राधिका यादव केस की असली वजह कुछ और, चाचा-ताऊ ने किया खुलासा!

राधिका यादव केस का जिक्र सबकी जुबान पर है। हादसे का आरोप राधिका के पिता दीपक यादव पर लग रहा है। बल्कि यूं कहना ज्यादा ठीक होगा कि दीपक ने यह कुबूल कर लिया है कि बेटी को उसने ही मारा है। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि दीपक ने आखिर ऐसा किया क्यों? क्योंकि हर घटना को अंजाम दिए जाने के पीछे एक मोटिव होता है यानी कि मंशा और जो कारण दीपक ने पुलिस को बयान में बताए हैं उस पर विश्वास हो नहीं रहा है।

एक पिता जिसने बेटी के सपनों के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया। बेटी के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर दिए। आखिर वो अपनी बेटी को क्यों मारेगा? क्या परिवार जानबूझ करके असली वजह को छिपा रहा है? इस कहानी में पेच कहां फंसा है? आज हम इसी पर बात करेंगे। तमाम मीडिया चैनल से बातचीत के दौरान राधिका के दोस्तों और परिजनों ने कई ऐसी बातें कही जिन पर गौर करने से पर्दे के पीछे की पूरी कहानी सामने आने लगती है।

सबसे पहले आप आरोपी पिता दीपक के बयान पर गौर कीजिए। दीपक ने पुलिस को जो बयान दिया उसमें तीन बातें सबसे अहम है। पहली बात यह है कि मैं दूध लेने के लिए वजीराबाद जाता था। वहां लोग मुझे कहते थे कि लड़की की कमाई खाते हो। इससे मैं काफी परेशान था।

दूसरी बात लोग मेरी बेटी के चरित्र पर उंगली उठाते थे। मैंने राधिका से कहा कि वो टेनिस एकेडमी जाना बंद कर दे। उसने ऐसा करने से मना कर दिया। इससे मैं परेशान था। और तीसरी बात 10 जुलाई को राधिका खाना बना रही थी। मैं रिवाल्वर लेकर किचन में गया और उसे पीछे से तीन गोलियां मारी। उस वक्त मेरी पत्नी अंजू घर में थी। बेटा धीरज ऑफिस गया था।

इस बयान की पहली दो बातों में ही सारा राज छिपा हुआ है। दरअसल जब मीडिया ने राधिका के अंतिम संस्कार में शामिल हुए उसके चाचा और ताऊ से बात की तो उनके बयान दीपक के बयान से ठीक उल्टे निकले। दरअसल दीपक यादव काफी अमीर हैं। रिश्तेदारों के मुताबिक दीपक की गुरुग्राम में कई प्राइम लोकेशन पर प्रॉपर्टीज हैं। जिनसे हर महीने उन्हें करीब 4 से ₹ लाख किराया मिलता है।

इसके अलावा दीपक प्रॉपर्टी डीलर भी हैं। वहां से भी उन्हें अच्छी खासी कमाई हो रही है। यानी बेटी की कमाई खाने का तो सवाल ही नहीं उठता। रिश्तेदारों का यह भी कहना है कि उन्होंने कभी ऐसा नहीं सुना कि किसी ने दीपक को बेटी की कमाई खाने की बात कही हो। दूसरी बात यह है कि दीपक ने राधिका को टेनिस एकेडमी खुलवाने के लिए ₹ करोड़ की मदद दी थी। उस पर खर्च किए थे। इसका मतलब साफ है कि दीपक की आर्थिक स्थिति अच्छी है। तो बेटी की कमाई खाने का तो सवाल ही नहीं उठता। यानी इस पॉइंट में दम नहीं है।

अब गौर कीजिए दूसरी बात पर। चरित्र पर सवाल उठाने वाली बात में दम बिल्कुल भी नहीं है। क्योंकि गांव में रह रहे दीपक यादव के परिवार का कहना है कि राधिका की तारीफ तो पूरा गांव करता था। क्योंकि उसने छोटी उम्र में ही टेनिस में इतना बड़ा नाम कर लिया था।

गांव वालों का कहना है कि राधिका भी बहुत सभ्य लड़की थी। वो अच्छे स्वभाव की थी। इतनी टैलेंटेड थी कि पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया उसने। राधिका की बेस्ट फ्रेंड हिमांशिका राजपूत का कहना है कि वो घर से ज्यादा बाहर नहीं निकलती थी। शांत रहती थी और जब भी किसी काम से घर से बाहर निकलती थी तो परिवार का कोई व्यक्ति उसके साथ हमेशा होता था। ऐसे में कोई राधिका के चरित्र पर कैसे सवाल उठा सकता है और अगर किसी ने उठाया भी तो परिवार कैसे विश्वास कर लेगा। लेकिन इसी बीच रिश्तेदारों ने एक बहुत ही अहम बात बताई।

गांव में रह रहे दीपक यादव के परिवार के मुताबिक राधिका की शादी की बात चल रही थी। लेकिन वो शादी के लिए तैयार नहीं थी। उसने साफ कह दिया था कि वह अपनी पसंद से शादी करना चाहती है। लेकिन फिलहाल वो इसके लिए तैयार नहीं है। वह अपनी मर्जी से शादी करेगी और आगे काम करने की ज़िद कर रही थी।

इसके लिए उसने सोशल मीडिया पर अपना अकाउंट बनाया था। वह रील्स और म्यूजिक वीडियोस में अब दिखने लगी थी और राधिका की इसी बात से दीपक परेशान था। गांव में रह रहे रिश्तेदारों के मुताबिक दीपक ने अपनी जिंदगी के 15 से 20 साल बेटी के लिए खर्च कर दिए। बेटी के सपनों पर पानी की तरह पैसा बहाया। ऐसे में दीपक को यह उम्मीद नहीं थी कि वही बेटी पलट करके उसे जवाब दे सकती है। उसकी कही किसी बात को मना कर सकती है और शायद इसी वजह से वो इतना गुस्सा था कि उसने अपनी बेटी की हत्या कर दी। यह कहना है रिश्तेदारों का।

यहां एक बात और सामने आई है वो यह कि दीपक का स्वभाव शक करने का था। और शायद इसलिए ही वो हर समय बेड़ी राधिका के साथ रहता था। मामले की जांच से जुड़े एक सीनियर अधिकारी से जब एक निजी मीडिया चैनल ने दीपक यादव के स्वभाव के बारे में पूछा तो उन्होंने जवाब दिया दीपक अपनी बेटी के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहता था।

अब तक की पूछताछ में यह बात समझ में आई है कि उसे एक बार शक हो जाता तो जल्दी से उसे वह छोड़ता नहीं था। इसलिए वह अक्सर बेटी के साथ रहता था। उसे अकेला कभी नहीं छोड़ता था। घरवालों से पूछताछ में पता चला कि दीपक हर रोज शाम को शराब पीता था। पिछले कई दिनों से बाप-ब में विवाद चल रहा था, जिससे वह डिप्रेशन में चला गया।

इस दौरान शादी को लेकर के कई बार बात हुई, लेकिन राधिका ने शादी करने से मना कर दिया। ऊपर से दीपक को यह शक हो गया कि शायद बेटी किसी और को पसंद करती है और इसलिए वो शादी के लिए मना कर रही है और बदनामी के डर से गुस्से में दीपक ने बेटी की जान लेने के बाद अब दीपक यादव को आत्मग्लानी हो रही है। राधिका के ताऊ विजय यादव का कहना है कि बेटी की का दीपक को बहुत ज्यादा दुख है। वो बार-बार कहता है कि मेरे से कन्या का वध हो गया। मुझे फांसी दिलाओ। यही बात उसने थाने में भी कही।

विजय यादव के मुताबिक दीपक ने कहा है कि मेरी ऐसी रिपोर्ट बनाना कि मुझे हो। 25 साल की राधिका अब इस दुनिया में नहीं है। जिस बेटी को इतने नाज नखरों से बड़ा किया। एक झटके में उसकी कर दी उसके पिता ने। इस केस में हमने अपनी थ्योरी आपके सामने पेश कर दी।

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