झारखंड के सिमरिया के घने जंगलों से जो खबर सामने आई है उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस मूसलाधार बारिश और आसमानी बिजली के बीच अचानक गायब हो गई। और फिर जो तस्वीरें सामने आई, वो किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं था। सवाल यह है कि आखिर उस रात आसमान में ऐसा क्या हुआ कि एक एडवांस एयर एंबुलेंस खिलौने की तरह टूट कर बिखर गई।
क्या यह सिर्फ खराब मौसम था या फिर सिस्टम की कोई बड़ी चूक? इस पूरी कहानी की शुरुआत होती है रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से। रेड बर्ड एिएशन कंपनी का एक एयरएंबुलेंस विमान दिल्ली के लिए उड़ान भरने को तैयार था। विमान में 41 साल के संजय कुमार सवार थे। संजय के शरीर का लगभग 55% हिस्सा जल चुका था। उनकी हालत नाजुक थी और परिवार वालों की आंखों में बस एक ही उम्मीद थी कि दिल्ली के बड़े अस्पताल पहुंचते ही संजय की जान बच जाएगी। विमान में संजय के साथ उनकी पत्नी अर्चना देवी, परिजन धरू कुमार, डॉ. विकास कुमार गुप्ता और सचिन कुमार मिश्रा मौजूद थे।
विमान की कमान पायलट विवेक विकास भगत और स्वराज दीप सिंह के हाथों में थी। जिंदगी की उम्मीदों का यह विमान आसमान में तो उड़ा लेकिन किसे पता था कि यह उसकी आखिरीउड़ान साबित होने वाली है। शाम के करीब 4:30 बज रहे थे। चतरा जिले के सिमरिया इलाके में कुदरत का कहर टूट रहा था। मूसलाधार बारिश हो रही थी।
आसमान में बिजली कड़क रही थी और तूफान अपने चरम पर था। अचानक एयर ट्रैफिक कंट्रोल यानी एटीसी का इस विमान से संपर्क टूट गया। सिमरिया के कासियातु के करम टांड के घने जंगलों के ऊपर यह विमान बेकाबू हो गया। चश्मदीदों की मानें तो आसमान में एक तेज आवाज हुई और आग का गोला नीचे जंगल की तरफ गिरता दिखा।
घने अंधेरे और बारिश के बीच यह एयर एंबुलेंस क्रैश हो चुकी थी। यह इलाका इतना दुर्गमहै कि वहां पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन जैसे ही हादसे की खबर फैली, स्थानीय ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर मौके पर पहुंच गए। इस दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया।
चतरा के डीसी कीर्ति श्री और एसपी सुमित कुमार अग्रवाल भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। नेट इंसिडेंट हुआ है यहां पे जो प्लेन जो है एक पेशेंट्स को ले ले जा रहे थे रांची टू दिल्ली वो बीच में हुआ है ड्यू टू थंडरस्ट तो जैसे हम लोगों को इंफॉर्मेशन पता चला हम लोग मेडिकल टीम के साथ जो है रश किया यहां पे बटअनफॉर्चूनेटली डॉक्टर्स का टीम इन्होंने फाउंड डिक्लेअ किया तो हम लोगों ने उनका बॉडीज को निकाल करके पोस्टमार्टम के लिए और फर्दर इन्वेस्टिगेशन के लिए भेजा हैं। मैम टोटल नंबर अपडेट अगर आप बता टोटल सात लोग हैं। इसमें क्रू मेंबर भी हैं और टोटल दो क्रू मेंबर्स हैं और बाकी पांच लोग जो है पेशेंट्स और पेशेंट के परिवार के लोग हैं। रात के अंधेरे में ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। विमान का मलवा इधर-उधर बिखरा पड़ा था।
मलवे से एक-एक करके सात शव बरामद किए गए। वो सात लोग जो कुछ देर पहले तक जिंदा थे, अब सिर्फ बेजान शरीर बनकर रह गएथे। मरीज संजय कुमार, उनकी पत्नी, डॉक्टर, नर्स और दोनों पायलट किसी की भी जान नहीं बच सकी। संजय का परिवार जो उनके ठीक होने की दुआएं मांग रहा था, अब फूट-फूट कर रो रहा है। यह सिर्फ एक विमान हादसा नहीं है बल्कि सात परिवारों की दुनिया उजड़ने की दास्तान है। फिलहाल पूरे साइट को सील कर दिया गया है। टीम मौके पर पहुंच चुकी है और सबूत जुटाए जा रहे हैं।
डीसी कीर्ति श्री ने साफ कर दिया है कि शुरुआती जांच में खराब मौसम ही इस हादसे की सबसे बड़ी वजह नजर आ रहा है। लेकिन असली सच सामने तब आएगा जब सिविल एिएशनमिनिस्ट्री की टीम यहां पहुंचेगी और विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद किया जाएगा। सवाल कई हैं।
क्या मौसम इतना खराब था कि उड़ान नहीं भरी जानी चाहिए थी? क्या विमान में कोई तकनीकी खराबी पहले से थी? इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिलेंगे। लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि कुदरत के आगे इंसान की हर तकनीक, हर कोशिश छोटी पड़ जाती है। सिमरिया के जंगलों में बिखरा यह मलबा आने वाले कई सालों तक उस काली रात की गवाही देता रहेगा।
