एक हसीना थी एक दीवाना आज यह दास्ता है भारतीय हिंदी सिनेमा के गुजरे दौर के 70 और 80 के दशक के रहस्यमय उस संजीदा अभिनेता की जिसने हिंदी सिनेमा में कदम रखकर अपनी वह पहचान बनाई जिसे आज तक पूरी दुनिया याद करती है तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे इस अभिनेता के अभिनय का हिंदी सिनेमा के ऊपर व जादू चला था कि इन्होंने उस दौर में बड़े-बड़े फिल्मी अभिनेताओं के साथ-साथ बड़ी-बड़ी अभिनेत्रियों को भी अपना दीवाना बनाया था वोटों पे जान चली आएगी नैनों में नींद नहीं आएगी इस अभिनेता की जिंदगी में कामयाबी के नाम पर सब कुछ होने के बावजूद इनकी जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इस अभिनेता की जिंदगी खुद के जीवन के लिए बन गई एक भयानक सजा जिसको आज तक भुगत रहा है यह बदनसीब अभिनेता मेरे उदास मन चल इस आकर्षित अभिनेता की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इस अभिनेता को हिंदी सिनेमा से बाहर कर दिया गया जिस सिनेमा में यह अभिनेता कभी एक चमकता सितारा था।
उसी सिनेमा ने ने इस शानदार और जबरदस्त अभिनेता को धकेल दिया उस गुमनामी के अंधकार में जिसकी गहराई से आज तक यह निकल कर नहीं आ पाया है ओ रे पगले तेरा अपना ये नहीं किस्मत और जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे इस बदनसीब अभिनेता की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि मुसीबत के समय में इस अभिनेता की पत्नी ने इनको छोड़ दिया क्यों इस अभिनेता के जिंदा ते इनकी पत्नी ने कर ली किसी दूसरे मर्द से शादी जहां प्यार हारता हो नफरत जीतती हो वहां से जाना ही पड़ेगा और क्या आप यह जानते हैं कि इस लाचार और बेबस अभिनेता को क्यों सत्य साईं बाबा को मारने के आरोप में एक चौकीदार ने कर कर दिया अधमरा मन नहीं माना चला आया यने की गलती मेरी है क्यों इस अभिनेता को अपने बुरे वक्त में जाना पड़ा था ।
कानून की शिक में क्यों यह चमकता सितारा अपनी जिंदगी को बचाने के लिए कभी चलाने लगा सात समुंदर पार दूसरे देशों में टैक्सी तो कभी इनको बनना पड़ा होटल्स में एक वेटर नहीं यह बार नहीं है 27 साल से गायब यह अभिनेता कैसे हो गया पागल क्यों इस अभिनेता की तलाश में हिंदुस्तान में अभिनेता ऋषि कपूर और एक्ट्रेस दीप्ति नवल को चलाना पड़ा था इनकी खोज में एक अभियान इतने सालों से हिंदुस्तान के लोगों और सिनेमा के लिए बने रहस्य इस अभिनेता को किसने कर रखा था।
27 सालों से कैद क्या इस अभिनेता ने दुख दर्द और तकलीफ को झेलते हुए कह दिया इस जालिम दुनिया को अलविदा क्या यह अभिनेता बन गया है कलयुग में एक भूत बताएंगे और भी बहुत कुछ इस रहस्यमय अभिनेता की जिंदगी का वो सच जिसे जानकर हो जाएंगी सभी की आंखें बेहद नम तो आप बने रहिए हमारे साथ इस वीडियो के अंत तक दिल बर जानिया अब तो आजा ओ दिल बर जानिया नमस्कार दोस्तों आदाब आभार आप सभी का आज हम अपने इस शो में बात कर रहे हैं एक ऐसे खूबसूरत अभिनेता की जिसने फिल्मों में कदम रखकर अपने अच्छे अभिनय से लोगों का दिल जीता और हिंदी सिनेमा में अपनी कामयाबी से पहचाने गए राज किरण मेहतान यानी राज किरण के नाम से यारी है फूलों से मेरी यारी है कौन थे।
अभिनेता राज किरण का जन्म 19 जून 1949 को एक साधारण से सिंधी परिवार में हुआ था हालांकि राज किरण के माता-पिता का नाम किसी भी जगह उजागर नहीं हुआ है इसलिए उनके बारे में आज तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी राज ने अपनी स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई मुंबई से ही पूरी की है राज पढ़ाई-लिखाई में अच्छे छात्र रहे थे राज को अपने स्कूल के समय से ही स्कूल के नाटकों में काम करना अच्छा लगता था और धीरे-धीरे राज किरण स्टेज प्रोग्राम्स नाटकों में पूरी तरह से रम गए लेकिन राज किरण का पूरा परिवार राज किरण के इन नाटकों में काम करने के खिलाफ होता था लेकिन राज ने कभी किसी की नहीं सुनी और काम करते रहे राज जब कॉलेज में थे यह अपने कॉलेज के वार्षिक उत्सव में एक नाटक करने वाले थे जिसको देखने के लिए अतिथि के रूप में हिंदी सिनेमा के मशहूर फिल्म निर्देशक बी आर इशारा आने वाले थे लिहाजा शो खत्म होने के बाद राज किरण एकदम से बीआर इशारा साहब के पास चले गए और उनसे बोले कि मैं आपकी फिल्म में काम करना चाहता हूं उनकी यह बात सुनकर पास खड़े लोग हैरान हो गए और उन्होंने उस समय राज किरण को वहां से हटा दिया लेकिन बी आर इशारा जी राज किरण के इस तरह के विश्वास को देखकर काफी प्रभावित हुए और इस प्रोग्राम के ठीक चार महीने बाद बी आर इशारा जी ने अपनी फिल्म कागज की नाव में साल 1975 में 26 साल के राज किरण को कास्ट कर लिया।
हर जन्म में हमारा मिलन राज किरण के साथ-साथ इस फिल्म से मशहूर अभिनेत्री सारिका ने भी अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी हालांकि इस फिल्म में वह कामयाबी उन्हें नहीं मिली जिसकी सब उम्मीद कर रहे थे लेकिन इस फिल्म से सारिका और राज किरण ने हिंदी सिनेमा के फिल्म निर्माताओं का ध्यान अपनी तरफ जरूर खींच लिया था जिसका असर यह हुआ कि राज किरण को एक और फिल्म किस्सा कुर्सी का मिल गई लेकिन दुर्भाग्यवश यह फिल्म कभी रिलीज ही नहीं हो पाई क्योंकि इस फिल्म में तत् कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और संजय गांधी का मजाक बनाया गया था और उसी दौरान देश भर में इमरजेंसी भी लग गई थी जिसके चलते फिल्म पर बैन लग गया था जिसके चलते सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म के सभी प्रिंट्स जबत कर लिए थे लेकिन बड़ी हैरानी की बात थी कि कुछ समय बाद इस फिल्म के सभी प्रिंट्स चोरी हो गए सूत्रों के मुताबिक पता चला था कि चोरी हुई वो सभी फिल्म के प्रिंट्स को गुड़गांव स्थित जला दिया गया था और इस फैक्ट्री के मालिक थे संजय गांधी पहली फिल्म जो कि चली नहीं और दूसरी फिल्म रिलीज ही नहीं हुई राजकिरण की लिहाजा राज किरण को फिल्मों के ऑफर नहीं मिल रहे थे तो ऐसे में राज किरण ने सोचा कि वह अब बस एक साल और देंगे अपने अभिनय करियर को और अगर कुछ नहीं हुआ तो वह फिल्म क्षेत्र से बाहर हो जाएंगे लेकिन राज किरण को इसकी जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि साल 1980 राज किरण की जिंदगी में एक नई रोशनी लेकर आया क्योंकि इसी साल राज किरण की एक दो तीन नहीं बल्कि आठ फिल्में रिलीज हुई और इसमें से अधिकतर फिल्में हिट हो गई ।
मनोकामना मान अभिमान ये कैसा इंसाफ प्यार का नजराना बुलंदी साजन मेरे मैं साजन की जैसी फिल्मों में दर्शकों ने राज किरण को खूब पसंद किया राज किरण की इन्हीं फिल्मों में से एक फिल्म ऐसी थी जिसने राज किरण को कामयाबी के आसमान पर बैठा दिया था यह फिल्म उस दौर की बिग ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी और वो फिल्म थी कर्ज एक हसीना थी एक दीवाना हालांकि इस फिल्म में राजकिरण का किरदार फिल्म की शुरुआत में ही खत्म हो जाता है लेकिन उनकी मौजूदगी फिल्म के अंत तक बनी रहती है ये क्या कर रही हो तुम कामने तुम मुझको चला रही हो काम नहीं और इस फिल्म में छोटा सा रोल निभाकर भी राज किरण हमेशा के लिए अमर हो गए इसके बाद राजकिरण एक बार फिर से एक फिल्म अर्थ में नजर आए यह फिल्म निर्माता महेश भट्ट और अभिनेत्री प्रवीण बॉबी के प्रेम संबंधों के ऊपर बनी फिल्म थी।
इस फिल्म में राज किरण ने दिग्गज कलाकार नसीरुद्दीन शाह कुलभूषण खरबंदा शबाना आजमी जैसे सितारों के साथ काम किया और इस तरह राज किरण हिंदी सिनेमा में कदम से कदम मिलाकर दूसरे बड़े-बड़े अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के साथ काम करने लगे और इसी कामयाबी के चलते राज किरण ने मजदूर घर एक मंदिर राज तिलक अर्जुन तेरी मेहरबानियां प्यार का मंदिर घर हो तो ऐसा प्यार के देवता जैसे हिट और सुपरहिट फिल्में दर्शकों को दी और राज किरण लोगों के दिल में बस गए मोहब्बत करके मैंने अभी तक राज किरण की जिंदगी में सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था लेकिन शायद जिंदगी राज किरण को वो दिखाने वाली थी जिसकी शायद ना तो हिंदी सिनेमा में किसी को कल्पना थी और ना ही उनके चाहने वाले को दरअसल साल 1980 के खत्म होते-होते राज किरण को हिंदी सिनेमा में लीड किरदार के रोल मिलने बंद हो गए राज किरण को अब फिल्म निर्माता कभी हीरो रो का भाई तो कभी सपोर्टिंग रोल के ऑफर देने लगे राज किरण अपनी फिल्मी सफर में इस डिमोशन से काफी दुखी होने लगे फिल्मों में नायक से खलनायक बनना उनको अपनी जिंदगी में अखर रहा था नहीं ये झूठ है।
सारा सर झूठ है जिसके चलते ये कई और फिल्मों से हाथ धो बैठे और समय की ऐसी मार राज किरण को पड़ी कि साल 1990 आते-आते इनको फिल्मों में काम मिलना ही बंद हो गया और अब राज किरण मजबूरी में हिंदी सिनेमा की बी और सी ग्रेड की फिल्मों में काम करने लगे री मैं मैं मैं इस सच को नहीं मान मान मान जब राज किरण को बड़ी फिल्मों के साथ निचले स्तर की फिल्मों में काम नहीं मिल रहा था तो इन्होंने छोटे पर्दे यानी कि टीवी शो में अपना कदम रखा और यह शेखर सुमन की टीवी शो रिपोर्टर में काम करते हुए नजर आए लेकिन यहां भी राज किरण को उतना काम नहीं मिला और अब राजकिरण हर तरफ से अकेले लाचार और बेबस हो गए जो सितारा कुछ साल पहले तक हिंदी सिनेमा की हर दूसरी फिल्म का स्टार होता था वो इतनी बुरी स्थिति में पहुंच जाएगा किसी ने नहीं सोचा था समय गुजरा और अब राज किरण हिंदी सिनेमा से न जाने कहां गायब हो गए उनकी किसी को कोई खबर नहीं थी कि ऐसे में एक दिन साल 1995 की सुबह अखबार में एक खबर छपी कि हिंदी सिनेमा के मशहूर एक्टर बेंगलर की सेंट्रल जेल में हुई बंद इस खबर के छपने से पूरी इंडस्ट्री और उनके चाहने वाले काफी हैरान हो गए।
लोग जानना चाहते थे कि आखिर राज किरण के साथ क्या हुआ है जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि राज किरण के पास कोई काम नहीं रहा था वो बेरोजगार थे उनके पास पैसे नहीं थे वह सड़क पर आ गए थे तो ऐसे मुश्किलों से भरे समय में उनकी हमसफर पत्नी रूपा ने भी उनका साथ छोड़ दिया था रूपा ने राज किरण को यही नहीं छोड़ा बल्कि रूपा ने राज किरण का धोखे से घर भी हथिया लिया था और रूपा ने राज किरण के होते हुए दूसरी शादी भी कर ली थी और बेबस लाचार जिंदगी की मार छेल रहे राज किरण पूरी तरह से आसमान से सड़क पर आ गए जहां प्यार हारता हो नफरत जीतती हो वहां से जाना ही पड़ेगा राज किरण अपनी जिंदगी को उजड़ हुए देख रहे थे वह अपने आप को खाक में मिलते हुए देख रहे थे उनके साथ उनकी पत्नी ने जो किया वो उस धोखे से टूट गए थे राज किरण इन्हीं सब के चलते धीरे-धीरे मानसिक बीमारी का शिकार होने लगे मेरे उदास मन चल दोनों राज किरण अपनी जिंदगी में चर्चित सत्य साईं बाबा को बहुत मानते थे इसलिए राजकिरण मुंबई छोड़कर बेंगलोर सत्य साईं बाबा के आश्रम रहने के लिए चले गए लेकिन नाकामी की मार झेल रहे।
राज किरण ने नशे का सहारा लिया और उसी नशे की हालत में यह आश्रम चले गए थे मन नहीं माना चला आया लेकिन राज किरण को अंदर नहीं घुसने दिया गया राज किरण सत्य साईं बाबा से मिलना चाहते थे लिहाजा यह उसी रात चोरी छिपे आश्रम में घुसने की कोशिश करते हुए पकड़े गए विश्वास कीजिए यहां आकर आपकी सुख शांति को तोड़ने का नहीं था मेरा और इसी सब घटना में चोर समझकर राजकिरण की चौकीदारों ने जरूरत से ज्यादा पिटाई कर दी और पुलिस बुलाकर उनको सत्य साईं बाबा को मारने की कोशिश में गिरफ्तार कर लिया गया यानी की गलती मेरी है और मैं वादा करता हूं दोबारा यह गलती नहीं हो जिसके बाद राज किरण एक महीने तक बेंगलोर की जेल में बंद रहे लेकिन जब अखबार के जरिए राज किरण के परिवार को इसकी खबर लगी तो उनके पिता बेंगलोर गए और उनको जमानत दिलाकर जेल से बाहर कराया राज किरण ने अपनी आप बीती अपने पिता को बताई राज किरण को इस हालत में देखकर उसके परिवार को यकीन नहीं हुआ कि यह उनका ही बेटा है।
इस घटना के बाद राज किरण अमेरिका चले गए जहां उनके बड़े भाई गोविंद रहते थे राज किरण यहां पहले एक डिलीवरी बॉय की नौकरी करने लगे लेकिन यहां अमेरिका में जब उनके बेंगलोर वाले कांड के बारे में पता चला तो उनको नौकरी से निकाल दिया गया यह सारी बात खुद राज किरण ने साल 1997 में एक मैगजीन को दिए गए इंटरव्यू में बताई थी जब राज किरण अमेरिका से वापस भारत आ गए थे और अपने इसी इंटरव्यू के जरिए राज किरण ने पूरे भारतीय हिंदी सिनेमा से मदद की गुहार लगाई थी कि उनको जिंदा रहने के लिए काम की जरूरत है लेकिन शायद राज किरण की जिंदगी तो अभी और उनको वह सब दिखाने वाली थी जिसकी उम्मीद उन्होंने दूर-दूर तक नहीं की थी राज किरण को इस इंटरव्यू के बाद भी कोई काम नहीं मिला सबने उनसे मुंह मोड़ लिया राज किरण को ना जाने उनके कौन से कर्मों की सजा मिल रही थी राज किरण अपने इस आखिरी इंटरव्यू के बाद अचानक गायब हो गए जिसके बाद राज किरण की किसी को कोई भी खबर नहीं मिली ना किसी ने भी उनको कहीं देखा और इसी सब के चलते हिंदी सिनेमा की चका चौध में यह सितारा न जाने कहां खोकर रह गया और सब उनको ऐसे में भूल गए मानो जैसे राज किरण कभी बॉलीवुड में थे ही नहीं साल 2004 में राज किरण की दोस्त रही अभिनेत्री दीप्ती नवल ने पहली बार राजकिरण की नेता ऋषि कपूर न्यूयॉर्क गए थे तो उनको दीप्ति नवल की पोस्ट दिख गई चकि राज किरण ऋषि कपूर के साथ काम कर चुके थे लिहाजा ऋषि कपूर ने उनकी तलाश की और इसी तलाश में वो राजकिरण के बड़े भाई गोविंद से संपर्क कर बैठे लेकिन जब ऋषि कपूर को उनके भाई से बात करके यह पता चला कि राज किरण अटलांटिक के पागलखाने में है तो उनके पैरों तरे जमीन निकल गई उन्हें पता चला कि राज किरण वहां काफी समय से हैं।
इस जानकारी के बाद ऋषि कपूर भारत वापस आ गए और उन्होंने यहां आकर टाइम्स ऑफ इंडिया को एक इंटरव्यू दिया और बताया कि राजकिरण के परिवार ने उनको पागलखाने में डाल दिया है उनको उनके हाल पर छोड़ दिया है जो एक्टर कभी लाखों दिलों की धड़कन हुआ करता था उसका यह हाल देखकर आंखें नम हो जाती हैं ऋषि कपूर के इस इंटरव्यू के बाद तो हर तरफ राज किरण की आवाज गूंजने लगी बॉलीवुड से लेकर राजनीति तक सब उनकी चर्चा करने लगे राजनीति का बड़ा नाम रही सुष्मा स्वराज ने तो मीडिया को यह तक कह दिया था कि राज किरण जो कई सालों से गायब थे उनको ढूंढ लिया गया है उनको जल्दी ही भारत वापस लाया जाएगा यह समाचार हम सबको बहुत संतोष देने वाला है लापता एक प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता राज किरण जी का पता लग गया है हालांकि ये दुख की बात है कि वो अमेरिका के एक मेंटल अससाइलम में मिले हैं लेकिन राज किरण की बदनसीब जिंदगी यहीं खत्म नहीं हुई ऋषि कपूर के इंटरव्यू के कुछ दिन बाद राज किरण की बेटी ऋषिका मेहतानी सबके सामने आई और उन्होंने कहा कि ऋषि कपूर ने जो कहा व सब झूठ है गलत है ऋषिका ने कहा कि उनके पिता किसी भी पागलखाने में नहीं है बल्कि असल सच यह है कि मेरे पिता आज तक गुमशुदा हैं हम सब मिलकर पिछले कई सालों से उनकी तलाश कर रहे हैं और हम इस काम में न्यूयॉर्क के पुलिस और प्राइवेट की भी मदद ले रहे हैं उनकी बेटी के इस बयान ने एक बार फिर से सब कुछ जीरो कर दिया था अब सवाल यह था कि ऋषि कपूर क्या सच में झूठ बोल रहे थे या राज किरण के भाई गोविंद झूठ बोल रहे थे यह सवाल आज भी ज्यों का त्यों खड़ा हुआ है भारत सरकार जो उनको वापस लाने के दावे कर रही थी।
उन दावों को कैसे अंतिम रूप दिया जाएगा क्योंकि जो ऋषि कपूर राजकिरण के खबर लाए थे वो तो अब दुनिया में रहे नहीं और राज किरण के मिलने की जो उम्मीद जागी थी व एक बार फिर से दम तोड़ गई हालांकि इसके बाद कई बार ऐसी खबरें सामने आई कि राज किरण से मिलता-जुलता इंसान न्यूयॉर्क की सड़कों पर मृत पाया गया लेकिन यह सब बातें सिर्फ अफवाह ही बनकर रह गई और राज किरण पूरी दुनिया के लिए एक रहस्यमय इंसान बन गए उनकी तलाश में भारत पुलिस और न्यूयॉर्क पुलिस ने खूब खोजबीन की लेकिन राज किरण की कहीं से कोई भी खबर ना मिल सकी और राज किरण धीरे-धीरे सभी के लिए एक एक सवाल बनकर रह गए जिसका जवाब आज तक नहीं मिला है आज राजकिरण जिंदा है या नहीं वोह आज किस हालत में है उनके साथ क्या हुआ होगा जिंदगी ने उनके साथ ऐसा क्यों किया कि एक हंसता खेलता हंसमुख सा ये चेहरा हमेशा हमेशा के लिए दुनिया की भीड़ में न जाने कहां खो गया राज न जाने दुनिया के किस अंधकार में है जहां से वह कभी वापस आएंगे भी या नहीं आज उनकी बेटी उनका बेसब्री से इंतजार कर रही है लेकिन राज किरण 28 साल से गायब हैं और उनके इंतजार में दिन महीने बने और महीने साल लेकिन राज किरण आज भी गुमशुदा हैं।
राज किरण को लेकर कुछ लोगों का दावा है कि राज किरण को उनके परिवार वालों ने मानसिक स्थिति खराब होने की वजह से किसी अनजान जगह छुपा कर रखा है जिसकी जानकारी वह किसी को नहीं दे रहे हैं तो वही कुछ यह मानते हैं कि राज किरण ने अपनी जिंदगी को खत्म कर लिया है और उनकी मौत हो चुकी है तो वहीं कुछ महीने पहले कुछ भारतीय नागरिक अमेरिका घूमने गए थे तो उन्होंने दावा किया कि उन्होंने वहां राज किरण को एक कैफे में एक वेटर के रूप में काम करते हुए देखा।
लेकिन अब इनके इन दावों में कितनी सच्चाई है यह तो कह पाना मुश्किल है लेकिन राज किरण की जिंदगी अब उनकी पहली फिल्म कागज के नाव के सीन की तरह ही हो गई है जिसमें राज किरण समुद्र के किनारे बैठे होते हैं रेत पर बहुत सारे क्वेश्चन मार्क बने होते हैं और राज किरण कहते हैं कि सवाल एक ही है लेकिन वो बड़ा होता जा रहा है सवाल एक ही है सरिता बड़ा हो गया है बहुत बड़ा राज किरण की जिंदगी आज तक अभी तक एक रहस्य बनी हुई है इनकी जिंदगी की कहानी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है
