विमान हादसे में घूमी जांच की सुई प्लेन के पिछले हिस्से से मिला सुराग !

एक भयानक हादसे के बाद जब पूरी दुनिया की निगाहें भारत पर थी। विदेशी मीडिया ने ठीकरा फोड़ दिया भारत के पायलटों पर। वॉल स्ट्रीट जनरल और राइटर्स ने सीधे कहा पायलट ने प्लेन हादसा कराया । लेकिन फिर जो हुआ उसने सबको चौंका दिया। भारतीय पायलट महासंघ ने द ऑल स्ट्रीट जनरल और राइटर्स को लीगल नोटिस भेजा और आधिकारिक तौर पर माफी मांगने को कहा।

भारत के पायलट संगठन ने डब्ल्यूएजे पर मानहानि ठोक दी है और अब सामने आया है वो नया सुराग जो शायद इस हादसे की असली वजह हो। 12 जून 2025 सरदार वल्लभ भाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने के ठीक 26 सेकंड बाद एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 हादसे का शिकार हो गई। 270 से ज्यादा और एक चमत्कारी बचाव लेकिन हादसे के पीछे की वजह अब तक एक रहस्य थी। फिर आई जांच की वो रिपोर्ट जिसने सब कुछ बदल दिया। जांच एजेंसी एएआईबी ने अब विमान के पिछले हिस्से यानी कि इंपिनेच में जो पाया है उसने जांच की दिशा ही बदल दी।

इंडियन एक्सप्रेस की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक एएआईबी की जांच में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आया है। विमान के पिछले हिस्से यानी कि इंपैनेज के मलवे में सीमित इलेक्ट्रिक आग के निशान मिले हैं। जिसने जांच की दिशा को ही इलेक्ट्रिक सिस्टम के खराबी की ओर मोड़ दिया है। यह खुलासा जांच अधिकारियों को हैरान करने वाला है क्योंकि यह हादसे का प्रमुख कारण हो सकता है। एएआईबी की 12 जुलाई की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक विमान के उड़ान भरने के 3 सेकंड बाद ही दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच रन से कट ऑफ स्थिति में चले गए। जिसके कारण इंजन बंद हो गए।

कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर में एक पायलट का सवाल तुमने फ्यूल क्यों काटा और दूसरे का जवाब मैंने नहीं किया और यहीं से शक गया विमान के इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर। जांचकर्ताओं को शक है कि किसी इलेक्ट्रिकल खराबी ने इंजन कंट्रोल यूनिट को गलत डाटा भेजा और दोनों इंजन अचानक बंद हो गए।

इतनी ऊंचाई नहीं थी कि पायलट कुछ कर पाते। रैम एयर टरबाइन ने आपातकालीन पावर देने की कोशिश की। एपीयू सुरक्षित मिला मगर रियर ब्लैक बॉक्स क्षतिग्रस्त। फ्रंट ब्लैक बॉक्स से मिले डाटा से बड़ा खुलासा हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि दिल्ली से अहमदाबाद आने वाली पिछली उड़ान AI423 में पायलट ने स्टेप फॉस XTCR यानी कि स्टेबलाइजर पोजीशन ट्रांसड्यूसर के खराबी की शिकायत दर्ज की थी।

यह सेंसर विमान के पिच को नियंत्रित करता है और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम को डाटा भेजता है। अहमदाबाद में मेंटेनेंस इंजीनियर ने इसकी जांच के बाद उड़ान को मंजूरी दी थी। लेकिन अब जांचकर्ता इस सेंसर के खराबी को व्यापक इलेक्ट्रिकल सिस्टम की समस्या से जोड़ रहे हैं। पिछले हिस्से के मलबे में मिले एपीयू, ट्रांसड्यूसर्स और रडार्स को सुरक्षित रखा गया है ताकि इनका विस्तृत विश्लेषण किया जा सके। जांच में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि उड़ान के दौरान इलेक्ट्रिकल सिस्टम में खराबी से सेंसर डाटा में गड़बड़ी हुई होगी। जिसकी वजह से ईसीयू ने इंजनों को गलत कमांड भेजी होगी।

इसके बाद रैम एयर टरबाइन यानी कि रैट तैनात हुआ जो इलेक्ट्रिकल विफलता के दौरान आपातकालीन शक्ति देता है। लेकिन विमान 625 फीट की ऊंचाई पर ही था जो बहुत कम ऊंचाई है। इस वजह से पायलटों को सुरक्षित लैंडिंग का समय नहीं मिला और विमान सीधे डीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में इस भवन पर जा गिरा। जहां उसके पीछे का हिस्सा अलग हो गया और अपेक्षाकृत कम क्षतिग्रस्त रहा। इससे जांच में अहम सुराग मिले।

जांच में बोइंग जनरल इलेक्ट्रिक अमेरिका की एनटीएसबी और ब्रिटेन की सीएए के विशेषज्ञ शामिल है। इस हादसे में एकमात्र बचे यात्री विश्वास रमेश ने भी बताया था कि क्रैश से पहले कैबिन की लाइटें हरी और सफेद रंग में टिमटिमा रही थी। फिर अचानक हुआ और सब खत्म हो गया। यह बयान इलेक्ट्रिकल फेलोर के सिद्धांत को और मजबूत करता है। तो क्या यह हादसा पायलट की गलती नहीं बल्कि एक तकनीकी लापरवाही का नतीजा था? क्या वैश्विक दिग्गज कंपनी बोइंग की जवाबदेही अब तय होगी और सबसे बड़ा सवाल क्या भविष्य की उड़ाने सुरक्षित है? जवाब अभी बाकी है और जांच अभी जारी है।

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