पूरी दुनिया में सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल हो रही है। ये खबर शेयर हो रही है कि ईरान के हमले में इसराइल का प्राइम मिनिस्टर बेंजामिन इतनिया मारा जा चुका है। उसके भाई की भी ईरान के हमले में हलाकत हो चुकी है। और इसराइल का शिद्दत पसंद लीडर वहां का नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतमा बिन गोयर भी मारा जा चुका है। यह तीनों ईरान के हमले में 8 मार्च को ही हलाक हो गए। और अब ये सब मुर्दा है।
लेकिन इजराइल की मीडिया इस खबर को छुपा रही है। सोशल मीडिया पर ये खबर लगातार वायरल हो रही है। और सिर्फ सोशल मीडिया पर नहीं बल्कि कई बड़े-बड़े मीडिया हाउसेस ने भी इस खबर को अब शाय कर दिया है। इंडिया में भी टीवी चैनलों पर ये खबर चल रही है और इंडिया की कुछ बड़ी न्यूज़ वेबसाइट ने भी इस खबर को शाय किया है।
लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स या दूसरी न्यूज़ वेबसाइट ने इस खबर को शाय करते हुए आगे क्वेश्चन मार्क लगा दिया है। दूसरी तरफ वेस्टर्न मीडिया में और इंडियन मीडिया में भी यह दावा किया जा रहा है कि इजराइल और अमेरिका के हमले में ईरान के नए सुप्रीम लीडर सैयद मुस्तफा खामन की शहादत हो चुकी है।
वह जिंदा नहीं है। कुछ वेस्टर्न मीडिया में यह दावा किया गया है कि 28 फरवरी के हमले में भी उनको चोट लगी थी। वह जख्मी हो गए थे और अभी तक वह सेहतयाब नहीं हो सके हैं। और उनकी क्या सुरते हाल है? क्या कंडीशन है? किसी को पता नहीं है। इन दोनों खबरों की क्या सच्चाई है? इस वीडियो में तफसील से जानते हैं। सबसे पहले जानते हैं कि क्या सच में इसराइल का प्राइम मिनिस्टर बन जामिनू अब इस दुनिया में नहीं रहा। वह मर चुका है और इस तरह का दावा तसनीम न्यूज़ एजेंसी ने एक हफ्ता पहले भी किया था। एक हफ्ता पहले तसनीम न्यूज़ एजेंसी ने ये खबर शायर करके कहा था कि ईरान के हमले में इसराइल का प्राइम मिनिस्टर बेंजामिन एतिया को मारा गया है।
लेकिन पिछले हफ्ते तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने कहा था कि आईआरजीसी ने बेंजामिन एतन्या के दफ्तर पर हमला किया है। इस खबर को कंफर्म नहीं किया गया था कि बेंजामिन इतनिया उस वक्त अपने दफ्तर में था या नहीं था। लेकिन अब कल जो तसनीम न्यूज़ एजेंसी ने खबर शायर की है उसमें ये कहा गया कि बेंजामिन ने नितनिनू अपने घर में था और उसकी मीटिंग चल रही थी।
उसका भाई भी मीटिंग में था और इजराइल का नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर भी घर में मौजूद था और उसी वक्त ईरान ने से हमला किया। 1 टन से ज्यादा वजन था इस का और 8 मार्च के बाद उस हमले के बाद बेंजामिन इतनिया की कोई ताजा तस्वीर सामने नहीं आई है। यानी जिन बुनियादों पर तसनीम न्यूज़ एजेंसी ने या आईआरजीसी ने दावा किया है.
बेंजामिन इतनियाू की हलाकत का उसकी एक वजह यह है कि 8 मार्च के बाद बेंजामिन इतना अभी तक पब्लिक प्लेस में नहीं आया है। उसकी कोई लेटेस्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। उसकी कोई वीडियो सामने नहीं आई है। और जो भी उसका बयान सामने आ रहा है वह रिटेन में आ रहा है। कोई वीडियो बयान भी बेंजामिन एतनियाू का सामने नहीं आ रहा है। कई जगह बेंजामिन एतियाू की मीटिंग शेड्यूल थी लेकिन वो मीटिंग कैंसिल हो गई है।
अमेरिकी सदर डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और अमेरिकी सदर के एलएस्ट विटको का इसराइल का दौरा होने वाला था और यह दौरा भी कैंसिल कर दिया गया क्योंकि बेंजामिन नतिनाहू अच्छी कंडीशन में नहीं है। तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने इन बुनियादों पर दावा किया है कि बिंजामिन नतीजा की हलाकत हो चुकी है। पहली वजह उसकी तस्वीर नहीं। दूसरी वजह उसका वीडियो बयान सामने नहीं आ रहा है। तीसरी वजह कहीं पब्लिक प्लस में वो नजर नहीं आ रहा है। चौथी वजह कहीं पर मीटिंग में उसकी तस्वीर नहीं दिख रही है। और पांचवी बड़ी वजह यह के अमकी एलजी की मीटिंग कैंसिल कर दी गई। जबकि इसराइल जाना इस वक्त जरूरी था। दूसरी तरफ यरूशलम पोस्ट ने खबर शाय करके इस पूरी खबर को झूठ बताया है। प्रोपेगेंडा बताया है और तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के बारे में ही दावा कर दिया गया कि यह आईआरजीसी का ही प्रोपेगेंडा है। लेकिन ये खबर इतनी फैली के बड़े-बड़े सोशल मीडिया अकाउंट से इस खबर को शेयर किया गया। एक खबर सामने आ रही है कि एक स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर गर्दिश कर रहा है कि अफगानिस्तान के प्राइम मिनिस्टर का Twitter पर अकाउंट बना हुआ है और उनके अकाउंट से भी मिजामिन नितिन याू के मरने की खबर को शाय किया गया और कहा गया कि सोर्सेस ये बता रहे हैं कि नितिन याू की ईरान के हमले में मौत हो चुकी है। क्या ये न्यूज़ सही है?
आप स्क्रीन पर देख सकते हैं इस Twitter अकाउंट को। अब यह वेरीफाई अभी तक नहीं हो सका कि जो Twitter अकाउंट है यह अफगानिस्तान के प्राइम मिनिस्टर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का ही ऑफिशियल अकाउंट है या फर्जी अकाउंट है क्योंकि जंग के जमाने में बहुत सारे फर्जी अकाउंट बना लिए जाते हैं।
फर्जी वीडियोस को शेयर किया जाता है। पुरानी वीडियोस को नई वीडियोस बनाकर शेयर किया जाता है। इसलिए कंफर्म करना मुश्किल हो जाता है। बहरहाल इस अकाउंट के जरिए भी बंजामिन इतनिया के मरने की खबर को शाय किया गया और इस तरह के बेशुमार अकाउंट है सोशल मीडिया पर जिनके जरिए दावा किया गया कि बंजामिन इतनिया की हलाकत की खबरें सामने आ रही है लेकिन इसराइल ने इस तरह की खबर को कंडम किया है झूठ करार दिया है यरूशलम पोस्ट ने कहा कि ये तसनीम न्यूज़ एजेंसी का झूठा प्रोपेगेंडा है। दूसरी तरफ वेस्टर्न मीडिया का दावा है कि मुस्तबा खामई भी अब नहीं रहे या वो शदीद जख्मी हैं। इस दावा की क्या सच्चाई है?
दरअसल वेस्टर्न मीडिया ये लिख रहा है कि 28 फरवरी को जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली खामनई को टारगेट किया निशाना बनाया और मीटिंग उनकी चल रही थी 9:40 पर हमला हुआ तो उस दिन मुस्तबा खामनई भी शदीद जख्मी हो गए और जख्मी हो जाने के बाद उनको हस्पताल में एडमिट किया गया और अभी तक वह सेहतियाब नहीं हो सके हैं और वेस्टर्न मीडिया दलील यह दे रहा है कि 28 फरवरी के बाद अभी तक कहीं पर भी खामई पब्लिक प्लेस में नजर ज़ नहीं आए हैं।
उनकी एक भी ताजा तस्वीर सामने नहीं आई है। उनका एक भी स्टेटमेंट और बयान सामने नहीं आया आया है। उनसे उनके किसी एडवाइजर या हुकूमत के किसी जिम्मेदार की मुलाकात हुई है। यह भी अभी तक सामने नहीं आया है। मुस्तबा खामनई को 9 मार्च को ही ईरान का अगला सुप्रीम लीडर ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने चुन लिया था। लेकिन अभी तक ईरान के हुकूमती जिम्मेदारों ने, आला अफसरान ने, फौजी कमांडरों ने, मुस्तबा खाम नई के साथ कोई मीटिंग नहीं की है। इस तरह की कोई भी खबर सामने नहीं आई है। कौन लोग उनके राबते में हैं? कौन उनके नए एडवाइजर और सेक्रेटरी बने हैं यह भी डिटेल सामने नहीं आई है।
इसका मतलब साफ है कि मुस्तबा खामनई की जो सिचुएशन है बहुत ज्यादा सीरियस है। उनकी कंडीशन अच्छी नहीं है। यह वेस्टर्न मीडिया का भी प्रोपेगेंडा किया जा रहा है। उनका यह भी मानना है कि वो नए सुप्रीम लीडर बन चुके हैं और तीन दिन से ज्यादा कर्सा गुजर चुका है। चुनांचे उनको पब्लिक प्लेस में आना चाहिए। आवाम से खिताब करना चाहिए। जिस तरह आवाम के बीच में ऐसी सुरते हाल में सैयद अली खाम नहीं आते थे।
जब भी अमेरिका की तरफ से दी जाती थी। इसराइल की तरफ से धमकी दी जाती थी और कहा जाता था कि उनकी शहादत हो चुकी है या वो में जाकर छुप चुके हैं या देश छोड़कर जा चुके हैं। तो अचानक सैयद अली खामनई नमूदार होते थे और अमेरिका को इजराइल को ललकारते थे। अमेरिकी सदर को चैलेंज करते थे और कहते थे देखो यहीं पर मौजूद है खाम नई मैं देश छोड़कर नहीं भागा हूं मैं यहीं रहूंगा उनके बारे में लगातार मीडिया में चल रहा है और ईरान के भी कई लोगों ने बताया कि जब इंटेलिजेंस ने रिपोर्ट दी कि अमेरिका और इसराइल का हमला होने वाला है और आपको टारगेट किया जाएगा इसलिए आप किसी बंकर में जाकर पनाह ले लीजिए छुप जाइए आपका अपने घर में रहना जिसको बैत रहबरी कहा जाता है और वह मकाम सबको पता था वहां सही नहीं है।
तो उन्होंने कहा कि ईरान की जो टोटल पापुलेशन है वह 8 करोड़ से ज्यादा की है। तो क्या ईरान की 8 करोड़ पापुलेशन के लिए बंकर बना हुआ है। वो लोग बंकरों में जाकर छुप सकते हैं, रह सकते हैं। अमेरिका और इसराइल के हमले से अपनी जिंदगी बचा सकते हैं? नहीं। जब 8 करोड़ ईरानी कौम के लिए बंकर नहीं बना हुआ है तो फिर मैं अकेला क्यों बंकर में जाऊं? जितनी अहमियत 8 करोड़ ईरानी आवाम के जानों की है उतनी अहमियत मेरी जान की भी है। मैं कौम का रहनुमा नहीं खादिम हूं और मैं उतना ही अपने आप को बचाने की कोशिश करूंगा जितना सब करेंगे। अगर वो मुझे मारना चाहते हैं तो मेरी मौत जहां लिखी होगी जैसे लिखी होगी वहीं आएगी। लोग बताते हैं कि उन्होंने बार-बार शहादत की आरजू की थी।
शहादत की तमन्ना का इज़हार किया था। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुई जिसमें देखा जा रहा है कि वो शहादत की दुआ मांग रहे हैं। कहा जा रहा है वेस्टर्न मीडिया के जरिए को पब्लिक प्लेस में आते थे लेकिन उनके बेटे मुस्तफा खामन पब्लिक प्लेस में नहीं आ रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि मुस्तफा खामन पहले से ही बहुत कम आवामी रहे हैं। आवाम से उनका मिलनाजुलना कम रहा है। ज्यादा उन्होंने आवामी इजलास का खिताब नहीं किया। हां अपने वालिद के दफ्तर को वो जरूर संभालते थे। सुप्रीम लीडर की जो ऑफिस है उसको पिछले कई सालों से वही देख रहे थे। फैसले कर रहे थे और अब वक्त आने पर जरूर वह पब्लिक में आएंगे। वक्त का वह इंतजार कर रहे हैं।
फिलहाल ईरान हालत जंग में है और ईरान का जो हुकूमती ढांचा है पूरी तरह बरकरार है। पिछले दिनों मैंने इंटरव्यू किया था ईरान के सुप्रीम लीडर के जो रिप्रेजेंटेटिव है इंडिया में डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही तो उन्होंने कहा कि दरअसल हमारी तरफ से एक सवाल था कि क्या ईरान की हुकूमत से भी आपका राब्ता है कम्युनिकेशन है। उनकी तरफ से आपको गाइडलाइंस मिल रही है। तो उन्होंने कहा कि ऑफकोर्स यस रोजाना हमारी बातचीत होती है। हमें रोजाना वहां से हिदायत मिलती है कि हमें क्या करना है, नहीं करना है। किस तरह इंडियन गवर्नमेंट के साथ बातचीत करनी है, क्या डिप्लोमेसी अपनानी है।
तो हमारा जो कम्युनिकेशन सेंटर है, हमारा जो कम्युनिकेशन सिस्टम है, वो पूरी तरह बरकरार है। और ईरान की हुकूमत जंग लड़ने के लिए भी तैयार है। हम जंग लड़ रहे हैं और अगले 10 सालों तक हम इस रफ्तार से जंग लड़ने की सलाहत रखते हैं। इस हमले का हुकूमती ढांचे पर कुछ भी असर नहीं पड़ा है। अब इन दोनों खबरों की असल सच्चाई क्या है? वह आने वाला वक्त बताएगा। क्या सच में बंजामिन इतना की हलाकत हो चुकी है या फिर मुस्तफा खान नई शदीद जख्मी है जैसा वेस्टर्न मीडिया दावा कर रहा है। आपको क्या लगता है? कमेंट सेक्शन में लिखिए। बताइए इस वीडियो में इतना ही। अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह बरकातहू। मौजूदा हालात में मीडिया हमारी सबसे अहम जरूरत है और मिल टाइम्स इस जरूरत को इस कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। पिछले 10 सालों से हर चैलेंज और मुश्किल का सामना करते हुए लगातार हम आपकी आवाज उठा रहे हैं। मीडिया के मैदान में काम कर रहे हैं और आपने हमेशा हमें सपोर्ट भी किया है। मिल्लत टाइम्स सिर्फ YouTube चैनल का नाम नहीं है बल्कि मिल्ला टाइम्स का अंग्रेजी डेस्क है। जहां अंग्रेजी में हम खबरें शाया करते हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं। मिल्ला टाइम्स का हिंदी डेस्क है। मिल्ला टाइम्स का उर्दू और बांग्ला डेस्क भी है। और चार जुबानों में हम वेबसाइट पर खबरें शाय करते हैं। सोशल मीडिया पर हम खबरें पोस्ट करते हैं। इसके अलावा YouTube पर हम एक्सप्लेनर वीडियोस बनाते हैं। ग्राउंड पर जाकर रिपोर्ट करते हैं। इंटरव्यूज करते हैं। पडकास्ट करते हैं। और मिल्ला टाइम्स ने अब डॉक्यूमेंट्री बनाना भी शुरू कर दिया है। इस साल हमने एक शानदार प्रोग्राम का इकाद भी किया। मिला टाइम्स की ऑफिस है। मिला टाइम्स का 20 लोगों का स्टाफ है। इसके अलावा भी मिला टाइम्स के कई सारे अखराजात हैं। बहुत सारे एक्सपेंसेस हैं। और आपने हमेशा मिल टाइम्स को आगे बढ़ाने के लिए हमें सपोर्ट किया है। आपसे गुजारिश है इस साल भी माहे मुबारक में हमें सपोर्ट कीजिए।
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