बाबा रामदेव के ‘साधु’ वाले बयान पर बौखलाए शंकराचार्य।

शंकराचार्य स्वामी अभी मुक्तेश्वरानंद जी हमारे साथ हैं। तबीयत थोड़ी नासाज है स्वामी जी। ठीक है अभी ऐसा है कि यह तो शरीर है। कभी बला बल इसमें बढ़ता रहता है। लेकिन जो हमारा संकल्प है वो दृढ़ है। उसमें कोई कमजोरी नहीं।

बाबा रामदेव यहां आए थे और उन्होंने एक बयान दिया कि जिसका अभिमान नहीं गया वो साधु नहीं हो सकता। ये वही बाबा रामदेव हैं जो भारत स्वाभिमान आंदोलन चला रहे थे। चला रहे थे कि नहीं चला रहे थे? यह स्वाभिमान की बात करने वाले रामदेव आज किस तरह से तलवा चाटू बन गए हैं।

इनका वक्तव्य यह दिखा रहा है। भारत स्वाभिमान की बात करने वाला एक व्यक्ति किस तरह से तलवा चाटने पर विवश हो जाता है। उनके बयान से यही पता चल रहा है। कह रहे हैं कि अभद्र भाषा का प्रयोग एक शंकराचार्य तो दूर एक साधु को भी शोभा नहीं। बात यह है कि आप भाषा पर जा रहे हो। यहां की जा रही है साधु संतों के साथ। यहां गालियां दी जा रही है साधु संतों को। यहां छोटे-छोटे भटकों के ऊपर प्रहार किया जा रहा है। यहां पर हिंदू धर्म में रहने से डराया जा रहा है कि तुम यह सब छोड़ो। आप अभी भाषा की बात कर रहे हैं और जहां तक अपशब्द की बात है वह हम लोगों ने कभी जीवन में नहीं बोला है।

किसी को नहीं बोला है। आप साक्षी हैं सुशांत जी सुशांत ना नीतीश जी आप साक्षी हैं कि जब 2015 ईवी में पुलिस हमें मार रही थी तब भी हम यह नहीं कह रहे थे कि मारो। हम कह रहे थे मारिए। तो जिस व्यक्ति को भाषा का ज्ञान है, वह कभी भी अपशब्दों का प्रयोग नहीं करता है। क्योंकि हम लोग यह मानते हैं व्याकरण शास्त्र के अनुसार कि सुशब्दों के साधु शब्दों के प्रयोग से धर्म होता है और अपशब्दों के प्रयोग से अधर्म होता है।

लेकिन इसीलिए कभी भी अपशब्द बोलते ही नहीं है। आप हमारे ऊपर अपशब्द को बोलने का आरोप लगाएं। यह तो पराकाष्ठा है चापलूसी की। इस क्षेत्र में तीर्थ क्षेत्र में कुछ लोग अलग अलग प्रकार का एजेंडा लेकर चले आते हैं। आप कौन सा एजेंडा लेकर आए? हमारा एजेंडा इस बार का यह था कि इस बार हम सवा लाख शिवलिंग ले आए थे कि हम यहां पर सवा लाख शिवलिंग प्रतिष्ठा करेंगे।

लोगों को दर्शन कराएंगे और पूजा होगी। सवा लाख शिवलिंग अभी तक भारत में कहीं भी एक साथ सवा लाख शिवलिंग रखकर के किसी ने दर्शन नहीं कराया है। तो वो काम हम करने वाले थे। हमारे शिवलिंग आ चुके थे।

लेकिन प्रशासन ने हमको यह नहीं करने दिया जिसके कारण सनातन धर्मी जनता सवा लाख शिवलिंग के दर्शन से वंचित रह गई। जिस तरह से आपने मंदिरों को तोड़ने को लेकर जो बयान दिया था जिस तुलना जो की थी उसको लेकर उन्होंने बोला कि योगी को लेकर इस तरह का बयान देना ठीक नहीं उचित नहीं। योगी को लेकर इस तरह का बयान देना ठीक नहीं है। यह वो कह रहे हैं और योगी को मंदिर तोड़ना ठीक है, मूर्ति तोड़ना ठीक है। योगी के राज में मंदिर और मूर्तियां तोड़े जाए धड़ल्ले से और मलबा बना के फेंका जाए। ये ठीक है। इसके बारे में कौन बोलेगा? अब आर्य रामदेव तो आर्य समाज हैं।

वह तो मंदिर और मूर्ति मानते नहीं है। हम तो हम तो आस्थावान सनातनी हैं। हम तो मंदिर और मूर्ति में आस्था रखते हैं। हमें तो पीड़ा होती है। जो आर्य समाज है उसको क्या पीड़ा होगी? एक तरफ सीएम भाई अपना बयान दे रहे हैं। एक तरफ डी जो डिप्टी सीएम है वो कहीं ना कहीं अलग बयान दे रहे हैं। आप क्या कहना है इस पर? देखिए भारतीय जनता पार्टी में अंतर्द्वंद इस समय चल रहा है।

जो जमीर वाले नेता हैं उनको लग रहा है कि पार्टी के द्वारा गलत परंपरा स्थापित की जा रही है। गलत निर्णय लिए जा रहे हैं और गलत कार्य हो रहा है। इसलिए अंदर उनके लड़ाई चल रही है। संघर्ष चल रहा है। सुनील बराला नाम के एक भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। कल उन्होंने कहा कि मुझे भारतीय जनता पार्टी में रह के दुख हो रहा है। यह क्या हो रहा है? यह नहीं होना चाहिए। इसी तरह से शाम होते-होते कल की जो केशव प्रसाद मौर्या है जो उप मुख्यमंत्री हैं उत्तर प्रदेश में उनका भी बयान आया है। लेकिन जो मुखिया हैं आदित्यनाथ वो अभी भी गलती मानने को तैयार नहीं है और दूसरों को गलत सिद्ध करने की चेष्टा कर रहे हैं जो कि हो नहीं पाएगी।

स्वामी जी आज भी कोई आया नहीं प्रशासन से। आज बसंत पंचमी स्नान आपने संगम पर रजा के नहीं किया है। ऐसा है कि हम यहां बैठे हैं तो क्या प्रशासन के आने की राह देख के बैठे हैं? ऐसा मत सोचिए। हम तो अपनी टेक पर बैठे हैं। हमारी टेक है कि हम जब संगम स्नान के लिए निकले थे तो हमारा ससम्मान संगम स्नान होना चाहिए। जब तक नहीं होता है हम बैठे हैं। हमें जहां लाकर के बैठा दिया गया है। हम किसी की प्रतीक्षा नहीं कर रहे हैं। वह आएंगे तो अपना भला करेंगे। नहीं आएंगे तो उनका पतन होगा।

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