रिंकू सिंह के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़। पिता खानचंद्र सिंह का हुआ निधन। बिखरा पूरा परिवार। खुद कंधे पर ढोए सिलेंडर लेकिन बेटे पर नहीं आने दिया जिम्मेदारियों का बोझ। क्रिकेटर बेटे की सफलता के पीछे छिपाया अपना कड़ा संघर्ष। बेटे के सपनों के लिए एक किया खून पसीना। लेकिन दुनिया से जाने से पहले अधूरी रह गई आखिरी इच्छा। क्रिकेटर रिंकू सिंह का पूरा परिवार इस वक्त गहरे सदमे में है।
27 फरवरी की सुबह रिंकू सिंह के पिता का निधन हो गया। रिंकू के पिता स्टेज फोर लीवर कैंसर से जंग लड़ रहे थे। 24 फरवरी को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था।
जहां तीन दिन तक वो वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ते रहे। लेकिन 27 फरवरी की सुबह तकरीबन 5:00 बजे के करीब खानचंद्र सिंह का निधन हो गया। रिंकू के पिता के निधन की दुखद खबर सामने आने के बाद पूरे खेल जगत में मातम पसरा है। और इसी के साथ चर्चा में आ गया है रिंकू के पिता का संघर्ष। वो कड़ा संघर्ष जो उन्होंने अपने बेटे को क्रिकेट का सुपरस्टार बनाने के लिए किया। खुद जिंदगी भर कंधे पर सिलेंडर ढोकर उन्हें घर-घर पहुंचाते रहे। लेकिन कभी भी गरीबी के बीच जिम्मेदारियों का बोझ अपने होनहार बेटे पर नहीं आने दिया।
गली मोहल्ले से निकालकर बेटे को क्रिकेट के मैदान तक पहुंचाकर ही दम लिया। अलीगढ़ की गलियों से आईपीएल का सफर तय करने वाले रिंकू सिंह के लिए सब कुछ बहुत आसान नहीं रहा। उन्होंने गरीबी देखी। क्रिकेट खेलने के चक्कर में अपने पिता से मार भी खाई लेकिन अपने सपनों पर डटे रहे और बेटे का क्रिकेट के प्रति जुनून देख खानचंद्र सिंह ने भी लंबा संघर्ष किया।
बता दें कि मूल रूप से यूपी के बुलंदशहर के रहने वाले खानचंद्र सिंह रोजगार की तलाश में बरसों पहले अलीगढ़ आए थे। जहां वह अलीगढ़ के एक गैस एजेंसी में एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी का काम किया करते थे। महीने में महज 7 से ₹8,000 की कमाई से उन्होंने अपने पूरे परिवार का पेट पाला। गरीबी की मार झेलते हुए वह घर-घर गैस सिलेंडर पहुंचाने का काम करते थे। रिंकू सिंह का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। दो कमरों के छोटे से घर में उनका पूरा परिवार रहता था।
एक इंटरव्यू में खुद रिंकू ने बताया था कि 2012 में क्रिकेट खेलने की वजह से उन्हें पिता की मार खानी पड़ी थी। क्योंकि शुरू में पिता उनके क्रिकेट खेलने के फैसले के खिलाफ थे। लेकिन रिंकू ने हार नहीं मानी। जिसके बाद बेटे का जुनून देख वो भी उसके सपनों को पूरा करने में जुट गए। उसी साल क्रिकेट में रिंकू ने इनाम में एक बाइक जीती। उसी इनाम की बाइक से खानचंद्र सिंह सिलेंडर डिलीवरी करने लगे। रिंकू की किस्मत तब बदली जब कोलकाता नाइटराइडर्स ने उन्हें आईपीएलl में ₹55 लाख में खरीदा। गुजरात टाइटंस के खिलाफ पांच बॉलों पर पांच लगाकर रिंकू सिक्सर किंग बन गए। बाद में केकेआर ने उन्हें ₹13 करोड़ में रिटेन किया। एक दौर ऐसा भी आया जब खानचंद्र सिंह ₹5 लाख के कर्ज में डूब गए थे।
रिंकू ने क्रिकेट से मिलने वाले डेली अलाउंस बचाकर पिता की मदद की। कभी दो कमरों के घर में रहने वाले रिंकू ने सफलता मिलने के बाद अपने माता-पिता को अनमोल तोहफा दिया था। साल 2024 में रिंकू ने अलीगढ़ की ओजोन सिटी के गोल्डन स्टेट में आलीशान घर खरीदा। लगभग 500 वर्ग गज में फैली हवेली जैसे आलीशान घर को रिंकू ने ₹3.5 करोड़ की कीमत में खरीदा था और अपने माता-पिता को तोहफे में दिया। इसी के साथ रिंकू ने पिता के लिए एक हाई एंड बाइक भी खरीदी थी। जिसकी तस्वीरें भी खूब वायरल हुई थी। रिंकू और उनके परिवार के लिए अच्छे दिन आए ही थे कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी ने उनके पिता को जकड़ लिया। परिवार रिंकू की शादी की तैयारियां कर रहा था। लेकिन इसी बीच खान चंद्र सिंह को स्टेज फोर लीवर कैंसर डायग्नोस हो गया। रिंकू और प्रिया सरोज की शादी की तैयारियों पर बार-बार ब्रेक लगता रहा। दो बार इनकी शादी पोस्टपोन की गई और अब जून में इनकी शादी का मुहूर्त निकला था।
खानचंद्र सिंह ने अपने बेटे के लिए कई सपने संजोए थे। उनकी इच्छा थी कि वह अपने बेटे रिंकू को दूल्हा बनते देखें। लेकिन अफसोस उनकी यह इच्छा अधूरी रह गई। खानचंद्र सिंह के निधन से उनका पूरा परिवार बिखर गया है।
जानकारी के लिए बता दें कि रिंकू के परिवार में मां वीणा देवी के अलावा पांच भाई और एक बहन भी हैं। पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर रिंकू सिंह आते हैं। रिंकू के एक भाई ऑटो चलाने का काम किया करते थे। जबकि दूसरे भाई कोचिंग इंस्टट्यूट में काम करते हैं। रिंकू की एक बहन नेहा भी है जो कि वीडियो कंटेंट क्रिएटर है।
