2019 में पीएम मोदी व्लादमीर पुतिन के साथ रूस के एक ऐसे इलाके में खड़े थे जो ईरान और खाड़ी देशों में मचे बवाल के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी रणतिक ताकत बनने जा रहा है।
पीएम मोदी करीब 7 साल पहले ही रूस के इस रणनीतिक इलाके की कीमत समझ चुके थे। लेकिन आज ईरान और खाड़ी देशों में जिस तरह के हमले शुरू हुए हैं, उन्हें देखकर आप भी समझ जाएंगे कि 7 साल पहले पीएम मोदी ने रूस के इस इलाके में खड़े होकर क्या तगड़ा खेल कर दिया था। यह एक ऐसा जादुई इलाका है जहां से रूस जब चाहे और जितना चाहे तेल और सामान भारत को भेज सकता है। इस इलाके में जंग होने की भी संभावना काफी कम है।
सबसे पहले तो आप यह जान लीजिए कि ईरान इजराइल जंग की वजह से पूरी दुनिया में तेल संकट गहरा गया है। ईरान ने स्टेट ऑफ हार्मोस को बंद किया जिसकी वजह से समंदर में कई तेल टैंकर फंस गए। खबरें हैं कि भारत के 37 जहाज और 10,109 भारतीय नाविक भी स्टेट ऑफ हॉर्मोस के पास फंसे हुए हैं। हालांकि ईरान ने दावा किया है कि उसने स्टेट ऑफ हॉर्मोस को सिर्फ अमेरिका, इजराइल और पश्चिमी देशों के लिए ही बंद किया है। लेकिन स्थिति भारत के लिए भी चिंताजनक बनी हुई है। क्योंकि स्ट्रेट ऑफ हरमूस के पास एक ऑयल टैंकर पर हुए ईरानी हमले में दो भारतीय सेलर्स भी मारे जा चुके हैं। लेकिन भारत और रूस ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस का तोड़ बहुत पहले ही निकाल लिया था।
आपके मन में सवाल होगा कि जब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस बंद है तो रूस का तेल भारत तक कैसे पहुंचेगा? तो आपको एक दिलचस्प बात बता दें कि रूस भारत को तेल भेजने के लिए ईरान के कंट्रोल वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस का इस्तेमाल ज्यादा नहीं करता। कभी कभार ही रूस इस रूट के जरिए भारत को तेल भेजता है।
आपको बता दें कि रूस के ज्यादातर तेल टैंकर्स स्वेज कैनाल के जरिए रेड सी से होते हुए गल्फ ऑफ एडन तक पहुंचते हैं और फिर भारत तक तेल पहुंचाते हैं। रूस इसी इलाके से भारत को सबसे ज्यादा तेल भेजता है। लेकिन यह इलाका भी खतरों भरा है। यहां पर समुद्री और ईरान समर्थित हूं का खतरा हमेशा बना रहता है।
लेकिन अब आने वाले समय में भारत और रूस एक जादुई कॉरिडोर के जरिए एक दूसरे के साथ व्यापार करेंगे। यह कॉरिडोर रूस के फार ईस्ट इलाके में बसे एक शहर व्लादिवोस्तोक से निकल कर सीधा भारत के चेन्नई तक पहुंचता है। आने वाले समय में रूस अब व्लादीस्टोक से ही तेल और बाकी सामान चेन्नई तक पहुंचाएगा।
इस कॉरिडोर को व्लादीक चेन्नई कॉरिडोर का नाम दिया गया है। खबरें हैं कि आने वाले समय में रूस अब इसी इलाके से भारत को जमकर तेल भेजेगा। यह वो कॉरिडोर है जिससे रूस का तेल सबसे कम समय में भारत पहुंच सकता है। इस कॉरिडोर के बीच में स्टेट ऑफ मलक्का पड़ेगा। स्टेट ऑफ मलक्का के पास भारत की डोमिनेंस है। आपको बता दें कि स्टेट ऑफ मलक्का से कुछ ही दूरी पर भारत ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भी बना रहा है।
जानकारी के लिए बता दें कि 2019 में पीएम मोदी पुतिन के साथ व्लादीक गए थे। उसी समय भारत और रूस के बीच व्लादीक चेन्नई कॉरिडोर पर समझौता हो गया था। चलिए जाते-जाते आपको व्लादीक के बारे में एक दिलचस्प बात बताते हैं। रूस को हमेशा यह डर सताता है कि चीन व्लादीक पर कब्जा कर सकता है। व्लादीक चीन के काफी नजदीक है। ऐसे में व्लादीक को चीन से बचाने के लिए ही पुतिन ने पीएम मोदी को यहां बुलाया था। इसी इलाके में भारत से जबरदस्त इन्वेस्टमेंट भी करवा दी थी।
