पायल वीडियो नहीं, धोखाधड़ी चल रही है !लिंक खोला तो अकाउंट हो जायेगा खाली।

सोशल मीडिया या किसी वेबसाइट पर पायल गेमिंग के नाम से जुड़ा दुबई अगर आप खोज रहे हैं तो सावधान हो जाइए क्योंकि आपका मोबाइल हैक या फिर आपका बैंक अकाउंट खाली हो सकता है क्योंकि आपको बता दें कि फैक्ट चेक में यह दावा पूरी तरह झूठा निकला है।

कोई भी असली या वेरीिफाइड वीडियो मौजूद नहीं है और शेयर किए जा रहे लिंक फचिंग और स्पैम साइट्स तक ले जाते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह एआई डी फेक और क्लिकबेट के जरिए लोगोंको ठगी का शिकार बनाने के लिए एक साजिश भी हो सकती है।

दरअसल भारत की जानीमानी गेमर और कंटेंट क्रिएटर पायल गेमिंग के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है जब अचानक उनके नाम केसाथ दुबई एमएमएस लीक जैसे शब्द जोड़े जाने लगे। कमेंट सेक्शन में लिंक दो वीडियो कहां है जैसे सवालोंकी बाढ़ आ चुकी है। जबकि असल सवाल यह है कि क्या ऐसे कोई वीडियो वाकई मौजूद है?

फैक्ट चेक में जो सामने आया वह ना सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि सोशल मीडिया की जहरीली मानसिकता को भी उजागर करता है। जांच में साफ हुआ कि पायल धरे से जुड़ा कोई भी असली या वेरीिफाइड एमएमएस वीडियो मौजूद नहीं है। जो लिंक शेयर किए जा रहे हैं वह फिचिंग स्पैम या पूरी तरह से इररिलेटेड वेबसाइट्स पर ले जाते हैं जहां पर आप स्कैम का शिकार हो सकते हैं। स्कैमर की नजर आप पर पूरी तरह है। दरअसल इससे पहले भी एक 19 मिनट 34 सेकंड का वीडियो वायरल हुआ था। इसका इस्तेमाल करते हुए साइबर ठगों [संगीत] ने कई लोगों के बैंक अकाउंट को साफ किया है। अब इस कड़ी में उन्होंने नया तरीका निकाला है। इस तरीके में कई जगहों पर दावा किया गया है कि 40 मिनट्स का वीडियो वायरल हो रहा है।

कुछ लोग इस वीडियो के लिंक पर क्लिक भी कर रहे हैं और और उनका डिवाइस हैंग हो जा रहा है। अगर आप भी उन्हीं लोगों में से एक हैं तो भूलकर भी ऐसे किसी लिंक पर क्लिक मत करिएगा। वरना आपका डिवाइस हैंग हो जाएगा और आपकी सारी निजी जानकारी ठगों तक पहुंच जाएगी। क्योंकि ऐसे वीडियोस एआई की मदद से बनाए जा रहे हैं। ऐसे वीडियोस का इस्तेमाल लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा है। एक लिंक क्लिक करते ही आप कंगाल भले ही आपको यह लाइन किताबी कहानी लगे लेकिन इस तरह के कई मामले हमें बीतेदिनों देखने को मिले हैं।

पहले समझते हैं यह स्कैम किस तरह के होते हैं। कई बार एक फर्जी वेबसाइट क्रिएट करते हैं और फिर आपको मैसेज या ईमेल भेजते हैं। या फिर वीडियोस के जरिए लिंक पर क्लिक करवाते हैं। यह मैसेजेस और लिंक्स कई तरह के हो सकते हैं। मसलन किसी जॉब के संदर्भ में या फिर बैंक केवाईसी या इलेक्ट्रिसिटी बिल से जुड़ा हो सकता है या फिर किसी वीडियो में आपको लिंक दिया जा सकता है।

जैसे ही आप इस तरह के किसी मैसेज के साथ आए अनजान लिंक पर क्लिक करते हैं। आपके सामने एक वेबसाइट खुलेगी जो होती तो फेक लेकिन दिखने में असली जैसी होगी। कई मौकों पर स्कैमर्स यूजर के फोन में मैलवेयर [संगीत] प्लांट करते हैं। ज्यादातर मामलों में यूज़र्स अपनी डिटेल्स खुद स्कैमर्स को दे देते हैं। आप सोचेंगे ऐसा कैसे होता है? तो आपके तो आपको पूरे खेलको समझना होगा।

दरअसल स्कैमर्स आपको एक मैसेज लिखते हैं और और लिंक में उसी मैसेज से जुड़ी डिटेल्स भरनी होती है। यूज़र्स को लगता है कि वह असली वेबसाइट पर अपनी डिटेल्स एंटर कर रहे हैं। लेकिन यह सारा डाटा स्कैमर्स तक पहुंचता है। फेक वेबसाइट या फिर यूज़र्स की सेंसिटिव जानकारी चुराते हैं। इसमें यूज़र्स के बैंकिंग क्रेडेंशियल, क्रेडिट कार्ड नंबर और दूसरी डिटेल्स शामिल हो सकती है। अका इस जानकारी के बदौलत यूज़र्स के बैंक अकाउंट्स तक को खाली कर सकते हैं। आपने यह लाइन कई बार सुनी, पढ़ी और कही होगी।

इंटरनेट की इस दुनिया में भी सेफ रहने का बेसिक नियम यही है। आप जितना सावधान रहेंगे उतना ज्यादा सुरक्षित रहेंगे। इसके अलावा भी आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। स्कैमर्स आपको अपने जाल में फंसाने के लिए कन्वेंसिंग मैसेज या मेल भी लिख सकते हैं। इसके अलावा आपको कुछ अटैचमेंट फाइल भी दिखाई पड़ सकती हैं और आपको वॉट्स ऐप पर भेजी जा सकती हैं।

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