इस पेंग्विन को छोड़कर। यह धीरे चल रहा है अकेला गलत दिशा में बिना किसी क्लेरिटी के। ना ही यह बहादुर है ना ही बुद्धिमान बस थक गया। और शायद यही वजह है कि इंटरनेट रुक ही नहीं पा रहा है। जा कहां रहा है यह पेंग्विन? करोड़ों लोग इसका जवाब तलाश रहे हैं। इंटरनेट यूज़र्स अपने मुताबिक इसका इंटरप्रिटेशन कर रहे हैं।
कोई मोटिवेशन तलाश रहा है। कोई जीवन का अर्थ। लेकिन साइंटिफिकली यह सिर्फ एक भटका हुआ पेंग्विन है। लेकिन इमोशनली यह एक मूड है। एक छोटा सा पेंग्विन लंबी बर्फ की सतह और एक दृढ़ संकल्प वाली चाल।
अपनी कॉलोनी से अलग होकर दूर पहाड़ों की ओर बढ़ रहा है। बस यही काफी था इंटरनेट को इसे नाहिलिस्टिक पेंग्विन का टैग देने के लिए। नाहिलिस्टिक का मतलब ऐसा व्यक्ति जो जीवन के अर्थ, उद्देश्य और मूल्यों को पूरी तरह से अस्वीकार करता है। यह मानता है कि जीवन व्यर्थ है और सभी नैतिक, धार्मिक और सामाजिक व्यवस्थाएं खोखली है। क्योंकि उनका कोई अंतनिर्हित आधार नहीं है। यह शब्द लैटिन शब्द निहिल से आया है जिसका अर्थ है कुछ नहीं। यह क्लिप एक्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक हर जगह आपको मिल जाएगी। क्लिप का सबसे इमोशनल पार्ट वो लगा जिसमें वो एक बार पीछे पलट कर देखता है जैसे कह रहा हो कि बस अब यहां और नहीं रहना और यही इस क्लिप का सबसे इमोशनल लम्हा है। वो ऐसे सफर पर जा रहा है जहां उसकी मौत पक्की है। यह सीन इंटरनेट पर एक पॉपुलर मीम बन गया है जिसका इस्तेमाल अकेलापन, निराशा और जिंदगी की बेतुकी बातों को दिखाने के लिए किया जा रहा है।
यह वीडियो आया कहां से? क्लिप जर्मन फिल्म डायरेक्टर वार्न और हरजग की डॉक्यूमेंट्री एनकाउंटर्स एट द एंड ऑफ द वर्ल्ड से लिया गया है। यह डॉक्यूमेंट्री 2007 में आई थी। एक ऐसा सीन जिसे भुलाया नहीं जा सकता। सीन में अंटार्कटिका में एक अ डेली पेंग्विन अचानक अपने झुंड से अलग हो जाता है और उल्टी तरफ लगभग 70 कि.मी. दूर पहाड़ की ओर बढ़ने लगता है। कोई पानी नहीं, कोई खाना नहीं, कोई कॉलोनी नहीं। सिर्फ बर्फ, खामोशी और लंबा मायूस सा रास्ता। पेंग्विनो के लिए यह बेसिकली एक एक तरफा जर्नी है और यही इसे इतना डरावना बनाता है।
पर यह अचानक इतना वायरल कैसे हो गया? इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया पर लोग इससे काफी रिलेट कर पा रहे हैं। यूज़र्स ने इस क्लिप को कैप्शनों के साथ पोस्ट करना शुरू कर दिया। जैसे मिलाटो नाम के एक यूजर ने लिखा। उस पेंग्विन ने मुझे यह एहसास करा दिया है कि मैं इससे कहीं ज्यादा के लिए बना हूं। वहीं एट नॉर्मी विभू नाम से एक यूजर ने लिखा। उन्होंने एक क्लिप शेयर किया जिसमें बॉलीवुड फिल्म धड़कन में सुनील शेट्टी का डायलॉग है। इस क्लिप में सुनील शेट्टी कह रहे हैं मैं रोज चलता था चलते-चलते थक जाता था। गिरता था, उठता था, जख्म भरते थे, लहू निकलता था। फिर गिरता था एक कदम और देव एक कदम और। यहां तक कि वाइट हाउस से भी एक प्रतिक्रिया आ गई। एक एआई जनरेटेड इमेज जहां पेंग्विन के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप चलते दिख रहे हैं।
कैप्शन था पेंग्विन उन लोगों की राय की परवाह नहीं करता जो उसे समझ ही नहीं सकते। कभी-कभी ना लोगों को बस मोटिवेशनल स्पीच नहीं चाहिए होती है। कभी-कभी बस यह रियलाइजेशन काफी होता है कि थक जाना भी ठीक है। तो क्या पेंग्विन वाकई मरने जा रहा है? नहीं। पेंग्विन साइंटिस्ट डॉक्टर डेविड एनली कहते हैं कि यह बिहेवियर भले ही दुखद हो लेकिन ऐसा होते रहता है। पेंग्विन नेविगेशन के लिए एनवायरमेंटल सिग्नल्स पर बहुत डिपेंडेंट रहते हैं। जब ये सिग्नल्स बाधित होते हैं तो चीजें गड़बड़ा जाती है। हो सकता है कि ये मौसम या इलाके की वजह से हुई भटकाव है या कोई बीमारी या न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम है। या फिर बस ऐसा हो सकता है कि पेंग्विन का नेविगेशन फेल हो गया हो। जानवर हमेशा सही डिसीजंस नहीं ले पाते हैं।
डॉक्यूमेंट्री के डायरेक्टर वार्नर हरजोग ने बाद में ऐसी यात्राओं को डेथ मार्च कहा। कहा कि ऐसे अंदरूनी इलाके की ओर जाने वाले पेंग्विन लगभग कभी वापस नहीं लौटते। पर यह कोई फिलॉसोफिकल चॉइस नहीं है। सिर्फ एक दुखद गलती है। यह इतना मीनिंगफुल क्यों लगता है? क्योंकि इंसान इमोशंस को प्रोजेक्ट करने में एक्सपर्ट्स है।
