यूएस ने दहेला दिया.…ईरान के अहम हिस्से पर हमला।

ईरान की तरफ से यह दावा किया गया है कि उनके सबसे बड़े इनरचमेंट फैसिलिटी पर अमेरिका और इजराइल ने मिलकर हमला किया है। इस बात की जानकारी इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी ने अपने ट्वीट में दी है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि हमें ईरान से यह जानकारी मिली है कि इजराइल और यूएस ने मिलकर नतंज पर हमला किया है। हालांकि की कोई भी बात सामने नहीं आई है। हम इसकी जांच कर रहे हैं। ऐसा ने अपने ट्वीट में लिखा है। यह पहली बार नहीं है। यह हमला पहली बार नहीं है। इससे पहले भी पिछले ही साल इजराइल ने और अमेरिका ने मिलकर पर हमला किया था।

तब प्रेसिडेंट ट्रंप ने इस बात की पुष्टि की थी कि ये हमला इजराइल और अमेरिका ने किया है और उन्होंने यह भी साफ किया था कि ये हमला इतना खतरनाक है कि अगले कई सालों तक ईरान वहां पर नहीं कर पाएगा। अब बात करते हैं नतंश की। यह वो जगह है जो ईरान की राजधानी तेहरान से 225 कि.मी. की दूरी पर इसहान प्रांत है। वहां पर यह शहर आता है। यह बहुत ही इंपॉर्टेंट एनरचमेंट फैसिलिटी साइट है ईरान के लिए क्योंकि बीते तीन-4 सालों से सबसे ज्यादा एनरचमेंट यहीं पर हुआ है। अगर इस साइट की बात करें तो ये दो हिस्सों में डिवाइडेड है। एक उसका एक उसका ऊपरी हिस्सा और एक निचला हिस्सा। जो निचला हिस्सा है वहां पर फ्यूल एनरचमेंट प्लांट है। जहां पर 60% यूरेनियम इनरचमेंट ईरान ने किया है। ऐसा मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था।

और यही सबसे बड़ी चिंता का सबब बन गया था अमेरिका के लिए और इजराइल के लिए क्योंकि 90% एनरचमेंट अगर कर लिया जाए तो उसे l बनाया जा सकता है और 60% जो है इनरचमेंट ईरान ने कर लिया था। यही वजह थी कि पिछले साल वहां पर भयंकर हमला हुआ था। इस हमले के बारे में और भी जानकारी देने के लिए है मानस। देखिए प्रगति जो आपने बताया कि फ्यूल इनरचमेंट प्लांट जो है पहली बात तो जो भी नतंश की फैसिलिटी है वह इतनी सिक्योर है इतनी अंडर ग्राउंड है जमीन के इतना नीचे है वो कितने फीट नीचे है कितने मीटर नीचे है ये एग्जैक्ट कोई नहीं जानता सिवाय ईरान के ऑफिशियल्स के शायद यूएस और मोसाद को इसकी जानकारी होगी कि वो एक्चुअल में वो कहां पे है कितनी गहराई पे साइड जो उस पे हमला हुआ था पिछले साल का जो आपने जिक्र किया पिछले साल उस पे से हमला हुआ था को गिरा गिराने के लिए बी टू का इस्तेमाल किया गया था। यह एक स्टेल्थ विमान है अमेरिका का। अमेरिका इसे किसी को नहीं बेचता। वजह है इसकी टेक्नोलॉजी क्योंकि अगर यह किसी भी देश के ऊपर से उड़ रहा है तो कोई रडार इसे पकड़ नहीं पाता। या इसका जो आरसीएस कहते हैं एक रडार क्रॉस सेक्शन एक चीज होती है कि रडार पे कोई चीज कितनी बड़ी दिखेगी।

उस हिसाब से बी टू एक बहुत ही उन्नत प्लेन है। इसका इस्तेमाल किया। दूसरी सबसे खास बात यह है इस जहाज की कि यह हैवी जो बंकर होते हैं वह वजन में काफी भारी होते हैं। काफी हैवी होते हैं। इसलिए उनको ले जाने के लिए बॉम्बर विमानों का इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिका के पास और भी B1 बी लैंसर भी है। B52 स्ट्रेटोफोट्रेस भी है। लेकिन पिछली बार इसका इस्तेमाल किया गया था। संभवत अगर इस बार भी नताश पे उनको हमला करना था। तो नतांश पे ऊपर से अगर आप देखें तो वहां पे कुछ नहीं दिखता। वो बिल्कुल सपाट एक प्लेन है वो वहां पे कुछ नहीं है आपको छोटे-छोटे एक आध इंस्टॉलेशन दिखेंगे आईआरजीसी आई ईरानी ऐसे कहा जाता है मानस कि ये दो जो ये साइट है ये दो पार्ट्स में डिवाइड है एक पायलट फ्यूल एनरचमेंट प्लांट जो ऊपरी हिस्से में है और नीचे जो है वो फ्यूल एनरचमेंट प्लांट है ऊपर जो पायलट फ्यूल एनरचमेंट प्लांट है वहां पर 5% जो है होता है और ईरान दावा करता है कि हम इसे इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करने के पर्पस से यूज़ करते हैं।

जबकि जो निचला हिस्सा है वहां पर जो l होता है सबसे ज्यादा चिंता इजराइल और अमेरिका को इसी चीज की है कि वहां पर 60% एनरचमेंट कर लिया था ईरान ने और 90% जो होता है बनाने के लिए जरूरत पड़ती है। देखिए अमेरिका और इजराइल की चिंता ये है इजराइल को इजराइल का यह कहना है, उसका यह तर्क है, दावा है कि अगर ईरान ने बना लिया तो उसका पहला टारगेट हम होंगे। अमेरिका का यह कहना है कि इससे पूरे रीजन को खतरा हो सकता है। ना सिर्फ इजराइल ये सिर्फ इजराइल की बात नहीं है।

इससे पूरे रीजन को खतरा हो सकता है। और इस वजह से वो नहीं चाहते कि ईरान बनाए। अब ईरान बार-बार ये कहता है कि हम किसी भी तरह का न्यूक्लियर बम नहीं बना रहे। हमारा प्रोग्राम बिल्कुल पीसफुल पर्पस के लिए है। हालांकि जब प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप पहली बार जब अपने कार्यकाल में आए थे तो उन्होंने ईरान से न्यूक्लियर डील को खत्म कर दिया था। प्रेसिडेंट ओबामा के टाइम ये डील हुई थी। तमाम इंटरनेशनल एजेंसीज का कोपरेशन की बात थी उस समय।

लेकिन हां अभी जो हमला हुआ है प्रगति ये बहुत मतलब अभी रेडिएशन लीक नहीं हुई है वहां पे ऐसा कुछ तो अभी सुनने में नहीं आया कोई रिपोर्ट ऐसी नहीं कि जहां रेडिएशन लीक हो क्योंकि जो जब गिर जब फटते हैं जो वो जो रिएक्टर होते हैं जो प्लांट्स होते हैं हमने हमने चर्नोबिल का हादसा याद है चर्नोबिल के हादसे के समय इतना निकला था वो एक लेड की तरह एक पदार्थ निकलता है उसमें से लेड और ग्रेफाइट निकलता है जो उसको स्टेबल करने के लिए न्यूक्लियर जो रिएक्टर होता है उसको स्टेबल करने के लिए क्योंकि वो बहुत अस्थिर प्रोडक्ट होता है वो यूरेनियम जब आप उसके दोनों को अलग करते हैं तो बहुत अस्थिर होता है। उसको कंट्रोल करने के लिए आपको ग्रेफाइट और बोरॉन का इस्तेमाल किया जाता है। की कंट्रोल रोड्स उसको कहते हैं वो उसमें डाली जाती हैं।

एक ग्रेफाइट का टुकड़ा अगर आप हाथ में ले लें तो वो आपके हाथ को चीरता हुआ निकल जाएगा। इतना ज्यादा खतरनाक होता है उसका रेडिएशन। हालांकि अभी तक यह बात अच्छी है कि लीक की कोई खबर नहीं है। लेकिन अगर यहां पे हमला हुआ है तो संभवत का इस्तेमाल हुआ है। क्योंकि ऊपर से यहां पे कुछ नहीं दिखेगा। आपको छोटे-मोटे के या ईरान की जो सेना है या सिक्योरिटी फोर्सेस हैं उनके कुछ पोस्ट दिखेंगे जो कि स्वाभाविक है अगर आपकी फैसिलिटी है तो वहां पे रहते ही हैं गार्ड्स वहां पे। उसके अलावा बी टू बॉम्बर हो या B1 बी लंसर हो या B52 किसका इस्तेमाल किया? क्योंकि अमेरिका और इजराइल ने अभी तक इस पे कुछ नहीं कहा। पिछली बार हां दर्शकों को अभी एक चीज और क्लियर कर दें जब तक हम यह वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं तब तक अमेरिका और इजराइल की तरफ से कोई भी जानकारी इस हमले को लेकर नहीं आई है। केवल ईरान का दावा है। अब प्रेसिडेंट ट्रंप ने पिछली बार जब हमला किया था तो उन्होंने बहुत टीवी पर आके एकदम बताया था कि हमने यह कर दिया है। हमने हमला कर दिया है।

सारी क्षमताएं खत्म कर दी हैं। क्षमताएं खत्म करने की बात तो वह अभी आर्मी के लिए भी कर रहे थे ईरान की कि हम देयर नेवी इज़ गॉन, देयर एयरफ़ोर्स इज़ गॉन, देयर । यह तीन चीज़ें उन्होंने बोली थी। हालांकि उनकी नेवी लगातार स्टेट ऑफ़ फोरमोस्ट पे अभी भी ब्लॉकेड बनाए हुए हैं। उनकी आर्मी जो इराक में उनकी जो एयर बेसेस हैं प्रेसिडेंट ट्रंप के अमेरिका के उस पे लगातार हमले कर रही है। मिसाइल हमले आज उनके तक पहुंच गई। और एक खास बात यह भी है मानस कि तब प्रेसिडेंट ट्रंप ने जब पिछली बार हमला हुआ था तब बहुत ही कॉन्फिडेंटली कहा था कि हमने इतने भीतर तक जाकर हमला किया है कि अगले कई सालों तक ईरान वहां पर नहीं कर यूरेनियम माफ़ कीजिएगा यूरेनियम इनरचमेंट नहीं कर पाएगा और अब फिर दोबारा ये खबर आ रही है कि अमेरिका और इजराइल ने मिलकर वहां पर किया है। देखिए प्रगति पहली बार नहीं है जब उन्होंने हमला किया था पिछले साल। इससे पहले भी कई बार l वो करते हैं जो होते हैं के वो के जरिए वह संचालित होते हैं। सेंट्रीफ्यूज को डिसेबल करने के लिए बिना उसको छुए बिना उस पर हमला किए इन्होंने साइबर अटैक्स स्टक्स नेट नाम का एक बहुत ये बहुत नामी अटैक था। ये अमेरिका और मोसाद जो वहां की इजराइल की एजेंसी है उसने मिलके इसको अंजाम दिया था। तो साइबर अटैक्स ये करते हैं। वहां की बिजली गुल करने की कोशिश करते हैं। वहां की कनेक्टिविटी प्रभावित करने की। ऐसा नहीं कि आपको सिर्फ जो मिलिट्री में दो तरह के एक्शनंस होते हैं। एक काइनेटिक जिसमें आप डायरेक्ट इंपैक्ट करते हैं। हमला होता है।

एक नॉन काइनेटिक। तो ये नॉन काइनेटिक एक्शन था। इसके अलावा ईरान के दर्जनों साइंटिस्ट को अब तक मोसाद अससिनेट करवा चुका है। सबसे क्लासिक एग्जांपल जो था इसका वो डॉ. मोहसिन फकरीजादे का अससिनेशन था। सबसे लेटेस्ट जिस तरीके से उनको मारा इजराइल ने उसके एजेंट्स ने एक रोबोट का इस्तेमाल करके उन्होंने डॉक्टर फकरीजादे की की थी और वो हमला इतना एक्यूरेट था कि फकरीजादे की पत्नी उनसे कुछ इंच की दूरी पर बैठी थी। उन्हें एक भी नहीं लगी।

तो ये सब चीजें मोसाद अपनी तकनीक का इस्तेमाल करके तो वो लगातार ये कोशिश करता है कि किसी तरह से न्यूक्लियर प्रोग्राम जो है ईरान का उसको डिले करवाया जाए, रोका जाए। आज का जो हमला है जैसा ईरान दावा कर रहा है तो वो भी इसी एक कवायद की में एक कड़ी है कि आप उसको डिले करवा पाओ कम से कम उस प्रोग्राम को जितना ज्यादा क्योंकि 90% जिस दिन ईरान पहुंच गया कम से कम वो तत्काल में 10 कम से कम बना सकता है। हालांकि ईरान ने कभी नहीं कहा कि उनका कोई इरादा है पावर बनने का। उनका हमेशा यह कहना रहा ईरान का कि हम पीसफुल पर्पस है। हमारी इलेक्ट्रिसिटी है। हम अपनी पब्लिक के लिए कर रहे हैं। लेकिन इजराइल और अमेरिका बार-बार इस बात पर अड़े रहते हैं। दुनिया को ये बार-बार भरोसा दिलाने की यकीन दिलाने की कोशिश करते हैं कि नहीं देखिए अगर इन्होंने बम बना लिया तो पूरे रीजन को खतरा होगा। इजराइल को सबसे बड़ा खतरा होगा। और इजराइल को खतरा होगा।

यानी उस पूरे इलाके में जो मिडिल ईस्ट का इलाका है जो वेस्ट एशिया का अमेरिकन इंटरेस्ट को सबसे बड़ा खतरा तभी होगा जब इजराइल पे कोई खतरा आता है और इसलिए प्रेसिडेंट ट्रंप अपने इंटरेस्ट को बचाने के लिए यह बार-बार ईरान पे हमले और तमाम चीजें और खासकर जो प्रोग्राम है उस पे हमले ये करवा रहे हैं।

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