नमस्ते बच्चों, मैं टीचर रोबोट हूं। भारत के पहले राष्ट्रपति कौन थे? भारत के पहले राष्ट्रपति थे डॉ. राजेंद्र प्रसाद। बच्चों, क्या आप कुछ और जानना चाहते हैं? भारत के पहले प्रधानमंत्री कौन थे? भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे बच्चों। क्या आप बच्चों को प्रॉपर तरीके से पढ़ा सकती हो? जी हां, मैं बच्चों को प्रॉपर तरीके से पढ़ा सकती हूं बच्चों। 100 + 92 कितने होते हैं? 100 + 92 192 होते हैं बच्चों। ये इलेक्ट्रिसिटी क्या होता है? बिजली इलेक्ट्रिसिटी एक प्रकार की ऊर्जा है बच्चों। यह मोशन और चार्ज्ड पार्टिकल्स के कारण होती है।
क्या आप इसके बारे में कुछ और जानना चाहते हैं? सब कुछ वैसा ही है जैसा नॉर्मल क्लासरूम में होता है। बच्चे हैं, टीचर हैं। सवाल जवाब है। फर्क बस इतना है कि ये टीचर एआई टीचर हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट टीचर। और इन मैम का नाम है सोफी। इनसे सवाल पूछे तो ये जवाब देती हैं। फिर चाहे सवाल इतिहास का हो या हो भूगोल का या फिर गणित की कोई पहेली ही क्यों ना हो अर्थशास्त्र का भी सवाल आप पूछ सकते हैं। इस टीचर रोबोट को यूपी के बुलंदशहर के रहने वाले आदित्य कुमार ने बनाया है। 17 साल के आदित्य 12वीं क्लास में पढ़ते हैं। उन्हें इस एआई टीचर को बनाने का आईडिया कहां से मिला? इसे बनाया कैसे गया? बनाने में टाइम कितना लगा? यह जानने से पहले एआई टीचर की क्लास देखिए।
इस रोबोट को बनाने में एलएलएम चिपसेट का इस्तेमाल किया गया है। एलएलएम यानी लार्ज लैंग्वेज मॉडल जिसमें लैंग्वेज के एक बहुत बड़े लार्ज मॉडल्स के तहत उसकी ट्रेनिंग करवाई जाती है एआई की। यह वही तकनीक है जिसका इस्तेमाल बड़ी-बड़ी कंपनियां रोबोट बनाने में करती हैं। एलएलएम चिपसेट का मतलब है जैसा मैंने बताया लार्ज लैंग्वेज मॉडल चिपसेट एक खास तरह की कंप्यूटर चिप होती है जो एi को भाषा समझने और बोलने लिखने में मदद करती है एक तरह की टेक्नोलॉजी। इस एआई टीचर रोबोट सोफी से अपना परिचय देने के लिए कहा गया तो सुनिए क्या कहती हैं। नमस्ते बच्चों, मैं एक एआई टीचर रोबोट हूं। मेरा नाम सोफी है और मुझे आदित्य ने इन्वेंट किया है। मैं शिवचरण इंटर कॉलेज बुलंदशहर में पढ़ाती हूं। इस रोबोट को बनाने वाले आदित्य बुलंदशहर के शिव चरण इंटर कॉलेज में पढ़ते हैं। उनके पिता पेशे से कंपाउंडर हैं और उन्होंने दोस्तों से पैसे लेकर यह रोबोट बनाया है।
आदित्य से जब इस रोबोट को लेकर यह पूछा गया कि उन्होंने इसे बनाया क्यों? तो उन्होंने बताया कि अगर कोई टीचर एक दिन स्कूल ना आए तो उनका रोबोट उनकी जगह क्लास ले सकता है। फिलहाल सोफी सिर्फ हिंदी बोलती हैं। इस रोबोट को बनाने का प्रोसेस क्या रहा? अब ये भी जान लेते हैं। सर ये बच्चों को प्रॉपर तरीके से नॉलेज दे सकता है। सर हमने इसके इसके अंदर हमने एलएलएम चिपसेट का यूज़ किया है जो कि बड़ी-बड़ी रोबोट्स कंपनी भी यूज़ करती हैं। तो ये काफी अच्छे से बच्चों को डाउट क्लियर कर सकती है। अगर मान लीजिए कोई टीचर एब्सेंट होते हैं तो खाली पीरियड में ये रोबोट्स पढ़ा सकते हैं। सर हम इसको इतना एडवांस बना सकते हैं। शायद ही ऐसा कोई इंडिया में रोबोट बना होगा इसको इतना ज्यादा एडवांस बना सकते हैं। सर ये फिलहाल अभी बोल सकती है। लेकिन हम इसको इस तरह से डिजाइन कर रहे हैं कि ये लिख भी सकती है। बोलने के साथ-साथ बच्चों को लिखकर भी बता सकती है। कॉलेजों में तो लैब्स होती हैं। हम चाहते हैं.
सर हर डिस्ट्रिक्ट में एक लैब होनी चाहिए। चाहे कोई सर बच्चा कोई गरीब हो या अमीर हो। हर बच्चा आकर वहां पर अपनी रिसर्च कर सके। इस एआई रोबोटिक टीचर और उनके पढ़ाने का तरीका शुरुआती तौर पर क्लासरूम में पढ़ने वाले बच्चों को काफी पसंद आ रहा है। आदित्य को उम्मीद है कि उनकी इस पहल को सरकारी मदद मिलेगी और इसी के साथ उन इलाकों जहां टीचर स्कूल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और बच्चे पढ़ाई से दूर हैं, वहां ऐसे रोबोटिक टीचर से बच्चों को पढ़ाई में मदद की जा सकेगी।
