थी तो फिल्म के निर्देशक आर के नैयर इनके आगे अपना दिल हार गए थे और साधना भी उनको पसंद करने लगी थी लेकिन उम्र कम होने की वजह से इनकी शादी उस वक्त नहीं हो पाई थी लिहाजा 7 मार्च 1966 को इन दोनों ने बड़े ही धूमधाम के साथ शादी कर ली थी कौन आया की निगाहों में चमक जाग उठी दिल के सोई शादी के तुरंत बाद इनकी एक और थ्रिलर सस्पेंस फिल्म रिलीज हुई मेरा साया जहां जहां चलेगा मेरा सारा इस फिल्म ने जहां सफलता की नई ऊंचाई यों को छुआ तो संगीत ने लोकप्रियता के झंडे गाड़ दिए नैनू में बदरा चाए बिजली से झुमके और इस फिल्म का गाना झुमका गिरा बरेली के बाजार में इसने तो तहलका मचा दिया इस गाने को सुनकर लोगों ने पिक्चर हॉल के पर्दे के ऊपर सिक्के और नोटों की बारिश कर दी और पैसों की ये बारिश तब तक चली जब तक यह फिल्म चलती रही ऐसी नगी थी लोगों की साधना के लिए चमका गीदार बरेली के बाजार में झुमका ग और इस गाने की कोरियोग्राफी की थी.

सरोज खान ने यहीं से इनके करियर की भी शुरुआत हुई थी और इसी फिल्म के बाद ही साधना की जिंदगी में वह हुआ जिसकी शायद ही कभी किसी ने कल्पना की थी साधना को इसी साल अपनी एक बीमारी का पता चला और वह बीमारी थी थायराइड इस बीमारी के चलते साधना की सेहत में एकदम से गिरावट आने लगी और इनको इलाज के लिए अमेरिका जाना पड़ा अपने करियर के टॉप पर साधना को इस बीमारी का पता चला और इस बीमारी के चलते साधना को साजन की गलियां दामन साहिरा लव स्पॉट जैसी फिल्मों से हाथ धोना पड़ा बेदर्दी बाल मां तुझको मेरा मन याद करता कुछ समय बाद साधना अपना इलाज करके वापस लौटी और फिर हिंदी सिनेमा में धमाकेदार एंट्री हुई साधना की अब मैं ठीक हो गई हूं मुझे घर ले चलिए इनकी दो फिल्म इंतकाम और दो फूल एक माली रिलीज हुई यह दोनों ही फिल्में सुपर हिट रही लेकिन इन फिल्म के दौरान साधना अपने थायरॉयड की बीमारी के लक्षण छुपाने के लिए अपने गले में एक दुपट्टा बड़े ही स्टाइलिश तरीके से पहनते हुए नजर आने लगी लड़कियों ने इनके इस अंदाज को भी अपनी जिंदगी में जगा दी करीब आए नजर फिर मिले इसके बाद साल 1971 में साधना और राजेंद्र कुमार फिर से सिल्वर स्क्रीन पर एक साथ नजर आए फिल्म आप आए बाहर आई में इस फिल्म का संगीत और कहानी दोनों सुपर डुपर हिट हुए आप आए बहर आई हो.

इसके बाद साधना 1972 में नजर आई पहली बार राजेश खन्ना के साथ फिल्म दिल दौलत दुनिया में इस फिल्म की कामयाबी ऐसी थी कि 1972 में इस फिल्म ने ढ़ करोड़ रुपए की कमाई की थी जो अपने आप में एक रिकॉर्ड था साथ में प्यारा साथी है रात भी ये मद माती है अब फिल्म में काम करते-करते साधना ने अपना फिल्म निर्माण और निर्देशन का काम भी शुरू कर दिया और अपने निर्देशन में साधना ने गीता मेरा नाम फिल्म बनाई जिसमें इन्होंने खुद भी अभिनय किया था यह फिल्म बहुत अच्छी चली ए लड़की लड़की नहीं गीता मेरा नाम है लेकिन अब साधना की बीमारी ने फिर से जोर पकड़ लिया और अब इनका थायराइड अब हाइपर थायराइड बन गया और इस बीमारी के चलते इनको आंखों की बीमारी ग्रॉस डिजीज हो गई जिसमें इंसान की आंखें बड़ी होती चली जाती हैं और बाहर की तरफ निकलने लगती हैं जिस साधना की एक झलक पाने के लिए लोग पागल रहते थे.

वह धीरे-धीरे बदसूरत होती जा रही थी उनकी आंखों की रोशनी जा रही थी इन सबके बीच साधना ने फिल्मों से दूरी बना ली क्योंकि वह हमेशा दुनिया के सामने एक खूबसूरत अभिनेत्री के तौर पर ही पहचानी जाना चाहती थी इसीलिए वह अपने इस चेहरे के साथ लोगों के सामने नहीं आना चाहती थी और साधना इस बीमारी के चलते जवानी में ही बुड्ढी नजर आने लगी साधना पर भगवान की वो मार पड़ी थी जिसकी किसी ने भी कल्पना नहीं की फूलों की तमन्ना की थी हार मिले खरों के साधना 1983 में गर्भवती हुई लेकिन किस्मत की मारी साधना को यह दुख भी झेलना था उनका बच्चा पैदा तो हुआ लेकिन मरा हुआ इसके बाद डॉक्टर ने उनको बताया कि थायराइड की दवाई की चलते आप अब दोबारा कभी मां नहीं बन सकती हैं.

मैं आपको कैसे बताऊं कि मैं अब उस देवता के काबल नहीं रही साधना पर मानो दुखों का पहाड़ टूट गया भगवान साधना को जाने किस गुनाह की सजा दे रहा हो साधना को इस कशमकश में अपनी बहन का वो श्राप याद आया जब बबीता ने गुस्से में साधना को बे औलाद होने का श्राप दिया था इधर साधना पहले से ही दुखों के सागर में डूबी थी कि इनके पति आर के नैयर को अभी अस्थमा का अटैक आया और वह इस दुनिया को अलविदा कह गए और इस तरह से दो प्यार करने वाले हंसों का जोड़ा हमेशा के लिए बिछड़ गया आज मोहताज है सहार के लुट गए साधना को हर कदम पर एक नया दुख मिल रहा था.

वह पूरी तरह से टूट गई थी जिंदगी उनकी नरक बनती जा रही थी बीमारी के साधना फिल्म से दूर थी और इसी बीमारी के चलते इनको पैसों की किल्लत होने लगी लिहाजा बड़ी मेहनत से कमाया गया घर और प्रोडक्शन कंपनी साधना को बेचनी पड़ी और साधना संगीता बंगलों में किराए पर रहने लगी लुट गए काफिले बहारों के साधना को अपने पति को खोने का सदमा था ऐसे में साधना की किसी ने भी कोई मदद नहीं की ये मैं नहीं बोल रही हूं साधना जी ने कहा था कि मैं जिंदगी भर एंट इंट करती रही फिल्म लाइन वाले मेरे लिए नहीं आए रिश्तेदार मेरे थे नहीं मैं अपने फैन से हाथ जोड़ के मदद मांगती हूं उनके सभी परिवार वाले दोस्त सबने मुंह मोड़ लिया था साधना से और दुख तकलीफ की मारी साधना धीरे-धीरे इस दर्द को अपनी किस्मत समझ के जीने लगी उनको पता था कि वह जीवन भगवान ने उनको दिया है वो तो उनको जीना ही पड़ेगा मरने का ढूंढते हैं आज हम बहाना साधना अब अपनी जिंदगी में अकेली थी वह मीडिया और पार्टी से दूर हो गई थी यह वही साधना है जिन्होंने 1965 की भारत पाकिस्तान युद्ध के लिए अपना पैसा और अपनी शादी के सारे गहने भारतीय सेना की खातिर धन कोश में जमा कर दिए थे और आज वही साधना खुद अपने लिए एक-एक पैसे के लिए परेशान हो रही थी अब साधना की जिंदगी में वो हुआ जिससे साधना की मुश्किलें और बढ़ गई साधना किराए के जिस घर में रहती थी.

वह घर था मशहूर सिंगर आशा भोसले का दरअसल इस घर में एक बगीचा था जिसको साधना इस्तेमाल करती थी जिसको लेकर आशा भोसले को आपत्ति थी और इसी विवाद के चलते साल 2012 में आशा भोसले ने दुखों की मारी और टूटी साधना पर पुलिस केस कर दिया और ऐसे में आशा भोसले ने जानबूझकर अपना यह घर एक बिल्डर यूसुफ लकड़ावाला को बेच दिया जिसके बाद इस बिल्डर ने साधना को परेशान करना शुरू कर दिया और उनको धमकाना शुरू कर दिया घर पर अपने गुंडे भेजने शुरू कर दिए लेकिन अकेली साधना ने हिम्मत नहीं हारी और पुलिस में जाकर बिल्डर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी फिल्म अभिनेत्री साधना इन दिनों काफी परेशान है साधना ने अपनी बिल्डिंग के बिल्डर के खिलाफ अब शिकायत दर्ज करा दी है जिसके बाद उस बिल्डर को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन कोई पुख्ता सबूत नहीं होने के कारण यह बिल्डर आसानी से छूट गया जो साधना बीमारी के चलते मीडिया और लोगों से दूर रहना चाहती थी इनको इस हालत में पुलिस कोर्ट परिसर के चक्कर काटने पड़ रहे थे यह सारा काम अब साधना को शारीरिक थकान मानसिक परेशानी के अलावा कुछ नहीं दे रहा था जिसके बाद इनकी मदद को आगे आए सलमान खान के पिता सलीम खान और सलमान खान साधना इतनी सफल अभिनेत्री थी फिर भी यह बात बड़ी अजीब लगती है कि उनको कभी भी एक भी फिल्म के लिए फिल्म फेयर अवार्ड नहीं मिला
बस उनको वह कौन थी और वक्त फिल्म के लिए फिल्म फेयर नॉमिनेशन मिला इतने बेहतरीन करियर होने के बाद भी क्यों साधना को कोई भी अवार्ड नहीं मिला यह सवाल हमेशा भारतीय हिंदी सिनेमा के सामने खड़ा रहेगा तुमने पुकारा और हम चले आए साल 2002 में साधना को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड जरूर मिला लेकिन उनके फैंस और कुछ बड़े लेखक आज भी साधना के साथ हुई जतियो को भुला नहीं पाए हैं लेकिन साधना अपने फैंस और पूरी दुनिया में इतनी मशहूर थी कि उनको कभी भी किसी अवार्ड की जरूरत ही नहीं पड़ी क्योंकि साधना खुद अपने आप में चमकता सोना थी जिसके आगे सभी अवार्ड की चमक हमेशा भी की रही बड़े स्टार सुपरस्टार डायरेक्टर राइटर साधना की खूबसूरती के दीवाने थे किस तरह आपका शुक्रिया अदा करो आपने बहुत बड़ा एहसान किया है.

लेकिन वही साधना बड़ी सादगी के साथ हमेशा यही कहती रही कि मैं तो सिर्फ एक आकर्षण हूं खूबसूरत तो मीना कुमारी और मधुबाला हैं हम जब सिमट के आपकी बाहो में आ गए साधना बेहद साधारण थी वो कभी भी किसी गॉसिप का हिस्सा नहीं रही वो जिंदगी भर बस एक ही इंसान को प्यार करती रही और वो थे उनके पति आपके इनायत आपके करम साधना हिंदी सिनेमा में इकलौती ऐसी हीरोइन थी जो कई तरह के फैशन बॉलीवुड में लेकर आई जैसे साधना है कट बड़े झुमके पहनना चूड़ीदार कुर्ता पजामा दुपट्टा गले में फोल्ड करके पहनना तिरछा काजल पांव में जूतियां जैसे कई फैशन स्टाइल्स थे जो उस दौर में लड़कियों ने खूब कॉपी किए और और आज भी देखे जा रहे हैं आपकी हर चीज बहुत खूबसूरत है साधना को समाज से भी काफी सम्मान मिला था उनको सिंधी समाज ने सिंधी अप्सरा का खिताब दिया था साधना को अपनी दुख भरी जिंदगी में बस दो बातों का दुख रहा एक तो अपने बच्चे को खोने का दूसरा अपने पति का यूं इस दुनिया से चले जाने का साधना अकेली थी और अपनी बीमारी से जूझ रही थी तो एक दिन उनकी बीमारी बढ़ी तो साधना को एक दिन खून की उल्टियां होने लगी उनको फौरन हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया जहां इलाज के बाद वह कुछ ठीक हुई लेकिन कुछ समय बाद एक दिन साधना को बहुत तेज बुखार आया उनको फिर हॉस्पिटल ले जाया गया जहां अगले दिन 25 दिसंबर 2015 को खूबसूरत साधना इस दुनिया को छोड़कर चली गई .

फिल्मी गुलशन का एक महकता हुआ फूल खिलखिला हुआ फूल मुर्झा गया बहुत ही करीबी थी वो और बहुत ही अच्छी दोस्त थी हमारी बहुत अच्छी सहली थी उनके जैसी कोई और दस्ती नहीं है मन तो उनका आर के नैयर साहब के जाने के बाद ही उचट गया था वो एक दूसरे अपने हस्बैंड को इतना प्यार करती थी इस कपल के अंदर बेइंतहा मोहब्बत थी मौत तो ऐसी एक सच्चाई है जो किसी से ना छुपी है और ना ही किसी से बेवफाई करती है साधना जिंदगी और मौत के सफर में अपने पीछे छोड़ गई अपने अभिनय और खूबसूरती की मिसाल पेश करती फिल्म और संगीत साधना की मौत हिंदी सिनेमा के लिए एक गहरा सदमा था जिसने भी सुना वह अपनी आंखों से आंसुओं को रोकने से नहीं रोक पाया साधना हमेशा एक जमीन से जुड़ी हुई हीरोइन थी उनको कभी भी स्टारडम की हवा नहीं लगी.

वह हमेशा लोगों की फिक्र किया करती थी लेकिन अफसोस कि उनकी किसी को कोई फिक्र नहीं थी अफसोस की बात तो यह है कि फिल्म इंडस्ट्री की तरफ से उनके दोस्तों की तरफ से या रिश्तेदारों की तरफ से उन्हें अलविदा कहने वाले गिने चुने लोग थे और हमारी खूबसूरत साधना इस दुनिया से दुख दर्द के साथ यूं अलविदा हो गई थी साधना हमेशा हिंदी सिनेमा का सूरज बनकर चमक गगी और जब-जब हिंदी सिनेमा में खूबसूरत अभिनेत्रियों का नाम आएगा साधना का नाम उनमें सबसे ऊपर होगा

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