प्रिया सचदेव ने किया करिश्मा का पर्दाफाश कोर्ट में दिखाए सबूत।

संजय कपूर की 3000 करोड़ की प्रॉपर्टी और वसीयत पर कंट्रोवर्सी के बीच उनकी बेटी समायरा ने हाल ही में हाई कोर्ट में दावा किया था कि उनकी 2 महीने से फीस नहीं भरी गई है।

ऐसे में करिश्मा और संजय की बेटी समायरा अमेरिकन यूनिवर्सिटी में पढ़ रही हैं और उन्होंने यह अपील की थी जस्टिस ज्योति सिंह के सामने और अब प्रिया सचदेवा की लीगल टीम ने दिल्ली हाईकोर्ट में इसका खंडन किया है। जी हां क्या है पूरा माजरा?

दोस्तों आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि करिश्मा कपूर के एक्स हस्बैंड संजय कपूर के गुजरने के बाद से उनकी प्रॉपर्टी और वसीयत पर विवाद चल रहा है।

दरअसल करिश्मा के बच्चों ने दिल्ली हाईकोर्ट में पिता संजय की दूसरी पत्नी प्रिया सचदेवा के खिलाफ याचिका दायर की। जिसमें कहा कि उन्होंने जाली वसीयत बनवाई है और संपत्ति हड़पने की कोशिश की है। इतना ही नहीं करिश्मा के बच्चों ने पिता की प्रॉपर्टी में अपना हक मांगा है और साथ ही मांग की है कि विवाद सुलझने तक प्रिया सचदेवा पर संपत्ति को बेचने, बदलने या ट्रांसफर करने से रोका जाए।

दिल्ली हाईकोर्ट में तीसरे दिन की सुनवाई में प्रिया सचदेवा की लीगल टीम ने जस्टिस के सामने करिश्मा कपूर के दावे का खंडन किया और अपना पक्ष रखा। कोर्ट की पिछली सुनवाई में करिश्मा की बेटी ने कहा था कि 2 महीने से उसकी यूनिवर्सिटी की फीस नहीं दी गई है।

इस पर कोर्ट ने दोनों पक्षों को ड्रामा न करने का सजेशन दिया। लेकिन प्रिया सचदेवा की वकील शेल त्रेहन ने इस दावे को खारिज करने के लिए कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश किए हैं। आपको बता दें कि उन्होंने कोर्ट में रसीद पेश की है जिसकी मानें तो हर सेमेस्टर की 95 लाख के हिसाब से फीस जमा की जा चुकी है।

साथ ही यह भी बताया गया है कि दूसरे सेमेस्टर की अगली किस्त दिसंबर में ही दे दी जाएगी। दरअसल, यह पिछली सुनवाई के बिल्कुल उलट था। जिसमें करिश्मा की बेटी की वकील ने आरोप लगाया था कि 2 महीने से उनकी यूनिवर्सिटी की फीस ही नहीं भरी गई है।

फीस का मुद्दा सुलझने के बाद कोर्ट मुख्य मुद्दे पर आई यानी संजय की वसीयत की प्रमाणिकता जिस पर करिश्मा और उनके बच्चों ने जाली बताया था। इसके बाद बचाव पक्ष ने कोर्ट को पूरा घटनाक्रम बताया कि कैसे वसीयत बनी और सामने आई। उन्होंने यह भी बताया कि पहला ड्राफ्ट नितिन शर्मा के लैपटॉप पर तैयार किया गया था जो इस दस्तावेज को तैयार करने वाले एडवोकेट थे।

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