आप रात के खाने की टेबल पर बैठे हैं और घड़ी की सुई अगले 30 मिनट का सफर तय करती है। उतने ही देर में दुनिया के एक कोने से उठी एक चिंगारी दूसरे महाद्वीप को राख के ढेर में बदल सकती है। यह कोई हॉलीवुड फिल्म का सीन नहीं बल्कि रूस के उस की हकीकत है जिसे दुनिया सैटर्न यानी के नाम से जानती है।
आखिर क्यों रूस की यह नई पूरी दुनिया की रातों की नींद उड़ाए हुए हैं। क्या वाकई इसे रोकना नामुमकिन है? आज की इस खास रिपोर्ट में हम परतों को खोलेंगे रूस की सबसे घातक ताकत आर एस28 सरमात की। भले ही रूस इसे कहता है सरमात लेकिन नाटो देशों ने इसे नाम दिया है सैटर्न सेकंड। इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली इंटरकॉन्टिनेंटल माना जाता है। अब आप सोच रहे होंगे कि क्या यह सिर्फ एक है? नहीं, यह एक चलता फिरता गोदाम है। 200 टन से ज्यादा वजनी यह इतनी ताकतवर है कि इसकी एक हिट एक पूरे देश का नक्शा बदलने की क्षमता रखती है। इसकी सबसे डराने वाली बात है इसकी रेंज। सरमाद की अनुमानित मारिक क्षमता 18,000 कि.मी. है। आसान भाषा में कहें तो रूस में बैठे-बैठे ही मॉस्को से वाशिंगटन तक निशाना साधा जा सकता है और समय मात्र 30 मिनट।
यानी जब तक दुश्मन को पता चलेगा कि हमला हुआ है तब तक जवाबी कारवाही का समय भी निकल चुका होगा। क्या वाकई रूस इस मिसाइल का इस्तेमाल करेगा? और अगर हां, तो किस पर? यूक्रेन या अमेरिका। देखिए इस रिपोर्ट में। क्या रूस कुछ ही मिनटों में अमेरिका पर हमला कर सकता है? जवाब है हां। और यह खतरा पहले से कहीं अधिक वास्तविक है। यह चेतावनी ईरान में जारी सहित बढ़ती वैश्विक तनावों के बीच आई है। व्लादमीर पुतिन के नेतृत्व में रूस का न केवल उन्नत है बल्कि यह संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक सीधा और अभूतपूर्व खतरा है। आर एस28 सरमत आईसीबीएम जैसे जो भयानक मारक क्षमता वाली मिसाइल हैं। 18,000 कि.मी. तक का सफर तय कर सकते हैं और मात्र 20 से 30 मिनट में मुख्य अमेरिकी महाद्वीप के किसी भी शहर तक पहुंच सकते हैं। इसका मतलब है कि प्रक्षेपण से लेकर प्रभाव तक अमेरिकियों के पास लगभग कोई चेतावनी नहीं होगी।
इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि इसका हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन जो मैक 20 से अधिक की गति से चलता है। दुनिया की लगभग हर मिसाइल रक्षा प्रणाली को चकमा दे सकता है। इसे रोकना लगभग नामुमकिन है जिससे हमला संभावित रूप से अजय हो जाता है। पनडुब्बी से ल्च की जाने वाली बुलवा रूस को अपने को महासागरों के नीचे छिपाने की अनुमति देती हैं जो अटलांटिक या प्रशांत महासागर में कहीं से भी आधे घंटे से भी कम समय में परमाणु हमला करने में सक्षम है। पुतिन की रणनीति स्पष्ट है। एक ऐसा बेहद संवेदनशील खतरा पैदा करना जहां सेकंड मायने रखते हैं जिससे अमेरिका लगातार सतर्क रहे और गलत अनुमान का जोखिम काफी बढ़ जाए। ईरान में जारी युद्ध जैसा क्षेत्रीय संघर्ष भी रूस की पहुंच के साथ जुड़ सकता है। जिससे वैश्विक खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गति, गोपनीयता और विनाशकारी शक्ति का यह संयोजन रूस के शस्त्रागार को अब तक का सबसे घातक रणनीतिक खतरा बनाता है। जिसका सामना अमेरिका ने कभी किया है। सबसे खराब स्थिति में संयुक्त राज्य अमेरिका को किसी भी सार्थक प्रतिक्रिया शुरू करने से पहले ही भारी तबाही का सामना करना पड़ सकता है।
इन बढ़ते खतरों के बीच नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबाड़ ने भी चेतावनी दी है कि रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों के पास अब ऐसी मिसाइल प्रणालियां हैं जो अमेरिकी मुख्य भूमि तक पहुंचने में सक्षम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खुफिया विभाग खतरे पर करीब से नजर रखता है। लेकिन आसन हमलों के बारे में फैसला राजनीतिक नेताओं पर निर्भर करता है जो शक्ति के संतुलन और नेतृत्व की जिम्मेदारी की एक डरावनी याद दिलाता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ईरान युद्ध और तेज हो गया है। जिसमें इजराइल, मृत सागर, नेगेव और हिंद महासागर में अमेरिका और ब्रिटेन के ठिकानों पर बार-बार l
हमले हो रहे हैं। ईरान की क्षेत्रीय और रूस की तत्काल हमला करने की क्षमता का यह संयोजन अमेरिका को अभूतपूर्व उच्च जोखिम वाली स्थिति में डाल देता है। यहां तक कि ट्रंप प्रशासन के दौरान भी रोग और रणनीतिक निवारण के सवालों ने यह उजागर किया था कि राजनीतिक निर्णय किस तरह जोखिम को बढ़ा सकते हैं। आज पुतिन के उन्नत शस्त्राचार और तेज होते वैश्विक संघर्षों के साथ अमेरिका उन खतरों का सामना कर रहा है जो मिनटों में उसकी धरती तक पहुंच सकते हैं जो एक ऐसी
