हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा पाकिस्तान जिंदाबाद कहना तब तक राजद्रोह नहीं माना जा सकता जब तक मातृभूमि यानी भारत की निंदा ना की जाए। दरअसल सिरमौर जिले के पावंटा साहिब में रहने वाले फल विक्रेता सुलेमान पर आरोप था कि उसने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एआई जनरेटेड तस्वीर के साथ पाकिस्तान जिंदाबाद लिखकर पोस्ट साझा की थी।
इस पोस्ट को भारत-पाकि तनावपूर्ण संबंधों के बीच राष्ट्र विरोधी मानते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 के तहत मामला दर्ज किया और सुलेमान ने जून में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण भी किया। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन ज्त कर उसे जांच के लिए भेजा और चार्जशीट भी दाखिल कर दी।
मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो जस्टिस राकेश कैंथला ने कहा कि भारत की निंदा किए बिना किसी अन्य देश की तारीफ करना ना तो अलगाववादी भावनाओं को भड़काता है और ना ही सरकार के खिलाफ असंतोष पैदा करता है। कोर्ट ने पाया कि सुलेमान के खिलाफ ऐसे ठोस सबूत मौजूद नहीं है जिनसे यह साबित हो सके कि उसने किसी तरह की विध्वंसक या राजद्रोही गतिविधि को बढ़ावा दिया हो।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस ने पहले ही चार्जशीट दाखिल कर दी है और आरोपी का मोबाइल ज्त किया जा चुका है। इसलिए उसे कस्टडी में रखने का कोई औचित्य नहीं बनता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सुलेमान को ₹00 के मुचलके और कड़ी शर्तों के साथ जमानत दे दी। शर्तों में यह भी शामिल है कि वह गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा। हर सुनवाई में मौजूद ।
7 दिनों से अधिक समय के लिए घर से बाहर नहीं जाएगा और यदि उसके पास पासपोर्ट है तो उसे कोर्ट में जमा करना होगा।
