आज यह दास्तान है भारतीय हिंदी सिनेमा के सुनहरे गुजरते दौर की एक ऐसी नायिका की जिसकी मनमोहक सांवली सलोनी सूरत की खूबसूरती ने हिंदी सिनेमा के साथ-साथ बड़े-बड़े फिल्म अभिनेताओं और फिल्म निर्माताओं के ऊपर वो जादू चलाया कि यह अभिनेत्री बन गई। सबके दिलों की धड़कन हंसते हंसते रस्ते जिंदगी यू ही हजारों लाखों दिलों की पहली पसंद बनी यह महान अभिनेत्री कैसे भारतीय हिंदी सिनेमा का वो नाम और मुकाम बन गई जिसकी चाहत में इनके साथ की दूसरी मशहूर नायिकाएं रह गई इनसे कोसों दूर।
दोस्तों, यह महान नायिका अपने शानदार और दमदार अभिनय की बदौलत 80 के दौर में कैसे बन गई हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित, लोकप्रिय और महंगी अदाकारा। गुम है किसी के प्यार में। दिल सुबह। दोस्तों इतनी खूबसूरत और लोकप्रिय अभिनेत्री की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इस अभिनेत्री की मां को तलाकशुदा होने के बावजूद हो गया था दो-दो मर्दों से नाजायज प्यार और कैसे आगे चलकर उसी नाजायज प्रेम संबंधों के चलते इस अभिनेत्री की मां को जन्म देना पड़ा था दो-दो नाजायज संतानों को। बस बस बंद करो। अब मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती। दोस्तों, क्यों इस अभिनेत्री को अपने बचपन के दिनों से, अपने माता-पिता की वजह से झेलनी पड़ी वो आलोचना और अपमान की आग जिसकी लौ में जलकर खाक हो गया इस अभिनेत्री का पूरा मासूम सा बचपन। आज उस अभिनेत्री की जहां पूरी दुनिया दीवानी है। वो अभिनेत्री क्यों कभी भी नहीं बनना चाहती थी, किसी भी सिल्वर स्क्रीन की अदाकारा। पर इन माय केस ऐसा नहीं है। मैं कभी नहीं चाहती थी कि मैं एक्ट्रेस बनूं। मुझे तो मार मार के बनाएगा। दोस्तों इस अदाकारा की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इस नायिका को अपने परिवार की खातिर घर गृहस्ती को चलाने के लिए रखना पड़ा था बाल अवस्था में सिनेमा की चौखट पर कदम।
इन माय केस मैं बहुत छोटी थी जब मैं आई थी तो मैं चाइल्ड आर्टिस्ट थी। 3 साल की उम्र से मैं काम कर रही हूं। दोस्तों और क्या आप जानते हैं कि अपने रंग रूप से काली मोटी और भद्दी दिखने वाली यह अभिनेत्री आगे चलकर कैसे बन गई हिंदी और साउथ सिनेमा की सबसे खूबसूरत और आकर्षित हीरोइन।
क्या आप जानते हैं कि इस अदाकारा की खूबसूरत जिंदगी का वो कौन सा श्राप मिला था इसे? जिसकी वजह से यह अदाकारा चार शादियां और छह प्रेम संबंधों में बंधे होने के बावजूद आज भी है अकेली तन्हा और विधवा जिंदगी रोज नए रंग जिंदगी के दुख के भंवर में फंसी ये अभिनेत्री दो-दो पतियों के विधवा होने के बावजूद आज भी क्यों और किसके नाम का लगाती है अपनी मांग में सुहागिन का सिंदूर। तुम एक दिल में नहीं। हजारों दिलों में एक साथ बसना चाहती थी इसीलिए। इसलिए आज ना तो तुम किसी की मां हो ना ही किसी की पत्नी। दोस्तों कैसे इस नायिका की वजह से मशहूर फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन और उनकी पत्नी जया बच्चन की जिंदगी में लग गई वो आग जिसकी धक में आज तक जल रहा है पूरा बच्चन परिवार। क्यों इस अभिनेत्री की वजह से अमिताभ बच्चन देना चाहते थे जया बच्चन को तलाक? क्यों मेरा घर तबाह कर रही हैं? अपना घर भी तो भूक रही हूं। और दोस्तों क्या आप यह जानते हैं कि इस अभिनेत्री की वजह से भारतीय हिंदी सिनेमा में बर्बाद हो गए कई घर और उन्हीं बर्बाद हुए घरों की एक महान खूबसूरत अभिनेत्री ने क्यों कह दिया था इस अदाकारा को राष्ट्रीय ? क्या आप जानते हैं कि ये अभिनेत्री चार-चार शादी अनेकों प्रेम संबंध होने के बावजूद कैसे बन गई समलैंगिक? क्या है इनकी समलैंगिक जिंदगी के पीछे का वो काला सच जिसे आज तक दुनिया की नजरों से छिपाया गया। मन क्यों बहका रे बहका आधी रात को।
इस अभिनेत्री ने भारतीय हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय और विवादों की वो छाप छोड़ी कि आज एक दौर गुजर जाने के बाद भी इस अभिनेत्री को पहचाना गया भानु रेखा गणेशन यानी हम सबके दिलों की धड़कन खूबसूरत रेखा के नाम से। तेरे बिना जिया जाए ना। कौन थी रेखा? कहां से आई थी? किस परिवार से यह ताल्लुक रखती हैं? क्या थे इनकी जिंदगी के वो राज और विवाद जिनकी वजह से आज भी हैं यह चर्चा में। मैं आपको रेखा से जुड़े हर उस राज के बारे में बताऊंगी। लेकिन उससे पहले एक नजर डाल लेते हैं रेखा के शुरुआती जीवन और पढ़ाई लिखाई पर। रेखा का जन्म 10 अक्टूबर साल 1954 को तमिलनाडु चेन्नई में हुआ था। रेखा का पूरा नाम भानु रेखा गणेशन है। रेखा की मां का नाम पुष्पावली और पिता का नाम जैेमिनी गणेशन है। रेखा के माता-पिता भी तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार्स थे। तो रात के मुसाफिर चंदा जरा बता दे। दोस्तों हम रेखा के जीवन के बारे में आपको सब कुछ बताएं। उससे पहले रेखा की मां और पिता के आपसी रिश्ते के बारे में जानना बहुत जरूरी है क्योंकि इस रिश्ते को जाने बिना रेखा की जिंदगी को समझ पाना मुश्किल है। रेखा के परिवार की जिंदगी शुरू होती है मद्रास की शान जैेमिनी स्टूडियो से। इस स्टूडियो के मालिक थे एस एस वासन साहब और एस एस वासन साहब की उन दिनों एक मशहूर अभिनेत्री हुआ करती थी उनका नाम था पुष्पावली।
वासन जी पहले से ही शादीशुदा थे तो वहीं पुष्पावली भी पहले से शादीशुदा थी और दो बच्चों की मां थी। एस एस वासन और पुष्पावली दोनों एक दूसरे के बेहद करीब थे। एस एस वासन पुष्पावली को बहुत प्यार करते थे। वो पुष्पावली को सब कुछ देना चाहते थे। लेकिन नहीं देना चाहते थे तो वह था एक पत्नी का दर्जा। और वहीं दूसरी तरफ तलाकशुदा पुष्पावली अपने इस रिश्ते को एक नाम देना चाहती थी। लेकिन उनको पत्नी का दर्जा नहीं मिल रहा था और यह बात पुष्पावली को हर रोज अंदर ही अंदर खाई जा रही थी। इसी कशमकश के बीच एक दिन पुष्पावली की एक फिल्म रिलीज हो रही थी जिसका नाम मिस मालिनी था और इसी फिल्म में एक छोटा सा रोल निभा रहे थे रामस्वामी गणेशन। रामस्वामी गणेशन और पुष्पावली की इसी फिल्म के सेट पर मुलाकात हुई। ये मुलाकातें कब प्यार में बदल गई यह दोनों को ही नहीं पता चला। रामास्वामी के साथ पुष्पावली अब अपने भविष्य के हसीन और खूबसूरत सपने देखने लगी थी।
लेकिन इन दोनों की यह नजदीकी एस एस वासन को कहीं ना कहीं खटक रही थी। एस एस वासन उन दिनों एक हिंदी फिल्म इंसानियत बनाने का विचार कर रहे थे। इस फिल्म में दिलीप कुमार और देवानंद हीरो थे और इन दोनों की हीरोइन बनने वाली थी पुष्पावली। एस एस वासन को पता था कि पुष्पावली का सपना था कि वह हिंदी सिनेमा की अभिनेत्री बनकर उस पर राज करें। लेकिन पुष्पावली के सपने के बीच आ गई एस एस वासन की गंदी नियत और इसी नियत के चलते एस एस वासन ने पुष्पावली से अपने हिंदी फिल्म इंसानियत और रामास्वामी गणेशन में से किसी एक को चुनने के लिए कहा। प्यार में पूरी तरह डूबी पुष्पावली ने फिल्म को छोड़ दिया और अपने प्यार रामास्वामी गणेशन को चुन लिया। हालांकि उन दिनों रामास्वामी गणेशन कोई बड़े एक्टर नहीं थे। जबकि पुष्पावली एक ऊंचे दर्जे की महिला एक्ट्रेस थी और पुष्पावली ने रामास्वामी के साथ जैेमिनी स्टूडियो को अलविदा कह दिया। रामास्वामी ने पुष्पावली के साथ सब कुछ छोड़ा लेकिन नहीं छोड़ा था जैेमिनी स्टूडियो का नाम। लिहाजा रामास्वामी ने अपने नाम के आगे से रामास्वामी हटाकर लगा लिया जैमिनी और इस तरह से यह बन गए जैमिनी गणेशन और अपनी मेहनत और किस्मत से कुछ ही समय बाद जैमिनी की फिल्में शानदार प्रदर्शन करने लगी और यह बन गए साउथ इंडस्ट्री के नए सुपरस्टार और अब इस कामयाबी के साथ ही अब पुष्पावली सोचने लगी जैेमिनी और अपनी शादी की बात लेकिन यहां यह बात गौर गौर करने की है कि जैेमिनी गणेशन भी पहले से ही शादीशुदा थे और जैेमिनी ने भी कामयाबी पाने के लिए पुष्पावली को पत्नी का दर्जा देने से इंकार कर दिया। यह सब कुछ जानकर पुष्पावली एक बार फिर अपना सब कुछ हार गई। वह अंदर तक टूट गई।
गणेश पुष्पावली को पत्नी तो मानते थे लेकिन दुनिया के सामने पत्नी का सम्मान नहीं देते थे। पुष्पावली की किस्मत ना जाने उनसे किस जन्म का बदला ले रही थी। इनकी जिंदगी में प्यार करने वाले तो थे लेकिन पत्नी का दर्जा देने वाले नहीं। कैसी है दुनिया हमने ना जाना। अपने और गणेशन के रिश्ते में पुष्पावली ने साल 1954 की 10 अक्टूबर को एक बेटी को जन्म दिया जिसका नाम रखा भानु रेखा गणेशन। रेखा के नाम के आगे गणेशन तो जुड़ गया लेकिन इनको दुनिया वालों ने गणेशन की नाजायज प्रेम संबंध की नाजायज संतान माना। क्योंकि गणेशन और रेखा की मां पुष्पावली का यह रिश्ता अभी तक एक नाजायज रिश्ते की डोर से बंधा था और इस नाजायज रिश्ते और संतान के जन्म ने उस वक्त न्यूज़पेपर और मैगजींस के कई पेज भर दिए थे और इन सबके बीच पुष्पावली के जख्म और गहरे होते चले गए और इस तरह से जैमिनी और पुष्पावली की नाजायज रिश्ते की दरारें और बढ़ती चली गई।
रेखा के बाद पुष्पावली ने एक और नाजायज बेटी को जन्म दिया जिसका नाम राधा रखा गया। दो-दो बेटियों के नाजायज पिता बनने के बाद भी जैमिनी गणेशन ने कभी भी पुष्पावली और अपने रिश्ते को कोई नाम नहीं दिया। बेटियों के जन्म के बाद जैमिनी ने पुष्पावली के घर आना-जाना बिल्कुल बंद सा ही कर दिया और इसी दुख के समय में भानु रेखा भी बड़ी हो रही थी और भानु रेखा भी समझने लगी थी उनके पिता जैमिनी गणेशन और भी कई बच्चों के पिता हैं और वह हमको अब पसंद नहीं करते हैं। जैमिनी गणेशन की इस बेरुखी ने पुष्पावली को घुटनों पर ला खड़ा किया और उधर मासूम सी भानु रेखा अपनी मां को हर रोज तड़पते और रोते आंसुओं को बहाते देखती और इस सबके बीच भानु रेखा अपनी मां के बेहद करीब आ गई। पुष्पावली अपनी बेटियों की देखभाल के लिए अब फिल्मों में छोटा-मोटा अभिनय कर लिया करती। लेकिन बढ़ती उम्र के साथ यह रोल भी मिलने बंद हो गए। भानु रेखा जब 4 साल की थी, तो अपनी मां की वजह से उन्हें बाल कलाकार के रूप में फिल्म इति गुट्टो में काम करने का मौका मिला था और यह फिल्म साल 1958 में रिलीज हुई। इसके बाद भानु रेखा साल 1966 में रंगुला रत्नम में भानु रेखा ने काम किया। वेली डिंभि नार गुजरते समय में पुष्पावली के लिए घर का खर्चा चलाना बड़ा मुश्किल होता जा रहा था।
उनको समझ ही नहीं आ रहा था कि वो करें तो करें क्या? घर के हालात बिगड़ते गए। कर्ज भी घर में पैर पसार चुका था। छोटी सी भानु रेखा और उनकी बहन इस मुश्किल दौर में समाज और आसपोस के साथ-साथ स्कूल में नाजायज संतान होने के दर्द और कड़वे तानों को सुन और सहन कर रही थी। स्कूल में बच्चे भानु रेखा को नाजायज शब्द से बुलाकर रोज दर्द देते जिसकी वजह से भानु रेखा का स्कूल जाना भी मुश्किल हो गया था। ऐसे में मासूम सी रेखा का मन पढ़ाई में लगे तो लगे कैसे? वह हर रोज बेइज्जती का दर्द झेल रही थी और इसी दर्द को झेलते हुए भानु रेखा फेल हो गई। भानु रेखा जहां कड़वे तानों से परेशान हो गई थी तो वहीं वो अपने लिए काली, मोटी और भद्दी जैसे शब्दों को अपने लिए सुनना बड़ा ही मुश्किल हो गया था। यह शब्द भानु रेखा की जिंदगी में जहर का काम कर रहे थे। और इन्हीं सब बातों से परेशान होकर एक दिन मासूम सी भानु रेखा ने अपनी मां को चिट्ठी लिखते हुए नाबालिक उम्र में ही अपनी जिंदगी को हमेशा हमेशा के लिए खत्म करने का फैसला कर लिया और भानु रेखा ने उस वक्त ढेरों नींद की गोलियां खा ली लेकिन शायद किस्मत को अभी यह मंजूर नहीं था। डॉक्टर की मदद से भानु रेखा को बचा लिया गया और जब भानु रेखा होश में आई तो उनको सबसे पहले अपनी मां का रोता हुआ चेहरा दिखा।
मां को रोते देख भानु रेखा मां से लिपट लिपट कर जोर-जोर से रोने लगी। बेटी की ऐसी हालत देख पुष्पावली भी अपने आप को रोक ना पाई और खुद भी टूट गई। दुख भरे इन हालातों में मां ने रेखा को समझाया और संभाला। उन्होंने रेखा से फिल्मों में आगे काम करने के लिए कहा क्योंकि पुष्पावली को रेखा से ही उम्मीदें थी कि भानु रेखा पूरे परिवार का सहारा बन सकती हैं। लिहाजा भानु रेखा की पढ़ाई छूट गई और अब पुष्पावली भानु रेखा को जगह-जगह स्टूडियो में ऑडिशन दिलवाने ले जाने लगी। भानु रेखा भूखी प्यासी धूप छांव में खड़े होकर ऑडिशंस देती तो कभी इंतजार करती और इतना सब होने पर भी भानु रेखा को फिल्म निर्माताओं की बेरुखी का सामना करना पड़ता था। सुख के दिन चले गए तो क्या दुख के दिन आ जाएंगे?
सब जानते थे कि भानु रेखा जैमिनी गणेशन की नाजायज बेटी है और ऐसे में जब जैमिनी गणेशन को ही अपनी बेटी की फिक्र या रिश्ता उन्होंने नहीं माना तो ऐसे में फिल्म निर्माता भी भानु रेखा को यह सोचकर काम नहीं देते थे कि कहीं भानु रेखा को हमने काम दे दिया तो कहीं जैमिनी गणेशन हमसे नाराज ना हो जाए क्योंकि जैमिनी गणेशन उन दिनों एक प्रभावशाली और बड़ा नाम और सुपरस्टार थे और इस सब के चलते भानु रेखा को छोटे-छोटे रोल करने के लिए मिलने लगे। लेकिन उनको कोई भी अपनी फिल्म की हीरोइन बनाने को तैयार नहीं था क्योंकि सबकी नजर में रेखा का रंग रूप काफी भद्दा था। वो मोटी काली दिखने वाली लड़की थीं। इधर भानु रेखा का भी मनोबल टूटने लगा तो उधर उनकी मां पुष्पावली को यही लगने लगा कि भानु रेखा उनके सपनों को साकार नहीं कर पाएंगी। इन सब तकलीफों के बीच साल 1969 को भानु रेखा की एक फिल्म ऑपरेशन जैकपॉट नली सीआईडी 999 रिलीज हुई।
हैंड्स अप। आई थैंक यू वेरी वेरीरी मच। हालांकि इन फिल्मों में काम करने से भानु रेखा को कोई कामयाबी तो नहीं मिल रही थी लेकिन घर चलाने के लिए राहत मिल रही थी। इसके बाद भानु रेखा ने जिंदगी में उम्मीद की किरण बनकर आए फिल्म निर्माता कुलजीत सिंह पाल जिनकी फिल्म अनजाना सफर में भानु रेखा पहली बार बतौर एक हीरोइन के तौर पर नजर आने वाली थी। लेकिन यह एक हिंदी फिल्म थी और भानु रेखा तो हिंदी भाषा का एक शब्द तक नहीं जानती थी। लेकिन अपनी कड़ी मेहनत के साथ भानु रेखा ने हिंदी का अभ्यास किया और फिल्म के लिए अपना कदम आगे बढ़ा दिया। कुलजीत रेखा की फिल्मों के प्रति लगन को देखकर काफी प्रभावित हुए और उन्होंने उसी दिन भानु रेखा से 5 साल के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करा लिए और रेखा को इस तरह अपनी पहली हिंदी फिल्म मिल गई और साथ ही इस फिल्म के लिए मिले ₹25,000 और रेखा को इस तरह अपनी पहली हिंदी फिल्म मिली और साथ ही इस फिल्म के लिए मिले ₹25,000। भानु रेखा की आने वाली फिल्मों में हर बार ₹25,000 और जुड़ते चले गए। बेटी के इस कदम और सफलता से मां पुष्पावली बेहद खुश थी क्योंकि जो पैसे रेखा को मिलने वाले थे।
उससे उनके जीवन की सारी परेशानी खत्म हो रही थी। हर मुसीबत का मुकाबला हंसते-हंसते करना चाहिए। इसके बाद 1979 में 15 साल की छोटी सी भानु रेखा के कदम पहली बार पड़े माया नगरी बंबई में यानी आज के मुंबई में। यहां भानु रेखा को अजंता प्लेस में रहने के लिए एक कमरा मिला। यह वो कमरा था जहां शूटिंग के बाद भानु रेखा रहती थी। ये रहा आपका कमरा। कमरा छोटा तो जरूर है मगर मुझे उम्मीद है आपको यहां किसी किस्म की कोई तकलीफ नहीं होगी। भानु रेखा मुंबई आ तो गई थी परिवार की खातिर लेकिन वो यहां खुश नहीं थी क्योंकि उनके दिल में घबराहट थी नया शहर अनजानी भाषा ना पसंद का खाना कुछ भी उनके मन का नहीं था लेकिन भानु रेखा मन को मारते हुए दिन रात काम करती एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागती वो बस अब एक कठपुतली की तरह काम कर रही थी क्योंकि उनके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी थी कुछ समय बाद रेखा की पहली फिल्म अनजाना सफर का मुहूर्त हुआ। लेकिन किसी वजह से इस फिल्म का नाम बदलकर दो शिकारी रख दिया गया।
चांद क्यों दर्द है रात पे? मुहूर्त पर लोग भानु रेखा को हीरोइन के तौर पर देखकर हैरान थे। आलोचकों ने फिल्म निर्माता कुलजीत को कहा कि तुमको फिल्म के लिए यही नाजायज और काली मोटी लड़की ही पसंद आई। लेकिन शायद उस वक्त यह बात किसी को भी नहीं पता थी कि आने वाले समय में यह लड़की कितना बड़ा इतिहास रचने वाली थी। इसके बाद भानु को कुछ और हिंदी फिल्म मेहमान हसीनों का देवता सावन भादो मिल गई। इसके बाद भानु रेखा की पहली फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। लेकिन इस फिल्म के सेट पर भानु रेखा के साथ जो हुआ वह शायद नहीं होना चाहिए था। इस फिल्म के हीरो विश्वजीत फिल्म के एक सीन में भानु रेखा को अचानक से किस करने लगते हैं। बताया जाता है कि इस तरह के किसी भी सीन के बारे में भानु रेखा को कुछ भी नहीं बताया गया था। इस सीन के दौरान ही भानु रेखा की आंखों से आंसुओं की धारा निकल गई। वह अपने आप को ठगा हुआ महसूस करने लगी। उनके मन में बहुत सारे सवाल खड़े हो रहे थे। वो फिल्म के हीरो और फिल्म निर्माता के खिलाफ जाना चाहती थी।
लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाए क्योंकि उनको पता था कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो उनको फिल्मों से बाहर कर दिया जाएगा और उनकी मां के सपने पल भर में मिट्टी में मिल जाएंगे। मुझे कब जाना होगा? दैट्स अ ग्रेव गर्ल। इस हादसे के बाद भानु रेखा ने अपने आप को मजबूत किया और अब उन्होंने अपने तरीके से जिंदगी को जीने का फैसला किया। जिसकी शुरुआत भानु रेखा ने अपने नाजायज पिता जैेमिनी गणेशन का नाम अपने नाम से हटाकर सिर्फ रेखा रखकर किया। तो तुम भी सुन लो कि आज मैं बहुत खुश हूं। रेखा अपनी मजबूत सोच के साथ आगे बढ़ रही थी। लेकिन उनके मां-बाप के अतीत ने उनका कभी भी कहीं भी पीछा नहीं छोड़ा। रेखा की जब पहली फिल्म दो शिकारी रिलीज होने से पहले सेंसर बोर्ड के पास पहुंची तो यह फिल्म पास नहीं हो पाई क्योंकि उस वक्त रेखा नाबालिक थी और फिल्म में कुछ सीन आपत्तिजनक थे। लिहाजा इस फिल्म को रोक दिया गया और इसके बाद यह फिल्म लगभग 10 साल बाद 1979 में रिलीज हुई थी। एक्सक्यूज मी। क्या मैं मिस्टर रंजीत से मिल सकती हूं? कहिए क्या बात है? ओ तो आप मिस्टर रंजीत है? जी नहीं मेरा नाम सतीश है। मैं इस लॉज में काम करता हूं। लेकिन इसी बीच रेखा कई और फिल्मों की शूटिंग शुरू कर चुकी थी और उन्हीं में से एक फिल्म थी सावर भादो। कान में झुमका जाल में ठुमका कमर पे चोटी लटके हो गया दिल का पुरजा। इस फिल्म में रेखा के साथ थे उस दौर के बेहद खूबसूरत हीरो नवीन निश्चल। नवीन निश्चल उन दिनों एक बड़ा नाम थे। नवीन निश्चल ने जब पहली बार रेखा को देखा तो वह फिल्म के निर्माता मोहन बाबू से काफी नाराज हुए थे। वो रेखा के रंगरूप को काफी अपमानजनक दृष्टि से देख रहे थे। वो रेखा की वजह से फिल्म छोड़ने को राजी हो गए। लेकिन उनको काफी समझा-बुझाकर मना लिया गया। रेखा हर कदम पर दुनिया की जिल्लत का सामना कर रही थी।
इस फिल्म में गोरे रंगरूप के नवीन निश्चल के आगे रेखा को चेहरे से लेकर पैर तक मेकअप करके थोड़ा बहुत गोरा बनाया जाता था। यह सब होते देखकर फिल्म यूनिट के लोग रेखा का मजाक बनाते लेकिन रेखा चुपचाप अपना काम करती रहती। वो अक्सर काम खत्म करके अपने घर आकर रोती रहती और इन सवालों के जवाब ढूंढने में लग जाती। सावन भादो फिल्म की शूटिंग पूरी हुई और इस फिल्म का प्रीमियर रखा गया। यहां आए सभी लोगों ने नवीन निश्चल की तारीफ कर दी। लेकिन बेचारी रेखा को यहां भी आलोचनाओं और तिलस्कार का सामना करना पड़ा और यहीं पर मशहूर फिल्म अभिनेता शशि कपूर भी आए थे। जिन्होंने रेखा को पहली बार देखा था और उनके मुंह से निकला कि ये काली मोटी फूहड़ लड़की कैसे इंडस्ट्री में टिक पाएगी। रेखा ने जब यह बात सुनी तो वह कुछ नहीं बोली। लेकिन शशि कपूर की पत्नी ने रेखा की आंखें पढ़ ली और शशि से कहा कि शशि जी आप देखना यह लड़की आने वाले समय में कई साल तक सिनेमा पर राज करेगी और यह बात किसको मालूम थी कि यही लड़की हिंदुस्तान में एक खूबसूरती स्टाइल की एक नई इबादत लिख देगी।
झूठ बोलोगे तो मेरा मन मुझे बता देगा। फिल्म सावन भादुर रिलीज हुई और यह फिल्म उस समय की एक बड़ी हिट फिल्म बनी। इस फिल्म ने कामयाबी के साथ सिल्वर जुबली बनाई और रेखा इसी फिल्म के साथ रातोंरात एक स्टार बन गई। मेरा मन घबराए तेरी आंखों में नी इस फिल्म की कामयाबी के बाद तो रेखा के आगे एक के बाद एक फिल्मों की लाइन लगती चली गई। और एक समय ऐसा हो गया था कि रेखा तकरीबन 25 फिल्मों में एक साथ काम कर रही थी। वह हर रोज दो शिफ्टों में काम करने लगी। रेखा अपनी कामयाबी की तरफ दौड़ रही थी। रेखा की अब हर साल दर्जन भर फिल्में रिलीज होती और रेखा ऊंचाई के सातवें आसमान पर थी। साल 1972 में रेखा ने एक फिल्म एक बेचारा की थी जिसमें इनके हीरो जितेंद्र थे। जितेंद्र उन दिनों लड़कियों के पसंदीदा एक्टर हुआ करते थे। जितेंद्र के साथ काम करते-करते कब जितेंद्र रेखा की पसंद बन गए, पता ही नहीं चला। जितेंद्र रेखा को बड़े सम्मान के साथ इज्जत दिया करते थे और यह सब चीज रेखा के दिल में घर कर गई। रेखा जितेंद्र में अपना भविष्य देखने लगी।
लेकिन शायद रेखा के नसीब में खुशी थी ही नहीं क्योंकि जिस जितेंद्र को रेखा अपना बनाने की सोच रही थी वो जितेंद्र पहले से अपनी एक महिला मित्र शोभा जो आगे चलकर इनकी धर्मपत्नी बनी उनको प्यार करते थे। जितेंद्र शोभा को नहीं छोड़ सकते थे। लिहाजा अब जितेंद्र और रेखा में झगड़े होने लगे। यह तुम भी अच्छी तरह समझ लो। तो फिर आज से हम दोनों के रास्ते अलग-अलग। बिल्कुल अलग-अलग। इसके बाद इन दोनों के बीच हालात यह हो गए कि यह फिल्म तो एक साथ कर रहे थे, लेकिन बातचीत पूरी तरह से बंद हो गई थी। रेखा जो पहले से ही जिंदगी में बहुत कुछ झेल चुकी थी, वह पहली बार दिल के टूटने के दर्द को भी झेल रही थी। पहली बार रेखा का दिल टूटा था। दर्द से गुजर रही रेखा को अभी यह एहसास भी नहीं था कि किस्मत उनको अभी ऐसे ही ना जाने कितने मोड़ों पर लाकर खड़ा कर देगी। तो मैं सच कहती हूं मैं जिंदा नहीं रहूंगी राम मैं मर जाऊंगी। रेखा की निजी जिंदगी में दर्द था लेकिन फिल्मी सफर का काम वैसा ही चल रहा था।
रेखा की झोली में फिल्में गिर रही थी और रेखा उस दौर के सभी बड़े स्टार और सुपरस्टार्स जैसे राजेंद्र कुमार, सुनील दत्त, विनोद खन्ना, धर्मेंद्र और राजेश खन्ना की हीरोइन बनकर फिल्मी पर्दे पर नजर आ रही थी। नदिया से दरिया दरिया से सागर रेखा के पास अभी सब कुछ था। अपना खुद का नाम था, शोहरत थी। लेकिन अगर नहीं था तो वो था एक हमसफर और एक प्यार करने वाला। बहुत जल्दी ही रेखा की जिंदगी में एक ऐसा इंसान आया जिसने रेखा को समझाया और प्यार दिया और उनके टूटे दिल को जोड़ने में कामयाबी उन्हें मिली। और उनका नाम था विनोद मेहरा जो कि हिंदी सिनेमा के एक जानेमाने फिल्म एक्टर थे। आपकी आंखों में कुछ महके हुए से रेखा और विनोद मेहरा ने पहली बार एक फिल्म ऐलान में साथ काम किया था जो साल 1971 में रिलीज हुई थी। रेखा और विनोद मेहरा में जल्दी ही दोस्ती हो गई और यह दोस्ती प्यार में बदल गई। रेखा का यह वो वक्त था जब यह दिल से खुश थी विनोद मेहरा के साथ। विनोद मेहरा वो इंसान थे जो रेखा की प्यार में ईमानदारी और उनके खुले विचारों को पसंद करते थे। विनोद मेहरा रेखा से शादी करना चाहते थे और रेखा भी इस रिश्ते से बेहद खुश थी। प्यार का यह रिश्ता इन दोनों को एक दूसरे का अपना तो बना रहा था।
लेकिन इस रिश्ते में एक ऐसा इंसान भी था जो इन सब से खुश नहीं था और वो थी विनोद मेहरा की मां कमला मेहरा। कमला मेहरा अपने बेटे के लिए एक संस्कारी और घरेलू बहू लाना चाहती थी। पर रेखा की छवि बिल्कुल अलग थी। रेखा के कुछ बोल्ड बयान और उनका पुराना अतीत उनके इस रिश्ते के आगे आ रहा था। विनोद मेहरा ने रेखा के प्यार में अपनी मां को मनाने की बहुत कोशिश की। लेकिन वो अपनी मां को नहीं मना पाए और रेखा को अब डर लगने लगा कि कहीं विनोद मेहरा उनको छोड़कर ना चले जाएं। और इसी सब के चलते एक दिन दोनों में झगड़ा हो गया। जो कहना चाहते हो साफ-साफ क्यों नहीं कहते? सुनकर चली जाऊंगी मैं। कह क्यों नहीं दे सकती? तुम मेरे साथ नहीं रह सकते। रेखा को लगने लगा कि अब यह रिश्ता खत्म हो जाएगा। रेखा शायद यह गम बर्दाश्त नहीं करना चाहती थी और विनोद मेहरा को खोना नहीं चाहती थी। लिहाजा एक दिन रेखा ने इसी कशमकश में संवेदनशील पदार्थ खा लिया और अपनी जिंदगी को एक बार फिर से खत्म करने की कोशिश की। क्या करूंगी? इस पर उम्मीद नहीं छोड़ते। सब कुछ तो है तुम विकास घर सब कुछ।
लेकिन समय रहते उनको हॉस्पिटल ले जाया गया जहां इनकी जान बच गई। रेखा के इस कदम की हर न्यूज़पेपर और जनता में चर्चा थी और जब रेखा सवालों के घेरे में घिर गई तो विनोद मेहरा और रेखा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें रेखा ने कहा कि वो अपने खाने के साथ कॉकरोच खा गई थी जिसकी वजह से ऐसा हुआ। लेकिन रेखा का यह बयान किसी के भी गले नहीं उतरा था। विनोद मेहरा जानते थे कि सच क्या है। विनोद मेहरा ने रेखा से वादा किया कि वह कभी भी उनको नहीं छोड़ेंगे और दोनों ने मिलकर तय किया कि अब वह दोनों शादी करके ही विनोद मेहरा की मां के पास जाएंगे और आगे कुछ हुआ भी यूं ही। मशहूर अभिनेत्री मौसमी चैटर्जी के पति ने शादी की सभी तैयारियां की। और विनोद मेहरा और रेखा ने कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में एक मंदिर में सात फेरे लेकर रेखा और विनोद मेहरा शादी के बंधन में बंध गए। आजकल पांव जमीन पर नहीं पड़ते। रेखा इस रिश्ते से बहुत खुश थी क्योंकि अब उनके रिश्ते को ऐसा नाम मिला जिससे उनके अतीत के कड़वे सच और नाजायज शब्द से उनका पीछा छूट जाएगा। और अब रेखा कहलाएंगी मिसेज मेहरा।
शादी के बाद यह दोनों कोलकाता से मुंबई वापस विनोद मेहरा के घर पहुंचे। रेखा और विनोद मेहरा अपने मन में जैसा सोच कर आए थे मां से मिलने पर वैसा नहीं हुआ। रेखा ने जैसे अपनी सास के पैर छुए तो विनोद मेहरा की मां ने रेखा को धक्का मार दिया और रेखा के ऊपर आग बबूला होते हुए उनको बहुत भला बुरा कहा। चल हट मत पुकार मुझे इस रिश्ते से। तेरा मेरा कोई रिश्ता नहीं। उठ निकल यहां से। ऐसा विनोद मेहरा अपनी मां को शांत करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उनकी मां का गुस्सा और बढ़ता जा रहा था। गुस्सा इतना ज्यादा हो गया कि वो रेखा के ऊपर चप्पल लेकर दौड़ पड़ी और उस वक्त के सारा तमाशा आसपास के लोग भी देख रहे थे। विनोद मेहरा इस स्थिति को संभालने में नाकामयाब हो गए और विनोद मेहरा ने रेखा से ही कहा कि तुम घर चली जाओ। मुझे क्या मालूम था कि
विनोद का यह जवाब सुनकर रेखा सुन्न पड़ गई। रेखा को विनोद से इस जवाब की कतई उम्मीद नहीं थी। रेखा अपने आप को एक बार फिर से ठगा सा महसूस कर रही थी। अब रेखा की आंखों में सपनों की जगह आंसुओं का सागर उमड़ पड़ा और इसी दुख के साथ रेखा अपने घर वापस आ गई। लाचार बेबस रेखा कुछ नहीं कर पाई। जिंदगी अंधकार में डूब रही थी। रेखा ने अपने रिश्ते को बचाने के लिए कोशिश भी की लेकिन किस्मत के आगे रेखा की एक ना चली। प्यार इतना कच्चा नहीं होता आनंद जिस्म दफना जाते हैं। प्यार नहीं मेरी जिंदगी एक उलझा हुआ सवाल बन गई है। रेखा का रिश्ता कांच की तरह एक ही चोट से पूरी तरह से चकनाचूर हो गया। इसके बाद साल 1973 में रेखा ने एक इंटरव्यू दिया जिसमें उन्होंने कहा कि मैं कमला मेहरा के लिए सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं बल्कि बदनाम अभिनेत्री हूं जिसका बेहद सड़ा हुआ अतीत है। तो ठीक है जो चाहे वो करो आज से तुम्हारा मेरा कोई रिश्ता नहीं।
इसके बाद रेखा फिर से फिल्मों में लगातार काम करने लगी और अब रेखा वो अभिनेत्री बन गई जिनकी फिल्मों से ज्यादा उनके रोमांस और बोल्ड बयानों के चर्चे होते थे। रेखा के उन दिनों में उनकी एक दोस्त हुआ करती थी जिनका नाम था योगिता बाली। योगिता बाली भी एक एक्ट्रेस थी। योगिता उन दिनों मशहूर फिल्म अभिनेता और खलनायक जीवन के बेटे किरण कुमार योगिता बाली के साथ प्रेम संबंधों में थे। तुम कितनी खूबसूरत हो ये मेरे दिल से किरण कुमार हमेशा योगिता से रेखा से दूर रहने की सलाह दिया करते थे। उनको इन दोनों की दोस्ती सही नहीं लगती थी। आगे चलकर जिंदगी में कुछ ऐसा हुआ कि जिसकी कल्पना शायद समझ से परे थी। यह कब हुआ, कैसे हुआ कुछ पता नहीं। जो किरण कुमार अपनी प्रेमिका से रेखा से दूर रहने की बात कर रहे थे, वो खुद रेखा को प्यार करने लगे और उनको डेट करने लगे और इन दोनों का यह प्रेम अखबारों की खबर बन गया। दिल का नजराना ले ओ दिलदार ले दिल का नजराना ले जब यह बात योगिता बाली को पता चली तो इस बात से वो काफी हैरान हुई लेकिन उन्होंने इन सब में रेखा की ही गलती नहीं मानी बल्कि किरण कुमार को ही धोखेबाज ठहराया। तुम्हारे सपने पूरे हो गए हैं। तुम्हें सब कुछ मिल गया है। गीता भला ही गीता ना मिलेगी तो क्या होगा? अब रेखा की जिंदगी में किरण कुमार आ चुके थे। किरण कुमार रेखा के प्यार में ऐसे दीवाने हुए कि वो अक्सर रेखा की फिल्मों की शूटिंग की जगह पहुंच जाते और फिल्मी पार्टियों में भी दोनों साथ नजर आते।
रेखा एक बार फिर से प्यार की गिरफ्त में हो तो गई लेकिन वो अपनी बदनसीब किस्मत के अंजाम से बेखबर थी। तेरे साथ ही जिएंगे। तेरे साथ ही किरण कुमार रेखा से प्यार करने में तो कामयाब हुए लेकिन अपने रिश्ते को कोई नाम देने में विफल हो गए। दरअसल किरण कुमार फिल्म अभिनेता जीवन के बेटे थे और जीवन रेखा का पुराना सारा अतीत जानते थे। वह जानते थे कि रेखा नाजायज औलाद हैं और जीवन ने रेखा के द्वारा दिए गए बोल्ड बयानों को भी सुना और पढ़ा था और इसी वजह से रेखा की छवि जीवन की नजरों में अच्छी नहीं थी जिसका नतीजा यह हुआ कि यह रिश्ता खत्म कर दिया गया। रेखा की जिंदगी में भले ही यह प्यार नया हो लेकिन किस्मत का फैसला वही पुराना था। इस रिश्ते के टूटने से रेखा के दिल पर कई गहरे जख्म हुए। मुझे रूठा यार बनाना है। रेखा ने अपने रिश्ते को बहुत कुछ दिया। अपने फिल्मी सफर की भी परवाह नहीं की। हर मुमकिन कोशिश की। अपने उन रिश्तों को बचाने की जिन्हें वह अपनाना चाहती थी। रेखा के प्रेम संबंध फिल्मी गलियारों में गूंज रहे थे। लेकिन रेखा ने सच में इन रिश्तों के लिए अपनी आत्मा तक को औरों को सौंप दिया। लेकिन रेखा को हर बार उस गलती की सजा मिली जिसकी वो हकदार नहीं थी। रेखा जिंदगी के दो रास्तों पर थी। निजी जिंदगी में तूफान था।
लेकिन फिल्मी सफर उनका बहुत अच्छा चल रहा था। साल 1972 से लेकर 1973 तक रेखा की 16 फिल्में रिलीज हुई। फिल्मों ने रेखा की झोली में सब कुछ डाल दिया था। और अब रेखा ने पहली बार साल 1972 में अपने लिए मुंबई में एक फ्लैट खरीदा। जहां रेखा ने यह फ्लैट खरीदा था। वहां उसी बिल्डिंग में जया भादुड़ी भी रहा करती थी। एक ही बिल्डिंग में रहने की वजह से इन दोनों की अक्सर मुलाकातें हुआ करती थी। उस वक्त जया भादुड़ी और अमिताभ बच्चन शादीशुदा नहीं थे। लेकिन प्रेम संबंध में थे। रेखा उन दिनों जया भादुड़ी को अच्छी बुरी सभी तरह की सलाह दिया करती थी। दोनों की दोस्ती सगी बहनों जैसी थी। जिस वक्त यह दोस्ती इतनी गहरी थी, उसी वक्त अमिताभ बच्चन फ्लॉप एक्टर के तौर पर जाने जाते थे। लेकिन कुछ समय बाद फिल्म जंजीर की कामयाबी ने अमिताभ बच्चन की किस्मत को ही बदल दिया और फिल्म कामयाबी के साथ अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी ने शादी कर ली। लेकिन दोस्तों जया बच्चन जो अब तक रेखा को बहन माना करती थी उन्होंने रेखा को अपनी शादी में ही नहीं बुलाया। रेखा को यह बात बहुत बुरी लगी और हर बार की तरह रेखा ने मीडिया के सामने अपने दिल की बात बोल दी। रेखा शादी में ना बुलाए जाने से बेहद नाराज थी और उनकी यह नाराजगी आगे बढ़ती ही चली गई। रेखा ये क्या हो गया तुम्हें? तुम होश में तो हो?।
इधर रेखा और जया बच्चन के बीच रिश्तो में दरार आ रही थी और वही रेखा उन्हीं के पति अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म दो अनजाने करने जा रही थी जिसमें अमिताभ बच्चन रेखा के पति का किरदार निभाने वाले थे। रेखा तुम शादी से खुश हो ना? इसमें खुशी और नाखुशी की कोई बात ही नहीं है। यह शादी मेरी मर्जी के खिलाफ हुई है। और दोस्तों यही वो फिल्म थी जिसकी वजह से आज तक अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और खुद रेखा की जिंदगी काफी तकलीफों के बीच होकर गुजरी या यूं कहिए कि अभी भी गुजर रही है। दरअसल अमिताभ बच्चन अपने काम के प्रति काफी ईमानदार थे। वो समय से शूटिंग पर आते, मान-सम्मान देते सभी को और फिर घर चले जाते। रेखा को अमिताभ बच्चन का यह बर्ताव काफी प्रभावित कर गया और यह धीरे-धीरे अमिताभ बच्चन की तरफ खींचने लगी और जब फिल्म दो अनजाने रिलीज हुई, तो पहली बार रेखा की तारीफ सभी ने की। जो इनके आलोचक थे, वह भी इनके प्रशंसक बन गए।
मेरी तारीफ हुई, मेरा नाम हुआ। मेरी फोटो पेपरों में छपी इसलिए तुम जल गए। अमिताभ बच्चन के साथ काम करके जो कामयाबी और तारीफ मिली उससे रेखा और भी ज्यादा अमिताभ बच्चन को पसंद करने लगी। लेकिन इस बार रेखा ने अपने आप को अंदर से नहीं बल्कि बाहरी रंग रूप को बदलने का फैसला किया। अब रेखा जिंदगी में पहली बार डाइटिंग करने लगी। वो कई-कई दिन सिर्फ दूध पिया करती थी। वो अब अपने शरीर पर जरा सी भी चर्बी नहीं रहने देना चाहती थी। लिहाजा उन्होंने योगा और एरोबिक्स का भी सहारा लिया और रेखा ही वह अभिनेत्री थी जो भारतीय हिंदी सिनेमा में योग और एरोबिक्स का ट्रेंड लेकर आई थी। रेखा हर तरह से अपने आप को निखार रही थी। अब वह अपने रंग रूप को मेकअप की कला से भी सवारना चाहती थी क्योंकि मेकअप से भी उन दिनों आपके दिखने पर असर पड़ता था। इसीलिए रेखा उन दिनों लंदन गई और वहां बाकायदा मेकअप का कोर्स किया, ट्रेनिंग की और फिर लौट कर वापस भारत आ गई। और भारत आते ही रेखा ने मशहूर फिल्म अभिनेत्री मीना कुमारी के मेकअप मैन राम दादा को अपना मेकअप करने के लिए रखा और रामदादा अपने अंतिम समय तक रेखा के ही साथ रहे। अब रेखा बिल्कुल बदल गई थी। फिल्मों के अभिनय में संजीदगी, चेहरे पर बेहद खूबसूरती, उनका यह नया रंग रूप सबको आकर्षित कर रहा था। रेखा अपने इस बदलाव के पीछे अमिताभ बच्चन को ही वजह मानती हैं क्योंकि वो शायद अमिताभ बच्चन के प्यार में पड़ चुकी थी और कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन भी रेखा के साथ अपनी नजदीकी बढ़ा चुके थे। और इन दोनों के प्यार के चर्चे होने लगे।
कई पत्रिका और अखबार इन दोनों के प्रेम के किस्सों से भरे जाने लगे। रेखा इस तरह की खबरों से खुश होती थी। देखा एक ख्वाब तो यह सिलसिले हुए दूर तक निगाह में क्योंकि यह खबरें दुनिया की नजरों में भी अमिताभ बच्चन को उनके करीब महसूस कराया करती थी। रेखा प्यार में थी। रेखा और अमिताभ बच्चन ने उन दिनों खून पसीना, आलाप, ईमान धर्म जैसी फिल्मों में एक साथ काम कर रहे थे। रेखा अब असल जिंदगी के साथ-साथ फिल्मों में भी अमिताभ बच्चन से प्यार कर रही थी। रेखा और अमिताभ बच्चन एक दूसरे को कितनी मोहब्बत करते थे। इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि एक बार रेखा और अमिताभ बच्चन जयपुर में अपनी फिल्म गंगा की सौगंध की शूटिंग कर रहे थे। रेखा और अमिताभ को देखने के लिए लोगों का हुजूम था और उसी भीड़ में एक शख्स ऐसा भी था जो रेखा को देखकर भद्दे भद्दे शब्दों का इस्तेमाल कर रहा था। बेहद शांत रहने वाले अमिताभ बच्चन ने जब यह सुना तो अमिताभ बच्चन ने अपना आपा खो दिया। और अमिताभ बच्चन ने उस इंसान की ऐसी पिटाई कर दी कि लोग देखते रह गए और अमिताभ बच्चन के इस काम ने मीडिया में भी हलचल मचा दी और सभी यह जानना चाहते थे कि जो काम वहां की सिक्योरिटी और पुलिस का था वो खुद अमिताभ बच्चन ने क्यों किया।
मत आज मैं इसे सबक सिखाकर ही छोड़। इसके बाद साल 1977 में रेखा की लगभग 11 फिल्में हिंदी सिनेमा में आई और उन्हीं में से एक फिल्म थी फरिश्ता या कातिल। इस फिल्म में रेखा के हीरो थे शशि कपूर। जी हां, वही शशि कपूर जिन्होंने कभी रेखा को देखकर कहा था कि ये मोटी, काली और फूहर लड़की कहां से आ गई फिल्मों में हीरोइन बनने? अब वही शशि कपूर रेखा के अभिनय और खूबसूरती की तारीफ करने लगे और रेखा अब शशि कपूर की पसंदीदा एक्ट्रेस बन गई। जाओ मुझे जाने दो हट जाओ ओ हट जाओ मुझे जाने दो। रेखा के पास अभी भी फिल्मों की एक लंबी लाइन थी। लेकिन इसी दौरान रेखा की एक फिल्म आई थी घर जो उस वक्त की एक सुपरडुपर हिट फिल्म थी। इस फिल्म में रेखा ने काम किया था कभी ना होने वाले पति और प्रेमी विनोद मेहरा के साथ। विनोद मेहरा की वजह से रेखा को बहुत दुख मिले थे। उसके बावजूद फिल्मी पर्दे पर रेखा ने विनोद मेहरा के साथ ऐसा अभिनय किया कि सब देखते ही रह गए। जब फिल्म की कामयाबी के बाद रेखा से फिल्म के बारे में पूछा गया तो रेखा ने सबको जवाब देते हुए कहा कि जब मैं यह फिल्म कर रही थी फिल्म में रोमांस कर रही थी तो मैं उस वक्त विनोद मेहरा को विनोद मेहरा नहीं बल्कि वो समझकर कर रही थी और कहा जाता है कि रेखा अमिताभ बच्चन को ही वह कहकर तवज्जो दिया करती थी। इधर रेखा अपने बयान देती रही, लेकिन उधर अमिताभ बच्चन ने कभी भी कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी।
अमिताभ बच्चन हमेशा अपने और रेखा के इस रिश्ते से इंकार ही करते रहे। जबकि सच्चाई तो सभी के सामने थी। धड़कनें कुछ कहना चाहे कह नहीं पाए। रेखा और अमिताभ बच्चन के रिश्ते की खबर कहीं ना कहीं जया बच्चन को भी थी और वह आए दिन छप रही खबरों की सच्चाई से तंग आ चुकी थी और जया बच्चन ने फैसला लिया और अमिताभ बच्चन को सख्त लहजे में समझा दिया कि तुम आगे से कोई भी फिल्म में रेखा के साथ काम नहीं करोगे। उधर काफी पारिवारिक युद्ध होने के बाद अमिताभ ने फिल्म निर्माताओं को रेखा के साथ काम नहीं करने के लिए मना कर दिया। और जब यह बात रेखा को पता चली तो उनको इस बात का बड़ा दुख हुआ। जब रेखा ने अमिताभ बच्चन से इसका जवाब मांगा तो अमिताभ बच्चन ने रेखा से कहा कि इस मुद्दे पर मैं एक भी शब्द नहीं कहूंगा। मुझे इस बारे में कुछ भी मत पूछो। मजबूर यह हालात इधर भी है उधर भी। अमिताभ के इस फैसले से रेखा बहुत ज्यादा दुखी रहने लगी और एक बार फिर से वो पूरी तरह से टूट गई। रेखा की जिंदगी हर बार उनको घुटनों पर लाकर खड़ा कर रही थी। राम तुम सिर्फ मेरे हो। सिर्फ मेरे। मैं अपना प्यार किसी के साथ नहीं बांट सकती।
राम किसी के साथ नहीं बांट सकती। रेखा अपने दिल के दर्द को कभी छुपा नहीं सकी। और रेखा की जिंदगी में एक शब्द और जुड़ गया और वही शब्द इनकी मां की जिंदगी के साथ भी हमेशा जुड़ा रहा। आज वही इनकी जिंदगी के साथ भी यह शब्द जुड़ गया था और वह शब्द था दूसरी औरत। रेखा की जिंदगी में एक तूफान चल रहा था। रेखा उस दोराहे पर थी जहां उनके पास प्यार के नाम पर सिर्फ दर्द ही था। इस बार रेखा ने अपने दर्द के पीछे जया बच्चन को ही दोषी बनाया। जया बच्चन और रेखा के बीच एक युद्ध चल रहा था। जहां जया बच्चन अमिताभ बच्चन को रेखा से दूर करने की हर कोशिश कर रही थी, तो वहीं रेखा किसी ना किसी बहाने से अमिताभ के लिए कुछ ना कुछ बोलकर सबका ध्यान अपने रिश्ते की तरफ खींच लेती थी। और इसी बीच रेखा और अमिताभ के अभिनय से सजी दो फिल्में सुहाग और नटवरलाल रिलीज हुई। परदेिया परदेिया ये सच है पिया। इस फिल्म में रेखा खुलकर अमिताभ से अपने प्यार का इजहार करते दिखी। फिल्म की कामयाबी और इन दोनों की जोड़ी को लोगों ने खूब पसंद किया और वहीं जया बच्चन इन सब से बेहद दुखी हो गई।
इसके बाद साल आया 1980 और इसी साल की 22 जनवरी को मशहूर अभिनेत्री नीतू सिंह और अभिनेता ऋषि कपूर की शादी हुई थी। इस शादी में रेखा का नया अवतार था जिसे देखकर लोग चौंक गए थे और इनके इस अवतार को वहां कैमरों ने कैद करने में जरा भी देरी नहीं लगाई। रेखा ने इस शादी में अपने माथे पर लगा रखी थी बड़ी लाल सी बिंदी और अपनी मांग में लगा लिया था लाल सुर्ख सिंदूर और यह सब देखकर वहां मौजूद लोगों के बीच कान्हा फूंसी शुरू हो गई। सबको लगा कि रेखा ने शादी कर ली है क्या? रेखा का पति कौन है? यह सवाल हर जगह हो रहा था। दूल्हा दुल्हन को बधाई देने के बाद जब रेखा ने अमिताभ बच्चन को पास ही अकेले खड़ा देखा, तो वह उनके पास चली गई। उस वक्त अमिताभ के हाथ में चोट भी लगी थी। यह सब देखकर रेखा अमिताभ बच्चन से उनके हाल-चाल पूछने लगी। इन दोनों को यूं देखकर सब हैरान थे और वहीं कुछ दूर खड़ी जया बच्चन यह सब देख रही थी। और जया यह सब देखकर ज्यादा देर तक अपने दर्द और आंसुओं को रोक नहीं पाई। इन सब के बाद जब रेखा से उनके इस अवतार के बारे में पूछा गया तो रेखा ने बताया कि वह फिल्म की शूटिंग कर रही थी और शूटिंग के बाद सीधे इसी लिबास में शादी पर चली आई। लेकिन रेखा की इस बात पर किसी ने भी विश्वास नहीं किया क्योंकि सब जानते थे कि रेखा अमिताभ बच्चन से प्यार करती थी और वो उनके नाम का ही सिंदूर अपनी मांग में लगाती थी और इन्हीं दोनों के बीच रेखा की एक फिल्म खूबसूरत भी रिलीज हुई और इस फिल्म के लिए रेखा को मिला बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवार्ड और वहीं इनकी दूसरी फिल्म उमरा जान के लिए इनको राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया।
लेकिन दोस्तों इस नेशनल अवार्ड को उस समय के राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने रेखा को दिया। साथ ही राष्ट्रपति ने भी रेखा से उस वक्त उनकी मांग के सिंदूर के बारे में पूछ लिया। तो रेखा ने राष्ट्रपति को जवाब दिया कि सर मैं जहां से आई हूं वहां सिंदूर लगाना एक श्रृंगार का हिस्सा है। हर जगह रेखा और अमिताभ के ही चर्चे थे और इन सभी बातों और सवालों से बच्चन परिवार में एक भूचाल आ गया था। और पहली बार बच्चन परिवार में एक शब्द गूंज उठा तलाक तलाक तलाक। मैं आपके साथ रहना चाहती हूं। कोई जरूरत नहीं। मेरी जिंदगी में मुझे किसी की भी जरूरत नहीं। अमिताभ बच्चन और रेखा का यह रिश्ता अपने आप में कड़वा सच था जिसे जया ने धिधिका। लेकिन रेखा ने दिल से अपनाया था। जिंदगी में चल रहे इस तूफान के बीच कुछ ऐसा हुआ जिसकी शायद किसी को भी कहीं से कहीं तक कोई उम्मीद नहीं थी। उन दिनों किसी को भी यकीन नहीं था कि जया बच्चन, अमिताभ बच्चन, रेखा यह तीनों एक साथ एक फिल्म में नजर आएंगे। लेकिन ऐसा हुआ यश चोपड़ा की वजह से।
दरअसल उन दिनों अमिताभ बच्चन की फिल्म कुछ अच्छा काम नहीं कर रही थी। तो ऐसे में अमिताभ को एक हिट फिल्म की जरूरत थी। यश चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन से मुलाकात की और उनको कहानी सुनाई। अमिताभ ने कहानी सुनकर फिल्म के लिए हां कर दी। यश चोपड़ा ने अमिताभ को भी बताया कि इस फिल्म में उनकी प्रेमिका का रोल रेखा निभाएंगी। अमिताभ यश चोपड़ा के खिलाफ नहीं जा सकते थे क्योंकि उनको उन दिनों एक हिट फिल्म की बहुत जरूरत थी। यश चोपड़ा इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन के साथ उनकी पत्नी का रोल जया बच्चन को देने की बात कर रहे थे। लेकिन जया उन दिनों फिल्मों से दूर थी, निजी जिंदगी में परेशान थी। यश चोपड़ा ने जब जया से मुलाकात की तो जया ने पहले तो इंकार कर दिया लेकिन उन्होंने बताया कि इस फिल्म में रेखा अमिताभ बच्चन की प्रेमिका का अभिनय निभा रही हैं। तो जया ने कुछ भी नहीं सोचा फिल्म का क्लाइमेक्स सुना जिसमें पति अंत में सब कुछ छोड़कर अपनी पत्नी का हो जाता है। जया को यह सब अपनी जिंदगी से जुड़ा हुआ महसूस हुआ और जया ने फिल्म को एकदम फ्री में करने के लिए हां कर दी और यह फिल्म थी सिलसिला जब ये फिल्म रिलीज हुई तो शानदार ओपनिंग से चली लेकिन आगे चलकर ज्यादा अच्छा काम नहीं कर पाई थी इस फिल्म में जया बच्चन और रेखा के बीच देखा गया जैसा कि असल जिंदगी में भी था।
इससे पहले कि हमारी शादी की बात होती उसकी शादी हो गई। जी हां। इस देश में पति प्रेमी नहीं होता। इस फिल्म के बाद तो अमिताभ बच्चन की एक से बढ़कर एक फिल्में जैसे लावारिस, कालिया, सत्ते पे सत्ता, नमक हलाल, शहंशाह जैसी फिल्में आई जो सुपरडुपर हिट फिल्में बनी। इस थाली पे तुम्हारा नहीं। हमारा नाम लिखा है। कौन हो तुम? इसके बाद आया साल 1982 जब अमिताभ बच्चन और उनके चाहने वालों के लिए एक बुरी खबर सामने आई। दरअसल इसी साल अमिताभ बच्चन की फिल्म कुली की शूटिंग चल रही थी और इस फिल्म की शूटिंग के दौरान भी अमिताभ बच्चन अभिनेता पुनीत के सर के हाथों चोटिल हो गए। इस चोट से अमिताभ की हालत खराब हो गई। उनको जल्दी ही एंबुलेंस में डालकर हॉस्पिटल ले जाया गया। अमिताभ की यह हालत थी कि अमिताभ कोमा में भी जा सकते थे। अमिताभ बच्चन की यह खबर सामने आते ही पूरी दुनिया में अमिताभ बच्चन के लिए दुआ और प्रार्थना के लिए लोग आगे आने लगे। जया बच्चन भी इन सबसे परेशान हो गई थी। जया बच्चन के लिए यह बेहद मुश्किल भरा समय था। पति की सलामती के लिए जया वह सब कर रही थी जो एक पत्नी को करना चाहिए था। जया ने मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे जाकर दुआएं की। तो वहीं रेखा को जब यह सब कुछ पता चला तो वह भी परेशान हो गई थी। लेकिन जया ने तो रेखा के हॉस्पिटल में भी आने पर पाबंदी लगा रखी थी।
जया बच्चन कभी नहीं चाहती थी कि ऐसे मुश्किल हालातों में भी रेखा का साया अमिताभ बच्चन के पास भी नजर आए। लेकिन रेखा भी जिद्दी थी। वह भी एक दिन सुबह जल्दी-जल्दी किसी को बिना कुछ बताए बिना मेकअप के चोरी छिपे हॉस्पिटल पहुंच गई और अमिताभ बच्चन को दूर से ही देखकर रोते-रोते वापस आ गई। समय गुजरा और अमिताभ बच्चन ठीक हो रहे थे। जया बच्चन ने जो सेवा अमिताभ बच्चन की की थी, उसने जया को अमिताभ बच्चन के और भी करीब ला दिया था और रेखा को अंधकार की तरफ धकेल दिया था। आंसुओं में चांद डूबा रात मुरझा निजी जिंदगी में रेखा टूट रही थी लेकिन फिल्मी पर्दे पर मजबूत हो रही थी। रेखा की फिल्में आती गई और रेखा हर किरदार को निभाकर लोगों को चकाचौंध कर रही थी। रेखा ने जब एक फिल्म की उत्सव जिसकी पूरे हिंदुस्तान में खूब चर्चा हुई। इस फिल्म में रेखा ने बेहद बोल्ड किरदार निभाया था जो शायद उस वक्त तक किसी और अभिनेत्री ने नहीं किया था। मन क्यों बहका रे बहका आधी रात को पर रेखा तो रेखा थी कुछ नया करने की चाह रखती थी।
चाहे उसके लिए उनको कोई भी आलोचना झेलनी पड़े। 80 का दशक रेखा के करियर का शानदार दशक रहा। और इस बीच रेखा का नाम हमेशा की तरह किसी ना किसी अपने को एक्टर जैसे शैलेंद्र सिंह, कमल हसन, राज बब्बर, धर्मेंद्र, प्रोड्यूसर राजीव कुमार, संजय दत्त का नाम भी इसमें शामिल रहा। संजय दत्त के नाम को लेकर तो यहां तक बात उठी थी कि रेखा और संजय दत्त ने चोरी-छिपे शादी तक कर ली है। हालांकि यह बात जब उठी थी, तब रेखा, संजय दत्त के करीब थी। जब संजय दत्त और रेखा की शादी की बात ने तूल पकड़ा तो संजय दत्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी और शादी वाली बात को झूठा कहा। इसके बाद भी रेखा का अपने साथियों के साथ नाम जुड़ता गया और रेखा को हमेशा लाइमलाइट में रहना पड़ा। इसके बाद रेखा की एक फिल्म आई बीवी हो तो ऐसी। इस फिल्म में पहली बार रेखा एक एक्शन हीरोइन के तौर पर नजर आई। रेखा को इस तरह से फिल्मों में एक्शन करते देख लोगों ने रेखा को एक नया नाम दे दिया लेडी अमिताभ और इस नाम के होने से रेखा को कहीं ना कहीं अंदरूनी सुकून जरूर मिला था। इस एक्शन फिल्म के बाद रेखा की एक और फिल्म आई खून भरी मां जिसमें रेखा एक बार फिर से दमदार एक्शन करते हुए देखी गई। फिल्म में रेखा बेहद खूबसूरत स्टाइलिश रंग रूप में नजर आई। फिल्म उस दौर की सुपरडुपर हिट फिल्म बनी और फिल्म कामयाबी ने एक बार फिर से रेखा को इस फिल्म के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवार्ड दिला दिया। इन फिल्मों के बाद रेखा की कुछ और फिल्में कसम सुहाग की भ्रष्टाचार सौतन की बेटी बहू रानी लड़ाई जैसी फिल्में आई लेकिन यह फिल्में कुछ खास कमाल नहीं कर सकी। अब रेखा का फिल्मी सफर बीच में था ना ज्यादा अच्छा ना ज्यादा बुरा। तो ऐसे में कुछ दोस्त और परिवार वाले रेखा को अपनी निजी जिंदगी को बसाने की सलाह देने लगे। रेखा ने भी सबकी सलाह को ठीक समझा और इनकी मुलाकात हुई दिल्ली के एक जानेमाने व्यापारी मुकेश अग्रवाल से।
रेखा और मुकेश का रिश्ता धीरे-धीरे आगे बढ़ा और दोनों ने शादी करने का फैसला किया। रेखा यह शादी करके अपने माथे से दूसरी औरत का ठप्पा हटाना चाहती थी और अपने नाम के आगे एक सरनेम जोड़ना चाहती थी जो उनको मुकेश अग्रवाल से मिलने वाला था। लेकिन रेखा और मुकेश की यह शादी किसी धूम धड़ाके से नहीं हुई बल्कि रात के 10:00 बजे एक अनजान मंदिर में हुई। क्योंकि रात में मंदिर बंद होते हैं लेकिन उस वक्त रहे पुजारी ने जब रेखा को देखा तो वह हैरान हो गए थे और उन्होंने मंदिर के उसूलों के परे जाते हुए इन दोनों की शादी कर दी। लेकिन इनकी शादी का दंड उस पुजारी को झेलना पड़ा था। उस पुजारी को मंदिर समिति ने हमेशा के लिए मंदिर से निकाल दिया था। रेखा और मुकेश अब पतिपत्नी बन चुके थे और 36 साल की रेखा को अब जाकर अपना हक और एक नाम मिला था और अब रेखा रेखा से रेखा अग्रवाल बन गई थी। शादी के बाद रेखा की जिंदगी में सब कुछ ठीक था लेकिन धीरे-धीरे मुकेश अग्रवाल रेखा से खफा रहने लगे।
वो इतने परेशान थे कि मुकेश अब डिप्रेशन में जाने लगे और अब अपनी जिंदगी को खत्म करने का विचार तक करने लगे। लेकिन वह ऐसा क्यों कर रहे थे? इसके पीछे की वजह किसी को नहीं पता थी। दोनों के बीच झगड़े भी बढ़ रहे थे। हालात यहां तक पहुंच गए कि बात तलाक तक जा पहुंची। लेकिन यह रिश्ता कानूनी कारवाही से खत्म होता। उससे पहले ही मुकेश अग्रवाल ने रेखा के ही एक दुपट्टे से खुद की जीवन लीला को ही समाप्त कर लिया। तुम्हारी जुदाई उससे बर्दाश्त नहीं हुई नेता। उसने आत्महत्या कर दी। जिस वक्त यह घटना घटी थी, रेखा न्यूयॉर्क में थी। मुकेश के निधन के पीछे उनके चाहने वालों ने रेखा को ही जिम्मेदार ठहराया। मुकेश की मौत ने परिवार को झकझोर दिया था। मुकेश की मां ने रेखा को डायन कह दिया था और बहुत ही भला बुरा कहा। लोग भी रेखा को ही इसका जिम्मेदार मान रहे थे और उस वक्त रेखा की जो फिल्म रिलीज हुई थी, लोगों ने उस फिल्म के पोस्टर पर कालिख पोत दी थी। रेखा को हर तरफ से सिर्फ और सिर्फ नफरत मिल रही थी। किसी ने इनको राष्ट्रीय चुड़ैल कहा तो किसी ने इनको शादीशुदा लोगों का घर तोड़ने वाली औरत कहा और जो फैंस रेखा को प्यार करते थे वो अब उनसे नफरत करने लगे और लोग उनको डायन कह कर बुलाने लगे।
इसके बाद लोगों को लगने लगा था कि अब रेखा का फिल्मी सफर खत्म हो जाएगा क्योंकि इसके बाद रेखा को कोई भी बड़ी फिल्म नहीं मिल रही थी। हिंदी सिनेमा में रेखा को एकदम अलग सा कर दिया था। रेखा ने बहुत कोशिश की थी अपनी सफाई देने की लेकिन किसी ने भी रेखा की बात नहीं सुनी। इसके बाद तो धीरे-धीरे इस रिश्ते की वह परत भी खुलने लगी जिसका शायद किसी को भी अंदाजा नहीं था। मुकेश अग्रवाल के घर वालों और दोस्तों ने तो मुकेश अग्रवाल की के पीछे रेखा की सेक्रेटरी फरजाना को जिम्मेदार ठहराया था। परिवार वाले कुछ ऐसा कह रहे थे जिससे सबकी नींदें उड़ गई। सबको पता था कि रेखा की सेक्रेटरी फरजाना उनके साथ साए की तरह रहती हैं। फरजाना से मिले बिना कोई रेखा तक पहुंच नहीं सकता था। परिवार वालों ने कहा था कि मुकेश रेखा के पति थे। लेकिन उनको भी रेखा के पास जाने के लिए फरजाना की इजाजत लेनी पड़ती थी। और इस तरह के चाल चलन की वजह से रेखा और फरजाना के रिश्ते पर भी सवाल उठ रहे थे। कहा जाता है कि मुकेश अग्रवाल को रेखा और फरजाना के समलैंगिक रिश्तों के बारे में पता चल गया था। जिसकी जानकारी उन्होंने अपने घर वालों को भी दी थी और इसी वजह से मुकेश अग्रवाल ने अपनी जिंदगी को खत्म करने का फैसला कर लिया था।
रेखा को अब सभी जगह बाईसेक्सुअल माना जाने लगा। रेखा और फरजाना के इस रिश्ते को लोग अलग-अलग दिशा दे रहे थे और इसी बीच रेखा ने बीच में आकर सफाई भी दी। रेखा ने कहा कि यह सब जो कहा जा रहा है वह सब एक बीमार सोच की उपज है और कुछ नहीं। रेखा के पति ने अपनी के बाद रेखा को अपनी जायदाद में कुछ भी नहीं दिया था। रेखा की जिंदगी उलझ गई थी। परेशानी इनका दामन छोड़ ही नहीं रही थी।
अब रेखा कई-कई दिन तक अपने ही कमरे में बंद रहती और किसी से भी कोई भी बात नहीं करती थी। बुरा समय था लेकिन वह भी धीरे-धीरे गुजर रहा था। पति मुकेश के निधन के बाद ठीक 8 महीने बाद रेखा की एक फिल्म रिलीज हुई। फूल बने अंगारे। फूल कभी जब बन जाए अंगारा। इस फिल्म में रेखा फिर से एक्शन हीरो के रूप में थी और दर्शकों ने रेखा को खूब पसंद किया और फिल्म हो गई सुपरहिट और रेखा एक बार फिर से हिंदी सिनेमा में छा गई। रेखा अपनी कामयाबी के बारे में इंटरव्यू तो देती थी लेकिन वह कोई भी पर्सनल सवाल पूछने के लिए पहले ही मना कर देती थी। और इन्हीं सबके बाद रेखा को अपनी पर्सनल लाइफ में एक और झटका लगा।
उनकी मां पुष्पावली लंबी बीमारी के चलते हमेशा हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़कर चली गई। रेखा की जिंदगी में सबसे ज्यादा महत्व उनकी मां ही रखती थी। लेकिन अब वो जा चुकी थी और रेखा ने अपनी मां की याद में ही अपने बंगले का नाम पुष्पावली रखा था। मां मां तुम तो चली गई। मुझे जीते जी मार डाला। अब रेखा अपनी मां और पति दोनों के बाद बिल्कुल अकेली पड़ गई थी। धीरे-धीरे रेखा ने अपने आप को चकाचौंध से बिल्कुल अलग कर लिया था। रेखा की जिंदगी में हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा था। जैसे रेखा की मां हमेशा अपनी जिंदगी से दूसरी औरत का कलंक नहीं मिटा पाई थी। ठीक वैसे ही रेखा भी अपनी जिंदगी से दूसरी औरत और नाजायज होने का दाग अपनी जिंदगी से नहीं मिटा पाई। रेखा का नाम इतना बड़ा था कि आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि मद्रास में होने वाले फिल्मफेयर अवार्ड के लिए रेखा को आमंत्रित किया और रेखा से कहा कि आपको जैमिनी गणेशन को लाइफ टाइम अचीवमेंट देना है। रेखा यह सुनकर दंग रह गई थी क्योंकि रेखा अपने उस पिता को अवार्ड देने वाली थी जिसने कभी रेखा को अपनाया ही नहीं था।
मां कभी-कभी सुख तब आता है जब सुख को पाकर सुखी होने वाला चला जाता है। अगर आज तुम जिंदा होती तो देखकर कितनी खुश होती और उनकी मां को कभी भी पत्नी का दर्जा नहीं दिया था। आज रेखा की जिंदगी में जो दुख थे उसका एक बड़ा कारण जैमिनी गणेशन खुद थे। रेखा मद्रास गई और अपने नाजायज पिता के पैर छुए और उनको यह अवार्ड दिया। और इसी अवार्ड कार्यक्रम में पहली बार जैमिनी गणेशन ने रेखा को सबके सामने अपनी बेटी कहा। रेखा को पहली बार सबके सामने अपने पिता का नाम मिल रहा था। रेखा असल में इस नाम की हकदार होते हुए भी ता उम्र इसके लिए तरसती रही थी। इस शो के दौरान पिता और बेटी खूब रोए, गिले शिकवे दूर हुए और रेखा ने सबके सामने भावुक बात स्टेज से कह दी। इट इज़ ओकेशन टू जस्ट सीट बैक एंड हैव अ बिग ब्लास्ट। एंड दैट इज जस्ट अबाउट द लॉन्गेस्ट स्पीच। आई हैव एवर गिवेन इन माय एंटायर लाइफ। इस सब के बाद पिता और पुत्री के रिश्तों में सुधार आया और अब रेखा की जिंदगी पारिवारिक दिशा की तरफ बढ़ रही थी। रेखा का फिल्मी सफर भी ठीक चल रहा था और रेखा की कुछ फिल्में इंसाफ की देवी मैडम एक्स गीतांजलि अब इंसाफ होगा।
उड़ान किला मदर रिलीज हुई। इन फिल्मों से रेखा की मौजूदगी तो दर्ज हो रही थी लेकिन फिल्म उतना अच्छा काम नहीं कर रही थी। रेखा को अपनी जिंदगी में फोटोशूट करने का सबसे ज्यादा शौक रहा है और अपने इसी शौक के चलते रेखा को हिंदुस्तान की सबसे शानदार कवर गर्ल का खिताब मिला था। रेखा हमेशा फिल्मी पर्दे पर कुछ ना कुछ नया करती रहती और इसी कड़ी में साल 1996 में रेखा ने फिल्म खिलाड़ियों का खिलाड़ी में काम किया था। इस फिल्म में युवा अभिनेता अक्षय कुमार थे। इस फिल्म में रेखा ने अक्षय कुमार के साथ बेहद बोल्ड सीन देकर खलबली मचा दी थी। इन द नाइट नो कंट्रोल क्या करूं? इस फिल्म में रेखा ने मैडम माया का वो किरदार निभाया कि यह असल जिंदगी में मैडम माया के नाम से मशहूर हो गई।
इस फिल्म के लिए रेखा को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवार्ड भी दिया गया। जहां एक तरफ फिल्म कामयाब थी तो वहीं दूसरी तरफ यह बात भी होने लगी कि रेखा और अक्षय कुमार के बीच प्यार ने जन्म ले लिया था। लेकिन इस रिश्ते में कोई सच्चाई थी या नहीं, यह आज तक एक बड़ा सवाल रहा है। रेखा और अक्षय कुमार ने भी कभी भी कोई भी जवाब इस पर नहीं दिया। और रेखा ने तो बिल्कुल ही चुप्पी साध ली थी। इसके बाद साल आया 2001 जब खूबसूरत रेखा को फिल्मफेयर ने लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया। द वन एंड ओनली रेखा सो मच थैंक यू फिल्मफेयर फॉर दिस ग्रेट ग्रेट अवार्ड। इसके बाद रेखा की कुछ और फिल्में जैसे लज्जा, भूत, कृष, सुपरनानी जैसी फिल्में सिनेमाघरों में पहुंची और इन फिल्मों में रेखा कभी हीरोइन तो कभी हीरो की मां का रोल करते हुए देखी गई।
इसके बाद जब साल 2012 आया, तो अभिनेत्री रेखा ने अब राजनीति में जाने के लिए कदम बढ़ाया। कांग्रेस पार्टी ने रेखा को राज्यसभा सदस्य के रूप में मनोनीत किया था। आई रेखा गणेशन हैविंग बीन नॉमिनेटेड अ मेंबर ऑफ द काउंसिल ऑफ स्टेट्स। लेकिन रेखा राज्यसभा में अपनी मौजूदगी ज्यादा नहीं दे पाई। रेखा अपनी जिंदगी में बहुत कुछ सीख चुकी थी। रेखा ने कुछ समय बाद अभिनेत्री सिममी ग्रेवाल के शो में एक इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू में रेखा ने अपनी और विनोद मेहरा की शादी को अफवाह बता दिया। यू मैरिड विनोद मेहरा। एक्सक्यूज मी व्हेन यू इन 1973 एक्सक्यूज मी देयर नो यू डिडंट मैरी नो तो वहीं अपनी और अमिताभ बच्चन की मोहब्बत को सिर्फ फैन की मोहब्बत का नाम दे दिया। रेखा ने कहा कि दुनिया का काम तो सिर्फ बोलना होता है। वह हमेशा आपको बदनाम ही करती है। तो वहीं जब उनके शो में अमिताभ बच्चन आए तो उनसे भी यही सवाल पूछा गया तो अमिताभ बच्चन ने भी रेखा और अपने प्रेम को सिर्फ मीडिया की उपज बताया। और इस तरह से यह दोनों ही अपने उस प्रेम को नकार रहे थे जो आज तक इनकी जिंदगी में देखा जाता है। रेखा हमेशा यही कहती रही कि मैं सिर्फ और सिर्फ भानु रेखा हूं और हमेशा भानु रेखा ही रहूंगी। मेरी जिंदगी में हमेशा अकेलापन था और रहेगा।
रेखा अपनी जिंदगी में एक खुली किताब रही है। लेकिन इसी खुली किताब के कुछ पन्ने गहरी खामोशी, दर्द, लाचारी, बेबसी को अपने अंदर समाए हुए हैं। जिसमें रेखा हमेशा के लिए कैद हैं और शायद आगे भी रहेंगी। रेखा आज 70 साल की हो चली हैं और वह आज भी इस उम्र में बेहद खूबसूरत नजर आती हैं। रेखा कहने को तो एक विधवा हैं लेकिन वो आज भी अपनी मांग में सिंदूर लगाती हैं। जिसकी वजह से यह हमेशा कटघरे में आ जाती हैं। अब यह सिंदूर रेखा अमिताभ बच्चन के नाम का लगाती हैं या अपनी सेक्रेटरी फरजाना के नाम का। रेखा आज भी युवा अभिनेत्रियों के साथ नजर आती हैं और उनकी खूबसूरती किसी से भी कम नहीं है। आज भी भारतीय हिंदी सिनेमा में लोग उसी रेखा की खूबसूरती का राज जानना चाहते हैं जिसको कभी मोटी काली भद्दी कहा जाता था। रेखा दिलकश आवाज की मलिका है और खूबसूरती की मिसाल। रेखा की जिंदगी पल-पल आगे गुजर रही है।
लेकिन रेखा की माया को कोई नहीं समझ पाया। रेखा वो नाम है जिसके लिए जितना बताया जाए या लिखा जाए उतना ही कम लगता है। दोस्तों आपको क्या लगता है कि रेखा की जिंदगी में जो हुआ क्या वो सही था? रेखा की जिंदगी का सबसे बड़ा दोषी कौन था? रेखा ने कौन सी ऐसी गलती की थी जिसकी वजह से रेखा आज भी अकेले और तन्हा हैं? आप क्या सोचते हैं दोस्तों रेखा को लेकर? हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा। आज मेरे प्यार की जीत हो जाने दो। आज मेरे प्यार रेखा ने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ ऐसा झेला था जो शायद बेवजह था। रेखा की जिंदगी अपनी मंजिल की तरफ है।
रेखा आज भी अपनी सेक्रेटरी फरजाना के साथ रहती हैं। फरजाना भी उनका साया बनी हुई है। अब लोग इनके रिश्ते को किस नजर से देख रहे हैं इस बात का रेखा को कोई फर्क नहीं पड़ता और वो फरजाना के साथ फिलहाल खुश हैं। मुझे जाने दो यहां से। जाने दो कि सांस ले सकूं। अब इस घुटन में जिया नहीं जाता। दोस्तों यह तो हमारा आज का शो रेखा के ऊपर था जिसमें हमने रेखा की पूरी जिंदगी सुखदख और विवादों पर नजर डाली और सभी को रूबरू कराया है। हमने रेखा की जिंदगी के ऊपर जमी धूल को उड़ाने की कोशिश की है। आज भले ही रेखा फिल्मों का हिस्सा नहीं है लेकिन दुनिया कभी भी इस महान और खूबसूरत अभिनेत्री को भुला नहीं पाएगी। रेखा हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी। उनकी खूबसूरती की हमेशा मिसाल दी जाएगी।
