राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इस बार वो कर दिखाया है जो पिछले 30 सालों में नहीं हुआ। जहां पहले छात्र जून की तपती गर्मी में रिजल्ट का इंतजार करते थे। इस बार मार्च की सुहानी शामों में ही आपकी किस्मत का फैसला होने वाला है। राजस्थान बोर्ड के इतिहास का सबसे बड़ा यूटर्न आ चुका है।
राजस्थान बोर्ड यानी आरबीएसई के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको चौंका दिया है। आमतौर पर हम देखते हैं कि 12वीं का रिजल्ट पहले आता है और 10वीं का बाद में।
लेकिन 2026 का साल इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। इस बार 12वीं से पहले कक्षा 10वीं का रिजल्ट जारी होने की पूरी तैयारी है। बोर्ड सचिव गजेंद्र सिंह राठौर ने साफ कर दिया है कि आंसर शीट्स की जांच के लिए 35,000 शिक्षकों की फौज दिनरा जुटी हुई है। मकसद सिर्फ एक 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र से पहले छात्रों के हाथ में उनकी मार्कशीट थमाना ताकि 11वीं की पढ़ाई में एक दिन की भी देरी ना हो। अब आप पूछेंगे कि आखिर वो डी डे कब है? तो अपनी डायरी निकाल लीजिए और यह तारीखें नोट कर लीजिए। 10वीं का रिजल्ट कब आएगा?
बोर्ड की पूरी कोशिश है कि 20 मार्च तक परिणाम 10वीं का रिजल्ट घोषित कर दिया जाए। वहीं इसके ठीक बाद यानी 28 मार्च तक 12वीं के नतीजे आने की संभावना है। पांचवी और आठवीं का रिजल्ट छोटे बच्चों के लिए भी खबर पक्की है। उनका रिजल्ट 24 मार्च को आएगा ताकि 25 मार्च की मेगापीटीएम में माता-पिता गर्व से अपने बच्चों की प्रोग्रेस देख सके। इस साल की परीक्षा की रफ्तार भी किसी एक्सप्रेस ट्रेन से कम नहीं है।
12 फरवरी से परीक्षाएं शुरू हुई। 10वीं की परीक्षा 28 फरवरी को खत्म। तो वहीं 12वीं का आखिरी पेपर 11 मार्च को हुआ। महज कुछ ही दिनों के भीतर लाखों कॉपियों को जांचना किसी चुनौती से कम नहीं था। अगर हम आंकड़ों की बात करें तो इस साल करीब 19.89 लाख छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी है। अकेले 10वीं में ही 106878 छात्र अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ सालों के मुकाबले इस बार छात्रों की संख्या में थोड़ी कमी आई। लेकिन मुकाबला आज भी उतना ही कड़ा है। छात्रों के मन में एक ही सवाल होता है। पास होने के लिए कितना चाहिए? तो नियम सीधा है। हर विषय में आपको कम से कम 33% नंबर लाने ही होंगे। अगर 100 नंबर का पेपर है तो 33 नंबर जीत की चाबी।
वैसे राजस्थान के छात्र पढ़ने में अवल हैं। पिछले साल यानी 2025 में 10वीं का पासिंग परसेंटेज 93.60% रहा था। जिसमें लड़कियों ने 94% के साथ बाजी मारी थी। इस बार देखना होगा कि क्या लड़के इस अंतर को कम कर पाते हैं या बेटियां अपना दबदबा कायम रखेंगी। य
हां एक जरूरी सूचना पांचवी और आठवीं के छात्रों के लिए भी है। इस बार सरकार ने नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म कर दी है। यानी अब बिना पढ़े पास होना मुमकिन नहीं होगा। पांचवी के बच्चों को भी कम से कम 32 नंबर लाने होंगे वरना उन्हें दोबारा परीक्षा के चक्रव्यूह से गुजरना पड़ सकता है।
