भागकर शादी करने वाले परिवार के घर ना कोई दूध देने या अन्य सामग्री देने लेने नहीं जाएगा। उक्त व्यक्ति के घर कोई पंडित, नाई और किसी भी प्रकार का काम करने पर भी प्रतिबंध है। गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले संविधान और अधिकारों की धज्जियां उड़ा दी गई। यह भाई साहब चार पन्नों का अपना अलग संविधान लिख रहे हैं। और पहला नियम है कि लव मैरिज करने वालों का बॉयकॉट किया जाएगा। खासकर उन कपल्स का जो परिवार के खिलाफ जाकर शादी करते हैं।
नियम बनाया गया है कि शादी करने वालों को तो होगा ही साथ में उनके परिवारों का भी बहिष्कार किया जाएगा। सख्त चेतावनी भी दी जा रही है कि अगर गांव के किसी भी व्यक्ति ने उस परिवार की मदद की या फिर कोई संबंध रखा तो उसे भी बॉयकॉट कर दिया जाएगा। यह महानुभाव गांव के कुछ लोगों के नाम भी लेते हैं और फैसला सुनाते हैं कि इन लोगों और इनके परिवारों से कोई संबंध नहीं रखेगा। दूध, सब्जी, भाजी, दवाई, शादी, ब्याह किसी भी तरह की मदद नहीं की जाएगी। लव मैरिज का बहिष्कार करने वाले इस गांव का नाम है पंचेवा। यह गांव मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में पड़ता है। इस घोषणा से भी ज्यादा भयानक है वहां बैठे लोगों की सहमति।
इस गांव में यह फैसला लंबे विचार विमर्श के बाद लिया गया है। यहां के अधिकतर लोग इस फैसले से राजी हैं। आज तक से जुड़े विनय मी की रिपोर्ट के मुताबिक गांव वालों का कहना है कि पिछले 6 महीनों में भागकर शादी करने वालों और इंटरकास्ट शादी करने वालों की संख्या बढ़ी है। उन्हें लव मैरिज से दिक्कत नहीं है।
उन्हें परिवार के खिलाफ लव मैरिज से दिक्कत है। गांव वालों ने कहा कि भागकर शादी करने वालों की वजह से उनके गांव का माहौल खराब हो रहा है। उन्होंने अपनी बेटियों को स्कूल कॉलेज भेजना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि लड़कियां घर से भाग जाती हैं और जब वापस लौटती हैं, तो उल्टा परिवारों के खिलाफ ही बयान देती हैं। यही कारण है कि ऐसा फैसला लिया गया है। ऐसा बयान गांव के कुछ लोगों ने दिया। अब आपको अरुण सांखला का बयान सुनाते हैं। अरुण वही व्यक्ति है जो बॉयकॉट का ऐलान करते दिखे थे। हाल फिलहाल तो सभी स्वतंत्र हैं।
किसी से कोई रोकथाम नहीं है। बाकी उस वजह से जैसे कि मैं चाहता हूं कि मैं उसके मुझे उसके घर नहीं जाना है। उस वजह से ये रखा था और बालक बालिका जो भी भाग कर गए थे उनको शरण दी गई जैसे बालक के पिता है उन्होंने उनको शरण दी गई अब बालिका हमारे गांव की है और बालिका के माता-पिता को दुख है और वो इसी गांव में भागकर इसी गांव में उनके सामने रहेगी तो कैसा रहेगा ये बस उनको अगली बार अगर ऐसा कोई कदम नहीं उठाए उनके लिए यह बनाया गया है। आज तक से जुड़े विजय मी ने गांव के कुछ और लोगों से बात की जो इस फैसले के समर्थन में हैं। सुनिए उनके बयान।
यह तो फंसाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। क्योंकि मेरी खुद लड़कियां कॉलेज पढ़ थी। मैंने बंद कर दिया क्योंकि आजकल जमाना ही खराब हो गया। हमारे गांव में छह लड़कियां भाग गई। ऐसे ही छ महीने में हां छ महीने आपने अपनी लड़की को कॉलेज हां कॉलेज से बंद कर दिया बेकायदा खराब। फिर आगे पढ़ाई उसकी? नहीं बिल्कुल नहीं करेंगे। क्यों ऐसा क्यों किया? नहीं ऐसा नहीं है।
तो ये गांव में ऐसा माहौल खराब हो रहा है तो क्या करेंगे? और जैसे अभी हमने अभी गांव वालों ने ऐसा बोला करा ये हम पे बात आ रही है तो फिर क्या करेंगे? लड़की को गांव की लड़की थी और उसे गांव का ही लड़का लेके भाग गया था। उस वजह से गांव वालों ने मतलब थोड़ा दहशत का माहौल था कि गांव का माहौल बिगड़ रहा है। अभी क्या है कि अभी पांच छ महीने में बहुत ज्यादा केस हो गए हैं ऐसे। अधिकारियों ने बताया कि बॉयकॉट का फैसला सुनाते वीडियो पर संज्ञान लिया गया है।
इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्ट के मुताबिक रतलाम के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा जारी किया गया वीडियो हमारे संज्ञान में आया है। संबंधित पुलिस अधिकारियों को मामले की जांच करने और शिकायत मिलने पर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थानीय प्रशासन को ग्रामीणों से बात करने के लिए गांव भेजा गया है। आपको याद दिला दें कि भारत का संविधान किसी भी बालिक व्यक्ति को अपने मन से अपना पार्टनर चुनने का अधिकार देता है। आर्टिकल 19 और 21 के मुताबिक 18 साल या फिर 18 साल से ऊपर कोई भी दो व्यक्ति एक दूसरे को लाइफ पार्टनर के रूप में चुन सकते हैं।
