गैस बंद करने चला था उल्टा भारत से चावल मांगे।

थी कि अगर भारत अरब वर्ल्ड यानी सऊदी क़तर जैसे देशों का साथ नहीं देता या ईरान से नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश की या फिर से ईरान को मेडिकल सहायता भेजी तो क़तर भारत की गैस सप्लाई बंद कर देगा। भारत में भुखमरी जैसे हालात पैदा करेंगे।

जी हां, इतने तीखे लफ्जों में क़तर के विदेश मंत्री अब्दुल रहमान अल थानी ने भारत की आलोचना की थी। क्योंकि भारत ने ईरान को जीवन रक्षक दवाइयां जो भेजी थी। लेकिन कहते हैं ना वक्त सबका आता है।

एक जमाना था जब ये अरब देश गैस और तेल के दम पर काफी उछल रहे थे। इन शेखों की यह सोच बन गई थी कि इन्होंने अगर तेल निकालना बंद किया तो पूरी दुनिया खत्म हो जाएगी। भूखी मर जाएगी। भारत को लेकर तो क़तर हमेशा निंदनीय सोच का रहा है। हमें घ्यास देकर क़तर को ऐसा लगता है जैसे मानो क़तर भारत पे कोई एहसान कर रहा हो। जैसे कि यह हमें फोकट में ही घ्यास बेचते।

लेकिन आज देखिए ईरान ने कैसे इन शेखों का घमंड इनका गुरूर चकनाचूर कर दिया है। बल्कि हालात यह हो चुके हैं कि अब क़तर को भारत के आगे हाथ फैलाने पड़े। जी हां, फिलहाल क़तर गवर्नमेंट को एक ही बात का डर सता रहा है जो कि है लगातार खत्म हो रहा अनाज।

दरअसल इस जंग में ईरान इजराइल के बाद सबसे ज्यादा अगर किसी को टारगेट कर रहा है तो वह क़तर है। चलो इजराइल के पास जहाज आने जाने का प्रॉब्लम नहीं लेकिन क़तर की मुश्किलें बढ़ चुकी है क्योंकि हॉर्मोस्ट्रेट पहले ही इन अरब देशों के लिए ईरान ने बंद कर रखा है और बहुत से कार्गो प्लेन मिडिल ईस्ट में उड़ान भरने से डर रहे क्योंकि ईरान के मिसाइल कब किस दिशा से आकर प्लेन को टकरा जाएगी कुछ कह नहीं सकते।

इसीलिए बहुत से देश अरब देशों को अनाज की सप्लाई ठीक से नहीं कर पा रहे। यही कारण है कि क़तर ने अब भारत से संपर्क करना शुरू कर दिया है। क़तर के विदेश मंत्रालय ने भारत से कांटेक्ट करके बासमती चावल की एक बड़ी खेप की मांग की है। शायद आपको पता होगा कि क़तर भारत से हर साल 20 से 25 करोड़ किलोग्राम चावल आयात करता है। जिसकी अनुमानित कीमत 1500 करोड़ों तक बताई जाती है। जितने चावल भारत अकेला कतर को बेचता है उतने तो पाकिस्तान, वियतनाम, चाइना और ऑस्ट्रेलिया भी मिलकर नहीं बेच पाते।

यही कारण है कि क़तर अब भारत के आगे हाथ फैला रहा है कि भारत आसमान या समंदर कहीं से तो चावल भेज दो क्योंकि क़तर का अनाज स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। और बाहरी देश ईरानी हमलों की वजह से मिडिल ईस्ट में अपने जहाजिया प्लेन भेजना नहीं चाहते। इस वक्त भारत के जहाजी हार्मोस्ट्रेट या ईरानी एयर स्पेस में आ जा रहे हैं। जो बात क़तर को भी अच्छी तरीके से पता है।

इसीलिए यह अरब देश अब भारत से चावल मांग रहे हैं। इस पर मैं अगर अपनी पर्सनल राय दूं तो भारत ने इन घमंडी शेखों को कुछ भी नहीं देना चाहिए। यह पाकिस्तान को फेवर करते हैं तो जाकर उसी से ही चावल मांगे और अगर भारत सरकार को कतर को चावल देने ही है तो उन्हें ऊंचे दामों में चावल बेचे जाए। अच्छा खासा बिजनेस करें।

क्योंकि इन शेखों ने भी भारत को कभी डिस्काउंट नहीं दिया। उल्टा तेल के नाम पर लूटा जरूर है। और वैसे भी यह कतर आज मुसीबत में है इसलिए हाथ जोड़ रहा है। कल को जब यह वॉर रुक जाएगी सब नॉर्मल होगा तब यही क़तर फिर से कश्मीर मुद्दे पर हमें पाकिस्तान के साथ यूएन के मंच पर दिखेगा।

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