रूसी महिला की बच्चियों का पिता कौन, खुला राज।

रविवार के दिन कर्नाटक के गोकड़ इलाके में एक गुफा से रूसी महिला और उसके दो मासूम बच्चियों के साथ रेस्क्यू किया गया। बताया गया कि महिला यहां पर आठ सालों से रह रही थी। गोवा की एक गुफा में उस महिला ने एक बच्ची को जन्म भी दिया। इन बातों पर सभी को यकीन नहीं हो रहा। मगर इसके अलावा और कोई विकल्प पुलिस के पास भी नहीं है। क्योंकि जो महिला बयान दे रही है, वही इस वक्त की सच्चाई है। दो बच्चियों के साथ महिला को गुफा से निकालकरडिटेंशन सेंटर ले जाया गया। इस पर महिला ने भारी दुख जाहिर किया। कुछ सवाल जिसके जवाब नहीं मिल रहे। पहला सवाल कि दो मासूम बच्चियों के पिता कौन है? वो कहां रहती है? महिला के साथ क्या किसी तरह का कोई अपराध तो नहीं हुआ? महिला क्या खाती थी? क्या पीती थी? वो कैसे इस जंगल में अकेले आठ सालों से सर्वाइव कर रही थी? वह भी दो मासूम बच्चियों के साथ।

आपको इस महिला की पूरी कहानी यहां पर बताने जा रहे हैं। महिला को उस गुफा से निकाले जाने के बाद बेंगलुरु के एक हॉस्पिटल में ले जाया गया। इस वजह से कि कहीं महिला और बच्चों को कोई इंफेक्शन या कोई तकलीफ ना हो। रूसी महिला जिनका नाम कुटीना है, उन्होंने एक न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए कहा कि वह अपने बच्चों के साथ जंगल में बहुत खुश थी। पहली बार उसके बच्चों ने अस्पताल और डॉक्टरों को देखा है। रूसी महिला ने दावा किया कि उसने गोवा की एक गुफा में रहते हुए अकेले एक बच्ची को जन्म भी दिया था।

अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने एक इजराइली व्यवसाई से संपर्क किया। इस शख्स को महिला ने बच्चों का पिता बताया है। 40 साल की नीना कुटीना और उनकी छह और 4 साल की दो बेटियों को 9 जुलाई को कर्नाटक के उत्तर कन्नड़जिले में गोकर्ण के पास एक गुफा में पाया गया था। अधिकारियों का कहना है कि उनका वीजा 2017 में ही समाप्त हो गया था। नीना वर्तमान में बेंगलुरु के एक डिटेंशन सेंटर में उनको रखा गया है।

नीना बताती हैं कि उन्होंने बहुत समय पहले अपने एक बेटे को खो दिया था और वो गोकर्ण कोई आध्यात्म की तलाश में नहीं बल्कि इसलिए आई थी क्योंकि वह प्रकृति अच्छा स्वास्थ्य देती है और प्रगति से वह प्यार करती है। विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय यानी कि एफआरआरओ के एक अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए

बताया कि बच्चों के पिता का पता लगाने में वह सफल हुए। अधिकारियों ने बताया कि बच्चियों का पिता एक इजराइली नागरिक है जो बिजनेस वीजा पर भारत पर रह रहा है। मंगलवार को फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस के अधिकारियों ने इस इजरली व्यक्ति के साथ में एक मीटिंग भी की ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह नीना और दोनों बच्चियों का टिकट वहन कर सकता है या नहीं।

एक अधिकारी ने बताया कि 40 साल के इस इजरली व्यक्ति की मुलाकात नीना से काफी पहले हुई थी और फिर दोनों में प्यार हो गया। वो कपड़ों का व्यवसाय करता है। लेकिन हम लोग आखिरकार उस व्यक्ति से मिलने में कामयाब रहे। एक सूत्र नेबताया कि शुरुआत में नीना बच्चों के पिता के बारे में बात करने या जानकारी देने को तैयार नहीं थी। लेकिन काउंसलर की मदद से उसने खुलकर बात की और इजराइल इजली नागरिक के बारे में पूरी जानकारी दी। जिसके साथ उसने कहा कि वह रिश्ते में है। अभी भी वह उसके साथ रिश्ते में है। एफ आरआरओ अधिकारियों ने रूसी वाणिज्य दूतावास से भी संपर्क किया और बताया कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने और महिला और उसके बच्चों को वापस भेजने में अभी लगभग 1 महीने का वक्त लग सकता है। सूत्रों ने बताया कि नीना की मुलाकात इस इजराइली व्यक्ति से 2017 या 18में हुई थी और वह अपने देश इसके बाद लौट गया था। गोकर्ण पुलिस स्टेशन के एक

पुलिस अधिकारी ने बताया कि उसका दावा है कि उसने गोवा में ही रहते हुए एक गुफा में खुद के एक बच्चे को जन्म भी दिया। हालांकि इस पर यकीन करना मुश्किल है लेकिन हम इसे नकारने की स्थिति में भी नहीं है क्योंकि पुलिस के पास इसका कोई सबूत नहीं है। बेंगलुरु के एक अस्पताल के बाहर कुटीना ने न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए बताया कि वो अपने बच्चों के साथ जंगल में बहुत खुश थी। वातावरण के बीच रहती थी और पहली बार इतने सालों में उसके बच्चों ने अस्पताल कीबिल्डिंग डॉक्टर्स यह सब देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें प्रकृति में जंगल में रहने का बहुत अनुभव है। हम मर वहां पर मर नहीं रहे थे। मैं अपनी बेटियों को यहां पर मरने के लिए नहीं लाई थी। वह बेहद खुश थी। झरने में रहती थी। वहां पर तैरती थी। सोने के लिए सोने के लिए जगह यहां पर बहुत अच्छी थी। उन्होंने मिट्टी से बहुत सारी कलाकृतियां बनाई, पेंटिंग बनाई और कई सारे सी सबक भी सीखे। हम स्वादिष्ट खाना यहां पर बनाते थे, खाते थे। महिला ने कहा कि मैंने कम से कम 20 देशों की यात्रा की है और अलग-अलग जंगलों में रही हूं क्योंकिहमें प्रकृति से प्यार है। रूसी महिला ने कहा कि गुफा किसी घने जंगल के अंदर नहीं थी और ना ही इतनी छोटी थी कि उसमें रहा ना जा सके। उसमें एक खिड़की जैसा एक जगह थी जहां से हम समुद्र देख सकते थे।

आपको क्या और क्या चाहिए? उन्होंने आगे बताया कि कोई मैं कोस्टारिका, मलेशिया, बाली, थाईलैंड, नेपाल और यूक्रेन की यात्रा कर चुकी हूं। उन्होंने बताया कि भारत में गोकर्ण जाने से पहले ही कुछ समय वह ऋषिकेश में भी रही है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस जो कह रही है वह पूरी बात सही नहीं है। उसका वीजा कुछ ही समय पहले खत्म हुआ है। जबकिपुलिस यह दावा कर रही है कि महिला का वीजा 2017 में ही खत्म हो गया। रेस्क्यू की गई रूसी महिला ने अपने एक दोस्त को बेहद भावुक मैसेज लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि उसके गुफा में रहने वाला जीवन अब छीन लिया गया है। इसका अंत हो गया है। अब उसे एक जेल जैसी जगह पर रखा गया है जहां ना खुला आसमान है ना घास है और ना ही पास में कोई झरना है। महिला ने अपने खत में लिखा कि अब वो एक सख्त ठंडी फर्श वाली जगह पर सोती है। जंगल में रहना मेरे लिए सबसे अद्भुत और रोमांचित कर देने वाला पल है।

हम यहां पर बिल्कुल नहीं डरे। मेरी छोटी बच्चियों को भी यहां पर बिल्कुल डर नहीं लगता। वो यहां पर बहुत खुश थे। वो यहां पर झरनों में खूब खेलती थी। यहां पर सोने के लिए बहुत अच्छी जगह है। हम यहां मिट्टी से खेलते थे। मिट्टी से पेंटिंग बनाते थे। यहां पर खाना चूल्हे पर पकाते थे और हमको यहां पर बहुत अच्छा एहसास हो रहा था। हम सब हमारे मैं और मेरी बच्चियां यहां पर नेचर के बीच सब कुछ अच्छा था और खुश थे। नेचर ने सब कुछ दिया है। यहां पर किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है। हम कभी भूखे भी नहीं सोए। आप कहीं भी घूम सकते हो। उगते हुए सूरज को देख सकते हो, योगा करसकते हो। यहां की आबोहवा भी बिल्कुल साफ है। महिला ने बताया कि वह हिमालय के साधुओं की तरह एक जीवन जी रहे थे। 40 साल की इस महिला का नाम नीना कुटीना है और उसे भारत आकर अपना नाम मोही कर लिया था। वो शांति और अध्यात्म की तलाश में भारत आई। महिला उत्तर कन्नड़ के रामतीर्थ पहाड़ियों में मिली। वह पूरी तरह से आइसोलेशन में रह रही घने जंगलों और खड़ी पहाड़ियों से वह घिरा हुआ पूरा इलाका था।

उसका बाहरी दुनिया से महिला का कोई संपर्क नहीं था। वहां सिर्फ और वह और उसके दो बच्चे थे। जिसका नाम छ साल की प्रिया और 4 साल कीअमा ये दोनों बच्चियों के नाम थे। इन तीनों के अलावा उनके पास थी एक रुद्रा की मूर्ति जिसकी वह पूजा करती थी। पुलिस बताती है कि वह अपना दिन पूजा, ध्यान, मौन और अध्यात्म में बिताती थी। ऐसा लगता है कि उसे बाहरी दुनिया की भागदौड़ से कहीं कोई फर्क नहीं पड़ता। उसका लक्ष्य था केवल अपने मन की शांति। पुलिस ने बताया कि इलाके में भीषण लैंडस्लाइड हुआ था। वो पेट्रोलिंग पर थे। उनको लगा कि लैंडस्लाइड की वजह से कहीं कोई शख्स तो मलबे पर नहीं चला गया। वो जंगली इलाके पर उतरे। उन्हें वहां पर एक गुफा नजर आई। यहां पर गुफा केबाहर कुछ कपड़े दिखे। जिसके बाद वो हैरान हुए कि आखिरकार इस ऐसे इलाके में जहां कोई दूर-दूर तक कुछ नहीं है। यहां कौन रह सकता है? वो अंदर गए तो रुद्रा की तस्वीर रखी जिसकी पूजा हो चुकी थी और एक बच्ची जो है वह वहां पर खेल रही थी और दूसरी बच्ची यहां सो रही थी। यहीं पर उनको पास में ही रूसी महिला नजर आई जिसके बाद पुलिस ने आगे की कारवाई शुरू की। भले ही रूसी महिला को प्रकृति से प्रेम है। वो प्रग कई देशों की यात्राएं कर चुकी है। उसने बताया कि वो वो 20 देशों में कई जंगलों में कई दिनों तक उन्होंने प्रवास किया है और वो उनकी हैबिटमें है। आदत में है। ऐसा नहीं है कि मुझे यहां पर कोई तकलीफ थी या मैं किसी अवसाद की वजह से यहां पर रुकी थी। बस मुझे यह है कि मुझे यह जगह बहुत अच्छी लग रही थी और इसीलिए मैंने इतने साल इस गुफा में बिता दिए।

उन्होंने बताया कि मैं कभी-कभी बाहर भी जाती थी, सामान ले भी आती थी। ऐसा नहीं है कि हमारे मैं अपनी बच्चियों को यहां पर डालने के लिए ले आई हूं। मैं अपनी बच्चियों की अच्छी सेहत के लिए उनकी अच्छी परवरिश के लिए मैंने यह जगह चुनी थी और मैं इसी जगह से मोहब्बत करती हूं। हालांकि अब उनको डिपोर्ट करने की तैयारियां शुरूहो चुकी है। एक महीने का अधिकारियों के मुताबिक सब समय लगेगा और इनको वापस से ही महिला को डिपोर्ट करके इनके देश रूस भेज दिया जाएगा।

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