भारत की इस 166 KM जमीन ने हिलाई दुनिया ये है मोदी की ताकत

भारत की मुख्य भूमि से 1800 कि.मी. दूर भारत के ही एक इलाके ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है। यह इलाका है तो 900 कि.मी. से बड़ा लेकिन इसमें से 166 कि.मी. के दायरे में भारत एक ऐसा काम कर रहा है जो पूरा हो गया तो कई देशों को घुटनों पर ला सकता है। इस इलाके में भारत जो प्रोजेक्ट बना रहा है, वह हमेशा के लिए चीन के गले में रस्सी डाल सकता है।

लेकिन आपके होश तब उड़ जाएंगे जब आपको यह पता चलेगा कि भारत के इस सबसे रणनीतिक और कूटनीतिक प्रोजेक्ट्स को रोकने वालों की लिस्ट में चीन से पहले भारत के ही कई तथाकथित एनजीओ शामिल हैं। खुद सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी एनवायरमेंट के नाम पर इस प्रोजेक्ट को रुकवाना चाहते हैं।

भारत के इस मेगा प्रोजेक्ट को बर्बाद करने के लिए कोर्ट में मामले को लटकाने की कोशिश हुई। कहा गया कि इस प्रोजेक्ट की वजह से काफी पेड़ काटे जाएंगे। कुछ लोग विस्थापित हो जाएंगे। लेकिन आज भारत के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पीएम मोदी के इस सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है।

भारत के इस मेगा प्रोजेक्ट का नाम ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट है। अब कुछ महीनों में समंदर के बीचों-बीच भारत का यह सबसे रणनीतिक ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने ₹90 हजार करोड़ से ज्यादा की ग्रेट निकोबार परियोजना की रणनीतिक अहमियत को समझते हुए कहा है कि यह प्रोजेक्ट बनना चाहिए। आपको बता दें कि ग्रेट निकोबार भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह के सबसे दक्षिणी इलाके में है।

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो, मलेशिया के क्लांग बंदरगाह और सिंगापुर से ग्रेट निकोबार की दूरी लगभग बराबर है। लेकिन ग्रेट निकोबार परियोजना की जिस खासियत ने चीन की हवाइयां उड़ा रखी हैं। वो खासियत इसकी मलक्का की खाड़ी से नजदीकी है। भारत का ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट मलक्का की खाड़ी यानी मलक्का स्ट्रेट से महज 160 किमी दूर है। मलक्का स्ट्रीट से दुनिया का 1/3 व्यापार गुजरता है। दुनिया के 40% तेल टैंकर ग्रेट निकोबार के हिंद महासागर क्षेत्र से ही होकर गुजरते हैं। आपको बता दें कि चीन की मलक्का स्टेट पर बहुत निर्भरता है। चीन की 80% ऊर्जा जरूरतें मलक्का स्टेट से ही पूरी होती हैं। यानी चीन अपनी जरूरत का जितना तेल आयात करता है उसका 80% मलक्का स्ट्रेट से ही होकर गुजरता है और यहीं पर भारत आकर बैठ गया है। मलक्का स्ट्रीट के पास मौजूद भारत ग्रेट निकोबार से चीन के हर जहाज पर नजर रख सकता है।

फिर चाहे वो चीन का तेल टैंकर हो, जासूसी जहाज हो या फिर मिलिट्री जहाज हो। अभी तक चीन भारत की जासूसी करता था। लेकिन अब भारत चीन की गर्दन पर जाकर बैठ गया है। आपको बता दें कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के तहत भारत इस इलाके में ड्यूल पर्पस एयरपोर्ट बना रहा है। यानी इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल सिविल पर्पस के साथ-साथ मिलिट्री पर्पस के लिए भी होगा। आपको बता दें कि अंडमान निकोबार में पहले से ही भारत की ट्राई सर्विस कमांड है।

इसका मतलब यह है कि यहां पर पहले से ही एयरफोर्स, आर्मी और नेवी तीनों मौजूद हैं और अब इन तीनों को ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से और भी ज्यादा मजबूती मिलेगी। इकोनॉमिक दृष्टि से भी ग्रेट निकोबार भारत के लिए बड़ा खजाना साबित होने वाला है। इस प्रोजेक्ट से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी। सिंगापुर और कोलंबो के बंदरगाहों पर भारत की निर्भरता कम होगी। हिंद महासागर में भारत की उपस्थिति मजबूत होगी।

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