अहमदाबाद प्लेन हादसे की बड़ी वजह, पायलट पर किसका दबाव?

जब से एयर इंडिया की AI 171 अहमदाबाद में क्रैश हुई और दो पायलट सुमित सबर्रवाल और केल्विन कुंदर मारे गए हैं। उसके बाद से ही बाकी चीजों पे चर्चा हो रही है। लेकिन एक और शब्द आपको सुनने में आ रहा होगा वो हो रहा होगा पायलट फटीक। पायलट फटीक मतलब पायलट्स की थकान पे बात चल रही है कि पायलट थके हुए तो नहीं थे। इन्हीं चीज पर आज चर्चा करेंगे और आपको बताने की कोशिश करेंगे कि भारत के पायलट्स कितने ज्यादा थके हुए हैं।

उन्हें कितनी ज्यादा ड्यूटी करनी पड़ती है और डीजीसीए का रेगुलेशन भी था कि एक पायलट से आप 13 घंटे तक की ड्यूटी एक दिन में ले सकते हैं। इसलिए एयरलाइंस कंपनियां पायलट पे दबाव डाल डालकर जबरन 13-13 घंटे तक की एक-ए दिन में उड़ान करवाती हैं। अभी भी यह चीजें आपको हम बताएंगे और इन वजहों से क्या-क्या हादसे हुए यह आपको बताएंगे। पायलट्स को कितना सफर करा करना पड़ा। यहां तक कि कई पायलट्स ऐसे हो गए उनकी मानसिक स्थिति ऐसी हो गई। एक कहानी आपको बताएंगे आगे कि जिन्होंने खुद ही अपने प्लेन को ले जाकर के क्रैश कर दिया।

अगस्त 2023 नागपुर एयरपोर्ट पर इंडिगो के पायलट मनोज सुब्रमण्यम को हार्ट अटैक आ जाता है। और उस वक्त यह देखिए। और उस वक्त ये कहा जाता है ये हार्ट अटैक का रीजन बताया जाता है कि एक्सेसिव ड्यूटी स्लीप स्लीपलेसनेस मतलब उनको सोना नहीं हो पाया। ये सारी चीजें कही जा रही थी। बताया गया कि उन्होंने सुबह 3:00 बजे से लेकर के 7:00 बजे तक की एक फ्लाइट की थी जो तिरुवनंतपुरम से नागपुर और उसके बाद पुणे वो लेकर के गए। उसके बाद 27 घंटे की रेस्ट करने के बाद वह फिर से ऑन ड्यूटी जा रहे जहां पर उनको कार्डियक अरेस्ट होता है और वहां पर वह खत्म हो जाते हैं। इसके ठीक 3 महीने बाद नवंबर 2023 को दिल्ली एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की फ्लाइट ले जाने के लिए एक पायलट थे। 37 साल की उम्र थी। उनकी भी दिल्ली एयरपोर्ट पर 3 महीने बाद ठीक ऐसे ही निधन हो जाती है।

अब सोचिए दोनों पायलट बोर्ड होते हैं। प्लेन टेक ऑफ करता है। उसके बाद इनको कार्डियक अरेस्ट आता है। इनकी जान चली जाती है। तो उसके बाद पैसेंजर्स का क्या होगा? तो क्या एयरलाइंस अपने पायलट्स की मेडिकल चेकअप भी नहीं कराती है या ये सारी चीजें क्यों हो रही? मेन रीजन जो बताया जा रहा है वो मैं बता दूं। एक एनजीओ है सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन के नाम से जिसने इन चीजों की बारीकी से जांच की और बताया कि ये सारी वजह जो है वो पायलट फटीग के नाम से मतलब पायलट्स बहुत ज्यादा थके हुए थे। सो नहीं पा रहे थे और नींद की कमी की वजह से हुई थी।

अब मैं आपको जो हादसा बताने जा रहा हूं वो बहुत ही हादसा है और इसमें पायलट की नींद की कमी हुई कमी की वजह से 158 पैसेंजर्स और क्रू मेंबर्स की जान चली जाती है। अब एक आर्टिकल आपको । एयर इंडिया प्लेन हादसे स्लीपी पायलट ब्लेम्ड। यह प्लेन था एयर इंडिया एक्सप्रेस 800 का बोइंग 737। यह दुबई से मंगलोर आ रहा था। भारत लौट रहा था और इसमें सवार थे 108 पैसेंजर। और यह प्लेन जब बेंगलोर एयरपोर्ट पर लैंड करने जाता है तो रनवे से आगे निकल जाता है। ओवरसूट हो के फट जाता है। इसमें 166 लोग सवार थे जिसमें 158 लोग मारे जाते हैं। बाद में जांच में एजेंसियों को पता चलता है जांच में कि पायलट जो था वह 2 से 3 घंटे सो गया था।

बकायदा कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर में पायलट के खर्राटे लेने की आवाज भी आती है और दोनों पायलट्स को आपस में बात करते भी सुना गया कि दोनों बात कर रहे थे थके होने की। थकावट की बात कर रहे थे। मतलब वही सब पायलट फटी। लैंडिंग के दौरान को-पायलट ने बकायदा फर्स्ट ऑफिसर को लैंडिंग करने से मना किया। लेकिन फर्स्ट ऑफिसर ने उसकी नहीं सुनी और लैंडिंग के लिए अप्रोच किया और बाद में पाया गया क्योंकि इस नींद से तुरंत जागने की वजह से स्लीप इनर्सिया नाम दिया गया इसको। नींद से तुरंत जागने की वजह से सही डिसीजन ना लेने की ले पाने की वजह से पायलट ने ये गलती यहां पर की। पायलट की थकान और नींद की वजह से ऐसा नहीं कि यह पहला हादसा था।

इसके पहले भी यह हादसे हो चुके हैं। इंडियन एयरलाइंस का एक प्लेन जिसको कहा जाता है कारविल कारविला क्रैश के नाम से जाना जाता है। यह मुंबई से फ्लाइट मद्रास जा रही थी। इसके पायलट थे के डी गुप्ता। यह प्लेन जो है मुंबई से टेक ऑफ करता है और रनवे से टेक ऑफ करने के बाद थोड़ी दूर पर ही जाकर के प्लेन फट जाता है। इसमें 95 लोग मारे जाते हैं। बाद में जांच में जांच एजेंसियों को फ्लाइट वॉइस कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर से पता चलता है कि पायलट ने बोला था कि उन्हें नींद महसूस हो रही है। बाद में जांच में यह चीजें पाई गई कि कि पायलट्स की नींद की वजह नींद आने की वजह से यह प्लेन हादसा हुआ। बाद में उनकी ड्यूटी को रिकॉर्ड किया गया तो पाया गया कि कैप्टन ने सुबह की उड़ान पूरी की थी। दिन भर ऑफिस में काम किया और फिर देर रात में उड़ान के लिए उड़ान संभाली।

थकान और नींद की कमी से उनकी सतर्कता जो है वो प्रभावित हो गई थी। बाद में यह जांच रिपोर्ट में यह दिया गया। इन हादसों के बाद भी डीजीसीए की तरफ से कोई रेगुलेशन नहीं दिया गया कि पायलट्स की नींद और थकान के लिए वही 13 घंटे की शिफ्ट और चली जा रही है। अभी तक आगे आपको बताते हैं कि कैसे पायलट्स ने इस पे प्रोटेस्ट किया। उसके बाद उन्होंने अपने हक की आवाज आवाज लाई बकायदा कोर्ट में केस चला फैसला भी आया लेकिन आज तक नहीं लागू हो पाया ये नियम 13 घंटे से कम फ्लाइट वाला ऐसा ही नहीं कि इंडिया में ही हुआ है ये अमेरिका में भी हो चुका है ये है कॉलन एयर फ्लाइट 3407 अमेरिका में न्यूयॉर्क से ये उड़ान भरती है और प्लेन क्रैश हो जाता है। इसमें भी माना जाता है बाद में जांच एजेंसियों को पता चलता है कि वजह थी पायलट्स की थकान और नींद। लेकिन 2009 में हुए इस हादसे के बाद अमेरिका की एफएए फेडरल एिएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने इस पर कड़ा रुख अपनाया और पायलटों की निंद्रा और थकान पे काफी जोर दिया कि इस पे कैसे काम करें। उनकी टाइम उनकी जो वर्किंग आवर्स थे उसको कम करके बाकी चीजें अपनी अपना करके किया।

लेकिन भारत में अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। आगे आपको बताते हैं। देखिए इंटरनेशनल सिविल एिएशन ऑर्गेनाइजेशन जो पूरे दुनिया की फ्लाइट रेगुलेटिंग अथॉरिटीज हैं जैसे भारत की डीजीसीए हैं। इन सबको रेगुलेट करती है और इसने खुद पाया कि पायलट्स जो ज्यादा देर तक जगते हैं बहुत देर तक सो नहीं पाते हैं। उनकी फिजिकल, मेंटल और साइकोलॉजिकल इन तीनों स्टेट्स पर फर्क पड़ता है। मतलब वो सही सोच समझ नहीं पाते और सोच समझ लेते हैं तो एक्शन लेने में ज्यादा टाइम लेते हैं। सेफ्टी मैटर फाउंडेशन एक एनजीओ है जिसने जुलाई 2024 में 530 भारतीय पायलट्स पर एक सर्वे किया।

उनसे पूछा जाकर के पूछा और उनको इस पड़ताल में पता चला कि 70% पायलट्स जो है प्लेन उड़ाते हुए थकान और अनिद्रा महसूस करते हैं। वो ये बताते हैं कि उनसे 24 घंटे में 133 घंटे 70% पायलट ऐसे हैं जो 24 घंटे में 133 घंटे प्लेेंस को उड़ाते हैं। ये वो पायलट्स हैं। अब सोचिए हम आप ऑफिस के काम को 8 घंटे से ज्यादा नहीं कर सकते। ये रूल है कि 8 घंटे से ज्यादा ड्यूटी किसी से नहीं लिया जाना चाहिए। ये है और 8 घंटे में भी आदमी फ्रस्ट्रेट हो जाता है ऑन डेस्क जॉब में और यह वो पायलट्स हैं जो 133 घंटे फ्लाइंग कर रहे हैं। लेकिन उसकी 13 13 घंटे उनसे फ्लाइट कराया जा रहा है। दिन में चार से छह ये पायलट्स ने बताया कि उन्हें छह-छह फ्लाइट टेक ऑफ और लैंडिंग दिन भर में करनी पड़ जाती है। और टेक ऑफ और लैंडिंग बहुत ही ज्यादा फ्रस्ट्रेट करने वाला काम होता है।

एक पायलट्स के लिए। सबसे ज्यादा एक्सीडेंट टेक ऑफ और लैंडिंग में होता है। करीब 75 से 80% टेक ऑफ और लैंडिंग के टाइम ही होता है। अहमदाबाद एआई 171 एयर इंडिया की जो फ्लाइट थी वो भी टेक ऑफ के टाइम पे ही क्रैश करती है। तो ये बहुत ही हेक्टिक टाइम होता है। अब सोचिए एक पायलट्स को दिन में छह-छह बार ऐसे सिचुएशन से गुजरना पड़ रहा है और दिन में 13 घंटे वो ड्यूटी कर रहा है। तो इस तरह की बातें पायलट्स ने बताई। 63% पायलट्स ने यह भी बताया कि वो रोस्टर से परेशान है क्योंकि उनकी ड्यूटी ही सही नहीं लगती। आज ड्यूटी किसी और टाइम पे है तो कल ड्यूटी किसी और टाइम पे है। उनका रोस्टर फिक्स नहीं है। उन्हें पता ही नहीं होता है कि उन्हें किस शिफ्ट में काम करना है। कौन सी फ्लाइट ले जानी है। जिसकी वजह से उनको यह अनिद्रा और थकावट क्योंकि भाई कोई रूटीन उनका मेंटेन नहीं हो पाता है।

इसलिए उन्हें भी यह परेशानी झेलनी पड़ती है। कई पायलट्स ये बता रहे थे कि 6:00 बजे की अगर डिपार्चर टाइम है किसी प्लेन का तो उन्हें 3:00 बजे ही उठ जाना पड़ता है प्लेन के बोर्डिंग प्लेन पे बोर्डिंग करने के लिए। तो यह बहुत ज्यादा हेक्टिक शेड्यूल्ड है इंडिया में पायलट्स का और पायलट्स की इन शेड्यूल्स इन हेक्टिक शेड्यूल्स की वजह से भी कई बार क्या होता है कि पायलट सही से चेक लिस्ट नहीं कर पाते हैं। कई कई प्लेन क्रैश में यह जाना गया है। यह पता चला है कि अनिद्रा की वजह से नींद नहीं पूरा होने की वजह से जो टेक ऑफ से पहले चेक लिस्ट होता है। काफी सारा चेक लिस्ट होता है।

लंबी बुक होती है। सारी चीजें सारा प्रोसीजर फॉलो करना है पायलट को। एक-ए चीज़ चेक करना होता है। वह पायलट्स नहीं कर पाते। उसकी वजह से भी हादसे होते हैं। अब इसके खिलाफ इंडियन पायलट एसोसिएशन ने जब आवाज उठाई बकायदा हाई कोर्ट में दिल्ली और मुंबई के हाई कोर्ट में केस चला और इस केस के बाद जब फैसला आया तो डीजीसीए ने अपनी गाइडलाइन में बताया कि भाई अब 13 घंटा नहीं अब 10 घंटे ही आप एक पायलट से ड्यूटी ले सकते हैं। न्यू फ्लाइट यह न्यू न्यू ड्यूटी टाइम लिमिटेशन बनाई गई जिसमें 13 घंटे के बजाय एक पायलट से 10 घंटे की ही ड्यूटी लेने की बात कही गई।

डीजीसीए ने बोला कि जून 2024 से यह सारे नियम लागू हो जाने चाहिए। जब यह डीजीसीए ने रेगुलेशन बनाई, रूल दिया उसके बाद भी Air इंडिया वही एयर इंडिया एआई 171 जिसकी अहमदाबाद में क्रैश हुई उसने साफ मना कर दिया कि हम अभी यह फॉलो नहीं कर पाएंगे। Air इंडिया ने बोला Air इंडिया और इंडिगो ने भी मना किया। इंडिगो ने भी बोला और एन इंडिया ने बोला कि हम 1 साल बाद मतलब जून 2025 से इस नियम को लागू करेंगे कि हम 10 घंटे से ज्यादा किसी पायलट से काम नहीं लेंगे और जून 2025 में यह हादसा भी हो जाता है और spice जेट ने बोला कि मैं मार्च 2026 के बाद इस रूल को इंप्लीमेंट कर पाऊंगा। एक एक्सपर्ट से बात करने से पता चला कि यह एयरलाइंस कंपनियां ऐसा नहीं करना चाहती क्योंकि ऐसा करने से उन्हें 20% नए पायलट्स की भर्ती लेनी पड़ेगी। अब 20% नए पायलट्स की भर्ती लेना, फिर उन्हें ट्रेनिंग देना और उनकी सैलरी को उठाना, खर्चा उठाना ये एयरलाइंस के लिए बहुत बड़ी कीमत हो जाएगी।

इसलिए वो इस तरह से कम पायलट्स पे ज्यादा उड़ान करवाते हैं। अब यहां पर एयरलाइन कंपनियों की ही गलती नहीं है। डीजीसीए की भी गलती है जो इन कंपनियों को रेगुलेट कर रही है भारत में। इस वक्त पूरे भारत में 9000 पायलट्स हैं जो 700 विमानों को इधर से उधर ले जा रहे हैं मतलब उड़ा रहे हैं। हर साल 2000 पायलट्स की जरूरत पड़ती है इन फ्लाइट्स को ऑपरेट करने के लिए सही से। लेकिन डीजीसीए 2000 के बजाय सिर्फ एक साल में 1000 लाइसेंस ही इशू करता है पायलट्स को। ऐसा नहीं कि यह चर्चा आज ही हो रही है।

इसके पहले भी यह चर्चा हो चुकी है। न्यूज़ गार्ड ने ही लिखा था कि फ्लाइट ने एक पायलट ने फ्लाइट उड़ाने से ही मना कर दिया क्योंकि वह बहुत थकावट महसूस कर रहा था। यह देखिए। फ्लाइट कैंसिल्ड आफ्टर पायलट रिफ्यूज्ड टू टेक ऑफ। टेक ऑफ व्हाई एयरलाइंस हैव टू फॉलो नॉर्म्स फ्रॉम ड्यूटी आवर्स। ये सारी चीजें हैं। पायलट फटीग इन इंडिया ए वेकअप कॉल्ड फॉर एयरलाइंस। इस तरह की खबरें बार-बार आती है लेकिन हम आप तक नजर नहीं पहुंचती है। अब जब इस तरह के इतने बड़े हादसे हो गए तो हम भी इस चीज को सीरियस ले रहे हैं और लेना चाहिए क्योंकि ये पायलट का इशू नहीं है। ये आम नागरिक का इशू है। हर एक भारतीय का इशू है जो ट्रैवल करता है। आज नहीं तो कल किसी ना किसी काम की वजह से हर किसी को फ्लाइट में बैठना है।

लेकिन सोचिए उस फ्लाइट को ऑपरेट करने वाला जब पायलट ही थका होगा सोया होगा तो क्या होगा? आगे हम आपको एक ऐसी कहानी बताने वाले हैं जो आपकी रूह को भी हिला के रख देगी। इंडियन एयरलाइन पायलट फटीग रिपोर्ट्स प्र्प सेफ्टी वरीज ये सारी रिपोर्ट्स हैं। अब देखिए ये है जर्मन विंग्स की फ्लाइट संख्या 9525 ये एक एयर बस है ये 3201 ये बार्सिलोना स्पेन से जर्मनी जा रही होती है। इसमें 144 लोगों के साथ छह चालक दल मतलब टोटल 50 लोग इस विमान में सवार थे। इस विमान के पायलट थे एंड्रियांश लुब्स। फ्रांस में जब यह आसमान में 38,000 फीट ऊपर होता है विमान। उस समय जब को पायलट बाहर जाते हैं वाशरूम के लिए उस समय ये पायलट उठते हैं जो मेन फर्स्ट ऑफिसर थे वो उठते हैं और डोर को अंदर से लॉक कर लेते हैं। फ्रांस के आसमान में जब ये विमान 38,000 फीट पे होता है उस समय को-पायलट निकल कर के कॉकपिट से बाहर जाते हैं, वाशरूम के लिए जाते हैं या शायद रेस्ट रूम में जाते हैं। उसके बाद जब वो आते हैं तो देखते हैं कॉकपिट का दरवाजा अंदर से लॉक था। हुआ यूं था कि फर्स्ट ऑफिसर ने पायल फर्स्ट ऑफिसर ने डोर को अंदर से लॉक कर लिया था।

91 के हादसे के बाद से प्लेन जिसमें हाईजैक करके ट्विंस टावर से टकरा दिया गया था। उस हादसे के बाद से प्लेन के कॉकपिट का जो डोर लॉक होता है अंदर से काफी मजबूत कर दिया गया था। इस वजह से वो डोर लॉक को खोल नहीं पा रहे थे। तोड़ने की कोशिश कर रहे थे को पायलट लेकिन उसको तोड़ भी नहीं पा रहे थे। फर्स्ट ऑफिसर ने क्या किया था? डोर लॉक करके उन्होंने ऑटो पायलट को सेट कर दिया था कि वह 38,000 फीट से प्लेन को 100 फीट तक ले जाए नीचे। और प्लेन बहुत तेजी से उसके बाद नीचे जाने लगता है। कोपायलट डोर को तोड़ने की कोशिश करते हैं। आवाज लगाते हैं, चिल्लाते हैं। लेकिन जो फर्स्ट ऑफिसर था वो कुछ नहीं सुनता है और बाद में जाकर के प्लेन जो है क्रैश हो जाता है। वॉइस रिकॉर्डर में साफ जो है पता चलता है कि कोई डोर तोड़ने की कोशिश कर रहा है। कॉकपिट में कुछ तोड़ने की आवाज आ रही है। और फर्स्ट ऑफिसर कुछ नहीं बोलता है। हां, उसके सांस लेने की आवाज बकाया द वॉइस रिकॉर्डर में रिकॉर्ड होती है।

इसलिए समझा गया कि वो उस वक्त जिंदा था। बाद में जब जांच पता चलती है, जांच एजेंसियों को पता चलती है तो उसकी मानसिक स्थिति बहुत खराब थी पायलट की क्योंकि जिस दिन उसने ऐसा किया था जिस दिन यह हादसा हुआ था उसके ठीक 1 साल पहले उसके बेटे की मौत हो जाती है और वह भी करना चाह रहा था। 1 साल बाद जब
वही फिर दिन आता है जिस दिन उसके बेटे की मौत होती है और वह पायलट जो है वह प्लेन को लेकर के जा रहा था उस वक्त उसको रास्ते में अपने जीवन को समाप्त करने की इच्छा होती है और उसने अपने साथ-साथ 149 लोगों को और जो है खत्म कर दिया। तो पायलट की मानसिक स्थिति पर काम करने की बहुत जरूरत है पूरे विश्व में। क्योंकि एक पायलट जो होता है वो सिर्फ अपने जीवन को नहीं सलामत रखता है। बाकी उसके साथ जो पैसेंजर होते हैं उनके भी जीवन को सलामत रखता है। और इस हादसे में भी पता चलता है कि पायलट ने कई रातों से सोया नहीं था। तो इस स्लीपलेसनेस की वजह से सोचिए कितने लोगों की जान जाती है और कितने पायलट इस थकान में अनिद्रा की कमी से पायलट इस इस थकान और अनिद्रा में भी प्लेन को उड़ा रहे हैं।

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