बेटी की अर्थी को नहीं मिला कंधा फिर… लाचार पिता को देख नहीं रुकेंगे आंसू।
गांव की उस कच्ची पगडंडी पर आज अजीब सी खामोशी थी। हवा चल रही थी। पेड़ों की पत्तियां सरसराती थी। लेकिन इंसानी आवाजें कहीं सुनाई नहीं दे रही थी। उसी रास्ते पर एक अर्थी रखी थी। लाल ऊनी से ढकी हुई। वह उड़नी जो आमतौर पर शादी ब्याह और खुशियों का प्रतीक मानी जाती है। … Read more